समान क्षेत्र में बल और त्वरण
विभवांतर U और अंतराल d वाली दो समांतर प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र समान होता है: E = U/d, + प्लेट से − प्लेट की ओर। आवेश q वाले कण पर बल F = qE लगता है। + आवेश क्षेत्र की दिशा में धकेला जाता है; − आवेश (जैसे इलेक्ट्रॉन) उसके उलटी दिशा में।
न्यूटन के दूसरे नियम से त्वरण a = qE/m है। यह स्थिर है, इसलिए गति के सामान्य समीकरण लगते हैं। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन से लगभग 1800 गुना कम है, इसलिए समान क्षेत्र में उसका त्वरण लगभग 1800 गुना होता है। इन प्रश्नों में गुरुत्व का बल विद्युत बल के सामने बहुत छोटा होता है और छोड़ दिया जाता है।
क्षेत्र के अनुदिश त्वरण: पाई गई चाल
आवेश q विराम से चलकर विभवांतर U पार करता है। क्षेत्र द्वारा किया गया कार्य qU है और वह गतिज ऊर्जा बन जाता है:
½ m v² = q U, इसलिए v = √(2qU/m)।
परिणाम केवल पार किए गए वोल्टेज पर निर्भर है, अंतराल d पर नहीं। U दोगुना करो तो चाल √2 गुना; U चार गुना करो तो चाल दोगुनी। इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (1 eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ J) वह ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉन 1 V पार करके पाता है। 1000 V से गुज़रकर प्रोटॉन 1000 eV पाता है।
क्षेत्र के आर-पार विक्षेपण
अब कण को चाल v₀ से क्षेत्र के लंबवत, लंबाई L की प्लेटों के बीच भेजो। यह ठीक क्षैतिज प्रक्षेप्य गति जैसा है:
प्लेटों के अनुदिश: कोई बल नहीं, इसलिए चाल v₀ स्थिर और अंदर का समय t = L/v₀।
प्लेटों के आर-पार: विराम से त्वरण a = qU/(md), इसलिए बग़ल का विक्षेपण y = ½ a t² = qUL²/(2 m d v₀²) और निकलते समय आड़ी चाल vy = a t।
प्लेटों के अंदर रास्ता परवलय है। प्लेटों से निकलने के बाद बल नहीं रहता, इसलिए कण सीधी रेखा में कोण θ पर चलता है, जहाँ tan θ = vy/v₀ = qUL/(m d v₀²)। अगर y आधे अंतराल से बड़ा हो जाए तो कण प्लेट से टकरा जाता है।
कैथोड-किरण ऑसिलोस्कोप
ऑसिलोस्कोप नली के चार भाग हैं। (1) इलेक्ट्रॉन गन: गर्म कैथोड इलेक्ट्रॉन छोड़ता है और ऊँचे वोल्टेज वाला ऐनोड उन्हें पतली किरण में तेज़ करता है। (2) ऊर्ध्वाधर (Y) प्लेटें: संकेत का वोल्टेज यहाँ लगता है और किरण को ऊपर-नीचे मोड़ता है। (3) क्षैतिज (X) प्लेटें: आरी-दाँत जैसा "टाइम-बेस" वोल्टेज किरण को एकसमान गति से बाएँ से दाएँ ले जाता है और फिर झट से लौटा देता है। (4) प्रतिदीप्त पर्दा: किरण जहाँ पड़ती है वहाँ चमकता है।
निश्चित त्वरक वोल्टेज पर पर्दे पर बिंदु का विस्थापन प्लेटों के वोल्टेज के समानुपाती होता है (Y ∝ U)। इसलिए पर्दा समय के साथ वोल्टेज का ग्राफ़ खींच देता है। इलेक्ट्रॉन इसलिए लिए जाते हैं कि वे हल्के हैं, छोटे वोल्टेज से भी बहुत मुड़ते हैं और तेज़ संकेतों पर लगभग तुरंत प्रतिक्रिया करते हैं।
