मताधिकार क्या है? 1848 से पहले कौन वोट देता था
मताधिकार चुनाव में वोट देने का अधिकार है। फ़्रांसीसी क्रांति के बाद यूरोप की कई सरकारें केवल उन पुरुषों को वोट देने देती थीं जो ज़्यादा कर देते थे या संपत्ति के मालिक थे। इसे संपत्ति (कर) आधारित मताधिकार कहते हैं।
फ़्रांस में 1815 से 1848 तक राजा एक ऐसी संसद के साथ राज करते थे जिसे 3 करोड़ से ज़्यादा लोगों में से 2.5 लाख से भी कम अमीर पुरुष चुनते थे। ब्रिटेन में 1832, 1867 और 1884 के सुधार क़ानूनों ने पुरुषों में वोट धीरे-धीरे बढ़ाया। पूरी सदी उथल-पुथल से भरी थी: 1830 और 1848 की क्रांतियाँ, नए संविधान, शासन के बदलाव, और हर बार सवाल था कि किसकी आवाज़ सुनी जाए।
1848: सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार और दास प्रथा का अंत
फ़रवरी 1848 में पेरिस की क्रांति से द्वितीय गणराज्य बना। उसकी सरकार ने तय किया कि 21 साल या उससे बड़ा हर पुरुष वोट देगा, चाहे उसके पास धन हो या न हो: सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार। मतदाता लगभग 2.5 लाख से बढ़कर लगभग 90 लाख हो गए।
उसी साल गणराज्य ने फ़्रांसीसी उपनिवेशों में दास प्रथा ख़त्म की (अप्रैल 1848 का आदेश, विक्तोर शोल्शेर के प्रयास से)। आज़ादी और बराबरी के विचार आगे बढ़े, पर महिलाएँ अब भी बाहर थीं।
नए मतदाताओं को वोट देना सीखना पड़ा: अप्रैल 1848 में कई लोग अपने इलाक़े के मुख्य कस्बे तक पैदल गए, अक्सर मेयर या पादरी के साथ समूह में, और काग़ज़ का मतपत्र पेटी में डाला। बहुत-से लोग पढ़ नहीं सकते थे, और स्थानीय प्रभावशाली लोग उन्हें बताते थे किसे वोट दें।
मतदान के तरीके, द्वितीय गणराज्य की विफलता और द्वितीय साम्राज्य
दिसंबर 1848 में मतदाताओं ने लुई-नेपोलियन बोनापार्ट को राष्ट्रपति चुना। मज़दूरों के विद्रोह (जून 1848) से डरी सभा ने 1850 में मतदाता सूची फिर छोटी कर दी। दिसंबर 1851 में लुई-नेपोलियन ने तख़्तापलट किया; एक साल बाद वह सम्राट नेपोलियन तृतीय बना (द्वितीय साम्राज्य, 1852–1870)।
सम्राट ने पुरुष मताधिकार रखा पर उसे सत्तावादी तरीके से इस्तेमाल किया: जनमत संग्रह (हाँ/ना वोट) से अपनी सत्ता पर मुहर लगवाई और "सरकारी उम्मीदवारों" को सरकार का साथ मिला। अख़बारों पर सेंसर था, विरोधी जेल या देश-निकाले में भेजे गए; लेखक विक्टर ह्यूगो 19 साल निर्वासन में रहकर शासन के ख़िलाफ़ लिखते रहे।
साम्राज्य में समृद्धि भी आई: रेलवे, बैंक, नए बने शहर, ल क्रूज़ो का श्नाइडर लोहे का कारख़ाना जैसे उद्योग। 1860 के दशक से यह कुछ उदार हुआ: 1864 में मज़दूरों को हड़ताल का अधिकार मिला। शहर तेज़ी से बढ़े। 1870 में युद्ध में हार के बाद साम्राज्य गिरा और तीसरा गणराज्य आया, जिसने पुरुष मताधिकार जारी रखा।
नारीवादी और महिला मताधिकार आंदोलन
महिलाओं ने शुरू से बराबर अधिकार माँगे। 1791 में ओलम्प द गूज ने महिलाओं के अधिकारों की घोषणा लिखी; 1792 में मैरी वॉलस्टनक्राफ़्ट ने कहा कि लड़कियों को लड़कों जैसी शिक्षा मिलनी चाहिए।
1800 के अंत से महिलाओं ने बड़े आंदोलन खड़े किए:
- सफ़्रेजिस्ट शांतिपूर्ण तरीके अपनाती थीं: याचिकाएँ, सभाएँ, नेताओं को पत्र (ब्रिटेन में मिलिसेंट फ़ॉसेट, न्यूज़ीलैंड में केट शेपर्ड)।
- सफ़्रेजेट (1903 से एमलीन पैंकहर्स्ट का संगठन) सीधी कार्रवाई करती थीं: जुलूस, रेलिंग से ख़ुद को बाँधना, जेल में भूख हड़ताल।
