Ukraine 8 клас Geography
अध्याय: 6
1. Introduction: geography of Ukraine
Objects and methods of Ukraine's physical and social geography
जल्द आ रहा है
2. Cartographic sources of information
Modern cartographic works · Working with a topographic map
जल्द आ रहा है
3. Geographic space of Ukraine
Ukraine's geographic position · Administrative-territorial structure · Ukraine on the time-zone map
- राजनीतिक भूगोल: भूमि, लोग और सत्ता कैसे जुड़ते हैं – राजनीतिक भूगोल बताता है कि लोग ज़मीन को कैसे बाँटते और चलाते हैं। राज्य के लिए चार चीज़ें चाहिए: भूमि (क्षेत्र), जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता। सीमाएँ नदी-पहाड़ जैसी प्राकृतिक हो सकती हैं या सीधी खींची गई कृत्रिम रेखाएँ। देश के अंदर सत्ता कई स्तरों में बँटी है। देश संगठनों में मिलकर सहयोग करते हैं, पर पानी, खनिज, ज़मीन या पहचान पर विवाद भी होते हैं। बातचीत और समझौते विवाद को सहयोग में बदलते हैं।
- अक्षांश, देशांतर और समय – अक्षांश रेखाएँ (समांतर) पूर्व–पश्चिम वृत्त हैं, जिन्हें विषुवत् वृत्त से उत्तर या दक्षिण (0° से 90°) नापा जाता है। देशांतर रेखाएँ (याम्योत्तर) ध्रुव से ध्रुव तक अर्धवृत्त हैं, जिन्हें प्रधान याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम (0° से 180°) नापा जाता है। पृथ्वी हर घंटे 15° घूमती है, तो 1° देशांतर = 4 मिनट। देश एक मानक याम्योत्तर चुनते हैं (भारत: 82°30′ पू., GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे), और तारीख अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (180°) पर बदलती है।
4. Nature of Ukraine
Relief, tectonic structures and mineral resources · Climate and climate resources · Inland waters and water resources · Soils, vegetation and wildlife · Natural complexes and use of nature
- चट्टानें और खनिज – खनिज एक प्राकृतिक, निर्जीव ठोस है जिसकी रासायनिक बनावट तय होती है और क्रिस्टल आकार नियमित होता है, जैसे क्वार्ट्ज़ या हेलाइट (नमक)। चट्टान एक या अधिक खनिजों का मिश्रण है। चट्टानें तीन तरह की हैं: आग्नेय (ठंडे मैग्मा या लावा से), अवसादी (दबे हुए कणों की परतों से) और कायांतरित (गरमी और दबाव से बदली)। शैल चक्र लाखों वर्षों में हर प्रकार को दूसरे में बदलता रहता है।
- विश्व के जलवायु प्रदेश – किसी जगह के लगभग 30 साल के मौसम का औसत उसकी जलवायु है। यह मुख्य रूप से अक्षांश (सूरज कितना ऊँचा चढ़ता है), ऊँचाई (हर 1 km पर लगभग 6.5 °C ठंडा), समुद्र से दूरी, पवनों और महासागरीय धाराओं पर निर्भर करती है। कोपेन ने दुनिया को पाँच समूहों में बाँटा: A उष्णकटिबंधीय, B शुष्क, C शीतोष्ण, D महाद्वीपीय और E ध्रुवीय, साथ में ऊँचे पहाड़ों पर पर्वतीय (H) जलवायु। मानसून जलवायु में पवनें मौसम के साथ दिशा बदलती हैं।
- नदी: उद्गम से समुद्र तक – नदी मीठा पानी है जो एक नाली (चैनल) में ऊँची ज़मीन (उद्गम) से समुद्र, झील या बड़ी नदी (मुहाना) तक बहता है। रास्ते में वह चट्टान को काटती (अपरदन), ढोती (परिवहन) और जमा करती (निक्षेपण) है। ऊपरी भाग तेज़ ढलान वाला है: V घाटी और जलप्रपात। मध्य भाग में विसर्प (मोड़) बनते हैं। निचला भाग समतल है: बाढ़ का मैदान, तटबंध और डेल्टा। तेज़ बारिश से बाढ़ आती है; उसे कठोर (बाँध, तटबंध) और नरम (पेड़, ज़ोनिंग) उपायों से संभालते हैं।
