क्रोमैटोग्राफी क्या है?
क्रोमैटोग्राफी मिश्रण के भागों को अलग करने का तरीका है। इसका अर्थ है "रंगों से लिखना", क्योंकि पहले प्रयोगों में पौधों के रंग अलग किए गए थे।
हर क्रोमैटोग्राफी में दो भाग होते हैं:
- स्थिर प्रावस्था (stationary phase): जो हिलती नहीं। जैसे कागज़, प्लेट पर सिलिका की पतली परत, या नली में भरा पाउडर।
- गतिशील प्रावस्था (mobile phase): जो चलती है। जैसे पानी, एथेनॉल जैसा विलायक, या हीलियम जैसी गैस।
हर पदार्थ दो तरफ़ खिंचता है। गतिशील प्रावस्था उसे आगे ले जाती है, स्थिर प्रावस्था उसे रोकती है। जो पदार्थ ज़्यादा चिपकता है, वह धीमा चलता है। इसलिए अलग पदार्थ अलग जगह पहुँचते हैं।
चिपकने के दो तरीके: अधिशोषण (adsorption), जब पदार्थ ठोस की सतह से चिपकता है (TLC, कॉलम), और विभाजन (partition), जब पदार्थ दो द्रवों में बँटता है (कागज़, जिसके रेशों में पानी रुका रहता है)।
कागज़ क्रोमैटोग्राफी और Rf मान
- नीचे से लगभग 2 सेमी पर पेंसिल से आधार रेखा खींचो (स्याही बह जाएगी)।
- रेखा पर मिश्रण का छोटा, गाढ़ा धब्बा लगाओ।
- कागज़ को विलायक में रखो। विलायक का तल आधार रेखा से नीचे हो।
- बर्तन ढक दो ताकि विलायक उड़े नहीं।
- विलायक ऊपर तक पहुँचने से पहले कागज़ निकालो और तुरंत विलायक अग्र पर निशान लगाओ।
Rf मान
Rf = धब्बे की तय दूरी ÷ विलायक अग्र की तय दूरी, दोनों आधार रेखा से (धब्बे के बीच तक)।
Rf की कोई इकाई नहीं होती और यह 0 से 1 के बीच होता है। एक ही विलायक, कागज़ और तापमान पर किसी पदार्थ का Rf हमेशा वही रहता है। इसलिए किसी अनजान पदार्थ का Rf ज्ञात पदार्थ से मिलाकर उसे पहचान सकते हैं।
मिश्रण कई धब्बे देता है, शुद्ध पदार्थ एक। जो पदार्थ विलायक में नहीं घुलता, वह आधार रेखा पर ही रहता है (Rf = 0)।
द्वि-विमीय क्रोमैटोग्राफी
अगर दो धब्बे एक-दूसरे पर आ जाएँ, तो कागज़ 90° घुमाकर दूसरे विलायक में फिर चलाओ। धब्बे दो दिशाओं में फैल जाते हैं।
पतली परत क्रोमैटोग्राफी (TLC)
TLC में स्थिर प्रावस्था काँच, प्लास्टिक या एल्युमिनियम की प्लेट पर सिलिका जेल (SiO₂) या एलुमिना की पतली परत होती है। गतिशील प्रावस्था कोई कार्बनिक विलायक होता है।
- TLC कागज़ से तेज़ है और धब्बे साफ़ बनते हैं।
- सिलिका ध्रुवीय (polar) है। ध्रुवीय पदार्थ इससे ज़्यादा चिपकते हैं, उनका Rf कम होता है।
- ज़्यादा ध्रुवीय विलायक सबको ऊपर खींचता है, सबका Rf बढ़ जाता है।
रंगहीन धब्बे कैसे देखें
- UV रोशनी: प्लेट चमकती है और धब्बे अलग दिखते हैं।
- आयोडीन वाष्प: धब्बे भूरे हो जाते हैं।
- निनहाइड्रिन: अमीनो अम्ल बैंगनी हो जाते हैं।
शुद्धता की जाँच
उत्पाद को शुद्ध नमूने के बगल में चलाओ। एक ही धब्बा, उसी Rf पर = शुद्ध। ज़्यादा धब्बे = अशुद्धि या बचा हुआ कच्चा पदार्थ।
कॉलम क्रोमैटोग्राफी
काँच की नली में सिलिका जेल या एलुमिना भरा जाता है (स्थिर प्रावस्था)। मिश्रण ऊपर डालते हैं। फिर विलायक, जिसे निक्षालक (eluent) कहते हैं, ऊपर से डालते हैं और वह नीचे बहता है।
मिश्रण के भाग अलग-अलग रंगीन पट्टियों (bands) में नीचे चलते हैं। जो सबसे कम चिपकता है, वह सबसे तेज़ चलता है और सबसे पहले निकलता है। हर पट्टी को अलग फ़्लास्क में इकट्ठा करके विलायक उड़ा देते हैं।
कॉलम से शुद्ध पदार्थ की बड़ी मात्रा इकट्ठी की जाती है। अच्छा विलायक चुनने के लिए पहले छोटा TLC कर लेते हैं।
गैस क्रोमैटोग्राफी (GC) और अवधारण समय