पहले विश्व युद्ध में महिलाओं के काम ने लोगों की सोच बदली। राष्ट्रीय वोट मिलने के वर्ष: न्यूज़ीलैंड 1893, फ़िनलैंड 1906, ब्रिटेन 1918 (30+) और 1928 (बराबर), अमेरिका 1920, स्पेन 1931, फ़्रांस 1944, इटली 1946, भारत 1950 (शुरू से सभी वयस्कों को), स्विट्ज़रलैंड 1971।
प्रमुख महिलाएँ और आज का सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
इतिहास बदलने वाली कुछ महिलाएँ: केट शेपर्ड (याचिकाओं से न्यूज़ीलैंड में वोट जीता), एमलीन पैंकहर्स्ट (सफ़्रेजेट नेता), क्लारा कैंपोआमोर (1931 में स्पेन की संसद में महिला वोट के पक्ष में बहस), सरोजिनी नायडू (कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी, भारतीय महिलाओं के वोट की माँग), मैरी क्यूरी (नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला, दो बार)।
आज सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अर्थ: हर वयस्क नागरिक, हर एक का एक वोट, बराबर मूल्य, गुप्त मतदान, बिना दबाव। आयु सीमा अक्सर 18 है (भारत ने 1989 में इसे 21 से घटाकर 18 किया)। सही मतदाता सूची, दिव्यांगों की पहुँच और मतदान प्रतिशत पर काम आज भी जारी है।
करके देखो: नियमों के साथ कक्षा का वोट
कक्षा में तीन बार नकली वोट करो। पहली बार: केवल किसी ख़ास रंग का पेन रखने वाले वोट दें। दूसरी बार: केवल लड़के (या केवल लड़कियाँ)। तीसरी बार: सब गुप्त रूप से। क्या नतीजा बदला? बाहर रखे गए बच्चों को कैसा लगा? इसी कारण सार्वभौमिक मताधिकार की लड़ाई ज़रूरी थी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मताधिकार: वोट देने का अधिकार
- संपत्ति (कर) आधारित मताधिकार: केवल ज़्यादा कर देने वाले या संपत्ति वाले वोट दें
- सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार: सभी वयस्क पुरुष वोट दें (फ़्रांस 1848)
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: सभी वयस्क नागरिक, एक व्यक्ति एक वोट
- जनमत संग्रह: एक सवाल पर हाँ/ना वोट, शासक अपनी सत्ता पर मुहर के लिए इस्तेमाल करते थे
- सफ़्रेजिस्ट (शांतिपूर्ण आंदोलन) बनाम सफ़्रेजेट (सीधी कार्रवाई)
हल किए गए उदाहरण
1. 1848 से पहले फ़्रांस के मतदान को कर-आधारित मताधिकार क्यों कहते थे?
क्योंकि केवल ऊँचा कर देने वाले पुरुष वोट दे सकते थे, यानी बहुत छोटा अमीर वर्ग प्रतिनिधि चुनता था।
2. 1848 में द्वितीय गणराज्य के दो बड़े बदलाव बताओ।
सार्वभौमिक पुरुष मताधिकार (21+ के सभी पुरुष) और उपनिवेशों में दास प्रथा का अंत।
3. नेपोलियन तृतीय ने मताधिकार रखते हुए भी सत्तावादी शासन कैसे किया?
जनमत संग्रह से सत्ता पर मुहर लगवाई, सरकारी उम्मीदवारों का साथ दिया, प्रेस पर सेंसर लगाया और विरोधियों को जेल या निर्वासन में भेजा।
4. सफ़्रेजिस्ट और सफ़्रेजेट में क्या अंतर है?
सफ़्रेजिस्ट शांतिपूर्ण, क़ानूनी तरीके (याचिका) अपनाती थीं। सफ़्रेजेट सीधी कार्रवाई करती थीं, जैसे जुलूस, व्यवधान और भूख हड़ताल।
5. क्रम में लगाओ: फ़्रांस, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड में महिला वोट।
न्यूज़ीलैंड 1893 → फ़्रांस 1944 → स्विट्ज़रलैंड 1971।
आम गलतियाँ
- सोचना कि 1848 के 'सार्वभौमिक' मताधिकार में महिलाएँ शामिल थीं। यह केवल पुरुषों के लिए था।
- सोचना कि द्वितीय साम्राज्य ने मतदान ख़त्म कर दिया। पुरुष वोट देते रहे, पर कड़े नियंत्रण में।
- सफ़्रेजिस्ट और सफ़्रेजेट को एक समझना; दोनों वोट चाहती थीं पर तरीके अलग थे।
- सोचना कि भारत में महिलाओं को पुरुषों के बाद वोट मिला। संविधान ने 1950 से सब वयस्कों को एक साथ वोट दिया।