Italy Secondaria di secondo grado – classe 2ª History and geography
अध्याय: 2
1. History: ancient and early medieval civilisations
Ancient Near East and Jewish civilisation · Greek civilisation · Roman civilisation and Christianity · Early Middle Ages · Sources of ancient and medieval history
- प्रारंभिक मानव और सभ्यता की शुरुआत – आज के इंसान (होमो सेपियन्स) लगभग 3 लाख साल पहले अफ़्रीका में आए और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैले। इतिहासकार बीते समय को औज़ारों के हिसाब से युगों में बाँटते हैं: पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण, फिर ताँबा, कांसा और लोहा। खेती सीखने पर लोग गाँवों में बस गए, अनाज जमा करने लगे और बर्तन बनाने लगे। कुछ गाँव बढ़कर योजनाबद्ध नगर बने, जैसे सिंधु और घग्गर नदियों के किनारे हड़प्पा के नगर। लगभग उसी समय मेसोपोटामिया, मिस्र और चीन में भी नदी-घाटी सभ्यताएँ बनीं।
- प्राचीन यूनान: नगर-राज्य, लोकतंत्र और स्थायी विरासत – प्राचीन यूनान ईजियन सागर के आसपास पनपा, पहाड़ों, छोटी घाटियों और ढेरों द्वीपों वाली ज़मीन पर। पहाड़ों ने बस्तियों को अलग रखा, तो यूनानी सैकड़ों स्वतंत्र नगर-राज्यों (पोलिस) में रहते थे, हर एक के अपने क़ानून, सेना और देवता; सागर व्यापार से उन्हें जोड़ता था। सबसे मशहूर थे एथेंस, एक व्यापारी नगर जिसने लगभग 508 ई.पू. में पहला लोकतंत्र बनाया, और स्पार्टा, एक सैनिक राज्य। यूनानियों ने मिलकर 490 और 480 ई.पू. में फ़ारसी हमले हराए, फिर पेलोपोनेसियन युद्ध में आपस में लड़े। बाद में मकदूनिया का सिकंदर सेना लेकर मिस्र और सिंधु तक गया, और हेलेनिस्टिक युग में यूनानी संस्कृति फैली। राजनीति, दर्शन, इतिहास-लेखन, विज्ञान, गणित, नाटक, खेल और वास्तुकला में यूनानी विचार आज भी दुनिया को आकार देते हैं।
- तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य: रोमन साम्राज्य – रोमन साम्राज्य भूमध्य सागर के चारों ओर की ज़मीन पर फैला था: यूरोप, पश्चिम एशिया और उत्तर अफ़्रीका के हिस्से। सत्ता तीन के बीच बँटी थी: सम्राट, सीनेट और सेना। अर्थव्यवस्था खेती, नगरों, जहाज़ों, सिक्कों और जैतून तेल, शराब व अनाज के व्यापार पर चलती थी। समाज परतों में बँटा था, ऊपर अमीर सीनेटर और नीचे बहुत सारे दास। रोमन व्यापारी मानसूनी हवाओं से भारत के बंदरगाहों तक आते थे। चौथी सदी से बदलाव आया: ईसाई धर्म मुख्य धर्म बना, कुस्तुंतुनिया नई राजधानी बनी और 476 ई. में पश्चिमी हिस्सा टूट गया। इस बदलाव के दौर को 'उत्तर-पुरातन काल' कहते हैं।
- प्रारंभिक मध्य युग (लगभग 400–1000 ई.) – प्रारंभिक मध्य युग लगभग 400 से 1000 ई. का समय है। पश्चिम में रोमन साम्राज्य 476 में बिखर गया और जर्मैनिक लोगों (फ्रैंक, गॉथ, लोम्बार्ड, ऐंग्लो-सैक्सन) ने राज्य बनाए। ज़्यादातर लोग गाँवों में खेती करते थे। चर्च और मठों ने पढ़ाई जीवित रखी। 600 के दशक में अरब में इस्लाम शुरू हुआ और व्यापार व ज्ञान के साथ फैला। 800 में शारलेमेन सम्राट बना। राजाओं को सैनिक चाहिए थे, इसलिए सामंतवाद चला: राजा, सामंत, शूरवीर और किसान।
