Spain 1º Bachillerato Performing Arts I
अध्याय: 5
1. Performing arts heritage
Concept of performing arts · History of performing arts · Drama, theatricality and performativity · Intangible heritage
- प्रदर्शन कलाएँ: संगीत, नृत्य और रंगमंच, जीवंत – प्रदर्शन कलाएँ वे कलाएँ हैं जो कलाकार के शरीर और आवाज़ से, समय में, जीवंत होती हैं: संगीत, नृत्य और रंगमंच (और ओपेरा, म्यूज़िकल, नुक्कड़ नाटक जैसे मिश्रित रूप)। हर प्रदर्शन को कलाकार, दर्शक और स्थान चाहिए। शो विचार से रिहर्सल, फिर प्रदर्शन और समीक्षा तक बढ़ता है।
- रंगमंच का इतिहास: यूनानी उत्सवों से ब्लैक बॉक्स तक – रंगमंच अनुष्ठान, गीत और कथा से शुरू हुआ। प्राचीन यूनान (लगभग 500 ई.पू.) में नाटक धार्मिक उत्सवों का हिस्सा थे, खुले रंगमंचों में थिएट्रॉन, ऑर्केस्ट्रा और स्केने के साथ, मुखौटों और कोरस के साथ। शास्त्रीय एशिया ने अपने रूप बनाए: नाट्यशास्त्र और रस के सिद्धांत वाला संस्कृत नाटक, जापान का नो और बाद में काबुकी, चीनी ऑपेरा। मध्यकालीन यूरोप में धार्मिक नाटक गाड़ियों पर होते थे; पुनर्जागरण इटली में कॉमेडिया देल’आर्ते; एलिज़ाबेथन लंदन में आगे निकले मंच वाले गोल रंगमंच (शेक्सपियर)। 1600 के दशक से प्रोसीनियम मेहराब ने रंगे दृश्यों को फ़्रेम किया, और 1800 के अंत में यथार्थवाद (इब्सन, चेख़व) रोज़मर्रा के कमरे और 'चौथी दीवार' लाया। 1900 के दशक में स्तानिस्लावस्की का सच्चा अभिनय, ब्रेख़्त का एपिक थिएटर, शारीरिक और प्रयोगधर्मी रंगमंच और लचीले ब्लैक बॉक्स आए। मंच का आकार, समाज और दर्शक हमेशा तय करते हैं कि नाटक कैसे लिखे और खेले जाएँ।
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
- सांस्कृतिक विरासत – सांस्कृतिक विरासत वह सब है जो किसी समुदाय को अतीत से मिला, जिसे वह आज महत्व देता है और आगे सौंपना चाहता है: इमारतें और स्मारक, संग्रहालय की चीज़ें, भाषाएँ, संगीत, नृत्य, त्योहार, हुनर, खाना और ज्ञान। मूर्त विरासत छू सकते हैं (अचल जैसे मंदिर और पुल, चल जैसे सिक्के और पांडुलिपियाँ); अमूर्त विरासत जी और निभाई जाती है; प्राकृतिक विरासत में ख़ास भू-दृश्य और जीव हैं। विरासत पहचान देती है, इतिहास सिखाती है, पर्यटन से कमाई लाती है और संस्कृतियों को जोड़ती है। मौसम, प्रदूषण, भीड़, लापरवाह निर्माण, उपेक्षा और संघर्ष इसे ख़तरे में डालते हैं; संरक्षण, कानून, संग्रहालय, विरासत सूचियाँ, शिक्षा और स्थानीय लोग इसे बचाते हैं।
2. Stage expression and communication
Stage sign codes · Stage space and theatrical convention · Visual stage resources · Dramatic text · Dramatic conflict · Building a character · Improvisation and collective creation
- चिह्न-विज्ञान (Semiotics): चिह्न अर्थ कैसे बनाते हैं – चिह्न-विज्ञान चिह्नों का अध्ययन है। चिह्न = संकेतक (signifier: दिखने वाला रूप) + संकेतित (signified: मन में आने वाला विचार)। निरूपण (denotation) सीधा अर्थ है, संकेतार्थ (connotation) समाज का जोड़ा भाव। चिह्न आइकन, इंडेक्स या सिंबल हो सकते हैं। कोड पढ़ने के साझा नियम हैं और कैप्शन एक अर्थ बाँधता है (एंकरेज)। बार्थ ने "स्वाभाविक" लगने वाले संकेतार्थों को मिथक कहा।
