National Year 9 Geography
अध्याय: 4
1. Locational knowledge
World regions and countries
- विश्व भूगोल: दुनिया के महाद्वीप, महासागर और क्षेत्र – भूमध्य रेखा पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में, और प्रधान मध्याह्न रेखा पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध में बाँटती है। अक्षांश से जलवायु कटिबंध बनते हैं: उष्ण, शीतोष्ण और ध्रुवीय। सात महाद्वीप हैं (एशिया, अफ़्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप, ओशेनिया) और पाँच महासागर (प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, दक्षिणी, आर्कटिक), जो पृथ्वी का लगभग 71% ढकते हैं। भूगोलवेत्ता देशों को विश्व क्षेत्रों में बाँटते हैं, जिनकी भौतिक विशेषताएँ (पर्वत, नदियाँ, मरुस्थल, जलवायु) और मानवीय विशेषताएँ (जनसंख्या, शहर, भाषा, अर्थव्यवस्था) होती हैं। आज के बड़े रुझान: जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और एशिया की बढ़ती आर्थिक ताक़त।
2. Place knowledge
Comparing regions
- स्थान-बोध: खाली स्थान जगह कैसे बनता है – कोई खाली स्थान (space) तब जगह (place) बनता है जब लोग उसे अर्थ देते हैं। हर जगह की एक अवस्थिति (कहाँ है), एक परिवेश या locale (वहाँ जीवन कैसा है) और एक स्थान-बोध (लोग उसके बारे में क्या महसूस करते हैं) होता है। अंदर वाले और बाहर वाले एक ही जगह को अलग ढंग से देखते हैं। जगहें अंतर्जात (अंदरूनी) कारकों जैसे उच्चावच, भूमि उपयोग, जनसंख्या से और बहिर्जात (बाहरी) रिश्तों जैसे लोगों, पैसे, सामान और विचारों के प्रवाह से बनती हैं। जगहें समय के साथ बदलती हैं और जनगणना के आँकड़ों से लेकर गीतों-फ़िल्मों तक कई तरह से दिखाई जाती हैं।
3. Human and physical geography
Physical geography · Human geography · People and environment
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
- टिकाऊ शहरी जीवन – शहर तब टिकाऊ (sustainable) है जब वह आज लोगों की ज़रूरतें पूरी करे और आने वाले लोगों के लिए पानी, ऊर्जा, ज़मीन और साफ़ हवा बचाकर रखे। मुख्य उपाय हैं: पानी बचाना (वर्षा जल संचयन, कम पानी वाले नल), ऊर्जा बचाना (सोलर पैनल, इन्सुलेशन), हरियाली बचाना (पार्क, पेड़, हरी छतें), कचरे का सही प्रबंधन (कम करो, दोबारा इस्तेमाल करो, रीसायकल करो, खाद बनाओ) और ट्रैफ़िक का प्रबंधन (बस, मेट्रो, साइकिल लेन, भीड़ शुल्क)। इन सबके पीछे एक बड़ा विचार है: मनुष्य और पर्यावरण हर समय एक-दूसरे पर असर डालते हैं।
4. Geographical skills and fieldwork
Maps and data · Fieldwork
- मानचित्र कौशल: नक्शे पढ़ना और इस्तेमाल करना – मानचित्र (map) किसी जगह का ठीक ऊपर से देखा गया, छोटा किया गया चपटा चित्र है। इसे पढ़ने के लिए चाहिए: संकेत-सूची (चिह्न), मापनी (दूरी नापने के लिए), दिशा (दिशा-बिंदु और दिकमान), ग्रिड संदर्भ (जगह ढूँढने और बताने के लिए) और समोच्च रेखाएँ (ऊँचाई और ढलान देखने के लिए)। आज GPS उपग्रहों से हमारी जगह बताता है, और GIS कंप्यूटर पर आँकड़ों की कई परतें जोड़कर जगहों के बारे में सवालों के जवाब देता है।
- भौगोलिक जाँच और क्षेत्र कार्य – भौगोलिक जाँच (enquiry) किसी असली जगह के बारे में एक छोटा शोध प्रोजेक्ट है। इसके साफ़ कदम हैं: सवाल पूछो और परिकल्पना लिखो; सही नमूना विधि से प्राथमिक आँकड़े (अपने माप और सर्वे) और द्वितीयक आँकड़े (जनगणना, नक्शे, वेबसाइट) जुटाओ; आँकड़ों को सही ग्राफ़ और नक्शों में दिखाओ; ढाँचा समझो और निष्कर्ष निकालो; फिर जाँचो कि नतीजे कितने भरोसेमंद हैं। यही कौशल फ़ैसले लेने में काम आते हैं: सबूतों से विकल्प तौलो और सबसे अच्छे को कारण सहित चुनो। बड़ी कक्षाओं में छात्र अपने सवाल, प्राथमिक-द्वितीयक आँकड़ों, विश्लेषण और निष्कर्ष के साथ एक लंबी स्वतंत्र जाँच लिखते हैं।