जनसांख्यिकी और उसके मूल विचार
जनसांख्यिकी जनसंख्या का अध्ययन है। औपचारिक जनसांख्यिकी संख्याएँ गिनती और अनुमान लगाती है (जन्म, मृत्यु, प्रवास)। सामाजिक जनसांख्यिकी पूछती है कि संख्याएँ क्यों बदलती हैं: पीछे कौन से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारण हैं।
आँकड़े मुख्य रूप से जनगणना (भारत में 1881 से हर 10 साल) और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण जैसे सर्वे से मिलते हैं। स्कूल, अस्पताल और रोज़गार की योजना इन्हीं से बनती है।
माल्थस का जनसंख्या वृद्धि सिद्धांत
थॉमस रॉबर्ट माल्थस (1798) ने कहा:
- जनसंख्या ज्यामितीय ढंग से बढ़ती है: 1, 2, 4, 8, 16...
- भोजन अंकगणितीय ढंग से बढ़ता है: 1, 2, 3, 4, 5...
- इसलिए जनसंख्या भोजन से आगे निकल जाएगी। इसे प्राकृतिक (सकारात्मक) निरोध (अकाल, बीमारी, युद्ध) या निवारक निरोध (देर से विवाह, संयम) रोकते हैं।
आलोचना: यूरोप में तकनीक से भोजन और धन जनसंख्या से तेज़ बढ़ा। उदारवादी और मार्क्सवादी विचारकों ने कहा कि गरीबी संसाधनों के असमान बँटवारे से आती है, सिर्फ़ ज़्यादा लोगों से नहीं।
जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत
जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास से जुड़ी है। तीन चरण हैं:
- चरण 1: ऊँची जन्म दर, ऊँची मृत्यु दर। धीमी वृद्धि। गरीब, खेती वाला समाज।
- चरण 2: ऊँची जन्म दर, घटती मृत्यु दर। दवा और भोजन सुधरने से मौतें तेज़ी से घटती हैं, पर जन्म ऊँचे रहते हैं। इस अंतर से जनसंख्या विस्फोट होता है।
- चरण 3: कम जन्म दर, कम मृत्यु दर। फिर धीमी वृद्धि। विकसित समाज।
भारत लगभग 1921 ('महाविभाजन का वर्ष') के बाद चरण 2 में आया और अब चरण 3 की ओर बढ़ रहा है।
आम माप: दरें और अनुपात
- जन्म दर: एक साल में प्रति 1000 लोगों पर जीवित जन्म।
- मृत्यु दर: एक साल में प्रति 1000 लोगों पर मौतें।
- प्राकृतिक वृद्धि दर: जन्म दर − मृत्यु दर।
- कुल प्रजनन दर: एक महिला के जीवन में औसत बच्चे। लगभग 2.1 'प्रतिस्थापन स्तर' है।
- शिशु मृत्यु दर: प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 1 साल से छोटे बच्चों की मौतें।
- मातृ मृत्यु दर: प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर प्रसव में महिलाओं की मौतें।
- जीवन प्रत्याशा: एक व्यक्ति के कितने साल जीने की उम्मीद है।
- लिंग अनुपात: प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाएँ। भारत का बाल लिंग अनुपात (0-6 साल) गिरा है, जो बेटे की चाह और लिंग-चयनात्मक गर्भपात दिखाता है।
- आयु संरचना: बच्चे (0-14), काम करने वाली उम्र (15-64) और बुज़ुर्ग (65+) का हिस्सा।
- निर्भरता अनुपात: (बच्चे + बुज़ुर्ग) ÷ काम करने वाली उम्र × 100।
जनसांख्यिकीय लाभांश
जब काम करने वाली उम्र का हिस्सा बड़ा हो और निर्भरता अनुपात गिरे, तो देश तेज़ी से बढ़ सकता है। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश कहते हैं। यह बस एक मौका है: काम, स्वास्थ्य और शिक्षा के बिना युवा बेरोज़गार भी रह सकते हैं।
ग्रामीण-नगरीय जुड़ाव और विभाजन
ज़्यादातर भारतीय अब भी गाँवों में रहते हैं, पर शहरी हिस्सा बढ़ रहा है।
जुड़ाव
- प्रवास: लोग काम के लिए शहर जाते हैं और घर पैसा भेजते हैं (प्रेषण)।
- बाज़ार: खेत की उपज शहर जाती है; कारखाने का माल गाँव आता है।
