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भारत के खनिज तथा ऊर्जा संसाधन (कक्षा 12)

खनिज निश्चित बनावट वाला प्राकृतिक पदार्थ है। भारत के ज़्यादातर खनिज पुरानी पठारी चट्टानों में तीन पेटियों में हैं: उत्तर-पूर्वी पठार, दक्षिण-पश्चिमी पठार और उत्तर-पश्चिमी पेटी। लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट और ताँबा धात्विक हैं; अभ्रक अधात्विक है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस परंपरागत ऊर्जा हैं जो ख़त्म हो जाएँगी। परमाणु, सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और जैव-ऊर्जा गैर-परंपरागत और साफ़ हैं। खनिज अनवीकरणीय हैं, इसलिए कम उपयोग, पुनर्चक्रण और विकल्प ज़रूरी हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. ज़्यादातर खनिज पुरानी, कठोर पठारी चट्टानों में हैं। भारत में तीन मुख्य खनिज पेटियाँ हैं। हर पेटी पर टैप करके देखिए उसमें क्या है।
  2. लौह अयस्क, मैंगनीज़, बॉक्साइट और ताँबा धात्विक खनिज हैं। अभ्रक अधात्विक है। हर एक पर टैप करके देखिए उससे क्या बनता है और कहाँ मिलता है।
  3. कोयला, तेल और गैस जीवाश्म ईंधन हैं। ये लाखों सालों में दबे पौधों और समुद्री जीवों से बने। तेल और गैस चट्टान के गुंबद के नीचे जमा होते हैं।
  4. गैर-परंपरागत ऊर्जा ख़त्म नहीं होती और साफ़ है। परमाणु, सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय और जैव-ऊर्जा पर टैप कीजिए।
  5. करके देखें: खनिज बनने में लाखों साल लगते हैं। उपयोग और पुनर्चक्रण बदलिए। देखिए भंडार कितने साल चलता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

खनिज बराबर क्यों नहीं फैले?

हर खनिज कुछ ख़ास चट्टानों में ही बनता है। धात्विक अयस्क पुरानी पठारी चट्टानों में और तेल परतदार अवसादों में। चरण 1 की पेटियों पर टैप करें।

अयस्क और खनिज में क्या अंतर है?

अयस्क वह चट्टान है जिसमें कोई खनिज इतना हो कि उसे निकालना लाभदायक हो, जैसे एल्युमिनियम के लिए बॉक्साइट। चरण 2 की चट्टानें देखिए।

तेल चट्टान के गुंबद के नीचे क्यों मिलता है?

तेल और गैस हल्के हैं, ऊपर उठते हैं जब तक कठोर चट्टान न रोक ले, फिर गुंबद के नीचे जमा होते हैं, जैसा चरण 3 में दिखता है।

क्या परमाणु ऊर्जा नवीकरणीय है?

यह गैर-परंपरागत और उपयोग में साफ़ है, पर यूरेनियम सीमित है। केरल की रेत का थोरियम भारत को लंबे समय का स्रोत देता है। चरण 4 में परमाणु पर टैप करें।

धातु तो फिर भी इस्तेमाल होती है, पुनर्चक्रण से क्या फ़ायदा?

पुनर्चक्रित कबाड़ नए अयस्क की जगह लेता है, इसलिए भंडार धीरे ख़त्म होता है। चरण 5 का पुनर्चक्रण स्लाइडर चलाइए।

खनिज और भारत की खनिज पेटियाँ

खनिज निश्चित रासायनिक और भौतिक बनावट वाला प्राकृतिक पदार्थ है। खनिज असमान रूप से फैले हैं। ज़्यादातर धात्विक खनिज प्रायद्वीपीय पठार की पुरानी क्रिस्टलीय चट्टानों में हैं; कोयला दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी घाटियों में; पेट्रोलियम असम, गुजरात और मुंबई हाई की अवसादी द्रोणियों में।

तीन खनिज पेटियाँ

हिमालयी पेटी, असम घाटी और समुद्र तल के नीचे (अपतटीय) भी कुछ खनिज और तेल मिलते हैं।

धात्विक और अधात्विक खनिज

लौह अयस्क: भारत में अच्छे हेमेटाइट और मैग्नेटाइट के बड़े भंडार हैं। मुख्य क्षेत्र: ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गोवा। यह इस्पात उद्योग का आधार है।

मैंगनीज़: लोहे-इस्पात को कठोर बनाने और मिश्रधातु में। मुख्य क्षेत्र: ओडिशा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र।

बॉक्साइट: एल्युमिनियम का अयस्क, पठारों की लेटराइट चट्टानों में। मुख्य क्षेत्र: ओडिशा, झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र।

ताँबा: बिजली का अच्छा सुचालक, तार और इलेक्ट्रॉनिक्स में। मुख्य क्षेत्र: झारखंड (सिंहभूम), मध्य प्रदेश (बालाघाट), राजस्थान (खेतड़ी)।

