r-चयनित और K-चयनित जातियाँ
हर जीव के पास ऊर्जा सीमित है। वह इसे बहुत सारे बच्चों पर खर्च कर सकता है या कुछ अच्छी तरह पाले गए बच्चों पर।
- r-चयनित जातियाँ: बहुत सारी छोटी संतानें, जल्दी प्रजनन, छोटा जीवन, देखभाल कम या नहीं। अच्छे समय में संख्या तेज़ी से बढ़ती है, बुरे समय में अचानक गिरती है। उदाहरण: कीट, चूहे, ज़्यादातर मछलियाँ, मेंढक, खरपतवार, जीवाणु।
- K-चयनित जातियाँ: कम पर बड़ी संतानें, देर से प्रजनन, लंबा जीवन, खूब देखभाल। संख्या वहन क्षमता (K) के पास रहती है, यानी आवास जितने जीवों को सँभाल सकता है। उदाहरण: हाथी, व्हेल, बड़े वानर, मनुष्य, नारियल का पेड़।
ये अक्षर वृद्धि समीकरण से आए हैं: r वृद्धि दर है, K वहन क्षमता। ज़्यादातर जातियाँ इन दोनों के बीच कहीं होती हैं। एक ही जनसंख्या के जीवों में भी अंतर (विविधता) होता है, जैसे आकार, गति या रोग से लड़ने की ताकत, और यही विविधता बदलाव में जनसंख्या को बचाती है।
उत्तरजीविता वक्र (Survivorship curves)
उत्तरजीविता वक्र एक साथ पैदा हुए समूह (मान लो 1000) से शुरू होता है और दिखाता है कि हर उम्र पर कितने ज़िंदा हैं। y-अक्ष अक्सर लॉग पैमाने पर होता है, ताकि बराबर मृत्यु दर सीधी रेखा दिखे।
- टाइप I: पहले सपाट, फिर बुढ़ापे में गिरावट। माता-पिता की देखभाल से ज़्यादातर बच्चे बचते हैं। अच्छी स्वास्थ्य सुविधा वाले देशों के मनुष्य, हाथी (K-चयनित)।
- टाइप II: सीधी तिरछी रेखा। हर उम्र में मरने का ख़तरा बराबर। कई पक्षी, छिपकलियाँ, गिलहरियाँ।
- टाइप III: शुरू में बहुत तेज़ गिरावट, फिर सपाट। ज़्यादातर अंडे, बीज या लार्वा अवस्था में मर जाते हैं; बचे हुए लंबा जीते हैं। मछली, सीप, मेंढक, पेड़ (r-चयनित)।
सामान्यवादी और विशेषज्ञ जातियाँ
किसी जाति का निकेत (niche) उसकी भूमिका है: वह क्या खाती है, कहाँ रहती है, कब सक्रिय रहती है।
- सामान्यवादी (generalist) का निकेत चौड़ा है: कई भोजन, कई आवास। कौआ, चूहा, कॉकरोच, गौरैया। आवास बदलने पर भी ये बच जाते हैं और अक्सर आक्रामक (invasive) बन जाते हैं।
- विशेषज्ञ (specialist) का निकेत संकरा है: एक भोजन या एक आवास। विशाल पांडा (बाँस), कोआला (यूकेलिप्टस की पत्तियाँ), मोनार्क तितली की इल्ली (मिल्कवीड)। स्थिर आवास में ये अच्छा मुकाबला करते हैं, पर वह एक संसाधन ख़त्म हो जाए तो ख़तरे में आ जाते हैं।
आयु संरचना आरेख (आयु पिरामिड)
आयु संरचना आरेख में हर आयु-वर्ग की एक पट्टी होती है, एक तरफ़ पुरुष, दूसरी तरफ़ महिलाएँ, सबसे नीचे सबसे छोटे।
- फैलता (चौड़ा आधार, त्रिभुज जैसा): बहुत बच्चे और युवा → आगे तेज़ बढ़त। जैसे उप-सहारा अफ़्रीका के कई देश।
