प्राथमिक क्रियाएँ क्या हैं?
प्राथमिक क्रियाएँ धरती के संसाधनों का सीधे उपयोग करती हैं: ज़मीन, पानी, पौधे, पशु और खनिज। इनमें आखेट और संग्रहण, पशुचारण, मछली पकड़ना, वानिकी, कृषि और खनन आते हैं। बाहर खुले में प्राथमिक काम करने वालों को लाल कॉलर श्रमिक कहते हैं।
आखेट और संग्रहण
यह सबसे पुरानी आर्थिक क्रिया है। लोग फल, बेर, मेवे, पत्तियाँ, कंद, छाल और औषधीय पौधे इकट्ठा करते और शिकार करते हैं। इसमें बहुत कम पूँजी और सरल औज़ार लगते हैं।
कहाँ: ऊँचे अक्षांशों के ठंडे इलाक़े (उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेशिया) और गर्म-गीले निचले इलाक़े (अमेज़न, उष्ण कटिबंधीय अफ़्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया के भाग)। आज कुछ संग्रहण व्यापार के लिए भी होता है, जैसे रबड़, गोंद, राल और जड़ी-बूटियाँ।
यह ज़्यादा लोगों का पेट नहीं भर सकता, और कृत्रिम चीज़ों ने कई वन उत्पादों की जगह ले ली है।
पशुचारण: चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन
चलवासी पशुचारण
चरवाहे घास और पानी के अनुसार पशुओं के साथ एक जगह से दूसरी जगह घूमते हैं। हर समूह का अपना पारंपरिक इलाक़ा होता है। पशु क्षेत्र के अनुसार: उष्ण अफ़्रीका में मवेशी; सहारा और एशियाई मरुस्थलों में भेड़, बकरी, ऊँट; तिब्बत में याक; आर्कटिक में रेंडियर। सर्दी में मैदान और गर्मी में पहाड़ों की ओर मौसमी आना-जाना ऋतु-प्रवास कहलाता है। मुख्य क्षेत्र: सहारा से मंगोलिया की पट्टी, दक्षिण-पश्चिम अफ़्रीका, आर्कटिक टुंड्रा। सरकारी सीमाओं और बसाने की नीतियों से इनकी संख्या घट रही है।
वाणिज्य पशुधन पालन
पशु बड़े रैंच (फ़ार्म) पर रखे जाते हैं, जो बाड़ से घिरे और हिस्सों में बँटे होते हैं। यह वैज्ञानिक है: नस्ल सुधार, रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य देखभाल। आमतौर पर एक ही तरह का पशु। मांस, ऊन और खाल बेची जाती है। न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, उरुग्वे और अमेरिका में मिलता है।
निर्वाह कृषि
किसान ज़्यादातर अपने परिवार के लिए उगाते हैं।
आदिकालीन निर्वाह (स्थानांतरी) कृषि
किसान जंगल का टुकड़ा जलाकर साफ़ करते हैं (कर्तन और दहन), कुछ साल फ़सल उगाते हैं जब तक मिट्टी की उर्वरता ख़त्म न हो, फिर नए टुकड़े पर चले जाते हैं। राख से पोषक तत्व मिलते हैं। स्थानीय नाम: पूर्वोत्तर भारत में झूमिंग, मध्य अमेरिका में मिल्पा, इंडोनेशिया-मलेशिया में लादांग।
गहन निर्वाह कृषि
घनी आबादी वाले मानसून एशिया में। छोटे खेत, परिवार का बहुत श्रम, सरल औज़ार। चावल प्रधान: भारी वर्षा वाले इलाक़ों में चावल मुख्य फ़सल, ज़मीन का बहुत गहन उपयोग। चावल रहित: सूखे इलाक़ों में सिंचाई से गेहूँ, मक्का, सोयाबीन और मोटे अनाज।
वाणिज्यिक कृषि के प्रकार
- रोपण कृषि: यूरोपीय लोगों ने उष्ण कटिबंधीय उपनिवेशों में शुरू की। एक फ़सल (चाय, कॉफ़ी, कोको, रबड़, कपास, ताड़ तेल, गन्ना, केला) बड़ी संपदा पर, ज़्यादा पूँजी, वैज्ञानिक तरीक़े, बहुत मज़दूर, कारखानों और बंदरगाहों तक अच्छा परिवहन।
- विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि: मध्य अक्षांश के घास के मैदानों में (प्रेयरी, स्टेपी, पंपास, डाउन्स, कैंटरबरी)। मशीनों से बहुत बड़े खेतों पर गेहूँ। प्रति एकड़ उपज कम, पर प्रति व्यक्ति ज़्यादा।
- मिश्रित कृषि: उत्तर-पश्चिम यूरोप, पूर्वी उत्तरी अमेरिका जैसे विकसित भागों में। फ़सल और पशु साथ: चारे की फ़सलें, फ़सल चक्र, अंतर-फ़सल। मशीनों और इमारतों के लिए ज़्यादा पूँजी।
- डेयरी कृषि: दुधारू पशु पालने का सबसे उन्नत तरीक़ा। ज़्यादा पूँजी और साल भर श्रम। उत्तर-पश्चिम यूरोप, कनाडा, उत्तर-पूर्वी अमेरिका, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में शहरों के पास।