अभ्रक (अधात्विक): पतली पारदर्शी परतों में टूटता है; बिजली का बढ़िया रोधक। मुख्य क्षेत्र: झारखंड, आंध्र प्रदेश, राजस्थान।

परंपरागत ऊर्जा: कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

कोयला भारत की ज़्यादातर बिजली देता है। गोंडवाना कोयला (लगभग 20 करोड़ साल पुराना) दामोदर घाटी (झरिया, रानीगंज, बोकारो), महानदी, सोन और गोदावरी घाटियों में है। टर्शियरी कोयला (नया) उत्तर-पूर्व में है। तमिलनाडु के नेवेली में लिग्नाइट निकलता है।

पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण है जो अवसादी चट्टानों में, अक्सर अपनति (मोड़) के नीचे फँसा मिलता है। मुख्य क्षेत्र: असम का डिगबोई आदि, गुजरात के अंकलेश्वर और कलोल, और अपतटीय मुंबई हाई। शोधनशालाएँ कच्चे तेल से पेट्रोल, डीज़ल और कई चीज़ें बनाती हैं।

प्राकृतिक गैस तेल के साथ या अलग मिलती है और कोयले से साफ़ है। मुंबई हाई, कृष्णा-गोदावरी द्रोणी आदि से गैस पाइपलाइनों से पहुँचाई जाती है।

गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत

ये स्रोत नवीकरणीय, हर जगह उपलब्ध और साफ़ हैं और आयातित तेल पर निर्भरता घटाते हैं, पर शुरू में खर्च ज़्यादा है।

खनिज संसाधनों का संरक्षण

खनिज अनवीकरणीय हैं: बनने में लाखों साल लगते हैं। सततपोषणीय विकास के लिए भविष्य के लिए बचाना ज़रूरी है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. खदान में 1,000 इकाई अयस्क है और हर साल 10 इकाई निकलती है। कितने साल चलेगी?

1,000 ÷ 10 = 100 साल।

2. अगर 50% धातु का पुनर्चक्रण हो तो शुद्ध उपयोग और अवधि क्या होगी?

शुद्ध उपयोग = 10 × 0.5 = 5 इकाई। 1,000 ÷ 5 = 200 साल। पुनर्चक्रण से अवधि दुगुनी।

3. छोटानागपुर पठार को खनिजों का भंडार क्यों कहते हैं?

इसकी बहुत पुरानी क्रिस्टलीय चट्टानों में कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज़, अभ्रक और बॉक्साइट पास-पास हैं, जो इस्पात जैसे भारी उद्योगों को सहारा देते हैं।

4. राजस्थान सौर ऊर्जा के लिए उपयुक्त क्यों है?

यहाँ साफ़ धूप वाले दिन ज़्यादा, तेज़ धूप और बड़ी खुली ज़मीन है।

5. पेट्रोलियम दक्कन लावा में क्यों नहीं, अवसादी चट्टानों में क्यों मिलता है?

तेल परतदार अवसादों में दबे समुद्री जीवों से बनता है; लावा चट्टानें पिघली चट्टान से बनीं, उनमें ऐसे अवशेष नहीं।

6. भारत पवन और सौर ऊर्जा क्यों बढ़ा रहा है? दो कारण।

ये कभी ख़त्म नहीं होते और प्रदूषण नहीं करते; तेल-कोयले का आयात घटाते हैं और ग्रिड से दूर गाँवों में लग सकते हैं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. बॉक्साइट किसका अयस्क है?
2. अधात्विक खनिज कौन-सा है?
3. ज़्यादातर गोंडवाना कोयला कहाँ है?
4. मणिकरण किसके लिए जाना जाता है?
5. मुंबई हाई किसके लिए प्रसिद्ध है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की तीन खनिज पेटियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश, दक्षिण-पश्चिमी पठारी प्रदेश और अरावली के साथ उत्तर-पश्चिमी प्रदेश।

परंपरागत और गैर-परंपरागत ऊर्जा में क्या अंतर है?

परंपरागत स्रोत (कोयला, तेल, गैस) ख़त्म होने वाले और प्रदूषक हैं; गैर-परंपरागत (सौर, पवन, ज्वारीय, भूतापीय, जैव, परमाणु) साफ़ और ज़्यादातर नवीकरणीय हैं।

क्या यह अध्याय CBSE कक्षा 12 बोर्ड के लिए ज़रूरी है?

हाँ। यह 'भारत: लोग और अर्थव्यवस्था' का अध्याय है; सिद्धांत प्रश्न और भौतिक रूपरेखा मानचित्र पर खदानें और संयंत्र दिखाने वाले प्रश्न आते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

स्पेन1º BachilleratoEarth dynamics and composition
स्पेन2º BachilleratoResources and their sustainable management
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12संसाधन एवं विकास
इंग्लैंडYear 123.2 The physical environment
इंग्लैंडYear 133.2.5 Resource security (Section C option)
चीन八年级(初二)Ch.3 Natural resources

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