- स्थिर (सीधी भुजाएँ, खंभे जैसा): जन्म लगभग मृत्यु के बराबर → बहुत कम बढ़त। जैसे अमेरिका, फ़्रांस।
- सिकुड़ता (पतला आधार, ऊपर उभार): वयस्कों से कम बच्चे → जनसंख्या घटेगी और बूढ़ी होगी। जैसे जापान, इटली, दक्षिण कोरिया।
चौड़े पिरामिड में युवाओं की भीड़ से जनसंख्या संवेग (population momentum) बनता है: हर परिवार कम बच्चे करे तब भी दशकों तक जनसंख्या बढ़ती है, क्योंकि बहुत लोग माता-पिता बनने की उम्र में आ रहे हैं। भारत आज फैलते और स्थिर के बीच है।
कुल प्रजनन दर और मानव जनसंख्या की गतिकी
कुल प्रजनन दर (TFR) एक महिला के पूरे जीवन में होने वाले औसत बच्चे हैं। प्रतिस्थापन स्तर लगभग 2.1 है: दो बच्चे माता-पिता की जगह लेते हैं, और 0.1 उन बच्चों के लिए है जो छोटी उम्र में मर जाते हैं। जहाँ बाल मृत्यु ज़्यादा है, वहाँ यह स्तर ऊँचा (लगभग 2.5) होता है।
मानव जनसंख्या बदलाव: वृद्धि दर (%) = (जन्म दर − मृत्यु दर) ÷ 10 + शुद्ध प्रवास, जहाँ दरें प्रति 1000 लोग प्रति वर्ष हैं। 70 का नियम: दोगुना होने का समय ≈ 70 ÷ वृद्धि दर (%)।
TFR घटाने वाले कारण: लड़कियों की पढ़ाई, महिलाओं को काम, परिवार नियोजन की सुविधा, कम बाल मृत्यु, शहरी जीवन, पेंशन। TFR ऊँचा रखने वाले कारण: खेतों में बच्चों का काम, बुढ़ापे के सहारे के रूप में बच्चे, ऊँची बाल मृत्यु, सांस्कृतिक या धार्मिक परंपराएँ। दुनिया की जनसंख्या 2022 में 8 अरब पार कर गई और हर साल पहले से धीमी बढ़ रही है।
जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic transition)
जनसांख्यिकीय संक्रमण मॉडल बताता है कि विकास के साथ देश कैसे बदलते हैं:
- चरण 1 (औद्योगीकरण से पहले): ऊँची जन्म दर, ऊँची मृत्यु दर → छोटी, स्थिर जनसंख्या।
- चरण 2 (संक्रमण): भोजन, साफ़ पानी, टीके और दवाइयों से मृत्यु दर गिरती है; जन्म दर ऊँची रहती है → बहुत तेज़ बढ़त।
- चरण 3 (औद्योगिक): पढ़ाई, शहर, महिलाओं के रोज़गार और परिवार नियोजन से जन्म दर भी गिरती है → बढ़त धीमी।
- चरण 4 (उत्तर-औद्योगिक): जन्म और मृत्यु दोनों दरें नीची → बड़ी, स्थिर जनसंख्या। कुछ देश चरण 5 में जाते हैं जहाँ जन्म मृत्यु से कम हो जाते हैं और जनसंख्या घटती है।
चरण 2 और 3 में जन्म और मृत्यु की रेखाओं के बीच का अंतर ही जनसंख्या की बढ़त है। यह मॉडल यूरोप के इतिहास पर अच्छा बैठता है, पर हर देश अपनी रफ़्तार से चलता है।
करके देखो: छोटा उत्तरजीविता वक्र बनाओ
64 सूखे राजमा (या काग़ज़ के टुकड़े) को नवजात समूह मानो। टाइप III जैसा बनाने के लिए पहले दो 'साल' हर बार आधे हटाओ, फिर हर साल सिर्फ़ 2 हटाओ। दूसरे समूह से हर साल 8 हटाओ (टाइप II)। हर साल बचे हुए लिखो और ग्राफ़ पेपर पर दोनों खींचो। फिर ऊपर 3D में TFR को 1.5 और 3.0 पर रखने से पहले अंदाज़ा लगाओ कि तीसरी पीढ़ी कितनी बड़ी होगी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वृद्धि दर (%) = (जन्म दर − मृत्यु दर) ÷ 10 [दरें प्रति 1000 प्रति वर्ष]
