Ontario Grade 12 PSK4U Introductory Kinesiology (Grade 12, University Preparation)
अध्याय: 3
1. A. Physical Activity and Sport in Society
A1 Social Change and Current Issues · A2 Participation – Influences and Benefits
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
2. B. The Basis of Movement
B1 Anatomy and Physiology · B2 Human Performance
- मानव शरीर के अंग तंत्र – हमारा शरीर स्तरों में बना है: कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग, अंग मिलकर अंग तंत्र और सारे तंत्र मिलकर पूरा जीव यानी हम। हर तंत्र का एक मुख्य काम है: कंकाल (ढाँचा), पेशी (गति), परिसंचरण (ढुलाई), श्वसन (गैसों का लेन-देन), पाचन (भोजन), उत्सर्जन (कचरा), तंत्रिका और अंतःस्रावी (नियंत्रण), प्रतिरक्षा (बचाव), त्वचा तंत्र और जनन तंत्र। कोई तंत्र अकेले काम नहीं करता: व्यायाम में पेशियाँ, दिल, फेफड़े और नसें साथ बदलकर शरीर के अंदर का हाल स्थिर रखते हैं (समस्थिति)।
- मानव प्रदर्शन: प्रशिक्षण, शरीर, भोजन और साधन कैसे असर डालते हैं – काइनेसियोलॉजी (kinesiology) मानव गति का विज्ञान है। प्रदर्शन तब सुधरता है जब प्रशिक्षण सिद्धांतों पर चले: प्रगतिशील अधिभार, विशिष्टता, व्यक्तिगत भिन्नता, उत्क्रमणीयता, विविधता और पुनर्प्राप्ति (FITT से योजना)। इस पर आंतरिक कारक (जीन, आयु, लिंग, शरीर-प्रकार, तंतु प्रकार, प्रेरणा) और बाहरी कारक (कोच, मौसम, ऊँचाई, उपकरण, नींद, पैसा) असर डालते हैं। अच्छा पोषण (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, पानी) ईंधन देता है। एर्गोजेनिक साधन प्रदर्शन बढ़ाने की कोशिश हैं: कुछ अनुमत, कुछ प्रतिबंधित।
3. C. Biomechanics and Motor Development
C1 The Mechanics of Movement · C2 Growth and Motor Development
- मानव शरीर के अंग तंत्र – हमारा शरीर स्तरों में बना है: कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग, अंग मिलकर अंग तंत्र और सारे तंत्र मिलकर पूरा जीव यानी हम। हर तंत्र का एक मुख्य काम है: कंकाल (ढाँचा), पेशी (गति), परिसंचरण (ढुलाई), श्वसन (गैसों का लेन-देन), पाचन (भोजन), उत्सर्जन (कचरा), तंत्रिका और अंतःस्रावी (नियंत्रण), प्रतिरक्षा (बचाव), त्वचा तंत्र और जनन तंत्र। कोई तंत्र अकेले काम नहीं करता: व्यायाम में पेशियाँ, दिल, फेफड़े और नसें साथ बदलकर शरीर के अंदर का हाल स्थिर रखते हैं (समस्थिति)।
- धारावाही चालक पर बल, विद्युत मोटर और प्रेरण – चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर एक धक्का यानी बल लगता है। तार क्षेत्र से 90° पर हो तो बल सबसे ज़्यादा, और क्षेत्र के समांतर हो तो शून्य। बल की दिशा फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से मिलती है। मोटर इसी बल से कुंडली घुमाती है; जनित्र उल्टा काम करके गति से धारा बनाता है।