मरुस्थल और मरूद्यान
पर्वतों से घिरा बेसिन
- तारिम बेसिन दक्षिणी शिनच्यांग, उत्तर-पश्चिम चीन में है। यह चीन का सबसे बड़ा आंतरिक बेसिन है: नदियाँ भीतर आती हैं और कभी समुद्र तक नहीं पहुँचतीं।
- इसे पर्वत घेरे हैं: तियानशान (उत्तर), कुनलुन (दक्षिण) और पामीर (पश्चिम)। पूर्व खुला और नीचा है।
तकलामकान मरुस्थल
- लगभग 3,30,000 वर्ग km, चीन का सबसे बड़ा मरुस्थल और दुनिया के सबसे बड़े चलती-रेत वाले मरुस्थलों में से एक।
- इतना सूखा क्यों? पर्वत नम हवाएँ रोकते हैं, इसलिए वर्षा 100 mm से कम (कुछ जगह 50 mm से कम) है, जबकि वाष्पीकरण बहुत अधिक।
- तापमान में बड़ा अंतर: दिन बहुत गर्म, रातें ठंडी; सर्दियाँ ठिठुरन भरी। रेत के टीले हवा से खिसकते हैं।
मरूद्यान
- मरूद्यान सूखे क्षेत्र में हरा टुकड़ा है जहाँ पानी मिलता है।
- बर्फ़ और हिमनद के पिघलने से बनी नदियाँ पर्वतों से उतरती हैं। जहाँ वे तलहटी में पहुँचती हैं, वहाँ मरुस्थल के चारों ओर घेरे में खेत और नगर बने हैं (काशगर, होतान, अक्सू, कोर्ला)।
- फ़सलें: लंबे रेशे वाला कपास, गेहूँ, मक्का और मीठे फल (अंगूर, ख़रबूज़े, नाशपाती, ख़ुबानी, बेर)। धूप के लंबे घंटे फलों को मीठा बनाते हैं।
- पुराने रेशम-मार्ग मरुस्थल के किनारे इन्हीं मरूद्यानों से गुज़रते थे।
तारिम नदी (लगभग 2,100 km) चीन की सबसे लंबी आंतरिक नदी है। यह मरुस्थल के उत्तरी किनारे से बहकर सूखे पूर्व में समाप्त होती है।
तेल और गैस
- तकलामकान के नीचे चट्टान की परतों में बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस है। खुदाई कठिन है क्योंकि कुएँ गहरे हैं और रेत खिसकती है।
- तारिम तेल-क्षेत्र चीन के बड़े ऊर्जा-केंद्रों में है।
- एक लंबी पाइपलाइन (पश्चिम-पूर्व गैस पाइपलाइन, लगभग 4,000 km) बेसिन से गैस पूर्व के शहरों, जैसे शंघाई, तक ले जाती है।
- एक सड़क, तारिम मरुस्थल राजमार्ग (लगभग 520 km), तेल के कुओं तक सेवा के लिए रेत को पार करती है। उसके किनारे घास और झाड़ियों की पंक्तियाँ रेत को रोकती हैं और ड्रिप पाइपों से सींची जाती हैं।
- अच्छी बात: गैस शहरों में कोयले की जगह ले सकती है और धुआँ घटा सकती है। सावधानी: खुदाई से नाज़ुक मरुस्थलीय पौधों और पानी को हानि न हो।
पारिस्थितिकी संरक्षण
समस्या
- ऊपरी नदी के खेतों और नगरों ने अधिकाधिक पानी लिया। निचली तारिम नदी कई वर्ष सूखी रही और उसके अंत की झील सिकुड़ गई।
- नदी के पानी के बिना मरुस्थलीय चिनार (रेत को थामने वाला मज़बूत पेड़) मर गए और रेत फैलने लगी।
समाधान
- पानी का न्यायपूर्ण बँटवारा: निचली नदी में योजना के अनुसार पानी छोड़ना, ऊपर की एक बड़ी झील से भी।
- पानी बचाना: खेत में पानी भरने की तुलना में ड्रिप सिंचाई और खेतों को पतली प्लास्टिक चादर से ढकना कम पानी गँवाते हैं।
- रक्षक वृक्ष-पट्टियाँ: खेतों, सड़कों और मरुस्थल के किनारे पेड़ों-झाड़ियों की पंक्तियाँ हवा धीमी करती हैं और रेत को बाँधती हैं।
- प्राकृतिक पेड़ बचाना और नई खेती की ज़मीन सीमित करना; कम पानी वाली फ़सलें लगाना।
याद रखने का नियम: नदी का उतना ही पानी लो जितना पूरा नदी-तंत्र दे सके।
करके देखो: मरूद्यान बनाओ
- एक ट्रे में सूखी रेत भरो। एक सिरे पर किताब रखकर पर्वत बनाओ।
- किताब के पास थोड़ा "बर्फ़ का पानी" डालो। वह कहाँ फैलता है?
