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भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास (कक्षा 12)

नियोजन का मतलब है सबकी भलाई के लिए तय करना कि पहले क्या करें। खंडीय नियोजन एक क्षेत्र पर और प्रादेशिक नियोजन पिछड़े प्रदेशों को आगे लाने पर ध्यान देता है। पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम और सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम जैसे लक्ष्य क्षेत्र कार्यक्रम ख़ास प्रदेशों की मदद करते हैं। सततपोषणीय विकास वह विकास है जो आज की ज़रूरतें पूरी करे पर आने वाली पीढ़ियों को नुकसान न पहुँचाए, अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरण में संतुलन रखकर। दो केस स्टडी: हिमाचल प्रदेश में गद्दी जनजाति का भरमौर क्षेत्र और थार मरुस्थल में इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. नियोजन मतलब सबकी भलाई के लिए तय करना कि पहले क्या करें। कुछ प्रदेश बहुत पीछे हैं। प्रादेशिक नियोजन उन्हें आगे लाता है।
  2. लक्ष्य क्षेत्र नियोजन ऐसे प्रदेशों के लिए ख़ास कार्यक्रम बनाता है। पर्वतीय क्षेत्र और सूखा संभावी कार्यक्रम पर टैप करके देखिए हर एक क्या करता है।
  3. सततपोषणीय विकास: आज की ज़रूरत पूरी करो, कल को नुकसान मत पहुँचाओ। तीन स्तंभ संतुलित रहें: अर्थव्यवस्था, समाज, पर्यावरण।
  4. भरमौर गद्दी जनजाति की ठंडी, ऊँची घाटी है। 1970 के दशक से योजना सड़क, स्कूल, अस्पताल, पानी और खेती की मदद लाई।
  5. इंदिरा गांधी नहर हरिके बैराज से थार मरुस्थल तक पानी ले जाती है। देखिए इसके साथ हरे खेत फैलते हैं: यह कमान क्षेत्र है।
  6. करके देखें: नहर क्षेत्र की योजना बनाइए। ज़्यादा पानी से ज़्यादा फ़सल। बहुत ज़्यादा पानी से जलाक्रांति और नमक। पेड़ों की पट्टी से संतुलन रखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

एक राष्ट्रीय योजना हर प्रदेश की बराबर मदद क्यों नहीं कर सकती?

प्रदेश अलग-अलग स्तर से शुरू करते हैं और उनकी ज़मीन और ज़रूरतें अलग हैं, इसलिए पिछड़े प्रदेश को ख़ास मदद न मिले तो अंतर बना रहता है। चरण 1 के दो ढेर देखिए।

लक्ष्य क्षेत्र और लक्ष्य समूह में क्या अंतर है?

लक्ष्य क्षेत्र जगह की मदद करता है, जैसे सूखा ज़िला; लक्ष्य समूह लोगों के प्रकार की, जैसे छोटे किसान। चरण 2 में दो लक्ष्य क्षेत्र हैं।

क्या सततपोषणीय विकास का मतलब कारख़ाने बंद करना है?

नहीं। इसका मतलब ऐसा विकास है जिसमें समाज न्यायपूर्ण और प्रकृति स्वस्थ रहे। चरण 3 के तीनों स्तंभ मंच को संभालते हैं।

भरमौर को ख़ास योजना की ज़रूरत क्यों थी?

यह ठंडा, खड़ी ढलानों वाला, बर्फ़ से घिरा इलाक़ा है, कमज़ोर मिट्टी और कम सुविधाएँ, इसलिए सामान्य योजनाएँ नहीं पहुँचीं। चरण 4 की घाटी देखिए।

कमान क्षेत्र क्या है?

वह ज़मीन जिसे नहर पानी दे सके। चरण 5 में नहर के साथ हरी पट्टी बढ़ती देखिए।

नहर का पानी खेतों को नुकसान कैसे पहुँचा सकता है?

