इतनी तेज़ी से औद्योगीकरण क्यों?
औद्योगीकरण यानी कारख़ाने, बिजलीघर और खदानें बनाना, ताकि देश सिर्फ़ खेती का सामान नहीं, मशीनें और इस्पात भी बनाए। 1920 के दशक में NEP के तहत सोवियत संघ छोटी अर्थव्यवस्था चलाने लायक़ बनाता था, पर ब्रिटेन, जर्मनी और अमेरिका से बहुत पीछे था।
स्तालिन ने दो कारण बताए: (1) हमले का डर, क्योंकि बड़ा हथियार उद्योग नहीं था; (2) आधुनिक अर्थव्यवस्था के साथ समाजवाद बनाने का सपना। 1931 में उन्होंने कहा कि दूसरे देशों ने जो दूरी पचास से सौ साल में तय की, वह दस साल में तय करनी है। एक और कारण था 1927-28 का अनाज संकट: सरकारी दाम कम होने से किसानों ने अनाज रोक लिया, तो शहरों में खाने की कमी हुई।
पंचवर्षीय योजनाएँ
पंचवर्षीय योजना राज्य योजना कार्यालय (गोसप्लान) का उद्योगों के लिए तय किया उत्पादन लक्ष्य है। पहली योजना अक्टूबर 1928 में शुरू हुई और चार साल तीन महीने में पूरी घोषित हुई। दूसरी 1933 से 1937 और तीसरी 1938 से युद्ध तक।
- प्राथमिकता: भारी उद्योग: कोयला, लोहा-इस्पात, बिजली, मशीनें, रेल।
- बड़ी परियोजनाएँ: मैग्नितोगोर्स्क इस्पात कारख़ाना, नीपर बाँध, तुर्किस्तान-साइबेरिया रेल, ट्रैक्टर कारख़ाने।
- नतीजे (लगभग): 1928 से 1940 में कोयला 3.5 से 16.5 करोड़ टन, इस्पात 43 लाख से 1.8 करोड़ टन, बिजली 5 से 48 अरब kWh। यानी लगभग x5, x4 और x10।
- मज़दूर: स्ताख़ानोव आंदोलन (1935) ने रिकॉर्ड तोड़ने वालों की तारीफ़ की; लाखों ग्रामीण शहर गए; कई महिलाओं ने कारख़ानों में काम किया; श्रम शिविरों के क़ैदियों ने भी नहरें और खदानें बनाईं।
- कमज़ोरियाँ: घटिया गुणवत्ता, कम मकान, दुकानों में कम सामान, दुर्घटनाएँ।
खेती का सामूहिकीकरण
सामूहिकीकरण यानी छोटे निजी खेतों को जोड़कर बड़े खेत बनाना, जो मिलकर चलाए जाते हैं। राज्य शहरों और निर्यात के लिए सस्ता, पक्का अनाज चाहता था और गाँवों पर नियंत्रण भी।
- कोलख़ोज़ (सामूहिक खेत): सदस्य ज़मीन, औज़ार और पशु मिलाते हैं और राज्य को तय हिस्सा देकर बाक़ी उपज बाँटते हैं।
- सोवख़ोज़ (राज्य खेत): मज़दूरों को राज्य वेतन देता है।
- मशीन-ट्रैक्टर स्टेशन ट्रैक्टर उधार देते थे और राज्य को नियंत्रण का साधन भी देते थे।
- कुलक-उन्मूलन: 1929 से अमीर किसान (कुलक) "वर्ग शत्रु" कहलाए; लगभग 20 लाख को दूर के इलाक़ों में भेजा गया। कई दूसरे किसानों ने पशु बेचकर या मारकर विरोध किया।
- मार्च 1930 में स्तालिन ने एक लेख में जल्दबाज़ी रोकी, पर दबाव फिर लौटा। 1937 तक लगभग दस में से नौ खेत सामूहिक हो चुके थे।
नतीजे: उद्योग ऊपर, खेती नीचे, अकाल
