ऊष्मागतिकी क्या है?
ऊष्मागतिकी भौतिकी का वह भाग है जो ऊष्मा, कार्य और ताप का, और ऊर्जा के रूप बदलने का अध्ययन करता है। यह बड़ी चीज़ों (सिलिंडर में गैस, इंजन, फ्रिज) को देखती है, एक-एक अणु को नहीं।
जिसका अध्ययन करते हैं वह निकाय (system) है, उसके चारों ओर सब कुछ परिवेश (surroundings)। दोनों के बीच की सीमा दीवार है।
- रुद्धोष्म दीवार (adiabatic): पूरी कुचालक, ऊष्मा पार नहीं होती।
- ऊष्मा-पारगम्य दीवार (diathermic): चालक, ऊष्मा पार होती है।
तापीय साम्य
गरम और ठंडी वस्तु को चालक दीवार से मिलाओ। ऊष्मा गरम से ठंडी की ओर बहती है। गरम ठंडी होती है, ठंडी गरम।
कुछ समय बाद दोनों का ताप बराबर हो जाता है। तब ऊष्मा का बहाव रुक जाता है और दोनों के दाब, आयतन, ताप बदलना बंद कर देते हैं। इसे तापीय साम्य कहते हैं।
छोटे में: जिन दो वस्तुओं का ताप बराबर है, वे तापीय साम्य में हैं।
साम्य का अर्थ है बड़े (स्थूल) राशियाँ समय के साथ नहीं बदलतीं। अणु अंदर चलते रहते हैं, पर उनका औसत व्यवहार वही रहता है।
ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम
शून्यवाँ नियम: यदि वस्तु A, वस्तु C के साथ तापीय साम्य में है, और वस्तु B भी C के साथ तापीय साम्य में है, तो A और B आपस में भी तापीय साम्य में हैं।
यह सीधी बात लगती है, पर बहुत ज़रूरी है। यह बताता है कि साम्य में सब वस्तुओं के लिए एक राशि बराबर होती है। वह राशि ताप है। यानी शून्यवाँ नियम ताप को सही अर्थ देता है।
इसे "शून्यवाँ" क्यों कहते हैं?
पहला और दूसरा नियम पहले ही नाम पा चुके थे। बाद में समझ आया कि यह नियम दोनों से अधिक मूल है, इसलिए इसे पहले नियम से भी पहले रखकर शून्यवाँ कहा गया।
थर्मामीटर इसका उपयोग कैसे करता है
थर्मामीटर वस्तु C है। शरीर के साथ साम्य में आकर वह शरीर का ताप ले लेता है। दो वस्तुओं के लिए एक ही रीडिंग आए तो वे दोनों बिना छुए भी एक ही ताप पर हैं।
अवस्था चर
साम्य में निकाय कुछ मापी जा सकने वाली राशियों से पूरा बताया जाता है। इन्हें अवस्था चर कहते हैं: दाब P, आयतन V, ताप T, मोल संख्या n, आंतरिक ऊर्जा U आदि।
अवस्था चर केवल अभी की अवस्था पर निर्भर है, इस पर नहीं कि निकाय वहाँ कैसे पहुँचा। (ऊष्मा और कार्य अवस्था चर नहीं हैं, ये रास्ते पर निर्भर हैं।)
विस्तीर्ण और गहन चर
- विस्तीर्ण (extensive): निकाय के आकार पर निर्भर। दो बराबर डिब्बे मिलाओ तो दुगुना। उदाहरण: V, n, द्रव्यमान, U.