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
- अभिनय: किरदार को ज़िंदा करना – अभिनय यानी किसी किरदार को दर्शकों के सामने सच्चाई से दिखाना। अभिनेता पहले परिस्थितियाँ (कौन, कहाँ, कब) और किरदार का लक्ष्य (उसे क्या चाहिए) समझता है। फिर शरीर (मुद्रा, हाव-भाव, स्तर, रुतबा) और आवाज़ (ज़ोर, रफ़्तार, सुर, ठहराव) से उसे दिखाता है। मंच पर अभिनय क्रिया और प्रतिक्रिया है: साथी को सुनो और जवाब दो। टाइमिंग, पॉज़ और तनाव दृश्य को आकार देते हैं, और रंगमंच असली सामाजिक मुद्दों को भी उठा सकता है।
- डिवाइज़्ड ड्रामा: समूह में नया नाटक गढ़ना – डिवाइज़िंग का मतलब है कि एक समूह बिना लिखी स्क्रिप्ट के, मिलकर एक नया नाटक बनाता है। शुरुआत एक उत्तेजक (stimulus) से होती है, फिर विचार-मंथन, शोध और तात्कालिक अभिनय, फिर अच्छे हिस्सों को क्रम में रखना, और अंत में राय लेकर रिहर्सल और सुधार। वर्किंग नोटबुक में हर फ़ैसला और उसका कारण लिखा जाता है।
3. Acting
Physical preparation for acting · Acting methods · The performer's instruments · Character representation · Performance score
- अभिनय: किरदार को ज़िंदा करना – अभिनय यानी किसी किरदार को दर्शकों के सामने सच्चाई से दिखाना। अभिनेता पहले परिस्थितियाँ (कौन, कहाँ, कब) और किरदार का लक्ष्य (उसे क्या चाहिए) समझता है। फिर शरीर (मुद्रा, हाव-भाव, स्तर, रुतबा) और आवाज़ (ज़ोर, रफ़्तार, सुर, ठहराव) से उसे दिखाता है। मंच पर अभिनय क्रिया और प्रतिक्रिया है: साथी को सुनो और जवाब दो। टाइमिंग, पॉज़ और तनाव दृश्य को आकार देते हैं, और रंगमंच असली सामाजिक मुद्दों को भी उठा सकता है।
- रंगमंच के साधक: जिन्होंने अभिनय का तरीक़ा बदल दिया – रंगमंच-साधक (practitioner) वह व्यक्ति है जिसने अभिनय, निर्देशन या नाटक बनाने का एक साफ़ तरीक़ा बनाया, जिसे आज दूसरे सीखते और अपनाते हैं। हर साधक के लिए चार बातें पढ़ो: संदर्भ (कब और कहाँ काम किया), उद्देश्य (दर्शकों पर क्या असर चाहा), कार्य-पद्धति (रिहर्सल और प्रशिक्षण के अभ्यास) और शैली (मंच पर नतीजा कैसा दिखता है)। स्तानिस्लावस्की ने 'चौथी दीवार' के पीछे यथार्थवादी अभिनय बनाया। ब्रेख़्त ने वह दीवार तोड़ी ताकि दर्शक समाज के बारे में सोचें। आर्तो इंद्रियों को झकझोरना चाहते थे; ग्रोतोव्स्की ने रंगमंच को सिर्फ़ अभिनेता के शरीर तक सीमित किया; बोआल ने दर्शकों को 'दर्शक-अभिनेता' बनाया जो कहानी बदलते हैं। आज फ़्रैंटिक असेंबली, कॉम्प्लिसिते, नीहाई और पंचड्रंक जैसी कंपनियाँ इन्हीं विचारों से फ़िज़िकल और इमर्सिव थिएटर बनाती हैं।
4. Staging and performance
The stage show · Types of stage shows · Other stage forms · Designing a show · Rehearsals · Staging performances · Teamwork in theatre
- प्रदर्शन कलाएँ: संगीत, नृत्य और रंगमंच, जीवंत – प्रदर्शन कलाएँ वे कलाएँ हैं जो कलाकार के शरीर और आवाज़ से, समय में, जीवंत होती हैं: संगीत, नृत्य और रंगमंच (और ओपेरा, म्यूज़िकल, नुक्कड़ नाटक जैसे मिश्रित रूप)। हर प्रदर्शन को कलाकार, दर्शक और स्थान चाहिए। शो विचार से रिहर्सल, फिर प्रदर्शन और समीक्षा तक बढ़ता है।
