Romania Clasa a XI-a Geography: Fundamental Problems of Today's World
अध्याय: 5
1. Environment – a key problem of today's world
Environment and geo-ecological factors · Environments and landscapes · Hazards and human impact · Environmental protection
- पर्यावरणीय समस्याएँ: कारण, प्रभाव और समाधान – पर्यावरणीय समस्याएँ हवा, पानी, ज़मीन, जलवायु और जीवों में होने वाले हानिकारक बदलाव हैं, जो ज़्यादातर इंसानों के कामों से होते हैं। मुख्य समस्याएँ हैं: वायु, जल और भूमि प्रदूषण, कचरा, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि और संसाधनों का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल। ये लोगों की संख्या और हर व्यक्ति की खपत (पारिस्थितिक पदचिह्न) के साथ बढ़ती हैं। साफ़ ऊर्जा, बचत, रीसाइक्लिंग, गंदे पानी की सफ़ाई, जंगलों की रक्षा और अच्छे कानूनों से हम इन्हें घटा सकते हैं।
- विश्व के जलवायु प्रदेश – किसी जगह के लगभग 30 साल के मौसम का औसत उसकी जलवायु है। यह मुख्य रूप से अक्षांश (सूरज कितना ऊँचा चढ़ता है), ऊँचाई (हर 1 km पर लगभग 6.5 °C ठंडा), समुद्र से दूरी, पवनों और महासागरीय धाराओं पर निर्भर करती है। कोपेन ने दुनिया को पाँच समूहों में बाँटा: A उष्णकटिबंधीय, B शुष्क, C शीतोष्ण, D महाद्वीपीय और E ध्रुवीय, साथ में ऊँचे पहाड़ों पर पर्वतीय (H) जलवायु। मानसून जलवायु में पवनें मौसम के साथ दिशा बदलती हैं।
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
2. Regionalisation and globalisation
Regionalisation and globalisation
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।
3. Population, resources and development
Population and development · Resources and sustainability
- भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना – जनसांख्यिकी यानी जनसंख्या का अध्ययन: कितने लोग हैं, कैसे बढ़ते हैं, और कौन हैं (उम्र, लिंग, जगह)। माल्थस ने कहा जनसंख्या भोजन से तेज़ बढ़ती है, इसलिए भूख उसे रोकती है। जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत बताता है कि समाज ऊँची जन्म और मृत्यु दर से, मृत्यु दर पहले घटने पर जनसंख्या विस्फोट से होते हुए, कम जन्म और मृत्यु दर तक पहुँचता है। मुख्य माप हैं: जन्म दर, मृत्यु दर, वृद्धि दर, प्रजनन दर, शिशु और मातृ मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा, लिंग अनुपात और निर्भरता अनुपात। भारत की जनसंख्या युवा है; युवाओं को काम और कौशल मिले तो यह जनसांख्यिकीय लाभांश बन सकती है। गाँव और शहर प्रवास, व्यापार और मीडिया से जुड़े हैं, पर काम, सुविधाओं और आय में बँटे भी हैं। भारत की जनसंख्या नीति 1952 के परिवार नियोजन से, आपातकाल की ज़बरदस्ती नसबंदी से होकर, राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 तक पहुँची, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और अपनी पसंद पर ज़ोर देती है।
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- पर्यावरण और धारणीय विकास – पर्यावरण हमें संसाधन देता है, हमारा कचरा सोखता है, जीवन चलाता है और सुंदरता देता है। जब हम संसाधन प्रकृति के नवीकरण से तेज़ लेते हैं, या कचरा उसकी सोखने की क्षमता से ज़्यादा फेंकते हैं, तो धारण क्षमता पार होती है और पर्यावरण संकट आता है। भारत में भूमि अपक्षय, वायु-जल प्रदूषण, वन और जैव-विविधता की हानि है। जीवाश्म ईंधन जलाने से गर्मी फँसती है और वैश्विक उष्णता होती है; CFC ओज़ोन परत पतली करते हैं। धारणीय विकास आज की ज़रूरतें पूरी करता है बिना भावी पीढ़ियों की क्षमता घटाए।
4. World economic and geopolitical system
World economy · Geopolitical system and groupings
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।
5. Social and cultural geography (social sciences)
Social geography · Cultural geography
- सामाजिक भूगोल: अलग-अलग जगहों पर लोग कैसे रहते हैं – सामाजिक भूगोल यह पढ़ता है कि लोग, उनकी संस्कृति और रहन-सहन की स्थितियाँ जगहों पर कैसे फैली हैं और क्यों। क्षेत्र परंपराओं (नृजातीय या सांस्कृतिक क्षेत्र), जीवन स्तर (आय, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास) और प्रजनन दर (प्रति महिला बच्चे) में अलग होते हैं। गाँव अक्सर लोग खो देते हैं क्योंकि युवा काम के लिए शहर चले जाते हैं (ग्रामीण जनसंख्या ह्रास), इसलिए गाँव और शहर का जीवन अलग-अलग तरह से बदलता है। शहर के भीतर लोग आय या मूल के आधार पर अलग-अलग इलाकों में बस सकते हैं, जिससे अलग-थलग, वंचित बस्तियाँ (घेटोकरण) बन सकती हैं। हर शहर का अपना चरित्र भी होता है, जिसे जीनियस लोकी (स्थान की आत्मा) कहते हैं। भूगोलवेत्ता मतदान जैसे पैटर्न दिखाने के लिए GIS नक्शे इस्तेमाल करते हैं, और जन भागीदारी लोगों को अपनी जगह गढ़ने में मदद करती है। कुछ क्षेत्र ग़रीब रह जाते हैं और उन्हें सामाजिक एकजुटता चाहिए, जैसे अमीर क्षेत्रों की मदद। काम और सहिष्णुता भी केंद्र में हैं: बाल श्रम और सस्ता श्रम, बेरोज़गारी (ख़ासकर युवाओं में), और नस्लवाद तथा विदेशी-द्वेष, जिन्हें शिक्षा, निष्पक्ष क़ानून और समूहों के मेल-जोल से रोका जा सकता है।