लाभ: सोवियत संघ औद्योगिक शक्ति बना। उसके कारख़ानों ने 1941 के बाद युद्ध में काम आने वाले टैंक और विमान बनाए। शहरी आबादी लगभग 2.6 करोड़ (1926) से 5.6 करोड़ (1939) हुई और साक्षरता तथा तकनीकी पढ़ाई फैली।
क़ीमत:
- अनाज 1928 के स्तर के आसपास रहा जबकि राज्य ने उसका बड़ा हिस्सा लिया, और पशुधन बहुत घटा।
- 1932-33 का अकाल: ख़राब फ़सल, ज़बरदस्ती अनाज वसूली और खेतों की अव्यवस्था से यूक्रेन, कज़ाख़िस्तान, वोल्गा और दूसरे अनाज क्षेत्रों में अकाल पड़ा। मौतों का अनुमान 50 से 80 लाख के बीच है।
- किसानों की आज़ादी घटी: 1932 में शहरों के लिए आंतरिक पासपोर्ट आए और ग्रामीण आसानी से आ-जा नहीं सकते थे।
करके देखो
3D इस्तेमाल करो। चरण 4 से पहले अनुमान लगाओ: 1940 में अनाज का बार इस्पात से ऊँचा, बराबर या नीचा होगा? फिर चरण 5 का स्लाइडर चलाओ और देखो कि हर बार किस साल x3 पार करता है। कौन-सा बार कभी पार नहीं करता?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पहली पंचवर्षीय योजना: 1928 से 1932; दूसरी 1933 से 1937; तीसरी 1938 से 1941
- वृद्धि गुणक = बाद का मान / पहले का मान (इस्पात: 18 / 4.3 ≈ 4.2)
- शहरी आबादी: लगभग 2.6 करोड़ (1926) से 5.6 करोड़ (1939)
- कोलख़ोज़ = सामूहिक खेत; सोवख़ोज़ = राज्य खेत (वेतन)
- कुलक-उन्मूलन = अमीर किसानों (कुलकों) को ज़मीन से हटाना
- MTS = मशीन-ट्रैक्टर स्टेशन
- 1932 से 1933 का अकाल: लाखों मौतें
हल किए गए उदाहरण
1. इस्पात उत्पादन 1928 में लगभग 43 लाख टन से 1940 में लगभग 1.8 करोड़ टन हो गया। यह कितने गुना बढ़ा?
180 ÷ 43 ≈ 4.2। इस्पात लगभग 4 गुना बढ़ा।
2. इन्हीं सालों में बिजली लगभग 5 से 48 अरब kWh हुई। वृद्धि गुणक निकालो और बताओ यह क्या दिखाता है।
48 ÷ 5 = 9.6, यानी लगभग 10 गुना। यह दिखाता है कि बिजली इस्पात से भी तेज़ बढ़ी, क्योंकि कारख़ानों को बिजली चाहिए थी।
3. 1930 के शुरुआती सालों में सामूहिकीकरण से पशु घटे और फ़सल बहुत कमज़ोर रही। दो कारण समझाओ।
पहला, कई किसानों ने पशु सामूहिक खेत को देने की जगह बेच दिए या मार दिए। दूसरा, राज्य ने तय कोटे से अनाज ज़बरदस्ती लिया और जल्दबाज़ी के बाद खेतों का प्रबंध ख़राब था, इसलिए फ़सल कम हुई और गाँवों के लिए अनाज कम बचा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पंचवर्षीय योजनाएँ सिर्फ़ खेती की थीं। वे उद्योग के लिए थीं; सामूहिकीकरण खेती का हिस्सा था।
- कोलख़ोज़ (साझा सामूहिक खेत) और सोवख़ोज़ (वेतन वाला राज्य खेत) को उलझाना।
- यह कहना कि सबको फ़ायदा हुआ। उद्योग को हुआ, पर किसानों, कुलकों और कई शहरियों ने कष्ट झेला।
- यह मानना कि अकाल का एक ही कारण था। ख़राब फ़सल, ज़बरदस्ती कोटे और सामूहिकीकरण की अव्यवस्था, तीनों मिलकर कारण बने।