खनिज और खनिज संसाधन क्या हैं?
खनिज वह ठोस पदार्थ है जिसे प्रकृति धरती के अंदर बनाती है। इसे कारखाने में नहीं बनाया जाता। ज़्यादातर खनिज चट्टानों में मिले हुए मिलते हैं।
जब कोई खनिज लोगों के काम का हो और उसे उचित खर्च में निकाला जा सके, तो वह खनिज संसाधन बन जाता है। बड़ी चट्टान में सोने का एक कण संसाधन नहीं है। लोहे की मोटी परत संसाधन है।
खनिज अनवीकरणीय (non-renewable) हैं: इन्हें बनने में लाखों साल लगते हैं, इसलिए एक बार निकल गए तो हमारे जीवनकाल में दोबारा नहीं भरते।
मुख्य खनिज: धातु, ईंधन और निर्माण खनिज
तीन बड़े परिवार हैं।
- धातु: लोहा (पुलों और मशीनों का स्टील), ताँबा (तार), एल्युमिनियम (हल्के वाहन, पन्नी), साथ ही सोना-चाँदी। धातुएँ अयस्क से मिलती हैं।
- ईंधन (ऊर्जा खनिज): कोयला, पेट्रोलियम (तेल) और प्राकृतिक गैस। इन्हें जलाकर गर्मी और ऊर्जा मिलती है।
- निर्माण और अन्य खनिज: रेत, बजरी, चूना-पत्थर (सीमेंट के लिए), मिट्टी, नमक, अभ्रक।
कुछ इलाके एक परिवार में अमीर और दूसरे में गरीब होते हैं। इसीलिए देश खनिजों का व्यापार करते हैं।
खनिज कैसे निकालते हैं: खनन
खुली खदान खनन: जब खनिज सतह के पास हो, तो ऊपर की मिट्टी-चट्टान हटाकर सीढ़ीनुमा चौड़ा गड्ढा खोदते हैं। यह सस्ता और सुरक्षित है।
शाफ्ट (भूमिगत) खनन: जब खनिज गहराई में हो, तो सीधा शाफ्ट उतारकर बगल में सुरंगें खोदते हैं। इसमें खर्च ज़्यादा और मज़दूरों के लिए ख़तरा भी ज़्यादा है।
खनन की कीमत भी है: धूल, शोर, ज़मीन को नुकसान और पानी का प्रदूषण। अच्छी खदानें बाद में ज़मीन को ठीक कर देती हैं।
अयस्क से वस्तु तक
अयस्क वह चट्टान है जिसमें इतनी धातु हो कि खोदना फ़ायदेमंद हो। रास्ता यह है: अयस्क खोदो, कूटो, धातु वाला हिस्सा अलग करो, भट्ठी में गरम करो (गलाना, smelting) ताकि धातु मिले, फिर चादर, तार या पुर्ज़े बनाओ। हर चरण में ऊर्जा लगती है और कचरा बनता है।
विवेकपूर्ण उपयोग: कम करें, दोबारा काम में लें, रीसायकल करें
विवेकपूर्ण उपयोग का मतलब है खनिजों को समझदारी से इस्तेमाल करना, ताकि वे देर तक चलें और कम नुकसान हो।
- कम करें: उतना ही लें जितना चाहिए; हल्की चीज़ें बनाएँ।
- दोबारा उपयोग: मरम्मत करके फिर काम में लें।
- रीसायकल: पुरानी धातु गलाकर नई चीज़ें बनाएँ। अयस्क से एल्युमिनियम बनाने की तुलना में रीसायकल में बहुत कम ऊर्जा लगती है।
- साथ में: खनन में बर्बादी घटाएँ, विकल्प ढूँढें और नए भंडार सावधानी से खोजें।
3D में 100 इकाई का भंडार है और हर साल 10 खुदती हैं, तो वह 10 साल चलेगा। अगर 50% रीसायकल हो, तो नई खुदाई 5 प्रति वर्ष रह जाती है और भंडार 20 साल चलता है।
खुद करके देखिए
अपने कमरे की पाँच चीज़ों की सूची बनाइए। हर एक के लिए बताइए कि वह किस खनिज परिवार (धातु, ईंधन या निर्माण) की है और क्या उसे रीसायकल किया जा सकता है। फिर 3D में रीसायकल को 0% से 80% तक खिसकाइए और साल पढ़ने से पहले अनुमान लगाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- खनिज = धरती के अंदर बना प्राकृतिक ठोस, अक्सर चट्टान में
- अयस्क = वह चट्टान जिसमें खोदने लायक धातु हो
- भंडार कितने साल चलेगा = भंडार / प्रति वर्ष उपयोग
- रीसायकल हिस्सा r हो तो: नई खुदाई प्रति वर्ष = उपयोग x (1 - r)
- अनवीकरणीय = बनने में लाखों साल
हल किए गए उदाहरण
1. इन्हें परिवारों में बाँटिए: ताँबा, कोयला, चूना-पत्थर, एल्युमिनियम अयस्क, प्राकृतिक गैस, रेत।
धातु: ताँबा, एल्युमिनियम अयस्क। ईंधन: कोयला, प्राकृतिक गैस। निर्माण खनिज: चूना-पत्थर, रेत।
2. एक खनिज सतह से 20 मीटर नीचे चौड़ी, समतल परत में है। कौन सा खनन तरीका संभव है और क्यों?
खुली खदान खनन। परत उथली और चौड़ी है, इसलिए ऊपर की चट्टान हटाना सुरंगों से सस्ता और सुरक्षित है।
3. किसी देश में एक धातु की 600 इकाई हैं और वह साल में 20 इकाई खोदता है। कितने साल चलेगी? अगर 50% उपयोग रीसायकल से पूरा हो तो?
600 / 20 = 30 साल। 50% रीसायकल पर नई खुदाई 20 x 0.5 = 10 प्रति वर्ष, तो 600 / 10 = 60 साल।
4. बड़ी चट्टान में सोने का छोटा कण खनिज संसाधन क्यों नहीं कहलाता, जबकि लोहे की परत कहलाती है?
संसाधन को काम का और उचित खर्च में निकालने लायक होना चाहिए। छोटे कण को अलग करने का खर्च उसकी कीमत से ज़्यादा है। मोटी लोहे की परत उचित खर्च में खोदी जा सकती है।
5. क्रम में रखिए: गलाना, अयस्क खोदना, वस्तु बनाना, अयस्क कूटना।
अयस्क खोदना, अयस्क कूटना, गलाना, वस्तु बनाना।
आम गलतियाँ
- अयस्क और धातु को एक समझ लेना। अयस्क चट्टान है; कूटने और गलाने के बाद धातु मिलती है।
- यह कहना कि चट्टानें बहुत हैं इसलिए खनिज नवीकरणीय हैं। इन्हें बनने में लाखों साल लगते हैं, इसलिए ये अनवीकरणीय हैं।
- भूल जाना कि कोयला, तेल और गैस भी खनिज (ईंधन खनिज) हैं।
- सोचना कि रीसायकल से खनन की ज़रूरत खत्म हो जाती है। इससे केवल नई खुदाई कम होती है।