बहुत ज़्यादा पानी से भौम जल स्तर ऊपर आता है और नमक सतह पर आता है। चरण 6 में पानी का स्लाइडर ऊँचा कीजिए।

भारत में नियोजन: खंडीय, प्रादेशिक और लक्ष्य क्षेत्र

नियोजन का अर्थ है भविष्य के बारे में सोचना, लक्ष्य चुनना और वहाँ पहुँचने के क़दम तय करना। खंडीय नियोजन अर्थव्यवस्था के एक क्षेत्र (कृषि, सिंचाई, उद्योग, परिवहन) के लिए कार्यक्रम बनाता है। प्रादेशिक नियोजन प्रदेशों के बीच का अंतर घटाने की कोशिश करता है, क्योंकि विकास हर जगह बराबर नहीं फैलता।

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ योजना आयोग बनाता था (2015 से नीति आयोग)। पिछड़े इलाक़ों के लिए सरकार ने लक्ष्य क्षेत्र नियोजन अपनाया, जैसे कमान क्षेत्र विकास कार्यक्रम, और ख़ास लोगों के लिए लक्ष्य समूह कार्यक्रम, जैसे लघु किसान और खेतिहर मज़दूर।

पर्वतीय क्षेत्र और सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम

पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम

पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में पहाड़ी ज़िलों के लिए शुरू हुआ। इसमें बाग़वानी, रोपण कृषि, पशुपालन, मुर्गीपालन, वानिकी और लघु ग्रामीण उद्योग की योजना बनी, स्थानीय लोगों की ज़रूरतों और नाज़ुक पहाड़ी पर्यावरण को ध्यान में रखकर।

सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम

चौथी पंचवर्षीय योजना में सूखे इलाक़ों के लोगों को रोज़गार और परिसंपत्तियाँ देने के लिए शुरू हुआ। पहले श्रम-प्रधान कामों पर ज़ोर था; बाद में सिंचाई, भूमि विकास, जल संरक्षण, वनरोपण, चरागाह विकास और ग्रामीण विद्युतीकरण जोड़े गए। ऐसे इलाक़े ज़्यादातर राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा, रायलसीमा, तेलंगाना और कर्नाटक के सूखे भागों में हैं।

सततपोषणीय विकास क्या है?

पहले 'विकास' का मतलब सिर्फ़ आर्थिक वृद्धि था। 1960–70 के दशक में लोगों ने देखा कि इससे पर्यावरण बिगड़ रहा है। 1987 में पर्यावरण और विकास पर विश्व आयोग (ब्रंटलैंड रिपोर्ट, 'हमारा साझा भविष्य') ने सरल विचार दिया: सततपोषणीय विकास वह विकास है जो वर्तमान की ज़रूरतें पूरी करे पर भावी पीढ़ियों की अपनी ज़रूरतें पूरी करने की क्षमता न छीने।

इसके तीन स्तंभ संतुलित रहने चाहिए: आर्थिक वृद्धि, सामाजिक न्याय और पर्यावरण की देखभाल।

केस स्टडी: भरमौर जनजातीय क्षेत्र

भरमौर हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले का जनजातीय इलाक़ा है, जहाँ गद्दी जनजाति रहती है। यहाँ कठोर जलवायु, कमज़ोर मिट्टी, खड़ी ढलानें और सर्दी में भारी बर्फ़ होती है। गद्दी परंपरागत रूप से भेड़-बकरियों के साथ ऊँचे और निचले चरागाहों के बीच आते-जाते रहे हैं (ऋतु-प्रवास)।

1975 में भरमौर को अधिसूचित जनजातीय क्षेत्र घोषित किया गया और पाँचवीं योजना में समन्वित जनजातीय विकास परियोजना (ITDP) शुरू हुई। इसने सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पीने का पानी, संचार, बिजली बनाए और खेती-पशुपालन में मदद दी।

परिणाम: साक्षरता बढ़ी, लिंग अनुपात सुधरा, बाल विवाह घटे, और दालें व नक़दी फ़सलें उगाने वाले बढ़े। पशुओं के साथ आवाजाही कम हुई। महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य सुधरा।

