भारत में नियोजन: खंडीय, प्रादेशिक और लक्ष्य क्षेत्र
नियोजन का अर्थ है भविष्य के बारे में सोचना, लक्ष्य चुनना और वहाँ पहुँचने के क़दम तय करना। खंडीय नियोजन अर्थव्यवस्था के एक क्षेत्र (कृषि, सिंचाई, उद्योग, परिवहन) के लिए कार्यक्रम बनाता है। प्रादेशिक नियोजन प्रदेशों के बीच का अंतर घटाने की कोशिश करता है, क्योंकि विकास हर जगह बराबर नहीं फैलता।
भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ योजना आयोग बनाता था (2015 से नीति आयोग)। पिछड़े इलाक़ों के लिए सरकार ने लक्ष्य क्षेत्र नियोजन अपनाया, जैसे कमान क्षेत्र विकास कार्यक्रम, और ख़ास लोगों के लिए लक्ष्य समूह कार्यक्रम, जैसे लघु किसान और खेतिहर मज़दूर।
पर्वतीय क्षेत्र और सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम
पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में पहाड़ी ज़िलों के लिए शुरू हुआ। इसमें बाग़वानी, रोपण कृषि, पशुपालन, मुर्गीपालन, वानिकी और लघु ग्रामीण उद्योग की योजना बनी, स्थानीय लोगों की ज़रूरतों और नाज़ुक पहाड़ी पर्यावरण को ध्यान में रखकर।
सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम
चौथी पंचवर्षीय योजना में सूखे इलाक़ों के लोगों को रोज़गार और परिसंपत्तियाँ देने के लिए शुरू हुआ। पहले श्रम-प्रधान कामों पर ज़ोर था; बाद में सिंचाई, भूमि विकास, जल संरक्षण, वनरोपण, चरागाह विकास और ग्रामीण विद्युतीकरण जोड़े गए। ऐसे इलाक़े ज़्यादातर राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा, रायलसीमा, तेलंगाना और कर्नाटक के सूखे भागों में हैं।
सततपोषणीय विकास क्या है?
पहले 'विकास' का मतलब सिर्फ़ आर्थिक वृद्धि था। 1960–70 के दशक में लोगों ने देखा कि इससे पर्यावरण बिगड़ रहा है। 1987 में पर्यावरण और विकास पर विश्व आयोग (ब्रंटलैंड रिपोर्ट, 'हमारा साझा भविष्य') ने सरल विचार दिया: सततपोषणीय विकास वह विकास है जो वर्तमान की ज़रूरतें पूरी करे पर भावी पीढ़ियों की अपनी ज़रूरतें पूरी करने की क्षमता न छीने।
इसके तीन स्तंभ संतुलित रहने चाहिए: आर्थिक वृद्धि, सामाजिक न्याय और पर्यावरण की देखभाल।
केस स्टडी: भरमौर जनजातीय क्षेत्र
भरमौर हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले का जनजातीय इलाक़ा है, जहाँ गद्दी जनजाति रहती है। यहाँ कठोर जलवायु, कमज़ोर मिट्टी, खड़ी ढलानें और सर्दी में भारी बर्फ़ होती है। गद्दी परंपरागत रूप से भेड़-बकरियों के साथ ऊँचे और निचले चरागाहों के बीच आते-जाते रहे हैं (ऋतु-प्रवास)।
1975 में भरमौर को अधिसूचित जनजातीय क्षेत्र घोषित किया गया और पाँचवीं योजना में समन्वित जनजातीय विकास परियोजना (ITDP) शुरू हुई। इसने सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पीने का पानी, संचार, बिजली बनाए और खेती-पशुपालन में मदद दी।
परिणाम: साक्षरता बढ़ी, लिंग अनुपात सुधरा, बाल विवाह घटे, और दालें व नक़दी फ़सलें उगाने वाले बढ़े। पशुओं के साथ आवाजाही कम हुई। महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य सुधरा।
केस स्टडी: इंदिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र