- प्रवास सहित वृद्धि दर (%) = (b − d + आप्रवास − उत्प्रवास) ÷ 10
- दोगुना होने का समय (वर्ष) ≈ 70 ÷ वृद्धि दर (%)
- प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन ≈ 2.1 बच्चे प्रति महिला
- जनसंख्या में बदलाव = (जन्म + आप्रवास) − (मृत्यु + उत्प्रवास)
- r-चयनित: बहुत, छोटे, देखभाल नहीं, टाइप III; K-चयनित: कम, बड़े, देखभाल, टाइप I
हल किए गए उदाहरण
1. एक देश में प्रति 1000 लोग प्रति वर्ष 30 जन्म और 10 मृत्यु हैं, प्रवास नहीं। वृद्धि दर और दोगुना होने का समय निकालो।
वृद्धि दर = (30 − 10) ÷ 10 = 2% प्रति वर्ष। दोगुना होने का समय ≈ 70 ÷ 2 = 35 वर्ष।
2. देश X में जन्म दर 12, मृत्यु दर 9, आप्रवासी 6 और उत्प्रवासी 1 प्रति 1000 प्रति वर्ष हैं। वृद्धि दर क्या है?
वृद्धि दर = (12 − 9 + 6 − 1) ÷ 10 = 8 ÷ 10 = 0.8% प्रति वर्ष। दोगुना होने का समय ≈ 70 ÷ 0.8 ≈ 87.5 वर्ष।
3. समुद्री कछुआ 100 अंडे देता है, सिर्फ़ 1 बड़ा होता है। गोरिल्ला हर 4 साल में 1 बच्चा देता है और ज़्यादातर बचते हैं। दोनों को वर्गीकृत करो।
कछुआ: बहुत बच्चे, देखभाल नहीं, ज़्यादातर जल्दी मरते हैं → r-चयनित, टाइप III। गोरिल्ला: कम बच्चे, लंबी देखभाल, ज़्यादातर बचते हैं → K-चयनित, टाइप I।
4. एक पिरामिड का आधार पतला है और सबसे चौड़ी पट्टियाँ 40–60 साल पर हैं। 30 साल बाद क्या होगा?
वयस्कों से कम बच्चे पैदा हो रहे हैं, इसलिए जनसंख्या घटेगी और बूढ़ों का हिस्सा बढ़ेगा। देश में काम करने वालों की कमी और पेंशन व इलाज का खर्च बढ़ सकता है।
5. TFR 1.8 होने पर भी जनसंख्या कुछ साल क्यों बढ़ती रहती है?
जनसंख्या संवेग: अगर अभी बहुत लोग युवा वयस्क हैं (पिरामिड का बीच चौड़ा), तो हर महिला के 2.1 से कम बच्चे होने पर भी कुछ समय जन्म मृत्यु से ज़्यादा रहते हैं। लंबी आयु भी मौतों को टालती है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि r-चयनित जातियाँ 'कमज़ोर' हैं। वे भी उतनी ही सफल हैं; वे बदलती, अनिश्चित जगहों के लिए ठीक हैं।
- उत्तरजीविता वक्र को सामान्य पैमाने पर पढ़ना। लॉग पैमाने पर सीधी रेखा (टाइप II) का मतलब है हर साल मरने का बराबर ख़तरा।
- प्रतिस्थापन प्रजनन को ठीक 2 कहना। यह लगभग 2.1 है, क्योंकि कुछ बच्चे बड़े होने से पहले मर जाते हैं।
- भूल जाना कि जनसांख्यिकीय संक्रमण के चरण 2 में पहले मृत्यु दर गिरती है जबकि जन्म दर ऊँची रहती है; इसी से वहाँ बढ़त सबसे तेज़ है।