- भूमध्यसागरीय कृषि: भूमध्य सागर के आसपास और ऐसी जलवायु वाले इलाक़ों में (मध्य चिली, कैलिफ़ोर्निया, दक्षिण-पश्चिम ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पश्चिम दक्षिण अफ़्रीका)। रसदार फल, अंगूर और शराब के लिए प्रसिद्ध। सर्दी में वर्षा, सूखी गर्मी।
- बाज़ार के लिए सब्ज़ी खेती और उद्यान कृषि: शहरी बाज़ार के लिए सब्ज़ी, फल, फूल जैसी ऊँचे दाम की फ़सलें। छोटे खेत, अच्छा परिवहन। ट्रक कृषि: जब दूरी इतनी हो कि ट्रक रात भर में तय कर ले। शहरों के पास मुर्गी और मवेशियों का कारखाना पालन भी।
सहकारी और सामूहिक कृषि
सहकारी कृषि: किसान अपनी ज़मीन रखते हैं पर एक समिति बनाकर बीज, औज़ार, खाद साथ ख़रीदते हैं और फ़सल अच्छे दाम पर साथ बेचते हैं। डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन और इटली में मज़बूत।
सामूहिक कृषि: ज़मीन, पशु और औज़ार पूरे समूह के साझा होते हैं (सामाजिक स्वामित्व)। किसान मिलकर काम करते और उपज बाँटते हैं; अपने उपयोग के लिए छोटा टुकड़ा रख सकते हैं। यह पूर्व सोवियत संघ में कोलखोज़ के रूप में शुरू हुई।
खनन: कारक और विधियाँ
खनन को प्रभावित करने वाले कारक
भौतिक: भंडार का आकार, श्रेणी (अयस्क कितना शुद्ध है) और उपस्थिति की अवस्था (उथला या गहरा, समतल या झुका)। आर्थिक: खनिज की माँग, उपलब्ध तकनीक, शुरू करने की पूँजी, श्रम, और अयस्क ढोने का परिवहन।
खनन की विधियाँ
धरातलीय (विवृत) खनन: जब अयस्क सतह के पास हो। सबसे आसान और सस्ता, सुरक्षित, जल्दी उत्पादन।
भूमिगत (कूपक) खनन: जब अयस्क गहरा हो। सीधे कूपक खोदे जाते हैं और सुरंगें अयस्क तक जाती हैं। लिफ़्ट, ड्रिल, ताज़ी हवा के पाइप और सुरक्षा व्यवस्था चाहिए। महँगा और जोखिम भरा (आग, बाढ़, धँसना, ज़हरीली गैस)।
ऊँची मज़दूरी के कारण विकसित देश खनन से हट रहे हैं; विकासशील देश अक्सर खनिज निकालकर निर्यात करते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्राथमिक क्रियाएँ = प्रकृति का सीधा उपयोग (संग्रहण, पशुचारण, कृषि, मछली, वानिकी, खनन)
- चलवासी पशुचारण = पशुओं के साथ घूमना; ऋतु-प्रवास = मैदान ↔ पहाड़ मौसमी आना-जाना
- पशुधन पालन (रैंचिंग) = बाड़ वाला, वैज्ञानिक, वाणिज्यिक
- स्थानांतरी कृषि = कर्तन और दहन, फिर आगे (झूमिंग, मिल्पा, लादांग)
- वाणिज्यिक प्रकार: रोपण, विस्तृत अनाज, मिश्रित, डेयरी, भूमध्यसागरीय, सब्ज़ी/ट्रक कृषि
- सहकारी = अपनी ज़मीन, साझा ख़रीद-बिक्री; सामूहिक = साझा ज़मीन (कोलखोज़)
- खनन कारक: भौतिक (आकार, श्रेणी, अवस्था) + आर्थिक (माँग, तकनीक, पूँजी, श्रम, परिवहन)
- खनन विधियाँ: धरातलीय/विवृत (उथला, सस्ता) बनाम भूमिगत/कूपक (गहरा, महँगा, जोखिम)
हल किए गए उदाहरण
1. सहारा में एक समूह ऊँट और बकरियों को एक मरूद्यान से दूसरे तक ले जाता है। कौन सी क्रिया?
चलवासी पशुचारण।
2. असम की एक संपदा सिर्फ़ चाय उगाती है, सैकड़ों मज़दूर हैं और अपना कारखाना है। कौन सा प्रकार?
रोपण कृषि।
3. नीदरलैंड का एक फ़ार्म चारे की फ़सलें उगाता है और गाय-सूअर पालता है। कौन सा प्रकार?
मिश्रित कृषि (फ़सल + पशु)।
4. कोयला ज़मीन से 400 मीटर नीचे है। कौन सी विधि और क्यों?
भूमिगत (कूपक) खनन, क्योंकि कोयला खुले गड्ढे के लिए बहुत गहरा है।
5. एक गाँव के किसान अपने खेत रखते हैं पर दूध एक समिति से साथ बेचते हैं। कौन सा प्रकार?
सहकारी कृषि।
आम गलतियाँ
- पशुधन पालन को 'चलवासी' कहना। रैंच के पशु बाड़ वाली ज़मीन पर रहते हैं; चलवासी घूमते हैं।
- सहकारी और सामूहिक कृषि को एक समझना। सहकारी में ज़मीन निजी रहती है; सामूहिक में साझा।
- कहना कि विस्तृत अनाज कृषि में प्रति एकड़ उपज ज़्यादा है। प्रति एकड़ कम, प्रति व्यक्ति ज़्यादा।
- खनन में आर्थिक कारक भूल जाना। अच्छा अयस्क भी माँग, पूँजी या परिवहन न हो तो नहीं निकाला जाता।