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भारत में उपनिवेशवाद: व्यापारी से शासक तक

उपनिवेशवाद का मतलब है कि एक देश दूसरी ज़मीन पर कब्ज़ा करके वहाँ के लोगों और धन का इस्तेमाल अपने फ़ायदे के लिए करे। 1600 के आसपास यूरोप की कंपनियाँ भारत व्यापार करने आईं। अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी ने किले और सेना बनाई, प्लासी (1757) और बक्सर (1764) जीते और 1765 में बंगाल की दीवानी (कर वसूलने का हक़) पाई। भारत का कच्चा माल और पैसा ब्रिटेन गया, वहाँ की मशीनों का कपड़ा भारत के बाज़ार में भर गया, और बहुत-से बुनकर बेरोज़गार हुए। अंग्रेज़ी स्कूल, रेल और नए क़ानून भी आए, पर ज़्यादातर अपने शासन के लिए। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश ताज ने सीधा शासन किया, और 1947 में भारत आज़ाद हुआ।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. 1600 के आसपास यूरोप के व्यापारी जहाज़ों से भारत आए। उन्हें मसाले, सूती कपड़ा और नील चाहिए था। तट पर उन्होंने गोदाम बनाए, जिन्हें कोठी या फ़ैक्टरी कहते थे।
  2. अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी के पास अपनी सेना थी। प्लासी (1757) और बक्सर (1764) के बाद 1765 में उसे बंगाल में कर वसूलने का हक़ मिला। व्यापारी कंपनी शासक बन गई।
  3. भारत से कच्चा कपास और कर का पैसा ब्रिटेन गया। वहाँ से मशीन का सस्ता कपड़ा वापस आया। एक तरफ़ा फ़ायदे को आर्थिक शोषण कहते हैं।
  4. भारतीय बुनकरों का काम छिन गया। अंग्रेज़ी स्कूल, रेल और डाक भी आए, पर मुख्य रूप से शासकों की मदद के लिए। 1857 के बाद ब्रिटिश ताज ने सीधा शासन किया।
  5. भारतीयों ने बार-बार विरोध किया: किसान, आदिवासी, सिपाही और फिर राष्ट्रीय आंदोलन। 1947 में भारत आज़ाद हुआ।
  6. अब तुम खेलो: साल का स्लाइडर 1600 से 1950 तक खिसकाओ। देखो उस साल सत्ता किसके पास थी और कौन-सी बड़ी घटना हुई।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर वे सिर्फ़ व्यापार करने आए थे, तो किले और सिपाही क्यों चाहिए थे?

वे आपस में लड़ते थे (अंग्रेज़, फ़्रांसीसी, डच) और ज़बरदस्ती अच्छे दाम चाहते थे। व्यापार के लिए बनी यही सेना बाद में प्लासी जैसे युद्ध जीती।

दीवानी मिलना इतनी बड़ी बात क्यों थी?

कर से कंपनी को भारत की ज़मीन से पक्की आमदनी मिली। उसी पैसे से सिपाही रखे और भारतीय माल ख़रीदा।

ब्रिटेन से कपड़ा ख़रीदने से भारत को नुक़सान कैसे हुआ?

सस्ता मशीन का कपड़ा अंदर आया और कच्चा कपास बाहर गया, तो बुनकरों का बाज़ार और कच्चा माल दोनों गए। लाल और नीले तीर यही एक तरफ़ा फ़ायदा दिखाते हैं।

क्या अंग्रेज़ों ने कुछ अच्छा भी किया?

रेल, डाक, छपाई और अंग्रेज़ी स्कूल काम के थे, पर ज़्यादातर ब्रिटिश ज़रूरतों के लिए बने। बाद में भारतीयों ने इन्हीं से एकता बनाई।

क्या भारतीयों ने चुपचाप राज मान लिया?

नहीं। किसानों और आदिवासियों के विद्रोह से लेकर 1857 का बड़ा विद्रोह और फिर 1947 तक राष्ट्रीय आंदोलन चला।

यूरोपीय व्यापारी भारत पहुँचे

1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को द गामा समुद्र के रास्ते कालीकट पहुँचा। उसके बाद डच, अंग्रेज़ और फ़्रांसीसी आए। हर देश ने एक व्यापारिक कंपनी बनाई। अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 में बनी।

उन्हें भारत के मसाले, बढ़िया सूती और रेशमी कपड़ा, नील और शोरा चाहिए थे। उन्होंने सूरत, मद्रास, बंबई और कलकत्ता जैसी जगहों पर कोठियाँ (पहरे वाले गोदाम) बनाईं। ज़्यादा व्यापार के लिए ये कंपनियाँ आपस में लड़ती भी थीं।