केस स्टडी: इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र

इंदिरा गांधी नहर (पहले राजस्थान नहर) भारत की सबसे बड़ी नहर प्रणालियों में है। यह पंजाब के हरिके बैराज से शुरू होती है, जहाँ सतलुज और ब्यास मिलती हैं, और राजस्थान के थार मरुस्थल में पाकिस्तान सीमा के समानांतर चलती है। कमान क्षेत्र वह ज़मीन है जिसे नहर सींच सकती है।

काम 1958 में शुरू हुआ। चरण I (उत्तर, कम ऊबड़-खाबड़ ज़मीन) और चरण II (ज़्यादा सूखी, रेतीले टीलों वाली ज़मीन) मिलकर गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर जैसे ज़िलों तक पानी पहुँचाते हैं।

प्रभाव

सततपोषणीयता के उपाय

जल प्रबंधन नीति का सख़्ती से पालन, ज़्यादा पानी वाली फ़सलें न उगाना, खट्टे फल उगाना, फव्वारा और टपक सिंचाई, जलाक्रांत ज़मीन से पानी निकालना, पेड़ों की रक्षक पट्टी लगाना, और भूमिहीन गरीबों को ज़मीन व बसने में मदद।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. सरकार पूरे भारत के सभी छोटे किसानों को सस्ता कर्ज़ देती है। यह लक्ष्य क्षेत्र है या लक्ष्य समूह?

लक्ष्य समूह नियोजन, क्योंकि यह एक प्रदेश नहीं बल्कि लोगों के एक समूह (छोटे किसान) के लिए है।

2. एक योजना सूखे ज़िले में चेक डैम, चरागाह और पेड़ों की पट्टी बनाती है। यह किस कार्यक्रम से मेल खाती है?

सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम, जो सूखे इलाक़ों में जल संरक्षण, चरागाह और वनरोपण पर ध्यान देता है।

3. पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम क्यों ज़रूरी था?

पहाड़ों में खड़ी ढलानें, नाज़ुक मिट्टी और कम पहुँच है, इसलिए सामान्य योजनाएँ ठीक नहीं बैठीं। बाग़वानी, वन और लघु उद्योग की ख़ास योजना चाहिए थी।

4. जनजातीय विकास परियोजना के बाद भरमौर में दो बदलाव बताइए।

साक्षरता बढ़ी और लिंग अनुपात सुधरा; सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र बने और नक़दी फ़सलें बढ़ीं।

5. इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में जलाक्रांति क्यों हुई?

किसानों ने फ़सल की ज़रूरत से कहीं ज़्यादा पानी दिया और जल-निकासी कमज़ोर थी, इसलिए भौम जल स्तर ऊपर आया और नमक सतह पर आ गया।

6. नहर कमान क्षेत्र को टिकाऊ बनाने के तीन उपाय बताइए।

चावल की जगह खट्टे फल जैसी कम पानी वाली फ़सलें; टपक और फव्वारा सिंचाई; पेड़ों की रक्षक पट्टी और जलाक्रांत भूमि से पानी निकालना।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सततपोषणीय विकास पर ब्रंटलैंड रिपोर्ट कब आई?
2. भरमौर किस जनजाति का घर है?
3. इंदिरा गांधी नहर कहाँ से शुरू होती है?
4. सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम किस योजना में शुरू हुआ?
5. नहर कमान क्षेत्र की बड़ी समस्या है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्य क्षेत्र नियोजन क्या है?

पिछड़े या ख़ास समस्या वाले प्रदेशों, जैसे पहाड़ी, सूखा संभावी और नहर कमान क्षेत्रों के लिए ख़ास कार्यक्रम बनाना।

सरल शब्दों में सततपोषणीय विकास क्या है?

ऐसा विकास जो आज की ज़रूरतें पूरी करे पर आने वाली पीढ़ियों का मौक़ा न छीने।

कक्षा 12 नियोजन और सततपोषणीय विकास में कौन-सी केस स्टडी हैं?

भरमौर जनजातीय क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश) और इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र (राजस्थान)। दोनों पर अक्सर 5 अंक के प्रश्न आते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12संसाधन एवं विकास

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