- मृदा: कैसे बनती है, उसकी परतें और उसे कैसे बचाएँ – मृदा (मिट्टी) ज़मीन की ऊपरी, ढीली और पतली परत है जिसमें पौधे उगते हैं। इसमें लगभग 45% चट्टान के कण, 5% जैविक पदार्थ (ह्यूमस), 25% पानी और 25% हवा होती है। जब अपक्षय जनक चट्टान को तोड़ता है और जीव ह्यूमस जोड़ते हैं, तब बहुत धीरे-धीरे मृदा बनती है। इसके पाँच कारक हैं: जनक चट्टान, जलवायु, जीव, उच्चावच (ढाल) और समय। ज़मीन को काटकर देखें तो परतें दिखती हैं, जिन्हें संस्तर कहते हैं: O (पत्तियाँ और ह्यूमस), A (ऊपरी मृदा), B (अवमृदा), C (टूटी चट्टान) और R (आधार शैल)। मृदा का गठन रेत, गाद और चिकनी मिट्टी के हिस्से पर निर्भर है। मृदा भोजन उगाती है, पानी जमा और साफ़ करती है, कार्बन रखती है और अनगिनत जीवों का घर है, पर अपरदन, लवण और प्रदूषण इसे बनने से कहीं तेज़ी से नष्ट कर सकते हैं।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- पर्यावरण और धारणीय विकास – पर्यावरण हमें संसाधन देता है, हमारा कचरा सोखता है, जीवन चलाता है और सुंदरता देता है। जब हम संसाधन प्रकृति के नवीकरण से तेज़ लेते हैं, या कचरा उसकी सोखने की क्षमता से ज़्यादा फेंकते हैं, तो धारण क्षमता पार होती है और पर्यावरण संकट आता है। भारत में भूमि अपक्षय, वायु-जल प्रदूषण, वन और जैव-विविधता की हानि है। जीवाश्म ईंधन जलाने से गर्मी फँसती है और वैश्विक उष्णता होती है; CFC ओज़ोन परत पतली करते हैं। धारणीय विकास आज की ज़रूरतें पूरी करता है बिना भावी पीढ़ियों की क्षमता घटाए।
5. Population of Ukraine and the world
Demographic processes · Ethnic and religious composition · Settlement and employment
- विश्व जनसंख्या: वितरण, घनत्व और वृद्धि – धरती पर लोग बराबर नहीं फैले। ज़्यादातर लोग पानी के पास उपजाऊ मैदानों में रहते हैं; मरुस्थल, ऊँचे पर्वत और बर्फ़ीले इलाक़ों में बहुत कम। घनत्व बताता है कि हर वर्ग किमी पर कितने लोग हैं। भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक कारक यह पैटर्न समझाते हैं। हज़ारों साल जनसंख्या धीरे बढ़ी, फिर 1800 के बाद बहुत तेज़ी से। जनसंख्या जन्म, मृत्यु और प्रवास से बदलती है। जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत बताता है कि गाँव की खेती से शहरी उद्योग की ओर बढ़ते समाज में जन्म और मृत्यु दर कैसे गिरती हैं। देश परिवार नियोजन और स्वास्थ्य सेवा से वृद्धि नियंत्रित करते हैं।
- सांस्कृतिक भूगोल: जगह संस्कृति को और संस्कृति जगह को कैसे गढ़ती है – सांस्कृतिक भूगोल यह पढ़ता है कि अलग-अलग जगहों पर संस्कृति कैसे अलग है और कैसे फैलती है. संस्कृति किसी समूह के जीने का साझा तरीका है: भाषा, धर्म, भोजन, पहनावा, भवन, कला और त्योहार. लोग अपनी संस्कृति के हिसाब से ज़मीन बदलते हैं, जिससे सांस्कृतिक भूदृश्य बनता है. प्राकृतिक पर्यावरण, ख़ासकर जलवायु और समुद्र की नज़दीकी, घर, भोजन और कपड़ों पर असर डालते हैं, पर लोग तकनीक और अपनी पसंद से भी चुनते हैं. मिलते-जुलते गुणों वाले इलाक़े सांस्कृतिक प्रदेश बनाते हैं. संस्कृति किसी केंद्र (हर्थ) से शुरू होकर प्रसार से फैलती है: स्थानांतरण (लोग जाते हैं) या विस्तार (विचार जाता है), जो संक्रामक, पदानुक्रमिक या उद्दीपन प्रकार का होता है. प्रसार से संस्कृति-ग्रहण, आत्मसात्करण, समन्वय और आज वैश्वीकरण होता है.
