अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और व्यापार संतुलन
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं की ख़रीद-बिक्री है। यह इसलिए होता है क्योंकि किसी देश के पास सब कुछ नहीं होता। निर्यात बाहर बेचा गया माल है; आयात बाहर से ख़रीदा गया माल। व्यापार संतुलन = निर्यात का मूल्य − आयात का मूल्य। आयात ज़्यादा हो तो व्यापार घाटा; निर्यात ज़्यादा हो तो अधिशेष। भारत में आम तौर पर घाटा रहता है, मुख्यतः महँगे कच्चे तेल के आयात के कारण। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत का कुल व्यापार बहुत तेज़ी से बढ़ा है; सॉफ़्टवेयर जैसी सेवाएँ अब निर्यात का बड़ा हिस्सा हैं।
भारत के निर्यात और आयात की बदलती संरचना
निर्यात
शुरुआती सालों में भारत ज़्यादातर चाय, जूट, कपास जैसी कृषि वस्तुएँ और कच्चा माल बेचता था। इनका हिस्सा बहुत घट गया है। अब मुख्य निर्यात विनिर्मित वस्तुएँ (इंजीनियरिंग सामान, रसायन और दवाइयाँ, कपड़े और परिधान, रत्न और आभूषण) और भारतीय शोधनशालाओं में बने पेट्रोलियम उत्पाद हैं। अयस्क और खनिज का हिस्सा छोटा है।
आयात
1950–60 के दशक में भारत अनाज, मशीनें और उर्वरक आयात करता था। हरित क्रांति के बाद अनाज आयात घटा। अब कच्चा पेट्रोलियम और ईंधन सबसे बड़ा आयात है, फिर इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनें, सोना, मोती और क़ीमती पत्थर, रसायन, उर्वरक और खाद्य तेल।
भारत के व्यापार की दिशा
व्यापार की दिशा का मतलब है भारत किन देशों और प्रदेशों से व्यापार करता है। पहले ज़्यादातर व्यापार ब्रिटेन और पश्चिमी यूरोप से था। अब एशिया (पश्चिम एशिया समेत) सबसे बड़ा साझेदार प्रदेश है, फिर यूरोप और उत्तरी अमेरिका; अफ़्रीका और लैटिन अमेरिका से व्यापार बढ़ रहा है। मुख्य साझेदार देश अमेरिका, चीन, UAE, सऊदी अरब, सिंगापुर आदि हैं। भारत पश्चिम एशिया से बहुत कच्चा तेल ख़रीदता है और अमेरिका व यूरोप को इंजीनियरिंग सामान, दवाइयाँ और कपड़े बेचता है।
समुद्री पत्तन: व्यापार के द्वार और उनके पृष्ठप्रदेश
मात्रा के हिसाब से भारत का लगभग 95% व्यापार समुद्री पत्तनों से होता है, इसलिए ये व्यापार के द्वार हैं। किसी पत्तन का पृष्ठप्रदेश उसके पीछे की वह ज़मीन है जिसकी वह सेवा करता है: वहाँ से माल सड़क, रेल, पाइपलाइन से पत्तन आता है और आयात वापस वहाँ जाता है।
पश्चिमी तट के बड़े पत्तन
- दीनदयाल (कांडला), गुजरात: 1947 के बाद कराची की जगह बना ज्वारीय पत्तन; उत्तर-पश्चिम की सेवा, कच्चा तेल और उर्वरक।
- मुंबई: प्राकृतिक पोताश्रय, सबसे बड़ा पारंपरिक पत्तन।
- जवाहरलाल नेहरू पत्तन (न्हावा शेवा): मुंबई का भार घटाने के लिए; सबसे बड़ा कंटेनर पत्तन।
- मारमागाओ (गोवा): लौह अयस्क निर्यात।
- न्यू मंगलौर: कुद्रेमुख का लौह अयस्क।
- कोच्चि: लैगून के पास प्राकृतिक पोताश्रय।