GC में गतिशील प्रावस्था एक निष्क्रिय वाहक गैस (हीलियम या नाइट्रोजन) होती है। स्थिर प्रावस्था एक बहुत लंबी, पतली, कुंडलीदार नली के अंदर द्रव की परत होती है, जो ओवन में रखी रहती है। नमूना गैस बनना चाहिए।
अवधारण समय (retention time) = नमूना डालने से लेकर पदार्थ के डिटेक्टर तक पहुँचने का समय। यह निर्भर करता है:
- स्थिर प्रावस्था से कितना चिपकता है,
- क्वथनांक पर (जल्दी उड़ने वाला पहले निकलता है),
- नली के तापमान और गैस के बहाव पर।
डिटेक्टर एक क्रोमैटोग्राम बनाता है: हर पदार्थ की एक चोटी। चोटी का समय बताता है पदार्थ कौन-सा है (ज्ञात पदार्थ से मिलाकर)। चोटी का क्षेत्रफल बताता है कितना है। GC को मास स्पेक्ट्रोमीटर से जोड़कर (GC-MS) हर चोटी पक्की तरह पहचानी जाती है।
HPLC
उच्च दक्षता द्रव क्रोमैटोग्राफी में द्रव को तेज़ दबाव से कसे हुए कॉलम में धकेला जाता है। यह उन पदार्थों के लिए है जो गरम करने पर टूट जाते हैं।
घर पर करके देखो
स्केच-पेन क्रोमैटोग्राफी: पेंसिल की रेखा, स्याही का बिंदु, गिलास में 1 सेमी पानी, 10 मिनट, अग्र पर निशान, फिर हर रंग का Rf। दो अलग कंपनियों के काले पेन से करो: क्या उनमें एक जैसे रंग हैं? अनुमान लगाओ: नमक का पानी लेने पर Rf बदलेगा? फिर 3D के खेल वाले चरण में जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- Rf = धब्बे की दूरी ÷ विलायक अग्र की दूरी
- 0 ≤ Rf ≤ 1 (कोई इकाई नहीं)
- धब्बे की दूरी = Rf × विलायक अग्र की दूरी
- अवधारण समय = नमूना डालने से डिटेक्टर पर चोटी तक का समय
- पदार्थ की मात्रा ∝ उसकी चोटी का क्षेत्रफल (GC/HPLC)
- ज़्यादा चिपकना → कम Rf, देर से निकलना, लंबा अवधारण समय
हल किए गए उदाहरण
1. विलायक अग्र 8.0 सेमी चला। नीला धब्बा 2.0 सेमी चला। Rf निकालो।
पंक्ति 1: Rf = धब्बे की दूरी ÷ विलायक की दूरी। पंक्ति 2: Rf = 2.0 ÷ 8.0। पंक्ति 3: Rf = 0.25।
2. एक रंग का Rf = 0.60 है। विलायक अग्र 9.5 सेमी चला। रंग कितना चला?
पंक्ति 1: धब्बे की दूरी = Rf × विलायक की दूरी। पंक्ति 2: = 0.60 × 9.5। पंक्ति 3: = 5.7 सेमी।
3. एक अनजान धब्बा 3.3 सेमी चला, विलायक 6.0 सेमी। इस विलायक में ज्ञात Rf: कैफ़ीन 0.30, एस्पिरिन 0.55, पैरासिटामॉल 0.75। धब्बा किसका है?
पंक्ति 1: Rf = 3.3 ÷ 6.0 = 0.55। पंक्ति 2: सूची से मिलाओ: एस्पिरिन का Rf 0.55 है। पंक्ति 3: यह शायद एस्पिरिन है (पक्का करने के लिए शुद्ध एस्पिरिन के बगल में चलाओ)।
4. सिलिका TLC पर A बहुत ध्रुवीय है और B अध्रुवीय। किसका Rf बड़ा होगा?
पंक्ति 1: सिलिका ध्रुवीय है, ध्रुवीय पदार्थ उससे ज़्यादा चिपकते हैं। पंक्ति 2: A ज़्यादा चिपकता है, कम चलता है। पंक्ति 3: B का Rf बड़ा है।
5. GC में चोटियाँ 2.1 मिनट (एथेनॉल) और 5.0 मिनट (अनजान) पर हैं। पहले कौन निकला और क्यों?
पंक्ति 1: अवधारण समय = डिटेक्टर तक पहुँचने का समय। पंक्ति 2: एथेनॉल 2.1 मिनट पर पहले पहुँचा। पंक्ति 3: वह स्थिर प्रावस्था से कम चिपकता है और/या जल्दी उड़ता है।
6. GC में चोटी X का क्षेत्रफल 300 और Y का 100 इकाई है। डिटेक्टर दोनों पर बराबर असर देता है। मिश्रण में X कितने प्रतिशत है?
पंक्ति 1: कुल क्षेत्रफल = 300 + 100 = 400। पंक्ति 2: X का % = 300 ÷ 400 × 100। पंक्ति 3: = 75%।
आम गलतियाँ
- कागज़ के निचले किनारे से नापना। दोनों दूरियाँ आधार रेखा से नापी जाती हैं।
- आधार रेखा पेन से खींचना। स्याही बहकर नए धब्बे बना देती है। पेंसिल लो।
- विलायक को आधार रेखा से ऊपर भर देना। धब्बा चढ़ने की बजाय पानी में घुल जाता है।
- यह सोचना कि सबसे ज़्यादा चिपकने वाला कॉलम से पहले निकलता है। उल्टा है: सबसे कम चिपकने वाला पहले।