चिह्न (sign) क्या है?
चिह्न-विज्ञान (semiotics) चिह्नों और उनसे बनने वाले अर्थ का अध्ययन है। चिह्न कोई भी चीज़ है जो किसी और चीज़ की जगह खड़ी हो: शब्द, फ़ोटो, रंग, आवाज़, लोगो, इशारा।
फ़र्डिनैंड द सस्यूर ने चिह्न के दो भाग बताए:
- संकेतक (signifier): जो रूप हम देखते-सुनते हैं (अक्षर ग-ु-ला-ब, या गुलाब की तस्वीर)।
- संकेतित (signified): वह विचार जो मन में आता है।
दोनों का रिश्ता ज़्यादातर मनमाना (arbitrary) है: "गुलाब" या "rose" अक्षरों में फूल जैसा कुछ नहीं। यह रिश्ता हम भाषा और संस्कृति से सीखते हैं।
डिज़ाइन में भी यही है। प्रोडक्ट सिमेंटिक्स में चीज़ का आकार बताता है कि उसे कैसे इस्तेमाल करें: उभरा बटन कहता है "दबाओ", हैंडल कहता है "खींचो"।
निरूपण, संकेतार्थ और मिथक (बार्थ)
रोलां बार्थ ने अर्थ की परतें बताईं:
- निरूपण (denotation): पहला, सीधा अर्थ। लाल गुलाब एक लाल फूल है।
- संकेतार्थ (connotation): दूसरा अर्थ जो संस्कृति जोड़ती है। लाल गुलाब से प्यार का भाव।
- मिथक (myth): जब कोई संकेतार्थ इतना दोहराया जाए कि वह स्वाभाविक और सच लगने लगे। मिथक चुपचाप मूल्य और विचारधारा फैलाते हैं।
विज्ञापन, फ़िल्म पोस्टर, पत्रिका कवर, म्यूज़िक वीडियो कई चिह्नों से बनते हैं। विश्लेषण का मतलब: चिह्न गिनो, फिर हर एक का निरूपण और संकेतार्थ लिखो।
आइकन, इंडेक्स और सिंबल (पर्स)
चार्ल्स सैंडर्स पर्स ने चिह्नों को इस आधार पर बाँटा कि वे अर्थ से कैसे जुड़ते हैं:
- आइकन: चीज़ जैसा दिखता या सुनाई देता है (आग की फ़ोटो, आग वाला इमोजी)।
- इंडेक्स: असली कारण-परिणाम का रिश्ता (धुआँ = आग, पैरों के निशान = कोई चला, बुख़ार = बीमारी)।
- सिंबल: सिर्फ़ सीखा हुआ नियम (शब्द "आग", प्राथमिक उपचार का लाल क्रॉस, झंडा)।
कई चिह्न मिले-जुले होते हैं। नक्शा आइकन भी है (ज़मीन जैसा दिखता है) और सिंबल भी (उसके रंग एक कुंजी से चलते हैं)।
कोड: तकनीकी, प्रतीकात्मक और मंच के चिह्न-कोड
कोड चिह्न पढ़ने के साझा नियम हैं।
- तकनीकी कोड: मीडिया कैसे बना: कैमरा कोण, शॉट का आकार, रोशनी, एडिटिंग, आवाज़। नीचे से लिया शॉट व्यक्ति को ताक़तवर दिखाता है।
- प्रतीकात्मक कोड: फ़्रेम में चीज़ों का अर्थ: रंग, पोशाक, सामान, जगह, हाव-भाव।
- लिखित कोड: हेडलाइन, कैप्शन, फ़ॉन्ट।
रंगमंच पर दर्शक मंच के चिह्न-कोड पढ़ते हैं: पोशाक और मेकअप, सेट और सामान, रोशनी और रंग, संगीत, इशारे, चेहरे के भाव, आवाज़ और प्रॉक्सेमिक्स (अभिनेताओं के बीच की दूरी: पास = नज़दीकी, दूर = दूरी या दुश्मनी)। एक अभिनेता ऊँची कुर्सी पर और दूसरा घुटनों पर, यह ताक़त का चिह्न है।
बहुअर्थता और एंकरेज
तस्वीर अक्सर बहुअर्थी (polysemic) होती है: उसके कई अर्थ हो सकते हैं। गुलाब की फ़ोटो का मतलब प्यार, दुख, बगीचा या सेल कुछ भी हो सकता है।
एंकरेज वह है जब शब्द (कैप्शन, हेडलाइन, स्लोगन) एक अर्थ बाँध दें। "सालगिरह मुबारक" प्यार बाँधता है; "प्यार भरी याद में" दुख। बनाने वाले एंकरेज से हमें अपना पसंदीदा अर्थ (preferred reading) पढ़वाते हैं।
