CBSE कक्षा 12 भूगोल
अध्याय: 12
1. मानव भूगोल
मानव भूगोल: प्रकृति एवं विषय क्षेत्र
- मानव भूगोल: प्रकृति एवं विषय क्षेत्र – मानव भूगोल पढ़ता है कि अलग-अलग जगहों पर लोग और प्रकृति एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। बहुत पहले प्रकृति लोगों को चलाती थी (मानव का प्राकृतीकरण, यानी पर्यावरणीय निश्चयवाद)। तकनीक आने पर लोग प्रकृति बदलने लगे (प्रकृति का मानवीकरण, यानी संभववाद)। नव-निश्चयवाद कहता है: प्रकृति बदलो, पर उसकी सीमा पर रुक जाओ। समय के साथ यह विषय अन्वेषण से उत्तर-आधुनिकतावाद तक कई उपागमों से गुज़रा। आज इसके कई क्षेत्र हैं, जैसे सामाजिक, नगरीय, राजनीतिक और आर्थिक भूगोल।
2. लोग
विश्व जनसंख्या · मानव विकास
- भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना – जनसांख्यिकी यानी जनसंख्या का अध्ययन: कितने लोग हैं, कैसे बढ़ते हैं, और कौन हैं (उम्र, लिंग, जगह)। माल्थस ने कहा जनसंख्या भोजन से तेज़ बढ़ती है, इसलिए भूख उसे रोकती है। जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धांत बताता है कि समाज ऊँची जन्म और मृत्यु दर से, मृत्यु दर पहले घटने पर जनसंख्या विस्फोट से होते हुए, कम जन्म और मृत्यु दर तक पहुँचता है। मुख्य माप हैं: जन्म दर, मृत्यु दर, वृद्धि दर, प्रजनन दर, शिशु और मातृ मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा, लिंग अनुपात और निर्भरता अनुपात। भारत की जनसंख्या युवा है; युवाओं को काम और कौशल मिले तो यह जनसांख्यिकीय लाभांश बन सकती है। गाँव और शहर प्रवास, व्यापार और मीडिया से जुड़े हैं, पर काम, सुविधाओं और आय में बँटे भी हैं। भारत की जनसंख्या नीति 1952 के परिवार नियोजन से, आपातकाल की ज़बरदस्ती नसबंदी से होकर, राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 तक पहुँची, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और अपनी पसंद पर ज़ोर देती है।
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- मानव विकास: अर्थ, स्तंभ, उपागम और HDI – वृद्धि का मतलब है बड़ा होना; विकास का मतलब है बेहतर होना। मानव विकास यानी लोगों के विकल्प बढ़ाना, ताकि वे लंबा, स्वस्थ, शिक्षित जीवन और ठीक-ठाक आय पा सकें। यह चार स्तंभों पर टिका है: समता, सततता, उत्पादकता और सशक्तिकरण। चार उपागम इसे अलग-अलग देखते हैं: आय, कल्याण, आधारभूत आवश्यकता और क्षमता। मानव विकास सूचकांक (HDI) स्वास्थ्य, शिक्षा और आय से देशों को 0 से 1 तक अंक देता है। मानव गरीबी सूचकांक कमी मापता था, और भूटान सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता मापता है। देश अति उच्च, उच्च, मध्यम और निम्न समूहों में बँटते हैं।
3. मानव क्रियाएँ
प्राथमिक क्रियाएँ · द्वितीयक क्रियाएँ · तृतीयक और चतुर्थक क्रियाएँ · परिवहन एवं संचार · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
