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प्रथम विश्व युद्ध और जन-समाज: जापान, वोट और महिलाएँ

प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में केवल सेनाएँ नहीं, पूरे समाज लगे। महिलाओं ने कारखानों में काम किया, सरकारों ने उद्योग पर नियंत्रण रखा और आम लोगों ने महसूस किया कि उनकी भी सुनी जानी चाहिए। जापान 1914 में मित्र-पक्ष में शामिल हुआ, चीन और प्रशांत में जर्मन ठिकाने ले लिए और उसके कारखाने व निर्यात तेज़ी से बढ़े (1918 तक लगभग तीन गुना)। पर दाम भी बढ़े और 1918 में चावल दंगे हुए। युद्ध के बाद कई देशों ने वोट का अधिकार बढ़ाया: ब्रिटेन और जर्मनी ने 1918-1919 के आसपास महिलाओं को वोट दिया, अमेरिका ने 1920 में। जापान में सब वयस्क पुरुषों को 1925 में और महिलाओं को 1945-46 में वोट मिला। जन-समाज आ गया: बड़े शहर, अख़बार, रेडियो, सिनेमा, मज़दूर संघ और जन-दल। इससे आज़ादी बढ़ी, पर नई समस्याएँ भी आईं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1900 के आसपास ज़्यादातर देशों में केवल कुछ अमीर पुरुष वोट देते थे, और महिलाएँ लगभग कहीं नहीं।
  2. प्रथम विश्व युद्ध में सबकी ज़रूरत पड़ी। महिलाएँ कारखानों में गईं और देश उनके बिना चल नहीं सकता था।
  3. जापान मित्र-पक्ष में लड़ा। उसके कारखाने और निर्यात बढ़े, पर दाम भी बढ़े।
  4. वोट का दायरा बढ़ा। 1925 में जापान ने सब वयस्क पुरुषों को वोट दिया: जन-राजनीति शुरू हुई।
  5. महिलाओं को अलग-अलग साल वोट मिला। पट्टी को 1893 से 1950 तक खींचकर देखिए।
  6. खुद खेलिए: साल बदलिए (1900 से 1946) और देखिए 20 वयस्कों में कितने वोट दे सकते थे।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

1900 में इतने कम लोगों को वोट क्यों मिलता था?

वोट अक्सर संपत्ति, दिए कर और लिंग पर निर्भर था। नेताओं को डर था कि आम मज़दूर और महिलाएँ पुरानी व्यवस्था बदल देंगे।

महिलाओं ने युद्ध में कारखानों की नौकरियाँ क्यों कीं?

पुरुष मोर्चे पर थे और कारखानों को गोले व सामान बनाने के लिए मज़दूर चाहिए थे। पीली टोपियाँ काम पर महिलाएँ हैं।

अगर जापान जीता तो चावल दंगे क्यों हुए?

तेज़ी सबको बराबर फ़ायदा नहीं देती। दाम मज़दूरी से तेज़ बढ़े, इसलिए ग़रीबों को कष्ट हुआ। निर्यात का स्तंभ चलाइए और दामों की बढ़त याद रखिए।

क्या 1925 के कानून ने सबको वोट दिया?

नहीं। केवल 25 साल और ऊपर के पुरुषों को। 3D में दसों महिलाएँ धूसर रहती हैं।

जापान की महिलाओं को 1946 तक इंतज़ार क्यों करना पड़ा?

1922 तक कानून ने उन्हें राजनीतिक सभाओं से दूर रखा, और 1945 की हार के बाद नए सुधारों में ही सरकार ने महिलाओं का वोट माना।

1946 में 20 वयस्कों में से कितने वोट दे सकते थे?

सभी 20, पुरुष और महिलाएँ। खुले चरण में 1946 पर जाइए।

प्रथम विश्व युद्ध: जिसमें सबकी ज़रूरत पड़ी

प्रथम विश्व युद्ध एक सम्पूर्ण युद्ध था: कारखाने गोले बनाते थे, सरकारें खाने और दामों पर नियंत्रण रखती थीं और लाखों आदमी नौकरी छोड़कर सेना में गए। उनकी जगह काम करने के लिए कई देशों में महिलाएँ कारखाने की मज़दूर, कंडक्टर, क्लर्क और नर्स बनीं। अख़बार, पोस्टर और फ़िल्में (प्रचार) जनता का समर्थन जीतने की कोशिश करते थे। पूरी कहानी प्रथम विश्व युद्ध वाले पाठ में है। यहाँ सवाल है: युद्ध ने समाज को कैसे बदला?

