डिवाइज़िंग क्या है?
डिवाइज़िंग (सामूहिक नाट्य रचना) यानी मिलकर नया नाटक बनाना। शुरू में कोई नाटककार नहीं होता। अभिनेता, और अक्सर निर्देशक, डिज़ाइनर और संगीतकार, सब मिलकर नाटक लिखते हैं।
हर नाटक का एक कलात्मक उद्देश्य होता है: दर्शक क्या सोचें या महसूस करें। हर फ़ैसला उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए।
उत्तेजक से अपने विचार बनाना
उत्तेजक (stimulus) यानी शुरुआत का बिंदु: फ़ोटो, कविता, गाना, कोई चीज़, अख़बार की हेडलाइन, पेंटिंग या 'आज़ादी' जैसा विषय।
- सवाल पूछो: कौन, कहाँ, कब, पहले क्या हुआ, बाद में क्या?
- विचार-मंथन: हर विचार बड़े काग़ज़ या स्टिकी नोट पर लिखो। अभी परखो मत।
- एक साफ़ विषय और दर्शक चुनो: नाटक किसके लिए है और वे क्या लेकर जाएँ?
शोध और रिहर्सल की विधियाँ
शोध
विषय से जुड़े तथ्य, असली कहानियाँ, बातचीत, तस्वीरें और संगीत खोजो, ताकि नाटक सच्चा लगे।
रिहर्सल की तकनीकें
- तात्कालिक अभिनय (improvisation): बिना स्क्रिप्ट का अभिनय, तुरंत या कुछ मिनट की तैयारी के साथ।
- फ़्रीज़ फ़्रेम / टैब्लो: शरीरों से बना स्थिर चित्र, जिसमें ऊँचाई, दूरी और चेहरे के भाव दिखें।
- थॉट-ट्रैकिंग: फ़्रीज़ फ़्रेम में खड़ा अभिनेता पात्र के मन की बात बोलता है।
- हॉट-सीटिंग: समूह पात्र से सवाल पूछता है, अभिनेता पात्र बनकर जवाब देता है।
- रोल ऑन द वॉल: शरीर की रूपरेखा, बाहर पात्र क्या दिखाता है, अंदर क्या महसूस करता है।
- फ़िज़िकल थिएटर और साउंडस्केप: शरीर से चीज़ें बनाना; आवाज़ों से जगह की ध्वनि बनाना।
सहयोग, संरचना और सुधार
अच्छा समूह काम बराबर बाँटता है, सुनता है और मिलकर फ़ैसले लेता है। एक संरचना चुनो:
- रैखिक: घटनाएँ समय के क्रम में।
- अरैखिक / प्रकरणात्मक: फ़्लैशबैक, आगे की झलक, या विषय से जुड़े छोटे-छोटे दृश्य।
- चक्रीय: अंत फिर शुरुआत वाले चित्र पर लौटता है।
सुधार यानी कमज़ोर हिस्सा काटना, दृश्यों के बीच बदलाव साफ़ करना, रोशनी, ध्वनि, वेशभूषा या कोई ख़ास प्रॉप जोड़ना, और देखना कि हर पल उद्देश्य के काम आए। बाहर के किसी व्यक्ति से राय लो और फिर आज़माओ।
वर्किंग नोटबुक (डिवाइज़िंग लॉग)
वर्किंग नोटबुक पूरी यात्रा दर्ज करती है: उत्तेजक, शोध, फ़्रीज़ फ़्रेम के स्केच या फ़ोटो, फ़ैसले और उनके कारण, मिली राय और उसके बाद बदलाव। 'मैं/हमने' में लिखो और क्यों समझाओ, सिर्फ़ क्या नहीं। जैसे: 'हमने अंत को शुरू में रखा ताकि दर्शक पहले ही जान लें कि बच्चा खो गया है, फिर देखें क्यों।'
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: उत्तेजक (stimulus) = विचारों की शुरुआत का बिंदु
- मुख्य शब्द: तात्कालिक अभिनय (improvisation) = बिना स्क्रिप्ट का अभिनय
- मुख्य शब्द: फ़्रीज़ फ़्रेम (टैब्लो) = शरीरों से बना स्थिर मंच-चित्र
- मुख्य शब्द: संरचना = दृश्यों का क्रम (रैखिक, अरैखिक, चक्रीय, प्रकरणात्मक)
- मुख्य शब्द: कलात्मक उद्देश्य = दर्शक क्या सोचें या महसूस करें
हल किए गए उदाहरण
1. उत्तेजक एक पुराने सूटकेस की फ़ोटो है। समूह कौन-से तीन विचार सोच सकता है?
नए शहर जाता परिवार; अंदर मिले किसी सैनिक के ख़त; हॉस्टल जाता बच्चा। तीनों 'घर छोड़ने' के विषय से जुड़े हैं।
2. बाढ़ पर नाटक गढ़ते समय हॉट-सीटिंग कैसे करोगे?
एक अभिनेता बचाव-कर्मी बनकर बैठता है। समूह पूछता है: तुमने क्या देखा? किस बात से डर लगा? जवाबों से दृश्यों के लिए बारीकियाँ और भावनाएँ मिलती हैं।
3. दृश्य हैं: आगमन, बहस, तूफ़ान, बचाव। नाटक को अरैखिक बनाओ और कारण बताओ।
बचाव से शुरू करो, फिर फ़्लैशबैक में आगमन, बहस और तूफ़ान। दर्शक जानते हैं कि लोग बचे, इसलिए वे 'कैसे' और 'क्यों' जानने के लिए देखते हैं और सहानुभूति बढ़ती है।
आम गलतियाँ
- पहला विचार चुनकर बाक़ी को न आज़माना। चुनने से पहले खुलकर विचार-मंथन करो।
- पहले दिन ही पूरी स्क्रिप्ट लिख देना। डिवाइज़िंग तात्कालिक अभिनय से बढ़ती है; शब्द बाद में पक्के करो।
- कलात्मक उद्देश्य भूल जाना। जाँचो कि हर दृश्य उसी भावना की ओर ले जाए।
- नोटबुक में सिर्फ़ यह लिखना कि क्या किया। हर फ़ैसले का कारण ज़रूर लिखो।