- प्राथमिक क्रियाएँ: संग्रहण, पशुचारण, कृषि और खनन – प्राथमिक क्रियाएँ सीधे प्रकृति से चीज़ें लेती हैं: संग्रहण और आखेट, पशुचारण, कृषि, मछली पकड़ना, वानिकी और खनन। संग्रहण सबसे पुराना है। पशुचारण चलवासी (पशुओं के साथ घूमना) या वाणिज्य पशुधन पालन हो सकता है। कृषि निर्वाह प्रकारों (स्थानांतरी और गहन) से लेकर वाणिज्यिक प्रकारों (रोपण, विस्तृत अनाज, मिश्रित, डेयरी, भूमध्यसागरीय, बाज़ार के लिए सब्ज़ी) तक है, साथ ही सहकारी और सामूहिक कृषि भी। खनन भौतिक कारकों (अयस्क का आकार, श्रेणी) और आर्थिक कारकों (माँग, तकनीक, परिवहन) पर निर्भर है। यह धरातलीय (विवृत) या भूमिगत (कूपक) विधि से होता है।
- द्वितीयक क्रियाएँ: विनिर्माण और उद्योग – द्वितीयक क्रियाएँ कच्चे माल को उपयोगी सामान में बदलकर उसका मूल्य बढ़ाती हैं। यही विनिर्माण है। आधुनिक विनिर्माण में विशेष काम, मशीनें, नई तकनीक और साफ़ संगठन होता है, और यह कुछ ही प्रदेशों में मिलता है। उद्योग बाज़ार, कच्चा माल, श्रम, शक्ति, परिवहन, सरकारी नीति और एक साथ रहने के फ़ायदे को तौलकर लगाए जाते हैं। इन्हें आकार (कुटीर, लघु, बृहत्), कच्चे माल (कृषि, खनिज, रसायन, वन, पशु), उत्पाद (आधारभूत, उपभोक्ता) और स्वामित्व (सार्वजनिक, निजी, संयुक्त) से बाँटते हैं। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग शोध और कुशल कर्मचारियों पर चलते हैं और टेक्नोपोलिस में समूह बनाते हैं।
- तृतीयक और चतुर्थक क्रियाएँ – तृतीयक क्रियाएँ सामान बनाने की जगह सेवाएँ देती हैं: व्यापार, परिवहन, संचार और नाई से लेकर वकील तक की सेवाएँ। देश जितना विकसित होता है, उतने ज़्यादा लोग सेवाओं में काम करते हैं। पर्यटन सबसे बड़ी तृतीयक क्रियाओं में है, जिसे जलवायु, भू-दृश्य, इतिहास, संस्कृति और अच्छी सुविधाएँ खींचती हैं। कुशल डॉक्टरों और कम ख़र्च के कारण भारत चिकित्सा पर्यटन का लोकप्रिय स्थान बन गया है। चतुर्थक क्रियाएँ ज्ञान और सूचना से जुड़ी हैं; पंचम क्रियाएँ सबसे ऊँचे स्तर के फ़ैसले लेने वाले काम हैं। बाह्यस्रोतन ऐसा काम देशों के पार भेजता है। डिजिटल (अंकीय) विभाजन उन लोगों के बीच का अंतर है जिनके पास आधुनिक डिजिटल तकनीक है और जिनके पास नहीं।
- विश्व में परिवहन एवं संचार – परिवहन लोगों और सामान को ले जाता है; संचार संदेश ले जाता है। सड़कें कम दूरी और घर-घर तक के लिए सबसे अच्छी हैं, और राजमार्ग दूर के शहरों को जोड़ते हैं। पार-महाद्वीपीय रेलमार्ग, जैसे ट्रांस-साइबेरियन, पूरे महाद्वीप को पार करते हैं। ज़्यादातर विश्व व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, और स्वेज़ व पनामा जैसी नहरें लंबे चक्कर बचाती हैं। राइन और सेंट लॉरेंस समुद्री मार्ग जैसे आंतरिक जलमार्ग भारी माल को ज़मीन के अंदर तक ले जाते हैं। वायु परिवहन सबसे तेज़ पर महँगा है, पाइपलाइन तेल और गैस लगातार ले जाती है, और उपग्रह व इंटरनेट सूचना को सेकंडों में दुनिया भर पहुँचाते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: आधार, संतुलन, WTO और पत्तन – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान है। यह वस्तु-विनिमय से शुरू हुआ, रेशम मार्ग जैसे रास्तों पर बढ़ा, क्रूर दास व्यापार और औपनिवेशिक व्यापार से गुज़रा, और उद्योगों के साथ फैला। देश इसलिए व्यापार करते हैं क्योंकि वे संसाधन, जनसंख्या, विकास, विदेशी निवेश और परिवहन में अलग हैं। व्यापार संतुलन निर्यात और आयात की तुलना है। व्यापार द्विपक्षीय या बहुपक्षीय हो सकता है; मुक्त व्यापार रुकावटें घटाता है, जबकि राशिपातन विदेश में लागत से कम पर माल बेचता है। WTO विश्व नियम बनाता है, प्रादेशिक समूह पड़ोसियों को जोड़ते हैं, और कई तरह के पत्तन व्यापार के द्वार हैं।