इंदिरा गांधी नहर (पहले राजस्थान नहर) भारत की सबसे बड़ी नहर प्रणालियों में है। यह पंजाब के हरिके बैराज से शुरू होती है, जहाँ सतलुज और ब्यास मिलती हैं, और राजस्थान के थार मरुस्थल में पाकिस्तान सीमा के समानांतर चलती है। कमान क्षेत्र वह ज़मीन है जिसे नहर सींच सकती है।
काम 1958 में शुरू हुआ। चरण I (उत्तर, कम ऊबड़-खाबड़ ज़मीन) और चरण II (ज़्यादा सूखी, रेतीले टीलों वाली ज़मीन) मिलकर गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर जैसे ज़िलों तक पानी पहुँचाते हैं।
प्रभाव
- सकारात्मक: मिट्टी में नमी बढ़ी, गेहूँ, कपास, मूँगफली, चावल फैले, वनरोपण और चरागाह बढ़े, हवा से कटाव घटा।
- नकारात्मक: ज़्यादा सिंचाई से जलाक्रांति और मिट्टी की लवणता।
सततपोषणीयता के उपाय
जल प्रबंधन नीति का सख़्ती से पालन, ज़्यादा पानी वाली फ़सलें न उगाना, खट्टे फल उगाना, फव्वारा और टपक सिंचाई, जलाक्रांत ज़मीन से पानी निकालना, पेड़ों की रक्षक पट्टी लगाना, और भूमिहीन गरीबों को ज़मीन व बसने में मदद।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- खंडीय नियोजन: एक क्षेत्र (सेक्टर); प्रादेशिक नियोजन: एक प्रदेश
- लक्ष्य क्षेत्र: जगह पर केंद्रित; लक्ष्य समूह: लोगों पर केंद्रित
- सततपोषणीय विकास: भावी पीढ़ी को नुकसान पहुँचाए बिना आज की ज़रूरत (ब्रंटलैंड, 1987)
- तीन स्तंभ: अर्थव्यवस्था + समाज + पर्यावरण
- कमान क्षेत्र: वह ज़मीन जिसे नहर सींच सके
- भरमौर: गद्दी जनजाति, चंबा (हि.प्र.), 1975 में अधिसूचित जनजातीय क्षेत्र
हल किए गए उदाहरण
1. सरकार पूरे भारत के सभी छोटे किसानों को सस्ता कर्ज़ देती है। यह लक्ष्य क्षेत्र है या लक्ष्य समूह?
लक्ष्य समूह नियोजन, क्योंकि यह एक प्रदेश नहीं बल्कि लोगों के एक समूह (छोटे किसान) के लिए है।
2. एक योजना सूखे ज़िले में चेक डैम, चरागाह और पेड़ों की पट्टी बनाती है। यह किस कार्यक्रम से मेल खाती है?
सूखा संभावी क्षेत्र कार्यक्रम, जो सूखे इलाक़ों में जल संरक्षण, चरागाह और वनरोपण पर ध्यान देता है।
3. पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम क्यों ज़रूरी था?
पहाड़ों में खड़ी ढलानें, नाज़ुक मिट्टी और कम पहुँच है, इसलिए सामान्य योजनाएँ ठीक नहीं बैठीं। बाग़वानी, वन और लघु उद्योग की ख़ास योजना चाहिए थी।
4. जनजातीय विकास परियोजना के बाद भरमौर में दो बदलाव बताइए।
साक्षरता बढ़ी और लिंग अनुपात सुधरा; सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र बने और नक़दी फ़सलें बढ़ीं।
5. इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में जलाक्रांति क्यों हुई?
किसानों ने फ़सल की ज़रूरत से कहीं ज़्यादा पानी दिया और जल-निकासी कमज़ोर थी, इसलिए भौम जल स्तर ऊपर आया और नमक सतह पर आ गया।
6. नहर कमान क्षेत्र को टिकाऊ बनाने के तीन उपाय बताइए।
चावल की जगह खट्टे फल जैसी कम पानी वाली फ़सलें; टपक और फव्वारा सिंचाई; पेड़ों की रक्षक पट्टी और जलाक्रांत भूमि से पानी निकालना।
आम गलतियाँ
- लक्ष्य क्षेत्र और लक्ष्य समूह को मिलाना। एक जगह के लिए, दूसरा लोगों के समूह के लिए है।
- सततपोषणीय विकास को विकास रोकना समझना। इसका मतलब भविष्य को नुकसान पहुँचाए बिना विकास है।
- भरमौर को उत्तराखंड में बताना। यह हिमाचल प्रदेश के चंबा ज़िले में है।
- यह मानना कि नहर का ज़्यादा पानी हमेशा अच्छा है। बहुत ज़्यादा पानी से जलाक्रांति और लवणता होती है।