Poland Liceum ogólnokształcące, klasa IV Geography (extended level)
अध्याय: 7
1. XVII. Zonation of the natural environment
Natural zones
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2. XVIII. Environmental problems of today's world
Natural hazards · Climate, ice, water and diversity
- प्राकृतिक संकट (Natural Hazards) – प्राकृतिक संकट (hazard) ऐसी प्राकृतिक घटना है जो लोगों और चीज़ों को नुकसान पहुँचा सकती है, जैसे भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा या चक्रवात। जब यह ऐसे लोगों पर पड़ती है जो तैयार नहीं हैं, तब यह आपदा (disaster) बन जाती है। भूगर्भीय संकट धरती के अंदर से आते हैं, मौसमी संकट हवा और पानी से। जोखिम = संकट × सुभेद्यता ÷ क्षमता, इसलिए चेतावनी, मज़बूत मकान और प्रशिक्षित लोग नुकसान घटाते हैं।
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
3. XIX. Natural conditions of economic activity
Nature and the economy
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4. XX. Political problems of today's world
Political change
- राजनीतिक भूगोल: भूमि, लोग और सत्ता कैसे जुड़ते हैं – राजनीतिक भूगोल बताता है कि लोग ज़मीन को कैसे बाँटते और चलाते हैं। राज्य के लिए चार चीज़ें चाहिए: भूमि (क्षेत्र), जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता। सीमाएँ नदी-पहाड़ जैसी प्राकृतिक हो सकती हैं या सीधी खींची गई कृत्रिम रेखाएँ। देश के अंदर सत्ता कई स्तरों में बँटी है। देश संगठनों में मिलकर सहयोग करते हैं, पर पानी, खनिज, ज़मीन या पहचान पर विवाद भी होते हैं। बातचीत और समझौते विवाद को सहयोग में बदलते हैं।
5. XXI. Social problems of today's world
Population and migration problems · Work and tolerance
- प्रवास (Migration) – प्रवास लोगों का एक जगह से दूसरी जगह कुछ समय या हमेशा के लिए रहने जाना है। छोड़ी गई जगह उद्गम है; पहुँचने की जगह गंतव्य। लोग प्रतिकर्ष कारकों (घर की समस्याएँ) और अपकर्ष कारकों (दूसरी जगह का आकर्षण) से जाते हैं, पर खर्च, दूरी और कानून जैसी बाधाएँ कुछ को रोकती हैं। प्रवास आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय, अस्थायी या स्थायी, स्वैच्छिक या बलात हो सकता है, और यह उद्गम व गंतव्य दोनों को बदलता है।
- सामाजिक भूगोल: अलग-अलग जगहों पर लोग कैसे रहते हैं – सामाजिक भूगोल यह पढ़ता है कि लोग, उनकी संस्कृति और रहन-सहन की स्थितियाँ जगहों पर कैसे फैली हैं और क्यों। क्षेत्र परंपराओं (नृजातीय या सांस्कृतिक क्षेत्र), जीवन स्तर (आय, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास) और प्रजनन दर (प्रति महिला बच्चे) में अलग होते हैं। गाँव अक्सर लोग खो देते हैं क्योंकि युवा काम के लिए शहर चले जाते हैं (ग्रामीण जनसंख्या ह्रास), इसलिए गाँव और शहर का जीवन अलग-अलग तरह से बदलता है। शहर के भीतर लोग आय या मूल के आधार पर अलग-अलग इलाकों में बस सकते हैं, जिससे अलग-थलग, वंचित बस्तियाँ (घेटोकरण) बन सकती हैं। हर शहर का अपना चरित्र भी होता है, जिसे जीनियस लोकी (स्थान की आत्मा) कहते हैं। भूगोलवेत्ता मतदान जैसे पैटर्न दिखाने के लिए GIS नक्शे इस्तेमाल करते हैं, और जन भागीदारी लोगों को अपनी जगह गढ़ने में मदद करती है। कुछ क्षेत्र ग़रीब रह जाते हैं और उन्हें सामाजिक एकजुटता चाहिए, जैसे अमीर क्षेत्रों की मदद। काम और सहिष्णुता भी केंद्र में हैं: बाल श्रम और सस्ता श्रम, बेरोज़गारी (ख़ासकर युवाओं में), और नस्लवाद तथा विदेशी-द्वेष, जिन्हें शिक्षा, निष्पक्ष क़ानून और समूहों के मेल-जोल से रोका जा सकता है।
6. XXII. Quality of life in selected regions
Quality of life
- जीवन की गुणवत्ता और सुखी जीवन की शर्तें – जीवन की गुणवत्ता का मतलब है लोगों का जीवन कुल मिलाकर कितना अच्छा है, सिर्फ़ उनके पास कितना पैसा है यह नहीं। इसमें आय, स्वास्थ्य, शिक्षा, साफ़ और सुरक्षित पर्यावरण, लोकतंत्र और अधिकार, और भरोसे व ईमानदारी वाला समाज शामिल है। इसे वस्तुनिष्ठ सूचकों (जैसे जीवन प्रत्याशा) और व्यक्तिनिष्ठ सूचकों (लोग कितना संतुष्ट महसूस करते हैं) से मापते हैं। एक जैसी आय वाली जगहों में भी जीवन की गुणवत्ता बहुत अलग हो सकती है।
7. XXIII. Economic problems of today's world
Global inequality
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