चिह्न-विज्ञान से निकले दूसरे सिद्धांत
- संरचनावाद (लेवी-स्ट्रॉस): अर्थ द्विआधारी विरोधों (binary oppositions) से बनता है: अच्छा/बुरा, गाँव/शहर, जवान/बूढ़ा। हीरो "अच्छा" तभी लगता है जब सामने खलनायक हो।
- कथा-विज्ञान (तोदोरोव): कई कहानियाँ चलती हैं संतुलन → गड़बड़ी → पहचान → सुधार की कोशिश → नया संतुलन।
- विधा सिद्धांत (नील): विधाएँ (genre) दोहराए गए चिह्नों और थोड़े-से नयेपन से बनती हैं और समय के साथ बदलती हैं।
- उत्तर-आधुनिकतावाद (बॉद्रिलार्ड): मीडिया से भरी दुनिया में चिह्न दूसरे चिह्नों की नकल करते जाते हैं, और नकल (simulacra) असली से ज़्यादा असली लगने लगती है: इसे अति-यथार्थ (hyperreality) कहते हैं।
करके देखो: विज्ञापन को चिह्न-विज्ञानी की तरह पढ़ो
घर पर कोई विज्ञापन या पोस्टर लो। तीन कॉलम बनाओ: चिह्न | निरूपण | संकेतार्थ। कम से कम पाँच चिह्न लिखो (रंग, मॉडल का पोज़, फ़ॉन्ट, जगह, लोगो)। फिर हाथ से स्लोगन ढको: क्या अर्थ खुल जाता है? हटाओ: स्लोगन कौन-सा अर्थ बाँधता है? 3D के आख़िरी चरण में एक ही चीज़ को तीन कैप्शन के साथ आज़माओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चिह्न = संकेतक (रूप) + संकेतित (विचार)
- निरूपण = सीधा अर्थ; संकेतार्थ = सांस्कृतिक, भावनात्मक अर्थ
- आइकन = समानता; इंडेक्स = कारण/परिणाम; सिंबल = सीखा हुआ नियम
- एंकरेज: शब्द बहुअर्थी तस्वीर का एक अर्थ बाँधते हैं
- मिथक (बार्थ): स्वाभाविक लगने वाला संकेतार्थ जो मूल्य फैलाता है
हल किए गए उदाहरण
1. इत्र के विज्ञापन का विश्लेषण करो: रात में बालकनी पर लाल पोशाक में एक महिला, स्लोगन "अविस्मरणीय बनो"।
चिह्न: लाल पोशाक (निरूपण: कपड़ा; संकेतार्थ: जुनून, आत्मविश्वास); रात की शहर की रोशनियाँ (शान-शौक़त, रोमांच); ऊँची बालकनी (रुतबा); स्लोगन अर्थ बाँधता है: इत्र लगाओ तो याद रखे जाओगे। मिथक: सुंदरता और सफलता ख़रीदी जा सकती है।
2. वर्गीकरण करो: (a) 39 °C दिखाता थर्मामीटर, (b) मैप-पिन इमोजी, (c) हरी ट्रैफ़िक लाइट।
(a) इंडेक्स: ऊँची रीडिंग शरीर की गर्मी से बनी। (b) आइकन: पिन जैसा दिखता है। (c) सिंबल: हरा मतलब "चलो" सिर्फ़ इसलिए कि हमने तय किया।
3. मंच पर राजा ऊँचे चबूतरे पर खड़ा है, नौकर दूर ठंडी नीली रोशनी में घुटनों पर है। मंच के चिह्न-कोड क्या कहते हैं?
ऊँचाई ताक़त दिखाती है; दूरी (प्रॉक्सेमिक्स) सामाजिक फ़ासला दिखाती है; नीली रोशनी तनाव या उदासी। बिना एक शब्द बोले दर्शक समझ जाते हैं कि राजा ताक़तवर और दूर है।
आम गलतियाँ
- संकेतक और संकेतित में गड़बड़: संकेतक रूप (तस्वीर, शब्द) है, संकेतित विचार।
- विश्लेषण में सिर्फ़ निरूपण लिखना। नंबर संकेतार्थ से मिलते हैं: चिह्न क्या सुझाता है और क्यों।
- हर तस्वीर को "सिंबल" कहना। फ़ोटो मुख्यतः आइकन है, धुआँ इंडेक्स; सिर्फ़ सीखे नियम वाले चिह्न सिंबल हैं।
- एंकरेज भूल जाना: हमेशा लिखो कि कैप्शन या स्लोगन अर्थ को कैसे सीमित करता है।