4. मानचित्र कार्य: विश्व
विश्व मानचित्र कार्य
- कक्षा 12 इतिहास मानचित्र कार्य: समय के साथ स्थान खोजें – कक्षा 12 इतिहास में मानचित्र का प्रश्न 5 अंक का होता है। आपको एक रेखा-मानचित्र मिलता है। उस पर जगहें अंकित करनी होती हैं और उनके नाम लिखने होते हैं। जगहें आपके पाठों से आती हैं: हड़प्पा के नगर, 16 महाजनपद, अशोक के अभिलेख, बौद्ध स्थल, विजयनगर और मुग़ल स्थान, और 1857 व राष्ट्रीय आंदोलन के केंद्र। तरीका आसान है। हर जगह को उसकी नदी, तट या पड़ोसी से याद रखिए। जगहों को युग के हिसाब से बाँटिए। फिर अंकित करना जल्दी और पक्का हो जाता है।
- कक्षा 12 भूगोल के लिए भारत मानचित्र कार्य (लोग और अर्थव्यवस्था) – कक्षा 12 के मानचित्र कार्य में आप 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' पुस्तक के स्थानों को भारत के रूपरेखा मानचित्र पर खोजकर नाम लिखते हैं: फ़सल क्षेत्र, खानें, तेल क्षेत्र, औद्योगिक केंद्र, पत्तन और हवाई अड्डे। पहले चिह्नों का संकेत सीखिए, फिर हर स्थान को एक सुराग (कौन-सा तट, नदी या पठार) से याद कीजिए, और साफ़-सुथरे ढंग से नाम सहित दर्शाने का अभ्यास कीजिए। केवल आधिकारिक रूपरेखा मानचित्र का उपयोग होता है; हम कोई सीमा नहीं बनाते।
- विश्व मानचित्र कार्य (कक्षा 12): कृषि क्षेत्र, रेलमार्ग टर्मिनल, पत्तन, हवाई अड्डे और जलमार्ग – कक्षा 12 के विश्व मानचित्र कार्य में आप रेखा-मानचित्र पर मानव भूगोल की चीज़ें अंकित करते हैं। संग्रहण घने वनों और ठंडे भागों में होता है; चलवासी पशुचारण शुष्क भूमि में; व्यापारिक पशुपालन, विस्तृत अनाज कृषि और मिश्रित कृषि शीतोष्ण घास के मैदानों और विकसित मैदानों में। चार पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग महाद्वीपों को एक तट से दूसरे तट तक पार करते हैं। समुद्री पत्तन तट पर होते हैं, हवाई अड्डे कहीं भी। स्वेज़ और पनामा नहरें महासागरों के बीच छोटे रास्ते हैं; राइन और सेंट लॉरेंस जहाज़ों को अंदर तक ले जाते हैं।
5. जनसंख्या
जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन
- भारत की जनसंख्या: वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन – 2011 में भारत में लगभग 121 करोड़ लोग थे, दुनिया का लगभग छठा हिस्सा। लोग उपजाऊ मैदानों में घने और पहाड़, मरुस्थल, वन में कम बसते हैं; औसत घनत्व 382 प्रति वर्ग किमी। वृद्धि चार प्रावस्थाओं से गुज़री: स्थिर (1901–21), नियमित वृद्धि (1921–51), जनसंख्या विस्फोट (1951–81) और घटती वृद्धि (1981 के बाद)। राज्यों में वृद्धि अलग-अलग है। लगभग 69% लोग गाँवों में रहते हैं। भारत में अनेक भाषाएँ (चार परिवार) और अनेक धर्म हैं। लगभग 40% लोग कामगार हैं और उनमें से आधे से ज़्यादा खेती पर निर्भर हैं। लिंगानुपात 943 है, इसलिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चल रहे हैं।
