आँकड़े क्या हैं और भूगोलवेत्ता को इनकी ज़रूरत क्यों है?
आँकड़े वे संख्याएँ या तथ्य हैं जो हम दर्ज करते हैं, जैसे वर्षा, फ़सल उत्पादन या किसी गाँव के लोगों की संख्या। भूगोलवेत्ता आँकड़ों से स्थानों की तुलना, प्रतिरूप खोजना और योजना (सड़क, विद्यालय, पानी) बनाते हैं।
आँकड़े मात्रा (कितना, कितने) या गुण (मिट्टी का प्रकार, घर का प्रकार) के बारे में हो सकते हैं।
आँकड़ों के स्रोत: प्राथमिक, द्वितीयक और अप्रकाशित
प्राथमिक स्रोत
आँकड़े जो आप स्वयं, पहली बार जुटाते हैं। विधियाँ: व्यक्तिगत प्रेक्षण (देखकर दर्ज करना), साक्षात्कार (लोगों से बात), प्रश्नावली या अनुसूची (प्रश्नों की छपी सूची), और अन्य विधियाँ जैसे क्षेत्र में मिट्टी या पानी मापना।
द्वितीयक स्रोत
आँकड़े जो किसी और ने जुटाकर प्रकाशित किए। उदाहरण: भारत की जनगणना, राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण, मौसम रिपोर्ट, सरकारी वार्षिकी, मानचित्र, पुस्तकें, पत्रिकाएँ, समाचार पत्र, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट (संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक) और सरकारी वेबसाइटें।
अप्रकाशित स्रोत
दफ़्तरों में रखे पर जनता के लिए न छपे अभिलेख: पटवारी के भूमि अभिलेख, नगरपालिका की फ़ाइलें, विद्यालय रजिस्टर, अस्पताल के अभिलेख, कंपनी की फ़ाइलें।
कौन-सा बेहतर?
प्राथमिक आँकड़े आपके ठीक प्रश्न के लिए होते हैं पर समय और पैसा लगता है। द्वितीयक आँकड़े जल्दी मिलते हैं और बड़े क्षेत्र के होते हैं, पर पुराने या किसी दूसरे उद्देश्य से जुटाए हो सकते हैं।
सारणीयन: आँकड़ों को सारणी में रखना
सारणीयन का अर्थ है आँकड़ों को पंक्तियों और स्तंभों में सजाना। अच्छी सारणी में संख्या, शीर्षक, स्तंभ-शीर्ष, इकाई (cm, km², %), मानों वाला मुख्य भाग और नीचे स्रोत होता है।
सारणी बड़े आँकड़ों को पढ़ना और तुलना करना आसान बनाती है। इसमें योग, औसत और प्रतिशत भी जोड़ सकते हैं। निरपेक्ष संख्याएँ, अनुपात और प्रतिशत, सभी सारणीबद्ध हो सकते हैं।
आँकड़ों का वर्गीकरण (समूहन)
जब मान बहुत हों, तो हम उन्हें वर्गों (जैसे 0–10, 10–20) में बाँटते हैं। हर वर्ग की निचली सीमा और ऊपरी सीमा होती है। इनका अंतर वर्ग-अंतराल (वर्ग की चौड़ाई) है।
चरण
- परिसर निकालिए = सबसे बड़ा − सबसे छोटा मान।
- वर्गों की संख्या (प्रायः 5 से 15) और एक गोल वर्ग-अंतराल चुनिए।
- हर मान के लिए उसके वर्ग में मिलान चिह्न लगाइए (हर पाँचवाँ चिह्न चार को काटता है: ||||)।
- चिह्न गिनिए। यह बारंबारता (f) है। सभी बारंबारताओं का योग कुल मानों (N) के बराबर होना चाहिए।
अपवर्जी और समावेशी विधि
अपवर्जी: 0–10, 10–20… ऊपरी सीमा शामिल नहीं, इसलिए 10 जाता है 10–20 में। समावेशी: 0–9, 10–19… दोनों सीमाएँ शामिल। संचयी बारंबारता बारंबारताओं का चलता योग है।