खुद करके देखो
मेज़ पर कंचा आड़ा लुढ़काओ और दोस्त मेज़ को एक ओर थोड़ा झुका दे। कंचा आगे की चाल रखते हुए नीची ओर मुड़ जाएगा, परवलय में, बिल्कुल क्षेत्र को पार करते आवेश की तरह। अब उसे ढलान की सीध में लुढ़काओ: वह केवल तेज़ होगा। 3D में यही दो स्थितियाँ हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- E = U/d (समांतर प्लेटों के बीच)
- F = qE, a = qE/m
- ½ m v² = qU, v = √(2qU/m)
- 1 eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ J
- प्लेटों में समय: t = L/v₀
- विक्षेपण: y = qUL²/(2 m d v₀²); tan θ = qUL/(m d v₀²)
- ऑसिलोस्कोप: पर्दे पर विस्थापन ∝ प्लेट का वोल्टेज
हल किए गए उदाहरण
1. प्रोटॉन विराम से चलकर 1000 V से त्वरित होता है। उसकी चाल निकालो। (e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C, m = 1.67 × 10⁻²⁷ kg)
v = √(2qU/m) = √(2 × 1.6×10⁻¹⁹ × 1000 / 1.67×10⁻²⁷) = √(1.92×10¹¹) ≈ 4.4 × 10⁵ m/s।
2. इलेक्ट्रॉन विराम से चलकर 100 V पार करता है। उसकी चाल निकालो। (m = 9.11 × 10⁻³¹ kg)
v = √(2 × 1.6×10⁻¹⁹ × 100 / 9.11×10⁻³¹) = √(3.51×10¹³) ≈ 5.9 × 10⁶ m/s।
3. दो प्लेटें 2 cm दूर हैं और उन पर 200 V है। क्षेत्र और बीच में इलेक्ट्रॉन का त्वरण निकालो।
E = U/d = 200/0.02 = 10⁴ V/m। a = eE/m = 1.6×10⁻¹⁹ × 10⁴ / 9.11×10⁻³¹ ≈ 1.76 × 10¹⁵ m/s²।
4. ऐल्फ़ा कण (आवेश 2e) विराम से 500 V पार करता है। उसकी गतिज ऊर्जा जूल और eV में निकालो।
KE = qU = 2 × 1.6×10⁻¹⁹ × 500 = 1.6 × 10⁻¹⁶ J, यानी 1000 eV।
5. इलेक्ट्रॉन v₀ = 2 × 10⁷ m/s से 5 cm लंबी प्लेटों में आता है। आड़ा त्वरण 3.5 × 10¹⁴ m/s² है। अंदर का समय और विक्षेपण निकालो।
t = L/v₀ = 0.05/(2×10⁷) = 2.5 × 10⁻⁹ s। y = ½ a t² = 0.5 × 3.5×10¹⁴ × (2.5×10⁻⁹)² ≈ 1.1 × 10⁻³ m = 1.1 mm।
6. प्रोटॉन और ऐल्फ़ा कण को विराम से एक ही वोल्टेज से छोड़ा गया। उनकी चालों की तुलना करो (ऐल्फ़ा: आवेश 2e, द्रव्यमान प्रोटॉन का लगभग 4 गुना)।
v ∝ √(q/m)। ऐल्फ़ा का q/m प्रोटॉन का 2/4 = 1/2 है। तो vα/vₚ = √(1/2) ≈ 0.71। ऐल्फ़ा धीमा है, पर उसकी गतिज ऊर्जा (qU) दोगुनी है।
आम गलतियाँ
- जो कण विराम से नहीं चलता उस पर भी v = √(2qU/m) लगा देना (तब शुरुआती गतिज ऊर्जा जोड़ो)।
- भूल जाना कि ऋणात्मक आवेश क्षेत्र के तीरों के उलटा चलता है।
- यह सोचना कि पाई गई चाल प्लेटों के अंतराल d पर निर्भर है। यह केवल पार किए U पर निर्भर है।
- प्लेटों के बाद के सीधे रास्ते के लिए भी पूरी प्लेट की लंबाई लगाना। परवलय केवल प्लेटों के अंदर है; बाद में रास्ता सीधा है।
- E = U/d में cm और m मिला देना।