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
- अभिनय: किरदार को ज़िंदा करना – अभिनय यानी किसी किरदार को दर्शकों के सामने सच्चाई से दिखाना। अभिनेता पहले परिस्थितियाँ (कौन, कहाँ, कब) और किरदार का लक्ष्य (उसे क्या चाहिए) समझता है। फिर शरीर (मुद्रा, हाव-भाव, स्तर, रुतबा) और आवाज़ (ज़ोर, रफ़्तार, सुर, ठहराव) से उसे दिखाता है। मंच पर अभिनय क्रिया और प्रतिक्रिया है: साथी को सुनो और जवाब दो। टाइमिंग, पॉज़ और तनाव दृश्य को आकार देते हैं, और रंगमंच असली सामाजिक मुद्दों को भी उठा सकता है।
- समूह: कैसे बनते हैं और हमें कैसे बदलते हैं – समूह दो या अधिक लोगों का ऐसा मेल है जिसमें वे आपस में बात करते हैं, एक लक्ष्य रखते हैं, मानक मानते हैं और 'हम' महसूस करते हैं। लोग सुरक्षा, प्रतिष्ठा, आत्म-सम्मान, ज़रूरतों और लक्ष्यों के लिए समूह में जुड़ते हैं। समूह पाँच चरणों से गुज़रता है: निर्माण, विप्लव, प्रतिमान, निष्पादन, समापन। संरचना में भूमिका, मानक, प्रतिष्ठा और संसक्तता होते हैं। प्रकार: प्राथमिक/द्वितीयक, औपचारिक/अनौपचारिक, अंतःसमूह/बाह्यसमूह। समूह हमारा व्यवहार भी बदलता है: सामाजिक स्वैराचार में साझा काम में हर व्यक्ति कम मेहनत करता है; समूह ध्रुवीकरण में चर्चा के बाद समूह की राय और चरम हो जाती है।
5. Reception of performing arts
The audience · Theatrical reception · Analysing stage works · Intellectual property in theatre
- दर्शकत्व: हम फ़िल्में और नाटक कैसे देखते हैं – दर्शकत्व इस बात का अध्ययन है कि दर्शक फ़िल्में और प्रस्तुतियाँ कैसे देखते, महसूस करते और उनसे अर्थ बनाते हैं। पुराने विचार दर्शक को निष्क्रिय मानते थे, जो बस संदेश सोख लेता है। नए विचार उसे सक्रिय मानते हैं: वह अनुमान लगाता, परखता, महसूस करता और अपना जीवन जोड़ता है। फ़िल्में कैमरा, संपादन, ध्वनि और दृष्टिकोण से दर्शक को एक जगह रखती हैं, फिर भी अलग लोग एक ही फ़िल्म को अलग पढ़ सकते हैं। लाइव रंगमंच कलाकार और दर्शक के बीच दोतरफ़ा रिश्ता जोड़ता है।
- डेटा सुरक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकार – बौद्धिक संपदा (IP) मन की रचना है, जैसे कहानी, गीत, प्रोग्राम, आविष्कार या लोगो। बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) निर्माता को उसके उपयोग पर नियंत्रण देते हैं। कॉपीराइट रचनात्मक कार्य (लेख, संगीत, कला, सॉफ़्टवेयर कोड) को बनते ही अपने-आप बचाता है; पेटेंट नए, उपयोगी आविष्कार को लगभग 20 साल बचाता है और इसके लिए आवेदन करना पड़ता है; ट्रेडमार्क ब्रांड नाम, लोगो और नारे बचाता है। साहित्यिक चोरी दूसरे का काम बिना श्रेय अपना बताना है। उल्लंघन सुरक्षित IP को बिना अनुमति इस्तेमाल करना है। सार्वजनिक लाइसेंस से निर्माता अपनी शर्तों पर साझा करते हैं: रचनात्मक कार्यों के लिए क्रिएटिव कॉमन्स (BY, SA, NC, ND), और सॉफ़्टवेयर के लिए GPL (कॉपीलेफ़्ट: बदला संस्करण खुला रहे) और Apache (उदार: नोटिस रखकर बंद उत्पाद में भी)।