6. मानव बस्तियाँ
मानव बस्तियाँ
- मानव बस्तियाँ: ग्रामीण और नगरीय प्रकार, नगरों का विकास, नगरीकरण और स्मार्ट सिटी – बस्ती वह जगह है जहाँ लोग घर बनाकर रहते हैं, एक झोपड़ी से लेकर बड़े नगर तक। ग्रामीण बस्तियाँ खेती और दूसरे प्राथमिक कामों पर टिकी हैं; नगरीय बस्तियाँ उद्योग, व्यापार और सेवाओं पर। गाँव गुच्छित, अर्ध-गुच्छित, पल्ली या परिक्षिप्त हो सकते हैं। भारतीय नगर तीन कालों में बढ़े: प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक। नगरीय हिस्सा 1901 में 11% से 2011 में 31% हुआ। नगरों को मुख्य काम से पहचानते हैं: प्रशासनिक, औद्योगिक, परिवहन, वाणिज्यिक, खनन, छावनी, शैक्षिक, धार्मिक और पर्यटन। स्मार्ट सिटी मिशन (2015) 100 नगरों को साफ़, सुरक्षित और रहने में आसान बनाना चाहता है।
7. संसाधन एवं विकास
भू-संसाधन तथा कृषि · जल संसाधन · खनिज तथा ऊर्जा संसाधन · भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास
- भारत में भू-संसाधन तथा कृषि (कक्षा 12) – भारत में ज़मीन नौ तरह से इस्तेमाल होती है; सबसे बड़ा हिस्सा निवल बोया क्षेत्र (लगभग 46%) है। समय के साथ वन और गैर-कृषि भूमि बढ़ी, बंजर भूमि और चरागाह घटे। गाँव का चरागाह, तालाब और जंगल सामुदायिक संसाधन हैं। फ़सलें तीन ऋतुओं में उगती हैं: खरीफ़, रबी और ज़ायद। खेती शुष्क भूमि या आर्द्र भूमि की होती है और सिंचाई रक्षात्मक या उत्पादक होती है। चावल, गेहूँ, दालें, तिलहन, कपास, जूट, गन्ना, चाय और कॉफ़ी मुख्य फ़सलें हैं। हरित क्रांति से उपज बढ़ी पर गिरता भूजल, लवणीय मिट्टी, छोटी जोत और कर्ज़ जैसी समस्याएँ भी आईं।
- भारत के जल संसाधन (कक्षा 12 भूगोल) – दुनिया का लगभग 4% पानी भारत में है पर आबादी 16% है। हर साल लगभग 1,122 घन किमी पानी उपयोग योग्य है: 690 धरातल से और 432 भूमि के नीचे से। केरल जैसे तटों पर लैगून और पश्चजल मछली, धान और पर्यटन के काम आते हैं। सबसे ज़्यादा पानी कृषि लेती है: धरातलीय जल का लगभग 89% और भौम जल का 92%। सीवेज, कारख़ानों का कचरा और खेती के रसायन पानी गंदा करते हैं। कम उपयोग, शोधन और पुनः उपयोग, वर्षा जल संग्रहण और जलसंभर प्रबंधन (हरियाली, नीरू-मीरू, अरवारी पानी संसद) से पानी बचता है।
- भारत के खनिज तथा ऊर्जा संसाधन (कक्षा 12) – खनिज निश्चित बनावट वाला प्राकृतिक पदार्थ है। भारत के ज़्यादातर खनिज पुरानी पठारी चट्टानों में तीन पेटियों में हैं: उत्तर-पूर्वी पठार, दक्षिण-पश्चिमी पठार और उत्तर-पश्चिमी पेटी। लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट और ताँबा धात्विक हैं; अभ्रक अधात्विक है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस परंपरागत ऊर्जा हैं जो ख़त्म हो जाएँगी। परमाणु, सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और जैव-ऊर्जा गैर-परंपरागत और साफ़ हैं। खनिज अनवीकरणीय हैं, इसलिए कम उपयोग, पुनर्चक्रण और विकल्प ज़रूरी हैं।
- भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास (कक्षा 12) – नियोजन का मतलब है सबकी भलाई के लिए तय करना कि पहले क्या करें। खंडीय नियोजन एक क्षेत्र पर और प्रादेशिक नियोजन पिछड़े प्रदेशों को आगे लाने पर ध्यान देता है। पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम और सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम जैसे लक्ष्य क्षेत्र कार्यक्रम ख़ास प्रदेशों की मदद करते हैं। सततपोषणीय विकास वह विकास है जो आज की ज़रूरतें पूरी करे पर आने वाली पीढ़ियों को नुकसान न पहुँचाए, अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरण में संतुलन रखकर। दो केस स्टडी: हिमाचल प्रदेश में गद्दी जनजाति का भरमौर क्षेत्र और थार मरुस्थल में इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र।
8. परिवहन, संचार एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
भारत में परिवहन तथा संचार · भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
- भारत में परिवहन तथा संचार (कक्षा 12) – परिवहन लोगों और माल को ले जाता है; संचार संदेश पहुँचाता है। भारत में सड़कों का बड़ा जाल है: राष्ट्रीय महामार्ग, राज्य महामार्ग, ज़िला सड़कें, ग्रामीण सड़कें और सीमांत सड़कें। भारतीय रेल बड़ी, मीटर और छोटी लाइन पर चलती है। पाइपलाइन तेल, गैस और पानी बिना रुके सस्ते में ले जाती है। अंतर्देशीय जलमार्ग (जैसे गंगा पर NW-1) और समुद्री मार्ग भारी माल के लिए सबसे सस्ते हैं। वायु परिवहन सबसे तेज़ है। संचार व्यक्तिगत (डाक, फ़ोन, इंटरनेट) या जनसंचार (रेडियो, टीवी, अख़बार, फ़िल्में) होता है, जिसमें INSAT और IRS उपग्रह मदद करते हैं।
- विश्व में परिवहन एवं संचार – परिवहन लोगों और सामान को ले जाता है; संचार संदेश ले जाता है। सड़कें कम दूरी और घर-घर तक के लिए सबसे अच्छी हैं, और राजमार्ग दूर के शहरों को जोड़ते हैं। पार-महाद्वीपीय रेलमार्ग, जैसे ट्रांस-साइबेरियन, पूरे महाद्वीप को पार करते हैं। ज़्यादातर विश्व व्यापार समुद्री मार्गों से होता है, और स्वेज़ व पनामा जैसी नहरें लंबे चक्कर बचाती हैं। राइन और सेंट लॉरेंस समुद्री मार्ग जैसे आंतरिक जलमार्ग भारी माल को ज़मीन के अंदर तक ले जाते हैं। वायु परिवहन सबसे तेज़ पर महँगा है, पाइपलाइन तेल और गैस लगातार ले जाती है, और उपग्रह व इंटरनेट सूचना को सेकंडों में दुनिया भर पहुँचाते हैं।
- भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (कक्षा 12 भूगोल) – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन है। भारत निर्यात से ज़्यादा आयात करता है, इसलिए व्यापार घाटा रहता है। व्यापार की संरचना बदली है: निर्यात में कृषि वस्तुओं का हिस्सा घटा और विनिर्मित वस्तुएँ, पेट्रोलियम उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान बढ़े। सबसे बड़ा आयात कच्चा तेल है, फिर इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें, सोना और रसायन। व्यापार की दिशा एशिया की ओर मुड़ी है; मुख्य साझेदार अमेरिका, चीन, UAE आदि हैं। मात्रा के हिसाब से लगभग 95% व्यापार समुद्री पत्तनों से होता है, जो अपने पीछे के पृष्ठप्रदेश की सेवा करते हैं। हवाई अड्डे हल्का, क़ीमती और जल्दी ख़राब होने वाला माल ले जाते हैं।
