भौतिक-भौगोलिक क्षेत्र और उच्चावच की मुख्य पट्टियाँ
पोलैंड का उच्चावच पट्टियों में है जो उत्तर से दक्षिण ऊँचा होता जाता है:
- बाल्टिक तट: रेतीले तट, टीले, लैगून और रेत की जिह्वाएँ।
- झील क्षेत्र: पिछली बर्फ़ की चादर (हिमनद) के छोड़े हज़ारों झील और नीची पहाड़ियाँ (हिमोढ़ / moraines)।
- मध्य निचले मैदान: चौड़े समतल मैदान और नदी घाटियाँ (विस्तुला, ओडर)।
- उच्च भूमि: 200 से 600 मी की पहाड़ियाँ, जैसे सिलेसिया-क्राकोव, मालोपोल्स्का और लुब्लिन उच्च भूमि।
- पर्वत: दक्षिण-पश्चिम में सुडेटेस और दक्षिण में कार्पेथियन।
पोलैंड में लगभग 10 में से 9 जगह 300 मी से नीचे है। सबसे ऊँचा बिंदु तात्रा में रीसी (2,499 मी) है। सबसे नीची जगहें विस्तुला डेल्टा के पास समुद्र-तल के क़रीब हैं।
भू-संरचना: मुख्य भूगर्भीय इकाइयाँ और उच्चावच
पोलैंड में तीन बड़ी भूगर्भीय इकाइयाँ मिलती हैं।
- पुराना पूर्वी यूरोपीय मंच (उत्तर-पूर्व): बहुत पुरानी कठोर चट्टान जो नई परतों के नीचे गहरी दबी है।
- पुरानी वलित पट्टी (सुडेटेस, स्विएंतोक्शिस्की पर्वत, दक्षिण-मध्य उच्च भूमि): लगभग 30 करोड़ साल पहले मुड़ी चट्टानें, घिसकर फिर उठीं, इसलिए पहाड़ियाँ पुरानी, गोल या खंड-आकार की हैं।
- नई कार्पेथियन वलित पट्टी (दक्षिण): लगभग 3 से 2 करोड़ साल पहले मुड़ी परतें, इसलिए पहाड़ ऊँचे, तीखे हैं और अब भी थोड़े उठ रहे हैं।
इसके ऊपर पिछले 20 लाख वर्षों में बर्फ़ की चादरों ने उत्तर और मध्य भाग को ढका। पिघलने पर उन्होंने हिमोढ़, झीलें, रेतीले मैदान और नदी घाटियाँ छोड़ीं। इसलिए चट्टानें (कौन सी, कितनी पुरानी) और हिमयुग मिलकर उच्चावच की पट्टियाँ समझाते हैं।
उच्च भूमि: कार्बोनेट और लोएस
कार्बोनेट (चूना-पत्थर) उच्च भूमि, जैसे क्राकोव-चेंस्तोखोवा उच्च भूमि, में चूना-पत्थर है। बारिश का पानी चूना-पत्थर को धीरे-धीरे घोलकर गुफाएँ, चट्टानी मीनारें और सूखी घाटियाँ (कार्स्ट) बनाता है। कई मध्ययुगीन क़िले इन्हीं चट्टानों पर हैं।
लोएस उच्च भूमि, जैसे लुब्लिन, सांदोमीर्ज़ और प्रोशोविस, पर लोएस की परत है: हिमयुग की हवा से उड़ी महीन पीली धूल। लोएस सबसे उपजाऊ मिट्टियों में से एक बनाता है। यह नरम होता है, इसलिए नदियाँ और सड़कें गहरे खड्ड काटती हैं जिन्हें लोएस खड्ड कहते हैं।
पर्वत: सुडेटेस, स्विएंतोक्शिस्की और बिएश्चाडी
सुडेटेस (दक्षिण-पश्चिम): पुराने खंड पर्वत; सबसे ऊँची चोटी कार्कोनोशे में स्निएज़्का, 1,603 मी है। इनके शीर्ष समतल हैं और ग्रेनाइट व पुरानी रवेदार चट्टानें हैं।
स्विएंतोक्शिस्की (पवित्र क्रॉस) पर्वत (दक्षिण-मध्य): यूरोप के सबसे पुराने पहाड़ों में, अब नीचे (सबसे ऊँची ल्यिसिका, 612 मी), बलुआ-पत्थर और क्वार्ट्ज़ाइट की लंबी गोल कटकों वाले।
बिएश्चाडी (सुदूर दक्षिण-पूर्वी कार्पेथियन): फ़्लिश (बलुआ-पत्थर और शेल की बारी-बारी की परतें) की मुड़ी परतें लंबी कटकें बनाती हैं जिन पर घास के पहाड़ी मैदान हैं जिन्हें पोलोनिनी कहते हैं। सबसे ऊँची चोटी तारनिका, 1,346 मी है। यह जंगली और कम आबाद है।
पश्चिमी तात्रा और ऊँचा तात्रा
