संघ से पहले: चार गणराज्य
गृहयुद्ध (1918 से 1921) में बोल्शेविक जीते। अब कई सोवियत गणराज्य साथ-साथ थे। सोवियत गणराज्य यानी वह राज्य जो सोवियतों (परिषदों) से चलता था और असल में कम्युनिस्ट पार्टी की अगुआई में।
- रूस (RSFSR): सबसे बड़ा, राजधानी मास्को।
- यूक्रेन और बेलारूस: पश्चिम के दो गणराज्य।
- ट्रांसकाकेशिया: काकेशस पर्वत के दक्षिण में जॉर्जिया, आर्मेनिया और अज़रबैजान मिलकर एक गणराज्य।
इन्होंने युद्ध साथ लड़ा था और पार्टी, सेना और रेल साझा थी। चार अलग राज्य रखने से व्यापार, रक्षा और मुद्रा चलाना कठिन था। नेताओं को एक साझा छत चाहिए थी।
दो योजनाएँ: स्वायत्तता या बराबर का संघ
1922 में एक समिति ने स्वायत्तीकरण की योजना बनाई: छोटे गणराज्य RSFSR के हिस्से बन जाएँ, थोड़े स्वशासन के साथ। बीमार लेनिन इससे सहमत नहीं थे। उन्हें डर था कि रूसी लोग बाक़ी पर हावी हो जाएँगे। वे इसे "महान रूसी अंधराष्ट्रवाद" कहते थे (एक राष्ट्र का घमंड, दूसरों की क़ीमत पर)।
आख़िर में लेनिन की बात मानी गई: बराबर के गणराज्यों का संघ, जिसमें हर गणराज्य साथी है और काग़ज़ पर अलग होने का हक़ भी रखता है। 3D में यही योजना B है।
संधि: 30 दिसंबर 1922 को सोवियतों की पहली कांग्रेस ने USSR बनाने की संधि मंज़ूर की। संघ में चार सदस्य थे।
1924 का संविधान
लेनिन की मृत्यु 21 जनवरी 1924 को हुई। 31 जनवरी 1924 को सोवियतों की दूसरी कांग्रेस ने USSR का पहला संविधान मंज़ूर किया। मुख्य बातें:
- संघ की सबसे ऊँची संस्था सोवियतों की कांग्रेस थी और उसके बीच केंद्रीय कार्यकारी समिति, जिसके दो सदन थे: संघ का सदन (जनसंख्या के हिसाब से सदस्य) और राष्ट्रीयताओं का सदन (हर गणराज्य के प्रतिनिधि)।
- सरकार थी जन-कमिसारों की परिषद।
- केंद्र के पास: रक्षा, विदेश नीति, विदेशी व्यापार, रेल-डाक, बड़ी आर्थिक योजना।
- गणराज्यों के पास: स्कूल, स्वास्थ्य, न्याय, खेती और स्थानीय मामले।
- हर गणराज्य को काग़ज़ पर संघ से अलग होने का अधिकार था।
काग़ज़ और असलियत: पार्टी और राष्ट्रीयता नीति
काग़ज़ पर नियम न्यायपूर्ण थे, पर कम्युनिस्ट पार्टी हर गणराज्य को मास्को की एक ही लाइन से चलाती थी। इसलिए अलग होने का हक़ सच में इस्तेमाल नहीं हो सकता था।
1920 के दशक में कोरेनिज़ात्सिया ("जड़ें जमाना") की नीति भी चली: स्थानीय अधिकारियों को प्रशिक्षण, स्थानीय भाषाओं में स्कूल, और जिन लोगों की लिपि नहीं थी उनके लिए लिपि बनाना। इससे कई समुदाय पढ़ना सीख सके, भले ही पार्टी का नियंत्रण बना रहा।
संघ बढ़ा: उज़्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान 1925 में, ताजिकिस्तान 1929 में जुड़े। 1936 में ट्रांसकाकेशिया टूटकर जॉर्जिया, आर्मेनिया और अज़रबैजान बना, और कज़ाख़िस्तान तथा किर्गिज़स्तान संघीय गणराज्य बने। कुल 11।
करके देखो
3D इस्तेमाल करो। चरण 1 में देखो कि छोटे ब्लॉक रूस के अंदर जाते हैं (योजना A) और फिर बराबर खड़े होते हैं (योजना B)। पहले अनुमान लगाओ: अगर तुम छोटे गणराज्य में रहते तो कौन-सी योजना चुनते? फिर चरण 5 में स्लाइडर चलाओ और वे साल नोट करो जब गिनती बदलती है: 1925, 1929 और 1936।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संघ = 4 गणराज्य (1922) → 6 (1925) → 7 (1929) → 11 (1936)
- संधि: 30 दिसंबर 1922; संविधान: 31 जनवरी 1924
- USSR = सोवियत समाजवादी गणराज्यों का संघ
- दो सदन: संघ का सदन + राष्ट्रीयताओं का सदन
- केंद्र = रक्षा, विदेश नीति, विदेशी व्यापार; गणराज्य = स्कूल, स्वास्थ्य, स्थानीय अदालतें
- कोरेनिज़ात्सिया = स्थानीय भाषा और स्थानीय अधिकारियों को बढ़ावा
- स्वायत्तीकरण = छोटे गणराज्य रूस के अंदर (लेनिन ने नकारा)
हल किए गए उदाहरण
1. 1922 में USSR बनाने वाले चार गणराज्यों के नाम बताओ।
रूसी सोवियत संघीय समाजवादी गणराज्य (RSFSR), यूक्रेनी SSR, बेलारूसी SSR और ट्रांसकाकेशियाई संघ (जॉर्जिया, आर्मेनिया और अज़रबैजान मिलकर)।
2. लेनिन ने स्वायत्तीकरण की योजना क्यों नकारी?
उस योजना में छोटे गणराज्य रूस के अंदर रहकर कम अधिकार पाते। लेनिन को रूसी दबदबे और दूसरे समुदायों की नाराज़गी का डर था। वे चाहते थे कि सब गणराज्य बराबर के साथी हों।
3. 1924 के संविधान ने केंद्र और गणराज्यों में ताक़त कैसे बाँटी, और ज़मीन पर क्या वैसा ही रहा?
केंद्र को रक्षा, विदेश नीति, विदेशी व्यापार, परिवहन और राष्ट्रीय योजना मिली। गणराज्यों के पास स्कूल, स्वास्थ्य, न्याय और स्थानीय मामले रहे, और काग़ज़ पर अलग होने का हक़ भी। असल में कम्युनिस्ट पार्टी सबको एक ही लाइन देती थी, इसलिए असली ताक़त मास्को में रही।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि USSR 1917 में बना। 1917 क्रांति का साल है; USSR 1922 में बना।
- यह कहना कि लेनिन चाहते थे रूस बाक़ियों पर राज करे। वे बराबर का संघ चाहते थे और रूसी घमंड से सावधान करते थे।
- दोनों सदनों को उलझाना: संघ का सदन जनसंख्या के हिसाब से है; राष्ट्रीयताओं के सदन में हर गणराज्य के प्रतिनिधि होते हैं।
- अलग होने के हक़ को असली मान लेना। वह सिर्फ़ काग़ज़ पर था, क्योंकि पार्टी हर गणराज्य को चलाती थी।