- गहन (intensive): आकार पर निर्भर नहीं। मिलाने पर वही रहता है। उदाहरण: P, T, घनत्व।
आसान जाँच: मन में निकाय को आधा काटो। जो आधा हो जाए वह विस्तीर्ण, जो वही रहे वह गहन।
अवस्था समीकरण
सभी अवस्था चर स्वतंत्र नहीं हैं। कुछ तय कर दो तो बाकी भी तय हो जाते हैं। इन्हें जोड़ने वाला नियम अवस्था समीकरण है।
आदर्श गैस के लिए:
PV = nRT
यहाँ R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ गैस नियतांक है और T केल्विन में (T = t °C + 273)। वास्तविक गैसें कम दाब और ऊँचे ताप पर इसे अच्छी तरह मानती हैं।
इसी कारण एक अवस्था को P–V ग्राफ पर एक बिंदु से दिखा सकते हैं। अगले पाठों में प्रक्रमों के लिए यही उपयोग होगा।
परीक्षा टिप: 1–2 अंक के प्रश्नों में अक्सर शून्यवाँ नियम लिखना, तापीय साम्य की परिभाषा, या गहन-विस्तीर्ण चर छाँटना पूछा जाता है।
घर पर करके देखो
एक कप गरम और एक कप ठंडा पानी लो। दोनों में स्टील का चम्मच दो मिनट रखो, हैंडल छूकर देखो (सावधानी से)। फिर दोनों पानी एक स्टील के कटोरे में डालो और पाँच मिनट रुको। हिलाकर छुओ: पूरे पानी का एक ही ताप है, बीच का। आपने तापीय साम्य बना दिया।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तापीय साम्य ⇔ T_A = T_B
- शून्यवाँ नियम: A ~ C और B ~ C ⇒ A ~ B
- PV = nRT (आदर्श गैस का अवस्था समीकरण)
- T (K) = t (°C) + 273.15
- n = m / M (मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान)
- R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹
हल किए गए उदाहरण
1. थर्मामीटर पानी X में 36 °C और पानी Y में भी 36 °C पढ़ता है। X और Y मिलाने पर क्या ऊष्मा बहेगी?
दोनों थर्मामीटर के साथ साम्य में हैं। शून्यवें नियम से दोनों आपस में साम्य में हैं, यानी ताप बराबर है। कोई नेट ऊष्मा नहीं बहेगी।
2. गहन और विस्तीर्ण में छाँटो: दाब, आयतन, ताप, द्रव्यमान, घनत्व, आंतरिक ऊर्जा।
गहन: दाब, ताप, घनत्व। विस्तीर्ण: आयतन, द्रव्यमान, आंतरिक ऊर्जा।
3. 27 °C और −73 °C को केल्विन में बदलो।
T = t + 273. 27 °C → 300 K, −73 °C → 200 K.
4. 2 mol आदर्श गैस 0.05 m³ बर्तन में 300 K पर है। दाब ज्ञात करो। (R = 8.31)
P = nRT/V = (2 × 8.31 × 300)/0.05 = 4986/0.05 = 99 720 Pa ≈ 1.0 × 10⁵ Pa (लगभग 1 atm)।
5. 300 K की गैस को स्थिर दाब पर गरम किया जब तक आयतन दुगुना न हो। नया ताप?
स्थिर P पर V ∝ T. V दुगुना तो T दुगुना: T = 600 K (327 °C)।
6. टायर में हवा 27 °C पर 2.0 × 10⁵ Pa पर है। लंबी यात्रा के बाद हवा 57 °C पर है, आयतन वही। नया दाब?
स्थिर V पर P ∝ T (केल्विन)। T₁ = 300 K, T₂ = 330 K. P₂ = 2.0 × 10⁵ × 330/300 = 2.2 × 10⁵ Pa.
आम गलतियाँ
- यह कहना कि साम्य में वस्तुओं की ऊष्मा बराबर है। बराबर ताप होता है; संचित ऊर्जा बहुत अलग हो सकती है।
- PV = nRT में °C डाल देना। पहले केल्विन में बदलो।
- ऊष्मा या कार्य को अवस्था चर कहना। ये रास्ते पर निर्भर हैं।
- यह सोचना कि साम्य में अणु रुक जाते हैं। अणु चलते रहते हैं; केवल औसत राशियाँ नहीं बदलतीं।