तात्रा पूरे कार्पेथियन का सबसे ऊँचा भाग है। ये छोटे हैं पर आल्प्स जैसे दिखते हैं।
- ऊँचा तात्रा: ज़्यादातर ग्रेनाइट, बहुत तीखा, नुकीली कटकें और चोटियाँ (रीसी 2,499 मी), U-आकार की घाटियाँ, गहरे सर्क और कई झीलें (जैसे मोर्स्की ओको)। इन्हें हिमयुग के हिमनदों ने तराशा।
- पश्चिमी तात्रा: नीचे और ज़्यादा गोल (लगभग 2,250 मी तक), ग्रेनाइट का केंद्र और ऊपर चूना-पत्थर। घास की ढलानें, चौड़ी घाटियाँ और कई गुफाएँ व झरने।
आसान याद: ऊँचा तात्रा = ऊँचा, कठोर ग्रेनाइट, नुकीला। पश्चिमी तात्रा = नीचा, नरम, घास वाला।
खनिज संसाधन और उनका महत्व
चट्टानों में ऊर्जा, धातु और निर्माण की सामग्री छिपी होती है।
- कठोर कोयला: ऊपरी सिलेसिया बेसिन (दक्षिण) और लुब्लिन बेसिन। बिजली और इस्पात में काम आता है।
- लिग्नाइट (भूरा कोयला): मध्य और दक्षिण-पश्चिम (बेलखातुव, कोनिन, तुरुव)। बिजली घरों में।
- तांबा (और चाँदी): निचला सिलेसिया, लूबिन और ग्वोगुव के पास।
- जस्ता और सीसा: सिलेसिया-क्राकोव क्षेत्र।
- सेंधा नमक: वीलिच्का और बोखनिया (पुरानी खानें), क्वोदावा और इनोव्रोत्सवाव।
- गंधक: तारनोब्ज़ेग के पास, अब ज़्यादातर खनन बंद।
- चूना-पत्थर, रेत, बजरी, मिट्टी: हर जगह, सीमेंट और सड़कों के लिए।
महत्व: बिजली, रोज़गार, निर्यात और उद्योग। पर खनन ज़मीन और हवा बदलता है, इसलिए देश अब स्वच्छ ऊर्जा और पुनर्चक्रण की योजना बनाते हैं।
खुद करके देखो: चरण 6 में चलने वाले को सागर से तात्रा तक सरकाओ, हर ऊँचाई ज़ोर से पढ़ो और अंदाज़ा लगाओ कि पैरों के नीचे कौन सी चट्टान है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उच्चावच की सीढ़ी: तट, झीलें, मैदान, उच्च भूमि, पर्वत।
- पोलैंड में लगभग 10 में से 9 जगह 300 मी से नीचे है।
- पुरानी वलित पट्टी (सुडेटेस, स्विएंतोक्शिस्की): नीची और गोल या खंड-जैसी।
- नई वलित पट्टी (कार्पेथियन): ऊँची और तीखी।
- लोएस = हवा से उड़ी हिमयुग की धूल = उपजाऊ मिट्टी।
- सबसे ऊँचा बिंदु: रीसी 2,499 मी (तात्रा)।
हल किए गए उदाहरण
1. रीसी (2,499 मी) स्निएज़्का (1,603 मी) से कितना ऊँचा है?
2,499 - 1,603 = 896 मी ऊँचा।
2. यात्री बाल्टिक तट से तात्रा तक चलता है। क्रम से मिलने वाली उच्चावच पट्टियाँ बताओ।
तट, झील क्षेत्र, मध्य निचले मैदान, उच्च भूमि, फिर कार्पेथियन पर्वत (तात्रा)।
3. लुब्लिन उच्च भूमि खेती के लिए अच्छी क्यों है?
उस पर लोएस की परत है: महीन, गहरी, उपजाऊ मिट्टी जो पानी और पोषक तत्व रोकती है।
4. स्विएंतोक्शिस्की पर्वत पुराने होकर भी तात्रा से नीचे क्यों हैं?
क्योंकि वे बहुत पुराने हैं: हवा, बारिश और नदियों ने उन्हें करोड़ों साल घिसा है। तात्रा नए और तीखे हैं।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि पोलैंड पहाड़ी है। लगभग 10 में से 9 जगह 300 मी से नीची है।
- पुराने पहाड़ों को ज़्यादा ऊँचा कहना। पुराने पहाड़ आमतौर पर नीचे और गोल होते हैं।
- सुडेटेस (दक्षिण-पश्चिम, पुराने) और कार्पेथियन (दक्षिण, नए) को मिला देना।
- भूलना कि उत्तर को हिमयुग ने आकार दिया: झीलें और हिमोढ़ पिघलती बर्फ़ की देन हैं।