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महान देशभक्ति युद्ध का पहला दौर (जून 1941 से नवंबर 1942)

22 जून 1941 को जर्मनी ने ऑपरेशन बारबारोसा में सोवियत संघ पर हमला किया: तीन सेनाएँ उत्तर, बीच और दक्षिण की ओर। सोवियत सेना को भारी नुक़सान हुआ और वह पीछे हटी, पर लगभग 1,500 कारख़ाने पूरब ले जाकर फिर चालू किए गए। लेनिनग्राद पर 872 दिन घेरा रहा। दिसंबर 1941 में सोवियत जवाबी हमले ने जर्मनों को मास्को के पास रोक दिया, यह पहला बड़ा मोड़ था। 1942 की गर्मियों में जर्मनी वोल्गा और स्तालिनग्राद तक पहुँचा, और 19 नवंबर 1942 के सोवियत जवाबी वार से यह दौर ख़त्म हुआ।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 22 जून 1941। लाल मोर्चा और तीन लाल तीर जर्मन हमला दिखाते हैं: उत्तर, बीच और दक्षिण। यह चित्र है, नक़्शा नहीं।
  2. मोर्चा पूरब की ओर बढ़ता है। पर नीला ब्लॉक (मास्को) अभी सुरक्षित है, और धूसर कारख़ाने के ब्लॉक पूरब खिसककर लड़ाई से दूर फिर शुरू होते हैं।
  3. लेनिनग्राद को लाल घेरा घेर लेता है। घेरा 872 दिन रहता है, और भोजन लादोगा झील की बर्फ़ पर "जीवन मार्ग" से आता है।
  4. मास्को, दिसंबर 1941। जर्मन मोर्चा शहर के पास रुक जाता है। नीला तीर लाल मोर्चे को पीछे धकेलता है।
  5. गर्मी 1942। लाल मोर्चा दक्षिण-पूरब में वोल्गा और स्तालिनग्राद की ओर बहुत आगे बढ़ता है।
  6. अपनी बारी: तारीख़ का स्लाइडर छह तारीख़ों पर चलाओ और लाल मोर्चे को आगे बढ़ते, रुकते, पीछे जाते और फिर आगे बढ़ते देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सोवियत संघ चौंक क्यों गया?

स्तालिन ने 1939 में जर्मनी से समझौता किया था और चेतावनियाँ अनदेखी कीं। सेना का बड़ा हिस्सा तैयार नहीं था। लाल तीर पहले हफ़्तों में बहुत आगे गए।

कारख़ाने बचाने की जगह हटाए क्यों?

पश्चिम के कारख़ाने सेना के रास्ते में थे। उन्हें पूरब, पहुँच से बाहर ले जाने से वे हथियार बनाते रहे।

घेरे में लोग कैसे रहे?

वे बहुत कम राशन पर रहे, गर्मी के लिए फ़र्नीचर जलाया और भोजन के लिए बर्फ़ पर जीवन मार्ग का सहारा लिया। कई लाख लोग मरे।

मास्को में जवाबी हमला क्यों सफल हुआ?

जर्मन थके हुए और अपने अड्डों से दूर थे, सर्दी जल्दी आई, और ताज़ा सोवियत रिज़र्व पहुँचे।

1942 में वोल्गा की ओर क्यों?

वह परिवहन की मुख्य नदी थी, और पास में काकेशस का तेल और अनाज था।

मोर्चा मास्को के सबसे पास कब था?

तारीख़ को दिसंबर 1941 की शुरुआत पर ले जाओ। लाल मोर्चा मास्को की पोस्ट के सबसे पास है।

ऑपरेशन बारबारोसा: 22 जून 1941 का हमला

जर्मनी ने 1939 का समझौता तोड़कर 22 जून 1941 को बिना चेतावनी हमला किया। उसने लगभग तीस लाख सैनिक, हज़ारों टैंक और विमान तीन समूहों में लगाए: उत्तर (लेनिनग्राद की ओर), बीच (मास्को की ओर) और दक्षिण (यूक्रेन के अनाज और कोयले की ओर)। जर्मनी ने कुछ महीनों में जीत की योजना बनाई थी (ब्लिट्ज़क्रीग)।

कारख़ाने पूरब ले जाना और पिछला मोर्चा

हथियार बनाते रहने के लिए राज्य ने 1941-42 में 1,500 से ज़्यादा कारख़ानों और लाखों मज़दूरों को रेल से पश्चिम से हटाकर वोल्गा, उराल और साइबेरिया पहुँचाया। मशीनें खुले मैदानों में लगीं; कुछ हफ़्तों-महीनों में उत्पादन फिर शुरू हुआ। 1942 तक सोवियत कारख़ाने जर्मनी से ज़्यादा टैंक, तोपें और विमान बनाने लगे।

