यूरोपीय व्यापारी भारत पहुँचे
1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को द गामा समुद्र के रास्ते कालीकट पहुँचा। उसके बाद डच, अंग्रेज़ और फ़्रांसीसी आए। हर देश ने एक व्यापारिक कंपनी बनाई। अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 में बनी।
उन्हें भारत के मसाले, बढ़िया सूती और रेशमी कपड़ा, नील और शोरा चाहिए थे। उन्होंने सूरत, मद्रास, बंबई और कलकत्ता जैसी जगहों पर कोठियाँ (पहरे वाले गोदाम) बनाईं। ज़्यादा व्यापार के लिए ये कंपनियाँ आपस में लड़ती भी थीं।
ईस्ट इंडिया कंपनी ने सत्ता कैसे पाई
कंपनी ने धीरे-धीरे अपने किलों और सिपाहियों को राजनीतिक ताक़त में बदल दिया।
मुख्य कदम
- 1757 प्लासी का युद्ध: कंपनी ने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला को हराया। नवाब के सेनापति मीर जाफ़र ने कंपनी का साथ दिया।
- 1764 बक्सर का युद्ध: कंपनी ने बंगाल के नवाब, अवध के नवाब और मुग़ल बादशाह की मिली-जुली सेना को हराया।
- 1765 दीवानी: मुग़ल बादशाह ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लगान वसूलने का हक़ कंपनी को दे दिया।
फिर कंपनी ने युद्ध, सहायक संधि (राजा को कंपनी की सेना रखनी और उसका ख़र्च देना पड़ता था) और हड़प नीति (जिस राजा का अपना बेटा न हो, उसका राज्य ले लेना) से और इलाक़े लिए। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश संसद ने कंपनी का शासन ख़त्म किया और 1858 से ताज का सीधा शासन शुरू हुआ।
आर्थिक शोषण: धन की निकासी
शोषण का मतलब है किसी का ग़लत तरीक़े से अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करना।
- भारी लगान: स्थायी बंदोबस्त (1793), रैयतवाड़ी और महालवाड़ी जैसी व्यवस्थाएँ फ़सल का बड़ा हिस्सा ले लेती थीं, अक्सर नकद में, ख़राब साल में भी।
- नक़दी फ़सलें: किसानों पर नील, कपास, जूट और अफ़ीम उगाने का दबाव था, अनाज की जगह। अकाल जानलेवा बन गए।
- कच्चा माल बाहर, सामान अंदर: भारत कच्चा कपास ब्रिटेन की मिलों को भेजता और मशीन का कपड़ा वापस ख़रीदता। ब्रिटिश सामान पर कम कर, भारतीय सामान पर ब्रिटेन में भारी कर।
- धन की निकासी: तनख़्वाह, पेंशन और मुनाफ़ा ब्रिटेन भेजा जाता था। दादाभाई नौरोजी ने इसे "धन की निकासी" (Drain of Wealth) कहा।
समाज, शिक्षा और हस्तशिल्प पर असर
हस्तशिल्प
मिल का सस्ता कपड़ा आने से हाथ का बुना कपड़ा महँगा पड़ने लगा। ढाका, बंगाल और दक्षिण के बुनकरों का काम छिन गया; शिल्प पर टिके कई शहर उजड़ गए। इसे वि-औद्योगीकरण (De-industrialisation) कहते हैं।
शिक्षा
1835 से सरकार ने क्लर्क तैयार करने के लिए अंग्रेज़ी शिक्षा को बढ़ावा दिया। 1857 में कलकत्ता, बंबई और मद्रास में विश्वविद्यालय खुले। पाठशालाओं और मदरसों की मदद घटी। पर पढ़े-लिखे भारतीयों ने नए विचारों से अंग्रेज़ी राज पर ही सवाल उठाए।
समाज
रेल (पहली यात्री गाड़ी 1853), तार और डाक ने देश को जोड़ा, मुख्य रूप से सेना, कच्चा माल और सामान ढोने के लिए। राजा राममोहन राय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर जैसे सुधारकों ने सती और बाल विवाह के ख़िलाफ़ काम किया। किसानों, आदिवासियों और सिपाहियों के विद्रोह और 1885 से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आज़ादी की लड़ाई खड़ी की, जो 1947 में पूरी हुई।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपनिवेशवाद: एक देश दूसरी ज़मीन पर राज करके वहाँ के लोग और संसाधन अपने फ़ायदे में लगाए।
- कोठी/फ़ैक्टरी (पुराना अर्थ): यूरोपीय कंपनी का किलेबंद व्यापारिक गोदाम।
- दीवानी: लगान (कर) वसूलने का अधिकार।
- सहायक संधि: राजा कंपनी की सेना का ख़र्च दे और विदेशी मामलों में आज़ाद न रहे।
- हड़प नीति: जिस राज्य का अपना पुरुष वारिस न हो, उसे कंपनी ले ले।
- धन की निकासी: भारत का पैसा और माल ब्रिटेन जाना, बदले में बराबर कुछ न आना।
- वि-औद्योगीकरण: स्थानीय हस्तशिल्प और उद्योग का पतन।
हल किए गए उदाहरण
1. 1765 को वह साल क्यों कहते हैं जब कंपनी व्यापारी से शासक बनी?
1765 में मुग़ल बादशाह ने कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी दी। कर वसूलना सरकार का काम है, इसलिए अब कंपनी राज चलाने लगी और भारत के ही कर के पैसे से भारतीय माल ख़रीदकर बाहर भेजने लगी।
2. 1780 में एक बुनकर कपड़ा 10 रुपये में बेचता है। 1830 तक वैसा ही मशीन का कपड़ा 4 रुपये में मिलता है। बुनकर का क्या होगा और क्यों?
ख़रीदार सस्ता मशीन का कपड़ा लेंगे, इसलिए बुनकर 10 रुपये में नहीं बेच पाएगा। कच्चा कपास ब्रिटेन जाने से धागा भी महँगा होगा। बहुत-से बुनकर काम छोड़कर खेत-मज़दूर बने। यही वि-औद्योगीकरण है।
3. क्या अंग्रेज़ी शिक्षा सिर्फ़ नुक़सानदेह थी? एक बुरा और एक अच्छा असर बताओ।
बुरा: पारंपरिक पाठशालाओं की मदद घटी और मक़सद क्लर्क बनाना था। अच्छा (जो अंग्रेज़ नहीं चाहते थे): भारतीयों ने आज़ादी और बराबरी के विचार पढ़े और उन्हीं से स्वतंत्रता माँगी।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि अंग्रेज़ सेना लेकर आए थे। वे पहले व्यापारी बनकर आए और धीरे-धीरे शासक बने।
- प्लासी (1757) और बक्सर (1764) को उलझाना। प्लासी पहले हुआ।
- यह कहना कि रेल मुख्य रूप से भारतीयों के लिए बनी। वह ज़्यादातर सेना, कच्चे माल और ब्रिटिश सामान के लिए बनी।
- यह मानना कि अंग्रेज़ी राज कंपनी के साथ ख़त्म हो गया। कंपनी का शासन 1858 में ख़त्म हुआ, ताज का शासन 1947 तक चला।