Germany Jahrgangsstufe 9 Politics and Society
अध्याय: 4
1. Politics for and by young people
Youth and politics in Germany
- नागरिकशास्त्र और सरकार: नागरिक और सरकार मिलकर कैसे काम करते हैं – नागरिकशास्त्र (civics) यह सिखाता है कि लोग ख़ुद पर शासन कैसे करते हैं और नागरिक कैसे भाग लेते हैं। लोकतंत्र में शक्ति जनता की होती है, जो स्वतंत्र चुनाव में प्रतिनिधि चुनती है। सरकार के तीन अंग हैं: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका जाँचती है कि वे संविधान के अनुसार हों। ज़्यादातर देशों में सरकार के स्तर भी होते हैं: स्थानीय, राज्य या प्रांतीय, और राष्ट्रीय। क़ानून एक विचार से शुरू होकर विधेयक बनता है, बहस और मतदान के बाद स्वीकृत होता है। नागरिकों के अधिकार भी हैं और कर्तव्य भी। सक्रिय नागरिक जानकारी रखते हैं, वोट देते हैं, सेवा करते हैं और शांतिपूर्ण ढंग से बदलाव लाते हैं।
2. Social cohesion then and now
Social change and cohesion
- संस्कृति और समाजीकरण: हम साथ रहना कैसे सीखते हैं – संस्कृति किसी समूह के जीने का पूरा तरीका है, जिसे लोग सीखते हैं और आपस में बाँटते हैं: उनके विचार, नियम और चीज़ें। यह जन्म से नहीं आती, सीखी जाती है। संस्कृति के तीन आयाम हैं: संज्ञानात्मक (हम क्या जानते और मानते हैं), मानकीय (व्यवहार के नियम) और भौतिक (औज़ार और वस्तुएँ)। समाजीकरण वह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है जिससे एक बच्चा संस्कृति सीखकर समाज का सदस्य बनता है। यह परिवार, मित्र-समूह, विद्यालय, जनसंचार माध्यम और कार्यस्थल, धर्म, समुदाय जैसे अभिकरणों से होता है।
3. Shaping politics in municipality and Bavaria
Local and Bavarian state politics
- स्थानीय शासन – स्थानीय शासन लोकतंत्र को गाँव और शहर के स्तर तक लाता है, जहाँ लोग अपनी समस्याएँ सबसे अच्छी तरह जानते हैं। भारत में स्थानीय निकाय 1882 से थे, पर दशकों तक कमज़ोर रहे। 1992 के 73वें (ग्रामीण) और 74वें (शहरी) संशोधनों ने पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा, नियमित चुनाव, महिलाओं, SC और ST के लिए आरक्षण, और विषयों की सूची व धन दिया।
4. Understanding and shaping globalisation
Understanding globalisation
- वैश्विक दुनिया का बनना – लोग, सामान, विचार और बीमारियाँ हज़ारों साल से दुनिया में घूम रहे हैं: रेशम मार्ग पर, आलू-मक्का जैसी फ़सलों के साथ और चेचक जैसी बीमारियों के साथ। 1815 से 1914 के बीच विश्व अर्थव्यवस्था तीन धाराओं से बढ़ी: माल, मज़दूर और पूँजी; रेल, भाप के जहाज़ और ठंडे जहाज़ों ने मदद की। उपनिवेशों ने क़ीमत चुकाई: अफ़्रीका में रिंडरपेस्ट और भारत से गिरमिटिया मज़दूर। पहले विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर उत्पादन और फिर 1929 की महामंदी आई, जिसने भारत के किसानों को बहुत चोट पहुँचाई। 1945 के बाद ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF और विश्व बैंक ने दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से खड़ी की।