ईस्ट इंडिया कंपनी ने सत्ता कैसे पाई

कंपनी ने धीरे-धीरे अपने किलों और सिपाहियों को राजनीतिक ताक़त में बदल दिया।

मुख्य कदम

फिर कंपनी ने युद्ध, सहायक संधि (राजा को कंपनी की सेना रखनी और उसका ख़र्च देना पड़ता था) और हड़प नीति (जिस राजा का अपना बेटा न हो, उसका राज्य ले लेना) से और इलाक़े लिए। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश संसद ने कंपनी का शासन ख़त्म किया और 1858 से ताज का सीधा शासन शुरू हुआ।

आर्थिक शोषण: धन की निकासी

शोषण का मतलब है किसी का ग़लत तरीक़े से अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करना।

समाज, शिक्षा और हस्तशिल्प पर असर

हस्तशिल्प

मिल का सस्ता कपड़ा आने से हाथ का बुना कपड़ा महँगा पड़ने लगा। ढाका, बंगाल और दक्षिण के बुनकरों का काम छिन गया; शिल्प पर टिके कई शहर उजड़ गए। इसे वि-औद्योगीकरण (De-industrialisation) कहते हैं।

शिक्षा

1835 से सरकार ने क्लर्क तैयार करने के लिए अंग्रेज़ी शिक्षा को बढ़ावा दिया। 1857 में कलकत्ता, बंबई और मद्रास में विश्वविद्यालय खुले। पाठशालाओं और मदरसों की मदद घटी। पर पढ़े-लिखे भारतीयों ने नए विचारों से अंग्रेज़ी राज पर ही सवाल उठाए।

समाज

रेल (पहली यात्री गाड़ी 1853), तार और डाक ने देश को जोड़ा, मुख्य रूप से सेना, कच्चा माल और सामान ढोने के लिए। राजा राममोहन राय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर जैसे सुधारकों ने सती और बाल विवाह के ख़िलाफ़ काम किया। किसानों, आदिवासियों और सिपाहियों के विद्रोह और 1885 से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आज़ादी की लड़ाई खड़ी की, जो 1947 में पूरी हुई।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 1765 को वह साल क्यों कहते हैं जब कंपनी व्यापारी से शासक बनी?

1765 में मुग़ल बादशाह ने कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी दी। कर वसूलना सरकार का काम है, इसलिए अब कंपनी राज चलाने लगी और भारत के ही कर के पैसे से भारतीय माल ख़रीदकर बाहर भेजने लगी।

2. 1780 में एक बुनकर कपड़ा 10 रुपये में बेचता है। 1830 तक वैसा ही मशीन का कपड़ा 4 रुपये में मिलता है। बुनकर का क्या होगा और क्यों?

ख़रीदार सस्ता मशीन का कपड़ा लेंगे, इसलिए बुनकर 10 रुपये में नहीं बेच पाएगा। कच्चा कपास ब्रिटेन जाने से धागा भी महँगा होगा। बहुत-से बुनकर काम छोड़कर खेत-मज़दूर बने। यही वि-औद्योगीकरण है।

3. क्या अंग्रेज़ी शिक्षा सिर्फ़ नुक़सानदेह थी? एक बुरा और एक अच्छा असर बताओ।

बुरा: पारंपरिक पाठशालाओं की मदद घटी और मक़सद क्लर्क बनाना था। अच्छा (जो अंग्रेज़ नहीं चाहते थे): भारतीयों ने आज़ादी और बराबरी के विचार पढ़े और उन्हीं से स्वतंत्रता माँगी।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी कब बनी?
2. 1757 में किस युद्ध से कंपनी को बंगाल पर पकड़ मिली?
3. दीवानी का मतलब है:
4. भारतीय बुनकरों का काम क्यों छिना?
5. किस घटना के बाद ब्रिटिश ताज ने भारत का सीधा शासन लिया?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपनिवेशवाद क्या है, आसान शब्दों में?

जब एक देश दूसरी ज़मीन पर कब्ज़ा करके वहाँ के लोग, ज़मीन और धन अपने फ़ायदे में लगाए, उसे उपनिवेशवाद कहते हैं।

भारत में अंग्रेज़ी राज कब शुरू हुआ?

बंगाल में कंपनी का राज प्लासी (1757) और दीवानी (1765) के बाद शुरू हुआ। ताज का सीधा शासन 1858 से 1947 तक रहा।

उपनिवेशवाद का भारतीय हस्तशिल्प पर क्या असर हुआ?

ब्रिटेन के सस्ते मशीन के कपड़े और भारी कर से बहुत-से बुनकर और कारीगर बर्बाद हुए। इसे वि-औद्योगीकरण कहते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 8भारत में औपनिवेशिक काल

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