भूवैज्ञानिक मानचित्र क्या है?
सामान्य मानचित्र सड़कें और नदियाँ दिखाता है। भूवैज्ञानिक मानचित्र मिट्टी के ठीक नीचे सतह पर मौजूद चट्टान दिखाता है।
हर चट्टान इकाई का अपना रंग और छोटा अक्षर कोड होता है। संकेत-सूची (legend) में इकाइयाँ उम्र के क्रम में होती हैं, सबसे नई ऊपर।
मुख्य चिह्न
- रंगीन क्षेत्र: अलग-अलग चट्टानें (बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, ग्रेनाइट)।
- रंगों के बीच पतली रेखा: संपर्क, जहाँ दो चट्टानें मिलती हैं।
- मोटी या लाल रेखा: भ्रंश।
- संख्या वाला T चिह्न: परत की strike और dip।
- भूरी समोच्च रेखाएँ: ज़मीन की ऊँचाई।
परतें, उम्र और अध्यारोपण का नियम
पानी में तलछट अख़बारों के ढेर की तरह जमता है। पहला अख़बार सबसे नीचे होता है। अगर परतें उलटी न हुई हों, तो नीचे की परत पुरानी होती है। यही अध्यारोपण का नियम है।
- मूल क्षैतिजता: परतें शुरू में लगभग सपाट बनती हैं। अगर अब झुकी हैं, तो बाद में कुछ हुआ।
- काटने का नियम: जो भ्रंश या लावा की नली (dyke) परतों को काटे, वह उनसे नया है।
स्तरिक स्तंभ
स्तरिक स्तंभ एक लंबी पट्टी है जिसमें परतें क्रम से हैं: सबसे पुरानी नीचे, सबसे नई ऊपर। हर खंड की ऊँचाई परत की मोटाई बताती है। लहरदार रेखा समय का अंतराल (विषम विन्यास) दिखाती है।
नति और नति-लंब: झुकी परत को बताना
एक झुकी छत सोचो। उस पर ऐसी रेखा खींचो जो न ऊपर जाए न नीचे। उसकी दिशा नति-लंब (strike) है। अब एक कंचा छत से सीधा नीचे लुढ़काओ। ढलान का कोण नति (dip) है और कंचे की दिशा नति दिशा। नति दिशा हमेशा strike से 90° पर होती है।
मानचित्र पर T बनाते हैं: लंबी रेखा strike के साथ, छोटा निशान ढलान की ओर, और पास में कोण, जैसे 30°।
मानचित्र पर झुकाव कैसे दिखता है
- सपाट परतें: संपर्क रेखाएँ समोच्च रेखाओं के साथ चलती हैं।
- खड़ी परतें: संपर्क सीधी रेखाएँ होते हैं।
- कम झुकाव: चौड़ी पट्टियाँ। ज़्यादा झुकाव: पतली पट्टियाँ।
भ्रंश, वलन और अनुप्रस्थ काट बनाना
भ्रंश वह दरार है जिसके साथ चट्टान खिसकी। मानचित्र पर रंग की पट्टी भ्रंश रेखा पर रुककर आगे खिसकी जगह से फिर शुरू होती है। खिसकाव की मात्रा throw है। वलन (fold) में परतें मेहराब (अपनति, बीच में सबसे पुरानी) या गर्त (अभिनति, बीच में सबसे नई) बनाती हैं।
अनुप्रस्थ काट कैसे बनाएँ
- मानचित्र पर A–B रेखा खींचो।
- समोच्च से ज़मीन की प्रोफ़ाइल बनाओ।
- जहाँ संपर्क A–B से मिलें, निशान लगाओ।
- हर निशान से परत को उसके dip कोण पर नीचे खींचो।
- भ्रंश जोड़ो, रंग भरो, शीर्षक और पैमाना लिखो।
भूवैज्ञानिक इतिहास का प्रवाह आरेख
मानचित्र और काट पढ़कर कहानी तीरों में लिखते हैं: परत A → परत B → परत C → झुकाव → भ्रंश → अपरदन → ऊपर नई परत। हर तीर एक घटना, सबसे पुरानी पहले।
घर पर करो
कटोरी में 4 रंग की मिट्टी या आटे की परतें दबाओ, ब्लॉक को झुकाओ और धागे से काटो। ऊपर का भाग तुम्हारा मानचित्र है, कटा हिस्सा अनुप्रस्थ काट।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अध्यारोपण का नियम: नीचे की परत = पुरानी (अगर उलटी न हो)
- नति-लंब ⟂ नति दिशा (हमेशा 90°)
- नति = परत और क्षैतिज के बीच का कोण (0°–90°)
- काटने का नियम: जो काटे, वह नया
- मानचित्र चिह्न: कोण के साथ T, जैसे ⊥30°
- अपनति: बीच में सबसे पुरानी; अभिनति: बीच में सबसे नई
हल किए गए उदाहरण
1. सपाट परतें P (नीचे), Q और R (ऊपर) हैं। एक भ्रंश P और Q को काटता है, R को नहीं। घटनाओं का क्रम बताओ।
P → Q → भ्रंश → R। R कटा नहीं, इसलिए वह भ्रंश के बाद बना।
2. Strike रेखा उत्तर–दक्षिण है, निशान पूर्व की ओर है और पास में 40° लिखा है। परत के बारे में बताओ।
Strike उत्तर–दक्षिण, dip पूर्व की ओर 40°। पूर्व की ओर चलने पर परत पैरों के नीचे और गहरी होती जाती है।
3. एक मानचित्र में संपर्क समोच्च रेखाओं के साथ चलते हैं, दूसरे में पहाड़ी-घाटी के पार सीधे। दोनों क्या बताते हैं?
समोच्च के साथ = सपाट परतें। सीधी रेखा = खड़ी परतें।
आम गलतियाँ
- Legend में सबसे ऊपर वाली चट्टान को सबसे पुरानी मानना। ऊपर सबसे नई होती है।
- Strike और dip को मिला देना। Strike दिशा है; dip कोण और नीचे की दिशा है।
- Dip दिशा को strike के समांतर बनाना। ये हमेशा समकोण पर होते हैं।
- भूल जाना कि भ्रंश उन परतों से नया है जिन्हें वह काटता है।