- स्रोत विश्लेषण: इतिहासकार सबूत कैसे परखते हैं – स्रोत अतीत का कोई भी निशान है जिससे हमें सबूत मिलता है: चिट्ठी, सिक्का, इमारत, गीत, फ़ोटो या वीडियो। प्राथमिक स्रोत उसी समय के होते हैं जिसका अध्ययन हो रहा है; द्वितीयक स्रोत बाद के विवरण हैं, जैसे इतिहासकारों की किताबें। स्रोत परखने के लिए उसका उद्गम पूछो (किसने, कब, क्यों, किसके लिए बनाया), उसकी बातों को अपनी जानकारी से मिलाओ, पक्षपात ढूँढो, और तय करो कि वह तुम्हारे प्रश्न के लिए कितना विश्वसनीय और कितना उपयोगी है। इतिहासकार स्रोतों को एक-दूसरे से मिलाते हैं (पुष्टि) और अलग-अलग विद्वानों की व्याख्याएँ पढ़कर तर्कपूर्ण टिप्पणी या निबंध लिखते हैं।
2. Geography: the contemporary world
Landscape, cities and globalisation · Population and migration · Culture, economy and environment · Regional geography · Tools of geography
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।
- भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना – जनसांख्यिकी यानी जनसंख्या का अध्ययन: कितने लोग हैं, कैसे बढ़ते हैं, और कौन हैं (उम्र, लिंग, जगह)। माल्थस ने कहा जनसंख्या भोजन से तेज़ बढ़ती है, इसलिए भूख उसे रोकती है। जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत बताता है कि समाज ऊँची जन्म और मृत्यु दर से, मृत्यु दर पहले घटने पर जनसंख्या विस्फोट से होते हुए, कम जन्म और मृत्यु दर तक पहुँचता है। मुख्य माप हैं: जन्म दर, मृत्यु दर, वृद्धि दर, प्रजनन दर, शिशु और मातृ मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा, लिंग अनुपात और निर्भरता अनुपात। भारत की जनसंख्या युवा है; युवाओं को काम और कौशल मिले तो यह जनसांख्यिकीय लाभांश बन सकती है। गाँव और शहर प्रवास, व्यापार और मीडिया से जुड़े हैं, पर काम, सुविधाओं और आय में बँटे भी हैं। भारत की जनसंख्या नीति 1952 के परिवार नियोजन से, आपातकाल की ज़बरदस्ती नसबंदी से होकर, राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 तक पहुँची, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और अपनी पसंद पर ज़ोर देती है।
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- प्रादेशिक भूगोल: हम दुनिया को प्रदेशों में कैसे बाँटते हैं – प्रदेश (region) वह क्षेत्र है जिसमें एक या अधिक लक्षण साझा हों, जो उसे आसपास के क्षेत्रों से अलग बनाएँ। औपचारिक (एकरूप) प्रदेश अंदर से एक जैसे होते हैं, जैसे कोई मैदान या धान पट्टी। क्रियात्मक (नोडल) प्रदेश किसी केंद्र से जुड़ाव से बनते हैं, जैसे शहर और वहाँ आने-जाने वाले गाँव। बोधगम्य प्रदेश लोगों के मन में होते हैं। प्रदेशों के किनारे आम तौर पर संक्रमण क्षेत्र होते हैं, और प्रदेश लोगों, सामान, पानी और विचारों के प्रवाह से एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