खेतों और शहरों में मोर्चे पर गए पुरुषों की जगह महिलाओं, बुज़ुर्गों और किशोरों ने काम सँभाला। राशन बहुत कम था।

लेनिनग्राद की घेराबंदी

जर्मन और सहयोगी सेनाओं ने 8 सितंबर 1941 को लेनिनग्राद के चारों ओर घेरा बंद किया। घेरा 872 दिन चला, 27 जनवरी 1944 तक।

मास्को की लड़ाई

अक्टूबर 1941 में जर्मनी ने मास्को लेने के लिए ऑपरेशन टाइफ़ून शुरू किया। दिसंबर की शुरुआत तक उसके टैंक कुछ जगह शहर के किनारे से लगभग 30 किमी पर थे।

1942 की गर्मी और स्तालिनग्राद की राह

1942 की गर्मियों में जर्मनी ने दक्षिण में ताक़त जुटाई, लक्ष्य वोल्गा और काकेशस का तेल। सोवियत सेना को फिर पीछे हटना पड़ा। 28 जुलाई 1942 को आदेश संख्या 227 ने सैनिकों से कहा: "एक क़दम पीछे नहीं"। साथ ही सहयोगियों से लेंड-लीज़ (ट्रक, भोजन, एल्युमिनियम) के ज़रिए मदद भी बढ़ी। अगस्त में स्तालिनग्राद की लड़ाई शुरू हुई, और 19 नवंबर 1942 को सोवियत जवाबी वार शुरू हुआ। इतिहासकार इस तारीख़ को "पहले दौर" का अंत और बड़े मोड़ की शुरुआत मानते हैं।

करके देखो

चरण 5 का तारीख़ स्लाइडर चलाओ। छह तारीख़ें काग़ज़ पर लिखो। हर एक के लिए तय करो: मोर्चा आगे बढ़ रहा है, रुक रहा है या पीछे जा रहा है? फिर नोट्स ढककर कड़ी बोलो: धावा, खिसकना, घेरा, रोक, वोल्गा।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. लेनिनग्राद की घेराबंदी 8 सितंबर 1941 से 27 जनवरी 1944 तक चली। यह लगभग कितने साल हुए?

872 दिन ÷ 365 ≈ 2.4 साल, यानी लगभग दो साल पाँच महीने।

2. कारख़ानों को पूरब ले जाना युद्ध के लिए क्यों ज़रूरी था?

पश्चिम के कारख़ाने जर्मन सेना के रास्ते में थे। उन्हें पूरब, पहुँच से बाहर ले जाने से सोवियत संघ टैंक, तोपें और विमान बनाता रहा, जिसने बाद में उसे जर्मनी के बराबर आने और हराने में मदद की।

3. मास्को की लड़ाई को पूर्वी मोर्चे का पहला मोड़ क्यों कहते हैं?

जर्मनी जल्दी जीत चाहता था पर मास्को से लगभग 30 किमी पर रुक गया और फिर 100 से 250 किमी पीछे धकेला गया। इससे दिखा कि सोवियत सेना टिककर पलटवार कर सकती है और जर्मनी के सामने लंबा, कठिन युद्ध है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सोवियत संघ पर हमले की जर्मन योजना का नाम क्या था?
2. लेनिनग्राद की घेराबंदी कितने दिन चली?
3. "जीवन मार्ग" क्या था?
4. मास्को में सोवियत जवाबी हमला कब शुरू हुआ?
5. आदेश 227 में क्या कहा गया?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसे युद्ध का पहला दौर क्यों कहते हैं?

रूसी इतिहास महान देशभक्ति युद्ध को तीन दौर में बाँटता है। पहला दौर, 22 जून 1941 से 18 नवंबर 1942, सोवियत पीछे हटने और मास्को की पहली सफलता का समय है।

जर्मनी मास्को में क्यों असफल रहा?

कड़ा बचाव, ताज़ा सोवियत रिज़र्व, कीचड़ और ठंड, और लंबी आपूर्ति लाइनों ने 5 दिसंबर 1941 के जवाबी हमले से पहले उन्हें थका दिया।

लेनिनग्राद की घेराबंदी क्या थी?

जर्मन सेनाओं ने सितंबर 1941 से जनवरी 1944 (872 दिन) शहर को काट रखा। भूख और ठंड से कई लाख लोग मरे, और भोजन लादोगा झील पर जीवन मार्ग से आता था।

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