बारंबारता बहुभुज
बारंबारता बहुभुज वर्गीकृत आँकड़ों का रेखा आलेख है। चरण:
- हर वर्ग का मध्य-बिंदु निकालिए: (निचली + ऊपरी) ÷ 2।
- x-अक्ष पर मध्य-बिंदु और y-अक्ष पर बारंबारता अंकित कीजिए।
- दोनों सिरों पर शून्य बारंबारता वाला एक अतिरिक्त वर्ग जोड़िए, ताकि आकृति x-अक्ष पर बंद हो।
- बिंदुओं को सीधी रेखाओं से जोड़िए।
इसे आयतचित्र के ऊपर (दंडों के ऊपरी मध्य-बिंदु जोड़कर) या अकेले बना सकते हैं। एक ग्राफ़ पर दो बहुभुज दो आँकड़ा-समूहों की तुलना में मदद करते हैं। तोरण (ओजाइव) संचयी बारंबारता की ऐसी ही रेखा है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परिसर = सबसे बड़ा मान − सबसे छोटा मान
- वर्ग-अंतराल = ऊपरी सीमा − निचली सीमा
- मध्य-बिंदु = (निचली सीमा + ऊपरी सीमा) ÷ 2
- Σf = N (बारंबारताओं का योग = कुल)
- संचयी बारंबारता = f का चलता योग
हल किए गए उदाहरण
1. आप एक घंटे तक विद्यालय के द्वार से गुज़रने वाले वाहन गिनते हैं। यह प्राथमिक है या द्वितीयक आँकड़ा?
प्राथमिक। आपने इसे स्वयं प्रेक्षण से जुटाया।
2. दो ज़िलों की साक्षरता की तुलना के लिए भारत की जनगणना रिपोर्ट से लिए आँकड़े: कौन-सा प्रकार?
द्वितीयक आँकड़े, क्योंकि इन्हें जनगणना कार्यालय ने जुटाकर प्रकाशित किया।
3. मान 12 से 87 तक हैं। आपको 8 वर्ग चाहिए। वर्ग-अंतराल कितना चुनेंगे?
परिसर = 87 − 12 = 75। 75 ÷ 8 ≈ 9.4, तो 10 तक गोल कीजिए। वर्ग: 10–20, 20–30, …, 80–90 (8 वर्ग)।
4. वर्ग 20–30, 30–40 और 40–50 के मध्य-बिंदु निकालिए।
(20+30)/2 = 25, (30+40)/2 = 35, (40+50)/2 = 45।
5. वर्षा मान: 12, 25, 7, 31, 18, 22, 9, 27, 15, 34, 21, 13, 28, 19, 5, 24, 16, 38, 23, 11 (cm)। इन्हें 10 के वर्गों में (अपवर्जी) बाँटिए।
0–10: 7, 9, 5 → f = 3। 10–20: 12, 18, 15, 13, 19, 16, 11 → f = 7। 20–30: 25, 22, 27, 21, 28, 24, 23 → f = 7। 30–40: 31, 34, 38 → f = 3। जाँच: 3+7+7+3 = 20 = N।
6. ऊपर की सारणी से बारंबारता बहुभुज के लिए अंकित बिंदु लिखिए।
खाली वर्ग −10–0 और 40–50 (f = 0) जोड़िए। बिंदु (मध्य-बिंदु, f): (−5, 0), (5, 3), (15, 7), (25, 7), (35, 3), (45, 0)। इन्हें सीधी रेखाओं से जोड़िए।
7. समावेशी वर्ग 10–19, 20–29, 30–39 को अपवर्जी में बदलिए।
19 और 20 के बीच अंतर 1 है; आधा 0.5। निचली सीमाओं से 0.5 घटाइए और ऊपरी में 0.5 जोड़िए: 9.5–19.5, 19.5–29.5, 29.5–39.5।
आम गलतियाँ
- जनगणना के आँकड़ों को प्राथमिक कहना। आपके लिए ये द्वितीयक हैं क्योंकि किसी और ने जुटाकर प्रकाशित किए।
- अपवर्जी विधि में सीमा पर के मान (जैसे 20) को नीचे वाले वर्ग में रखना। यह 20–30 में जाता है।
- बारंबारता बहुभुज के दोनों सिरों पर शून्य वर्ग न जोड़ना, जिससे वह x-अक्ष को नहीं छूता।
- शीर्षक, इकाई या स्रोत के बिना सारणी बनाना।