पूर्वी तट के बड़े पत्तन
- वी.ओ. चिदंबरनार (तूतीकोरिन), तमिलनाडु।
- चेन्नई: सबसे पुराने में से, कृत्रिम पोताश्रय।
- कामराजर (एन्नोर): चेन्नई का दबाव घटाने के लिए।
- विशाखापत्तनम: सबसे गहरा स्थलरुद्ध पोताश्रय; लौह अयस्क और तेल।
- पारादीप, ओडिशा: लौह अयस्क।
- श्यामा प्रसाद मुखर्जी (कोलकाता) और हल्दिया: हुगली पर नदीय पत्तन, गंगा मैदान जैसा विशाल पृष्ठप्रदेश; गाद की समस्या घटाने के लिए हल्दिया बना।
हवाई अड्डे
हवाई अड्डे क़ीमती, हल्का और जल्दी ख़राब होने वाला माल (दवाइयाँ, फूल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फल) और यात्रियों को लंबी दूरी तक बहुत कम समय में ले जाते हैं। प्रति टन लागत ज़्यादा है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ज़्यादातर हवाई अड्डे संभालता है; बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और तिरुवनंतपुरम में हैं। ऑनलाइन व्यापार से हवाई माल तेज़ी से बढ़ रहा है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- व्यापार संतुलन = निर्यात − आयात
- आयात > निर्यात → व्यापार घाटा; निर्यात > आयात → अधिशेष
- संरचना = क्या व्यापार होता है; दिशा = किससे
- पृष्ठप्रदेश = पत्तन द्वारा सेवा की जाने वाली ज़मीन
- मात्रा के हिसाब से ≈ 95% व्यापार समुद्र से
- सबसे बड़ा आयात: कच्चा पेट्रोलियम; बड़े निर्यात: इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयाँ, रत्न
हल किए गए उदाहरण
1. भारत का निर्यात ₹40 लाख करोड़ और आयात ₹55 लाख करोड़ (उदाहरण मान) है। व्यापार संतुलन निकालिए।
40 − 55 = −15 लाख करोड़: व्यापार घाटा।
2. निर्यात ₹50 लाख करोड़ हो जाए और आयात ₹55 लाख करोड़ ही रहे, तो घाटे का क्या होगा?
50 − 55 = −5 लाख करोड़। घाटा 15 से घटकर 5।
3. 1947 के बाद कांडला (दीनदयाल) पत्तन क्यों बना?
कराची पत्तन पाकिस्तान में चला गया, इसलिए भारत के उत्तर-पश्चिमी पृष्ठप्रदेश को नया पत्तन चाहिए था।
4. कोलकाता के पास हल्दिया क्यों बनाया गया?
हुगली नदी बहुत गाद लाती है, इसलिए बड़े जहाज़ कोलकाता मुश्किल से पहुँचते हैं। समुद्र के पास हल्दिया यह समस्या घटाता है।
5. अब भारत के निर्यात में कृषि वस्तुओं का हिस्सा कम क्यों है?
विनिर्माण और सेवाएँ बहुत तेज़ी से बढ़ीं, और बढ़ती आबादी ज़्यादा कृषि उपज देश में ही खाती है।
6. फूल और दवाइयाँ हवाई जहाज़ से क्यों भेजी जाती हैं?
ये हल्के, क़ीमती हैं और ख़राब हो सकते हैं या तुरंत चाहिए, इसलिए लागत से ज़्यादा गति ज़रूरी है।
आम गलतियाँ
- संरचना और दिशा को मिलाना। संरचना = क्या, दिशा = किससे।
- पत्तन के सामने के समुद्र को पृष्ठप्रदेश मानना। यह पीछे की ज़मीन है।
- यह कहना कि भारत का व्यापार अधिशेष में है। आम तौर पर तेल आयात से घाटा रहता है।
- कोलकाता को तटीय पत्तन कहना। यह हुगली पर नदीय पत्तन है।