प्रथम विश्व युद्ध और जापान

जन-समाज क्या है?

जन-समाज ऐसा समाज है जिसमें बहुत बड़ी संख्या में आम लोग अर्थव्यवस्था, संस्कृति और राजनीति में हिस्सा लेते हैं।

जापान में 1910 और 1920 के दशकों को अक्सर ताइशो लोकतंत्र का दौर कहते हैं: दलों की सरकारें, जीवंत अख़बार, मज़दूर संघ और शहरी जीवन की नई शैलियाँ।

जन-राजनीति: वोट किसे मिले?

1800 के दशक में वोट का अधिकार आम तौर पर संपत्ति, दिए गए कर और लिंग पर निर्भर था। मज़दूरों के दबाव, युद्ध के प्रयास और 1917 की रूसी क्रांति ने देशों को वोट का दायरा बढ़ाने पर मजबूर किया।

महिलाओं की स्थिति

महिलाएँ दशकों से वोट माँग रही थीं। युद्ध के काम ने इस माँग को अनदेखा करना कठिन बना दिया।

करके देखिए: 20 लोगों की भीड़

20 आदमी-औरत की तस्वीरें बनाइए: 10 पुरुष, 10 महिलाएँ। जापान में 1900, 1925 और 1946 में जिन्हें वोट की इजाज़त थी, उनके सिर रंगिए। 3D के खुले चरण से मिलाइए। फिर किसी दादा-दादी से पूछिए: परिवार की महिलाओं ने पहली बार वोट कब और किस देश में दिया?

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. दो कारण बताइए कि युद्ध ने महिलाओं को वोट दिलाने में कैसे मदद की।

1) जब पुरुष मोर्चे पर थे, महिलाओं ने कारखानों, परिवहन और अस्पतालों में काम किया, जिससे साबित हुआ कि वे हर तरह का काम कर सकती हैं। 2) सरकारों ने सब नागरिकों से त्याग माँगा था, इसलिए आधे नागरिकों को वोट न देना मुश्किल था। ब्रिटेन, जर्मनी और अमेरिका ने युद्ध के लगभग दो साल के भीतर महिलाओं का वोट बढ़ाया।

2. प्रथम विश्व युद्ध के जापान की अर्थव्यवस्था और समाज पर दो प्रभाव दीजिए।

अर्थव्यवस्था: यूरोप के लड़ाई में व्यस्त होने से कारखाने और निर्यात बढ़े और जापान ऋणदाता बना। समाज: दाम, ख़ासकर चावल के, बढ़े और 1918 में चावल दंगे हुए; शहर बढ़े, मज़दूर संघ और दलीय राजनीति मज़बूत हुई।

3. इतिहासकार 1920 के दशक को जापान में जन-समाज का दौर क्यों कहते हैं?

क्योंकि बहुत से आम लोग शहरी जीवन और राजनीति में शामिल हुए: सस्ते अख़बार, सिनेमा और रेडियो लाखों तक पहुँचे, मज़दूर संघ और दल बढ़े, और 1925 में सब वयस्क पुरुषों को वोट मिला। साथ ही शांति-रक्षा कानून ने कुछ आज़ादियाँ सीमित कीं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. जापान ने सब वयस्क पुरुषों को किस साल वोट दिया?
2. प्रथम विश्व युद्ध में जापान किस पक्ष में था?
3. ऊँचे दामों के कारण 1918 में जापान में क्या हुआ?
4. किस देश ने 1920 में महिलाओं को वोट दिया?
5. जापानी महिलाओं ने पहली बार वोट कब दिया?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन-समाज क्या है?

ऐसा समाज जिसमें बहुत से आम लोग अर्थव्यवस्था, संस्कृति और राजनीति में हिस्सा लेते हैं: कारखानों और शहरों, अख़बार, रेडियो और सिनेमा, संघों, दलों और वोट के ज़रिए।

प्रथम विश्व युद्ध ने महिलाओं की स्थिति कैसे बदली?

युद्ध में महिलाओं ने बहुत से काम किए और अपनी क्षमता साबित की। कई देशों ने जल्दी वोट दिया: ब्रिटेन 1918, जर्मनी 1919, अमेरिका 1920। जापान ने 1945-46 में और भारत ने 1950 में।

प्रथम विश्व युद्ध में जापान की भूमिका क्या थी?

जापान मित्र-पक्ष में लड़ा, ज़्यादातर एशिया और प्रशांत में। उसने जर्मन ठिकाने लिए, उसकी अर्थव्यवस्था बढ़ी और 1919 के शांति सम्मेलन में वह एक विश्व शक्ति के रूप में बैठा।

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