- जहाँ रेत गीली है वहाँ दो सरसों-बीज या क्रेस लगाओ। क्या उगता है?
- अब एक ही ओर ज़्यादा पानी डालो। क्या दूसरी ओर सूख जाता है? यही निचली नदी की समस्या है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आंतरिक बेसिन: पर्वतों से घिरा निचला क्षेत्र जहाँ नदियाँ समुद्र तक नहीं पहुँचतीं
- तकलामकान: लगभग 3,30,000 वर्ग km चलती रेत; वर्षा साल में 100 mm से कम
- मरूद्यान: सूखे क्षेत्र में हरा टुकड़ा जहाँ पानी उपलब्ध है
- तारिम नदी: लगभग 2,100 km, चीन की सबसे लंबी आंतरिक नदी
- बर्फ़-पिघलन: पर्वत की बर्फ़ का पिघलकर नदियों में आना
- ड्रिप सिंचाई: पौधों की जड़ों पर बूँद-बूँद पानी देकर पानी बचाना
- रक्षक वृक्ष-पट्टी: पेड़ों या झाड़ियों की पंक्ति जो हवा धीमी करती और रेत बाँधती है
हल किए गए उदाहरण
1. नगर और खेत तकलामकान के बीच में नहीं, घेरे में क्यों हैं?
पानी बर्फ़-पिघलन की उन नदियों से आता है जो किनारे के पर्वतों से निकलती हैं। जहाँ पानी तलहटी में पहुँचता है, वहाँ मरूद्यान बनते हैं। बीच में नदी का पानी नहीं, सिर्फ़ रेत है।
2. एक नदी 100 इकाई पानी लाती है। ऊपर के खेत 70 लेते हैं। निचली नदी के लिए कितना बचा? यदि ड्रिप सिंचाई से खेतों का हिस्सा एक-तिहाई घट जाए तो?
100 - 70 = 30 इकाई बचा। ड्रिप सिंचाई में खेत 70 × 2/3, यानी लगभग 47 इकाई लेते हैं, तो लगभग 53 इकाई नीचे बहता है। निचले पेड़ों के लिए ज़्यादा पानी।
3. मरुस्थल से तेल-गैस निकालने के दो लाभ और एक जोखिम लिखो।
लाभ: देश के लिए ऊर्जा और कोयले की जगह स्वच्छ गैस; रोज़गार। जोखिम: लापरवाह खुदाई से नाज़ुक मरुस्थलीय पौधों और भूजल को हानि।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि मरुस्थल में बिलकुल पानी नहीं होता। उसके किनारे बर्फ़-पिघलन की नदियाँ और मरूद्यान होते हैं।
- यह सोचना कि तारिम नदी समुद्र तक पहुँचती है। यह आंतरिक नदी है जो सूखी भूमि में समाप्त होती है।
- यह सोचना कि ऊपर अधिक खेत किसी को नुक़सान नहीं देते। वे निचली नदी को सुखा सकते हैं।
- यह सोचना कि तकलामकान हर जगह ठंडा है। यहाँ दिन गर्म और रातें ठंडी होती हैं, और किनारों को ठंडे पर्वत पानी देते हैं।