CBSE कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान (समाज की खोज: भारत और उसके आगे)
अध्याय: 15
1. प्राकृतिक संसाधन और उनका उपयोग
संसाधन
जल्द आ रहा है
2. भारत के राजनीतिक मानचित्र का पुनर्गठन
13वीं–17वीं सदी के राज्य
जल्द आ रहा है
3. मराठों का उदय
मराठा शक्ति
जल्द आ रहा है
4. भारत में औपनिवेशिक काल
औपनिवेशिक शासन
- भारत में उपनिवेशवाद: व्यापारी से शासक तक – उपनिवेशवाद का मतलब है कि एक देश दूसरी ज़मीन पर कब्ज़ा करके वहाँ के लोगों और धन का इस्तेमाल अपने फ़ायदे के लिए करे। 1600 के आसपास यूरोप की कंपनियाँ भारत व्यापार करने आईं। अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी ने किले और सेना बनाई, प्लासी (1757) और बक्सर (1764) जीते और 1765 में बंगाल की दीवानी (कर वसूलने का हक़) पाई। भारत का कच्चा माल और पैसा ब्रिटेन गया, वहाँ की मशीनों का कपड़ा भारत के बाज़ार में भर गया, और बहुत-से बुनकर बेरोज़गार हुए। अंग्रेज़ी स्कूल, रेल और नए क़ानून भी आए, पर ज़्यादातर अपने शासन के लिए। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश ताज ने सीधा शासन किया, और 1947 में भारत आज़ाद हुआ।
5. सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की चुनाव प्रणाली
चुनाव
जल्द आ रहा है
6. संसदीय प्रणाली: विधायिका और कार्यपालिका
संसद और सरकार
जल्द आ रहा है
7. उत्पादन के कारक
उत्पादन
- उत्पादन के साधन: भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यम – उत्पादन के साधन वे संसाधन हैं जिनसे वस्तुएँ और सेवाएँ बनती हैं। ये चार हैं: भूमि (प्राकृतिक संसाधन, पुरस्कार किराया/लगान), श्रम (मानव मेहनत, पुरस्कार मज़दूरी), पूँजी (इंसान के बनाए औज़ार-मशीनें, पुरस्कार ब्याज) और उद्यम (बाक़ी को जोड़ना और जोखिम उठाना, पुरस्कार लाभ)। इच्छाएँ असीमित और संसाधन सीमित हैं, इसलिए हर समाज को चुनना पड़ता है कि क्या, कैसे और किसके लिए बनाए। आर्थिक गतिविधि का उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा इच्छाएँ पूरी करना है।
8. विश्व भूगोल: कुछ झलकियाँ
महाद्वीप और महासागर
- विश्व भूगोल: दुनिया के महाद्वीप, महासागर और क्षेत्र – भूमध्य रेखा पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में, और प्रधान मध्याह्न रेखा पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध में बाँटती है। अक्षांश से जलवायु कटिबंध बनते हैं: उष्ण, शीतोष्ण और ध्रुवीय। सात महाद्वीप हैं (एशिया, अफ़्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप, ओशेनिया) और पाँच महासागर (प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, दक्षिणी, आर्कटिक), जो पृथ्वी का लगभग 71% ढकते हैं। भूगोलवेत्ता देशों को विश्व क्षेत्रों में बाँटते हैं, जिनकी भौतिक विशेषताएँ (पर्वत, नदियाँ, मरुस्थल, जलवायु) और मानवीय विशेषताएँ (जनसंख्या, शहर, भाषा, अर्थव्यवस्था) होती हैं। आज के बड़े रुझान: जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और एशिया की बढ़ती आर्थिक ताक़त।
9. स्वतंत्रता की ओर भारत की लंबी यात्रा
स्वतंत्रता संग्राम
जल्द आ रहा है
10. भारतीय स्थापत्य की यात्रा
भारतीय स्थापत्य
- भारतीय स्थापत्य कला: स्तूप, मंदिर, गुंबद और किले – भारतीय इमारतों में खाली जगह ढकने के दो मूल तरीके हैं: खंभों पर सीधी धरन (स्तंभ-धरन या ट्रेबीट शैली) और मेहराब व गुंबद (आर्कुएट शैली)। स्तूप अवशेषों पर बना ठोस अर्धगोल टीला है। मंदिरों की दो बड़ी शैलियाँ बनीं: नागर (उत्तर, घुमावदार शिखर) और द्रविड़ (दक्षिण, सीढ़ीदार विमान और गोपुरम); बीच में मिली-जुली वेसर शैली। मस्जिदों और मकबरों में सच्ची मेहराब, बड़ा गुंबद, मीनार और चारबाग आए। किलों में मोटी दीवारें, बुर्ज, द्वार और खाई होती थी। हड़प्पा से जयपुर तक नगर योजना से बसाए गए। यह सब हमारी विरासत है, जिसे आज बचाना ज़रूरी है।
11. हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका
न्यायपालिका
जल्द आ रहा है
12. नागरिकता: अधिकार और कर्तव्य
नागरिकता
- नागरिकशास्त्र और सरकार: नागरिक और सरकार मिलकर कैसे काम करते हैं – नागरिकशास्त्र (civics) यह सिखाता है कि लोग ख़ुद पर शासन कैसे करते हैं और नागरिक कैसे भाग लेते हैं। लोकतंत्र में शक्ति जनता की होती है, जो स्वतंत्र चुनाव में प्रतिनिधि चुनती है। सरकार के तीन अंग हैं: विधायिका क़ानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है और न्यायपालिका जाँचती है कि वे संविधान के अनुसार हों। ज़्यादातर देशों में सरकार के स्तर भी होते हैं: स्थानीय, राज्य या प्रांतीय, और राष्ट्रीय। क़ानून एक विचार से शुरू होकर विधेयक बनता है, बहस और मतदान के बाद स्वीकृत होता है। नागरिकों के अधिकार भी हैं और कर्तव्य भी। सक्रिय नागरिक जानकारी रखते हैं, वोट देते हैं, सेवा करते हैं और शांतिपूर्ण ढंग से बदलाव लाते हैं।
13. जनसंख्या की गतिशीलता
जनांकिकी
जल्द आ रहा है
14. भारत का नगरीय परिदृश्य
नगरीकरण
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
15. सांस्कृतिक धाराएँ: 13वीं से 17वीं सदी
सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ
जल्द आ रहा है