- कक्षा 12 इतिहास मानचित्र कार्य: समय के साथ स्थान खोजें – कक्षा 12 इतिहास में मानचित्र का प्रश्न 5 अंक का होता है। आपको एक रेखा-मानचित्र मिलता है। उस पर जगहें अंकित करनी होती हैं और उनके नाम लिखने होते हैं। जगहें आपके पाठों से आती हैं: हड़प्पा के नगर, 16 महाजनपद, अशोक के अभिलेख, बौद्ध स्थल, विजयनगर और मुग़ल स्थान, और 1857 व राष्ट्रीय आंदोलन के केंद्र। तरीका आसान है। हर जगह को उसकी नदी, तट या पड़ोसी से याद रखिए। जगहों को युग के हिसाब से बाँटिए। फिर अंकित करना जल्दी और पक्का हो जाता है।
- कक्षा 12 भूगोल के लिए भारत मानचित्र कार्य (लोग और अर्थव्यवस्था) – कक्षा 12 के मानचित्र कार्य में आप 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' पुस्तक के स्थानों को भारत के रूपरेखा मानचित्र पर खोजकर नाम लिखते हैं: फ़सल क्षेत्र, खानें, तेल क्षेत्र, औद्योगिक केंद्र, पत्तन और हवाई अड्डे। पहले चिह्नों का संकेत सीखिए, फिर हर स्थान को एक सुराग (कौन-सा तट, नदी या पठार) से याद कीजिए, और साफ़-सुथरे ढंग से नाम सहित दर्शाने का अभ्यास कीजिए। केवल आधिकारिक रूपरेखा मानचित्र का उपयोग होता है; हम कोई सीमा नहीं बनाते।
- मानचित्र का परिचय – मानचित्र पूरी पृथ्वी या उसके किसी भाग का ऊपर से देखा गया, मापनी के अनुसार बनाया गया छोटा, समतल चित्र है। हर मानचित्र में शीर्षक, मापनी, दिशा (उत्तर तीर), संकेत-सूची व चिह्न और प्रक्षेप पर बना ग्रिड होना चाहिए। मानचित्र मापनी (बृहत् या लघु) और कार्य (भौतिक या सांस्कृतिक) के आधार पर बाँटे जाते हैं।
- विश्व मानचित्र कार्य (कक्षा 12): कृषि क्षेत्र, रेलमार्ग टर्मिनल, पत्तन, हवाई अड्डे और जलमार्ग – कक्षा 12 के विश्व मानचित्र कार्य में आप रेखा-मानचित्र पर मानव भूगोल की चीज़ें अंकित करते हैं। संग्रहण घने वनों और ठंडे भागों में होता है; चलवासी पशुचारण शुष्क भूमि में; व्यापारिक पशुपालन, विस्तृत अनाज कृषि और मिश्रित कृषि शीतोष्ण घास के मैदानों और विकसित मैदानों में। चार पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग महाद्वीपों को एक तट से दूसरे तट तक पार करते हैं। समुद्री पत्तन तट पर होते हैं, हवाई अड्डे कहीं भी। स्वेज़ और पनामा नहरें महासागरों के बीच छोटे रास्ते हैं; राइन और सेंट लॉरेंस जहाज़ों को अंदर तक ले जाते हैं।
- विश्व मानचित्र कार्य (भौतिक भूगोल): महासागर, प्लेटें, मरुस्थल, सागर, धाराएँ और हॉटस्पॉट – मानचित्र कार्य में विश्व के रेखा-मानचित्र पर भौतिक लक्षण ढूँढकर अंकित करते हैं। पाँच महासागर मिलकर एक विश्व महासागर बनाते हैं। भूपर्पटी सात बड़ी और कई छोटी प्लेटों में बँटी है; अग्नि वलय प्रशांत को घेरता है और मध्य-अटलांटिक कटक अटलांटिक के बीच से गुज़रता है। गरम मरुस्थल 15°–30° पर महाद्वीपों के पश्चिम में हैं। सागर महासागर के छोटे, कुछ घिरे भाग हैं। गरम धाराएँ ध्रुवों की ओर, ठंडी धाराएँ भूमध्य रेखा की ओर बहती हैं। हॉटस्पॉट समृद्ध पर संकटग्रस्त क्षेत्र हैं; चार भारत से जुड़े हैं।