9. चयनित मुद्दों और समस्याओं पर भौगोलिक परिप्रेक्ष्य
चयनित मुद्दे और समस्याएँ
- चयनित मुद्दों और समस्याओं पर भौगोलिक परिप्रेक्ष्य (कक्षा 12) – प्रदूषण का मतलब है हवा, पानी, ज़मीन या आवाज़ में हानिकारक चीज़ें मिलना। वायु प्रदूषण ईंधन जलाने, कारख़ानों और गाड़ियों से; जल प्रदूषण सीवेज, उद्योग और खेत के रसायनों से; भूमि प्रदूषण कूड़े और रसायनों से; ध्वनि प्रदूषण ट्रैफ़िक और लाउडस्पीकर से होता है। शहर बहुत ठोस कचरा बनाते हैं जिसे अलग करना, पुनर्चक्रित करना और सुरक्षित निपटाना चाहिए। लोग प्रतिकर्ष कारकों (गरीबी, काम नहीं) और अपकर्ष कारकों (नौकरी, सुविधाएँ) से गाँव से शहर जाते हैं; बहुत से गंदी बस्तियों में रहते हैं। कटाव, जलाक्रांति, लवणता, खनन और अति चराई से हुआ भूमि निम्नीकरण ठीक हो सकता है, जैसा झाबुआ के जलसंभर कार्य ने दिखाया।
10. मानचित्र कार्य: भारत
भारत मानचित्र कार्य
- कक्षा 12 इतिहास मानचित्र कार्य: समय के साथ स्थान खोजें – कक्षा 12 इतिहास में मानचित्र का प्रश्न 5 अंक का होता है। आपको एक रेखा-मानचित्र मिलता है। उस पर जगहें अंकित करनी होती हैं और उनके नाम लिखने होते हैं। जगहें आपके पाठों से आती हैं: हड़प्पा के नगर, 16 महाजनपद, अशोक के अभिलेख, बौद्ध स्थल, विजयनगर और मुग़ल स्थान, और 1857 व राष्ट्रीय आंदोलन के केंद्र। तरीका आसान है। हर जगह को उसकी नदी, तट या पड़ोसी से याद रखिए। जगहों को युग के हिसाब से बाँटिए। फिर अंकित करना जल्दी और पक्का हो जाता है।
- कक्षा 12 भूगोल के लिए भारत मानचित्र कार्य (लोग और अर्थव्यवस्था) – कक्षा 12 के मानचित्र कार्य में आप 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' पुस्तक के स्थानों को भारत के रूपरेखा मानचित्र पर खोजकर नाम लिखते हैं: फ़सल क्षेत्र, खानें, तेल क्षेत्र, औद्योगिक केंद्र, पत्तन और हवाई अड्डे। पहले चिह्नों का संकेत सीखिए, फिर हर स्थान को एक सुराग (कौन-सा तट, नदी या पठार) से याद कीजिए, और साफ़-सुथरे ढंग से नाम सहित दर्शाने का अभ्यास कीजिए। केवल आधिकारिक रूपरेखा मानचित्र का उपयोग होता है; हम कोई सीमा नहीं बनाते।
- विश्व मानचित्र कार्य (कक्षा 12): कृषि क्षेत्र, रेलमार्ग टर्मिनल, पत्तन, हवाई अड्डे और जलमार्ग – कक्षा 12 के विश्व मानचित्र कार्य में आप रेखा-मानचित्र पर मानव भूगोल की चीज़ें अंकित करते हैं। संग्रहण घने वनों और ठंडे भागों में होता है; चलवासी पशुचारण शुष्क भूमि में; व्यापारिक पशुपालन, विस्तृत अनाज कृषि और मिश्रित कृषि शीतोष्ण घास के मैदानों और विकसित मैदानों में। चार पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग महाद्वीपों को एक तट से दूसरे तट तक पार करते हैं। समुद्री पत्तन तट पर होते हैं, हवाई अड्डे कहीं भी। स्वेज़ और पनामा नहरें महासागरों के बीच छोटे रास्ते हैं; राइन और सेंट लॉरेंस जहाज़ों को अंदर तक ले जाते हैं।
11. भूगोल में प्रायोगिक कार्य भाग-2
आँकड़े: स्रोत और संकलन · आँकड़ों का प्रक्रमण · आँकड़ों का आलेखी निरूपण · स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी
- आँकड़े: स्रोत और संकलन (कक्षा 12 भूगोल प्रायोगिक) – आँकड़े स्थानों और लोगों के बारे में संख्याएँ या तथ्य हैं। ये प्राथमिक स्रोतों (अपना क्षेत्र कार्य), द्वितीयक स्रोतों (दूसरों द्वारा प्रकाशित) और अप्रकाशित अभिलेखों से मिलते हैं। कच्चे आँकड़े बिखरे होते हैं, इसलिए हम उन्हें साफ़ सारणी में रखते हैं, बराबर वर्गों में बाँटते हैं और हर वर्ग की बारंबारता गिनते हैं। बारंबारता बहुभुज वर्गों के मध्य-बिंदुओं को जोड़कर आँकड़ों का आकार दिखाता है।
- आँकड़ों का प्रक्रमण: माध्य, माध्यिका और बहुलक (कक्षा 12 भूगोल प्रायोगिक) – आँकड़ों का प्रक्रमण लंबी संख्या-सूची को कुछ उपयोगी संख्याओं में बदलता है। केंद्रीय प्रवृत्ति की तीन मापें हैं: माध्य (बराबर बाँटना: योग ÷ संख्या), माध्यिका (क्रम में रखने पर बीच का मान) और बहुलक (सबसे अधिक बार आने वाला मान)। हर एक की अवर्गीकृत और वर्गीकृत आँकड़ों के लिए विधि है। संतुलित आँकड़ों में तीनों पास-पास होते हैं; कुछ बहुत बड़े या छोटे मान हों तो माध्यिका अधिक उचित औसत है।
- आँकड़ों का आलेखी निरूपण (कक्षा 12 भूगोल प्रायोगिक) – आलेख, आरेख और विषयक मानचित्र सारणियों को चित्रों में बदलते हैं, जिससे प्रतिरूप तुरंत दिखता है। रेखा आलेख और बहुरेखी आलेख समय के साथ बदलाव दिखाते हैं। दंड आरेख (सरल, बहुदंड, मिश्रित) मदों की तुलना करते हैं। वृत्त आरेख कोणों से पूरे के भाग दिखाता है। प्रवाह मानचित्र गतिविधि दिखाते हैं, तीर की चौड़ाई मापनी के अनुसार। विषयक मानचित्र एक क्षेत्र पर एक विषय दिखाते हैं: बिंदु मानचित्र (1 बिंदु = तय संख्या), वर्णमात्री मानचित्र (मान के अनुसार रंगे क्षेत्र) और सममान रेखा मानचित्र (समान मान वाली रेखाएँ)।
- स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी: जीआईएस (कक्षा 12 भूगोल प्रायोगिक) – भौगोलिक सूचना तंत्र (जीआईएस) एक कंप्यूटर तंत्र है जो स्थानों के आँकड़ों को संग्रहित करता, जोड़ता, विश्लेषित करता और दिखाता है। यह संसार को परतों में रखता है। इसके लिए हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, आँकड़े, लोग और विधियाँ चाहिए। स्थानिक आँकड़े रेखापुंज (कोशिकाओं का जाल) और सदिश (बिंदु, रेखा, बहुभुज) प्रारूपों में होते हैं। आँकड़े अंकीकरण, स्कैनिंग, जीपीएस या उपग्रह चित्रों से डाले जाते हैं और गुण सारणियों से जोड़े जाते हैं। अध्यारोपण परतों को मिलाकर शर्तें पूरी होने की जगह खोजता है; बफ़र किसी वस्तु के चारों ओर तय दूरी का क्षेत्र बनाता है।
12. केवल रचनात्मक आकलन हेतु विषय
जनसंख्या संघटन, बस्तियाँ और प्रवास
- प्रवास (Migration) – प्रवास लोगों का एक जगह से दूसरी जगह कुछ समय या हमेशा के लिए रहने जाना है। छोड़ी गई जगह उद्गम है; पहुँचने की जगह गंतव्य। लोग प्रतिकर्ष कारकों (घर की समस्याएँ) और अपकर्ष कारकों (दूसरी जगह का आकर्षण) से जाते हैं, पर खर्च, दूरी और कानून जैसी बाधाएँ कुछ को रोकती हैं। प्रवास आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय, अस्थायी या स्थायी, स्वैच्छिक या बलात हो सकता है, और यह उद्गम व गंतव्य दोनों को बदलता है।