सीधा या वक्र? वक्रीय गति की शर्तें
पिंड सीधी रेखा में चलता है अगर कुल बल शून्य हो, या कुल बल ठीक उसके वेग की दिशा में (या उलटी दिशा में) हो। तब केवल चाल बदलती है।
पिंड वक्र पर (वक्रीय गति) चलता है जब कुल बल वेग की दिशा में नहीं होता। बल का बग़ल वाला भाग वेग को मोड़ता है। हर बिंदु पर वेग रास्ते की स्पर्श-रेखा के अनुदिश होता है और रास्ता उसी ओर मुड़ता है जिधर बल धकेलता है।
दो उदाहरण: तिरछा फेंका गया गेंद (गुरुत्व का बल नीचे, वेग तिरछा) और डोरी से घुमाया गया पत्थर (बल केंद्र की ओर, वेग स्पर्श-रेखा पर)।
वेग हमेशा स्पर्श-रेखा के अनुदिश
घूमते पत्थर की डोरी काट दो तो पत्थर उसी रेखा में उड़ता है जिसमें वह उस क्षण चल रहा था। वही रेखा स्पर्श-रेखा है। इससे पता चलता है कि किसी भी बिंदु पर वेग स्पर्श-रेखा के अनुदिश होता है। वक्रीय गति में वेग की दिशा बदलती रहती है, इसलिए चाल स्थिर रहने पर भी पिंड में त्वरण होता है।
गति का संयोजन
जब पिंड एक साथ दो गतियों में भाग लेता है, तो उसकी असली गति दोनों का संयोजन (सदिश योग) है। मुख्य नियम है स्वतंत्रता: हर गति ऐसे चलती है जैसे दूसरी हो ही नहीं। विस्थापन, वेग और त्वरण सदिश की तरह जुड़ते हैं।
नदी में नाव: शांत पानी में नाव की चाल u (आड़ी) और नदी की चाल w (किनारे के अनुदिश)। वास्तविक चाल v = √(u² + w²) और किनारे से कोण tan θ = u/w।
चौड़ाई D की नदी पार करने का समय t = D/u। नदी का बहाव w नाव को केवल w × t दूरी बहा देता है। समय नहीं बदलता।
गति का वियोजन
वियोजन उलटा काम है: एक गति को समकोण पर दो गतियों में तोड़ना। क्षैतिज से कोण θ पर वेग v के घटक vx = v cos θ और vy = v sin θ होते हैं। दोनों घटकों को अलग-अलग पढ़कर फिर जोड़ सकते हैं। प्रक्षेप्य गति में हम यही करेंगे: क्षैतिज में एक-सी चाल और ऊर्ध्वाधर में गुरुत्व के साथ गति।
नाव के विशेष मामले: सबसे कम समय में पार करने के लिए नाव को सीधे आड़ी दिशा में चलाओ (t = D/u)। ठीक सामने उतरने के लिए धारा के विरुद्ध लंब से कोण θ पर नाक करो जहाँ sin θ = w/u; इसके लिए u > w चाहिए।
खुद करके देखो
एक कंचे को झुकी मेज़ या काग़ज़ पर सीधा लुढ़काओ जबकि दोस्त काग़ज़ को धीरे-धीरे बग़ल में खींचता है। हर सेकंड पर कंचे की जगह पेंसिल से बिंदु लगाओ। रास्ता तिरछी रेखा बनेगा। काग़ज़ तेज़ खींचो तो रेखा और झुकेगी, पर कंचा उसी समय में दूसरे किनारे पहुँचेगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बल वेग की दिशा में → सीधा रास्ता
- बल वेग की दिशा में नहीं → वक्र रास्ता
- वेग रास्ते की स्पर्श-रेखा के अनुदिश
- v = √(u² + w²), tan θ = u/w (नदी पार करती नाव)
- पार करने का समय t = D/u; बहाव = w × t
- घटक: vₓ = v cos θ, v_y = v sin θ
- सबसे छोटा रास्ता: sin θ = w/u (धारा के विरुद्ध, u > w)
हल किए गए उदाहरण
1. नाव शांत पानी में 4 m/s से सीधी नदी पार करने चलती है। नदी 3 m/s से बहती है। नाव की वास्तविक चाल और किनारे से कोण निकालो।
v = √(4² + 3²) = 5 m/s। tan θ = u/w = 4/3, तो किनारे से θ ≈ 53°।
2. नदी 100 m चौड़ी है। u = 4 m/s आड़ा और w = 3 m/s हो तो पार करने का समय और बहाव निकालो।
t = D/u = 100/4 = 25 s। बहाव = w × t = 3 × 25 = 75 m धारा की दिशा में।
3. गेंद को ज़मीन से 30° ऊपर 10 m/s से मारा गया। उसके क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर वेग घटक निकालो।
vₓ = 10 cos 30° = 8.66 m/s और v_y = 10 sin 30° = 5 m/s।
4. हवाई जहाज़ हवा में 80 m/s से उत्तर की ओर चलता है। पश्चिम से पूर्व को 60 m/s की हवा चल रही है। ज़मीन के सापेक्ष उसकी चाल क्या है?
v = √(80² + 60²) = √10000 = 100 m/s, उत्तर से पूर्व की ओर कोण जिसका tan = 60/80।
5. u = 5 m/s की नाव को w = 3 m/s और 120 m चौड़ी नदी के ठीक सामने उतरना है। उसे किस दिशा में चलना होगा और कितना समय लगेगा?
sin θ = w/u = 3/5, तो लंब से धारा के विरुद्ध θ ≈ 37°। आड़ी चाल = √(5² − 3²) = 4 m/s। t = 120/4 = 30 s।
6. 0.8 m ऊँची मेज़ से गेंद 2 m/s की क्षैतिज चाल से लुढ़ककर गिरती है। गिरने का समय, क्षैतिज दूरी और ज़मीन पर पहुँचने की चाल निकालो (g = 10 m/s²)।
ऊर्ध्वाधर: 0.8 = ½ × 10 × t², तो t = 0.4 s। क्षैतिज दूरी = 2 × 0.4 = 0.8 m। ऊर्ध्वाधर चाल = 10 × 0.4 = 4 m/s। चाल = √(2² + 4²) = √20 ≈ 4.5 m/s।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि वक्र पर चलने के लिए रास्ते की दिशा में बल चाहिए। बल वेग की रेखा से हटकर होना चाहिए।
- यह सोचना कि तेज़ नदी में नाव को पार करने में ज़्यादा समय लगता है। समय केवल D/u है।
- समकोण पर लगी गतियों की चाल सीधे जोड़ देना। v = √(u² + w²) लो।
- वृत्त में घूमते पिंड का वेग केंद्र की ओर बनाना। वेग स्पर्श-रेखा पर है; बल और त्वरण केंद्र की ओर हैं।