- मीडिया और परिवहन: टीवी, फ़ोन और सड़कें शहरी जीवनशैली गाँव तक लाती हैं।
विभाजन
- खेती से आय घटती जा रही है; अच्छे काम शहरों में हैं।
- गाँवों में अस्पताल, कॉलेज और सुविधाएँ कम हैं।
- शहरों में भीड़ बढ़ती है; बहुत से प्रवासी झुग्गियों में रहते हैं।
गाँव का संकट (कर्ज़, फ़सल के कम दाम) लोगों को बाहर धकेलता है; शहर का काम उन्हें खींचता है।
भारत की जनसंख्या नीति
- 1952: भारत राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू करने वाले पहले देशों में था। लक्ष्य: वृद्धि धीमी करना, स्वास्थ्य सुधारना।
- 1975-77 (आपातकाल): ज़बरदस्ती बड़े पैमाने पर नसबंदी, ज़्यादातर गरीब पुरुषों की। इससे गुस्सा फैला और कार्यक्रम पीछे गया।
- 1977 के बाद: नाम बदलकर राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम; ज़ोर स्वैच्छिक तरीकों और माँ-बच्चे के स्वास्थ्य पर।
- राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000: 14 साल तक मुफ़्त, अनिवार्य शिक्षा, शिशु और मातृ मृत्यु कम करना, सबका टीकाकरण, लड़कियों की देर से शादी, और प्रतिस्थापन स्तर (TFR 2.1) तक पहुँचना।
सबक: लोग छोटा परिवार तब चुनते हैं जब स्वास्थ्य, शिक्षा (खासकर लड़कियों की) और सुरक्षा हो, ज़बरदस्ती से नहीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जन्म दर = (साल के जीवित जन्म ÷ कुल जनसंख्या) × 1000
- मृत्यु दर = (साल की मौतें ÷ कुल जनसंख्या) × 1000
- वृद्धि दर = जन्म दर − मृत्यु दर (प्रति 1000; प्रतिशत के लिए ÷10)
- लिंग अनुपात = (महिलाएँ ÷ पुरुष) × 1000
- निर्भरता अनुपात = (0-14 साल + 65+ साल) ÷ 15-64 साल × 100
- शिशु मृत्यु दर = (1 साल से पहले मौतें ÷ जीवित जन्म) × 1000
- प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन: TFR ≈ 2.1 बच्चे प्रति महिला
हल किए गए उदाहरण
1. 50,000 लोगों के कस्बे में एक साल में 1,000 जन्म हुए। जन्म दर निकालिए।
जन्म दर = 1000 ÷ 50000 × 1000 = 20 प्रति 1000।
2. जन्म दर 20 और मृत्यु दर 7 प्रति 1000 है। वृद्धि दर प्रतिशत में?
वृद्धि = 20 − 7 = 13 प्रति 1000 = 1.3%।
3. एक ज़िले में 5,00,000 पुरुष और 4,70,000 महिलाएँ हैं। लिंग अनुपात?
470000 ÷ 500000 × 1000 = 940 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष।
4. एक गाँव में 300 बच्चे (0-14), 600 वयस्क (15-64) और 100 बुज़ुर्ग (65+) हैं। निर्भरता अनुपात?
(300 + 100) ÷ 600 × 100 ≈ 66.7। यानी हर 100 काम करने वालों पर लगभग 67 निर्भर।
5. 1,000 जीवित जन्मों में 30 बच्चे पहले जन्मदिन से पहले मर जाते हैं। शिशु मृत्यु दर?
30 ÷ 1000 × 1000 = 30 प्रति 1000 जीवित जन्म।
6. एक देश में जन्म दर 40 है और मृत्यु दर 38 से घटकर 15 हो जाती है। यह कौन सा चरण है और वृद्धि का क्या होता है?
चरण 2 (ऊँचा जन्म, घटती मृत्यु)। वृद्धि 40 − 38 = 2 से बढ़कर 40 − 15 = 25 प्रति 1000: जनसंख्या विस्फोट।
आम गलतियाँ
- जन्म और मृत्यु दर को जोड़ देना। वृद्धि दर = जन्म दर घटा मृत्यु दर।
- लिंग अनुपात को प्रति 1000 महिलाओं पर पुरुष लिखना। भारत में यह प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाएँ है।
- यह सोचना कि जनसांख्यिकीय लाभांश अपने आप मिलता है। इसके लिए युवाओं को काम, स्वास्थ्य और शिक्षा चाहिए।
- कहना कि जनसंख्या विस्फोट जन्म बढ़ने से होता है। यह मृत्यु घटने और जन्म ऊँचे रहने से होता है।