अपना ही समाज क्यों पढ़ें? अनसीखना और स्व-प्रतिबिंब
ज़्यादातर विषय वह सिखाते हैं जो हम नहीं जानते। पर भारतीय समाज में हम पूरी ज़िंदगी रहे हैं, इसलिए लगता है सब पता है। यह रोज़ का ज्ञान अधूरा होता है: यह हमारे परिवार, जाति, क्षेत्र और वर्ग से आता है।
- अनसीखना: जो बात बिना सोचे मान ली थी, उसे अलग रखकर दोबारा जाँचना।
- स्व-प्रतिबिंब: खुद को बाहर से देखना, जैसे कोई दूसरा देखे। पूछना: मैं ऐसा क्यों मानता हूँ? किसने सिखाया? क्या यह सबके लिए सच है?
- इससे हम एक सामाजिक नक्शा बनाते हैं: समाज में हम कहाँ खड़े हैं और दूसरे कहाँ।
ध्यान दें: यह अध्याय मूल्यांकन में नहीं है (बोर्ड परीक्षा में नहीं पूछा जाता), पर इसके विचार हर अध्याय में काम आते हैं।
उपनिवेशवाद: अंग्रेज़ी राज ने भारत को कैसे बदला
उपनिवेशवाद यानी एक देश का दूसरे देश पर अपने फ़ायदे के लिए राज करना। अंग्रेज़ी उपनिवेशवाद पुराने साम्राज्यों से अलग था, क्योंकि इसने भारत की पूरी अर्थव्यवस्था को ब्रिटेन के उद्योग की सेवा में लगा दिया।
- अर्थव्यवस्था: भारत से कपास, नील, जूट बाहर गए और मशीन का माल वापस आया। बहुत से बुनकर बेरोज़गार हुए।
- ज़मीन: नई लगान व्यवस्थाओं ने ज़मीन को खरीदने-बेचने और टैक्स की चीज़ बना दिया।
- लोगों का आना-जाना: मज़दूर बागानों, खदानों और दूसरे उपनिवेशों में भेजे गए।
- नई चीज़ें: रेल, तार, अंग्रेज़ी स्कूल, अदालतें, छपे अख़बार।
उपनिवेशवाद बराबरी और अधिकार जैसे आधुनिक विचार लाया, पर भारतीयों को ये नहीं दिए। इसी विरोधाभास से आज़ादी की लड़ाई को ताकत मिली।
राष्ट्रवाद: एक जन बनना
राष्ट्रवाद यह भावना है कि 'हम' एक राष्ट्र हैं और हमें खुद पर राज करना चाहिए। भारत में यह मुख्य रूप से उपनिवेशी राज के खिलाफ़ बढ़ा।
- रेल, अख़बार और अंग्रेज़ी से दूर-दूर के लोग मिले और विचार बाँटे।
- साझा दुख (अकाल, टैक्स, अपमान) ने एक साझा विरोधी दिखाया।
- सुधारकों और नेताओं ने भाषा, धर्म और जाति के पार एक साझा 'हम' बनाया।
भारतीय राष्ट्रवाद ने सबको एक जैसा बनाकर नहीं, बल्कि विविधता के साथ एकता रखने की कोशिश की।
वर्ग और समुदाय
वर्ग
वर्ग ऐसे लोगों का समूह है जिनकी आर्थिक स्थिति मिलती-जुलती हो: क्या उनके पास है और वे कैसे कमाते हैं। उपनिवेशी राज में नए वर्ग बने: ज़मींदार, काश्तकार किसान, कारखाना मज़दूर, बागान मज़दूर और अंग्रेज़ी पढ़ा मध्यम वर्ग (वकील, क्लर्क, शिक्षक)। इसी मध्यम वर्ग ने आगे राष्ट्रीय आंदोलन का बड़ा नेतृत्व किया।
समुदाय
समुदाय वह समूह है जिसमें हम आमतौर पर जन्म या आस्था से होते हैं: जाति, धर्म, जनजाति, क्षेत्र, भाषा। अंग्रेज़ों ने जनगणना में लोगों को जाति और धर्म के हिसाब से गिना और बाँटा। इससे सामुदायिक पहचानें और पक्की, कभी-कभी कठोर हो गईं। आज़ादी के बाद भी समुदाय वोट, शादी और दोस्ती पर असर डालता है, और साथ में वर्ग भी अहम हो गया है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अनसीखना: बिना जाँचे मानी बात को अलग रखकर दोबारा जाँचना।
- स्व-प्रतिबिंब: खुद को बाहर से, दूसरों की नज़र से देखना।
- सामाजिक नक्शा: समाज में आप और दूसरे कहाँ खड़े हैं, इसकी तस्वीर।
- उपनिवेशवाद: एक देश का दूसरे पर अपने लाभ के लिए राज।
- राष्ट्रवाद: एक राष्ट्र होने और खुद पर राज करने की साझा भावना।
- वर्ग: मिलती-जुलती आर्थिक स्थिति (संपत्ति, आय, काम) वाला समूह।
- समुदाय: जन्म या आस्था से बना समूह (जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा)।
हल किए गए उदाहरण
1. रिया कहती है, 'भारत में सब रोज़ चावल खाते हैं।' समाजशास्त्र उससे क्या करवाएगा?
अनसीखना और जाँचना। यह बात उसके अपने क्षेत्र से आई है। स्व-प्रतिबिंब पूछता है: मैंने यह कहाँ सीखा, क्या यह दूसरे क्षेत्रों और वर्गों के लिए भी सच है? आँकड़े बताते हैं कि अलग-अलग जगह गेहूँ, मोटा अनाज और चावल सब अहम हैं।
2. 1800 के दशक में बंगाल के बुनकरों का काम क्यों छूटा?
उपनिवेशवाद: कच्ची कपास ब्रिटेन की मिलों में गई और मशीन का सस्ता कपड़ा भारत के बाज़ार में आया। हाथ का कपड़ा मुकाबला न कर सका, इसलिए बुनकर बेरोज़गार हुए।
3. 1920 के बंबई में एक अंग्रेज़ी पढ़ा वकील, एक मिल मज़दूर और एक ज़मींदार रहते थे। इन्हें वर्ग के अनुसार बाँटिए और बताइए कौन सी बात इन्हें जोड़ सकती थी।
ज़मींदार: ज़मीन वाला वर्ग; वकील: पढ़ा-लिखा मध्यम वर्ग; मिल मज़दूर: मज़दूर वर्ग। राष्ट्रवाद, यानी उपनिवेशी राज खत्म करने की साझा इच्छा, इन्हें वर्ग के फ़र्क के बावजूद जोड़ सकती थी।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि समाज में रहते हैं तो सब जानते हैं। रोज़ का ज्ञान अधूरा होता है; समाजशास्त्र उसे जाँचता है।
- यह सोचना कि उपनिवेशवाद सिर्फ़ राजनीतिक राज था। उसने अर्थव्यवस्था, ज़मीन, कानून और विचार भी बदले।
- वर्ग और समुदाय को एक समझना। वर्ग पैसे और काम से है; समुदाय जन्म और आस्था से।
- यह सोचना कि आधुनिक बदलाव से जाति और धर्म मिट गए। उन्होंने नए रूप लिए और कभी-कभी और पक्के हो गए।