- नगरीकरण: शहर क्यों बढ़ते हैं और उन्हें बेहतर कैसे बनाएँ – नगरीकरण किसी देश या दुनिया के उन लोगों के हिस्से का बढ़ना है जो कस्बों और शहरों में रहते हैं। 1950 में दुनिया के लगभग 30% लोग नगरीय थे; 2007 से आधे से ज़्यादा हैं, और 2050 तक लगभग 68% होने का अनुमान है। शहर ग्रामीण-नगरीय प्रवास (गाँव से धक्का देने वाले और शहर की ओर खींचने वाले कारक) और प्राकृतिक वृद्धि से बढ़ते हैं। आज सबसे तेज़ बढ़त एशिया और अफ़्रीका के कम आय वाले और उभरते देशों में है, जहाँ 1 करोड़ से ज़्यादा के महानगर बन रहे हैं; कई अमीर देशों में बढ़त धीमी है और लोग उपनगरों या गाँवों की ओर भी जाते हैं (उपनगरीकरण और प्रति-नगरीकरण)। तेज़ बढ़त से अवसर (रोज़गार, सेवाएँ) और समस्याएँ (अनौपचारिक बस्तियाँ, ट्रैफ़िक, प्रदूषण, कचरा, बाढ़, नगरीय ऊष्मा द्वीप) आती हैं। टिकाऊ नगरीय विकास इन्हें सार्वजनिक परिवहन, हरी जगहों, साफ़ पानी, पुनर्चक्रण, सस्ते घरों और नवीकरणीय ऊर्जा से सुधारता है।
6. Nature and population of the home region
Geography of one's own region
- स्थानीय भूगोल: अपने इलाक़े का अध्ययन – स्थानीय भूगोल उस जगह का अध्ययन है जहाँ आप रहते हैं: आपका कस्बा, ज़िला या गृह-क्षेत्र। पूरा विवरण छह सवालों के जवाब देता है: यह कहाँ है (स्थिति), प्रकृति इसे क्या देती है (उच्चावच, जलवायु, पानी, मिट्टी, वन, खनिज, संरक्षित क्षेत्र), यहाँ कौन और कैसे रहता है (जनसंख्या और बस्तियाँ), लोग कैसे कमाते हैं (अर्थव्यवस्था, रोज़गार, सेवाएँ), पर्यावरण कैसा है और उसकी निगरानी कैसे होती है, और समय के साथ यह सब कैसे बदला। भूगोलवेत्ता ये जवाब क्षेत्र-अध्ययन से ढूँढते हैं: सवाल पूछो, देखकर, नापकर और बातचीत करके आँकड़े जुटाओ, उन्हें नक्शे-चित्र और ग्राफ़ में दिखाओ, और ताक़त, समस्याएँ और सुझाव लिखो।