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ठोसों का आइसोमेट्रिक (सममितीय) प्रक्षेप

आइसोमेट्रिक प्रक्षेप एक ही चित्र में ठोस को तीन अक्षों के साथ दिखाता है जो आपस में 120° पर हैं: एक ऊर्ध्वाधर, दो क्षैतिज से 30° पर। इन अक्षों पर हर लंबाई एक ही अनुपात में छोटी होती है: आइसोमेट्रिक लंबाई = 0.816 × असली लंबाई। पूरी लंबाई लेने पर आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग (दृश्य) बनती है, जो लगभग 22.5% बड़ी होती है। प्रिज़्म और पिरामिड को आइसोमेट्रिक डिब्बे में बंद करके बनाते हैं। फलक पर वृत्त दीर्घवृत्त बनता है (चार-केंद्र विधि)। गोला हमेशा वृत्त दिखता है: प्रक्षेप में उसकी त्रिज्या असली त्रिज्या ही रहती है, और केंद्र स्पर्श-बिंदु से 0.816 × R ऊपर होता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. एक कोने से तीन आइसोमेट्रिक अक्ष निकलते हैं: ऊँचाई सीधी ऊपर, बाक़ी दो ज़मीन से 30° पर। हर जोड़ी के बीच 120°।
  2. दोनों पट्टियाँ देखिए। असली 40 mm किनारा आइसोमेट्रिक में केवल 32.7 mm दिखता है। यही आइसोमेट्रिक पैमाना है: × 0.816।
  3. षट्भुज प्रिज़्म पहले खड़ा है, फिर लेट जाता है। ठोस वही है; केवल अक्ष की दिशा बदलती है।
  4. बेलन का गोल ऊपरी भाग आइसोमेट्रिक वर्ग के अंदर बैठता है। वृत्त दीर्घवृत्त बन जाता है, चार चापों से बनता है।
  5. गोला हर तरफ़ से वृत्त दिखता है। आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में उस वृत्त की त्रिज्या असली होती है।
  6. अब आपकी बारी। ठोस चुनिए, खड़ा या लिटाइए, और प्रक्षेप व ड्रॉइंग माप बदलकर देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

90° नहीं, 120° क्यों?

हम घन के विकर्ण के साथ देखते हैं, इसलिए तीनों किनारे बराबर फैलते हैं: 360° ÷ 3 = 120°।

0.816 कहाँ से आया?

हर किनारा कागज़ से लगभग 35° झुका है; कागज़ पर उसकी छाया √(2/3) = 0.816 गुना है। चरण 2 की पट्टियाँ।

ठोस लेटने पर क्या बदलता है?

केवल अक्ष की दिशा: आधार क्षैतिज से ऊर्ध्वाधर फलक पर चला जाता है।

असली दीर्घवृत्त की जगह चार चाप क्यों?

परकार से चार चाप जल्दी बनते हैं और असली दीर्घवृत्त के बहुत क़रीब होते हैं।

गोला छोटा क्यों नहीं होता?

उसकी बाहरी रेखा हमेशा आपके सामने है, कुछ झुका नहीं। केवल केंद्र की ऊँचाई घटती है।

आइसोमेट्रिक अक्ष, पैमाना और आइसोमेट्रिक लंबाई

एक घन को ऐसे झुकाइए कि उसका लंबा विकर्ण सीधा आपकी आँख की ओर हो। पास वाले कोने के तीनों किनारे बराबर और 120° पर दिखते हैं। ये आइसोमेट्रिक अक्ष हैं।

हर किनारा आपसे दूर झुका है, इसलिए छोटा दिखता है। तीनों अक्षों पर छोटापन बराबर है:

आइसोमेट्रिक लंबाई = असली लंबाई × √(2/3) ≈ 0.816 × असली लंबाई

इस अनुपात से बना रूलर आइसोमेट्रिक पैमाना है: एक बिंदु से 45° रेखा (असली माप) और 30° रेखा खींचें; 45° के निशानों से 30° रेखा पर लंब गिराएँ।

आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में यह पैमाना लगता है। आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग (दृश्य) में असली लंबाई, इसलिए आकार 1.225 गुना बड़ा पर रूप वही। अक्ष के समानांतर न हो ऐसी (अन-आइसोमेट्रिक) रेखा सीधे नहीं नापते; पहले उसके सिरे खोजते हैं।

प्रिज़्म और पिरामिड अलग-अलग स्थितियों में

तरीका: डिब्बे में बंद करो। आइसो लंबाइयों से ऐसा आइसोमेट्रिक डिब्बा बनाइए जिसमें ठोस ठीक आ जाए। फिर डिब्बे के फलकों पर आधार और ऊपर के कोने खोजिए।

आइसोमेट्रिक में छिपे किनारे प्रायः नहीं दिखाते।

बेलन, शंकु और चार-केंद्र दीर्घवृत्त

फलक पर व्यास d का वृत्त 0.816d भुजा वाले आइसोमेट्रिक वर्ग (समचतुर्भुज) में बनता है।

  1. समचतुर्भुज बनाइए; भुजाओं के मध्य-बिंदु चिह्नित कीजिए।
  2. हर अधिक-कोण वाले कोने से सामने की दोनों भुजाओं के मध्य-बिंदुओं तक रेखा खींचिए।
  3. ये रेखाएँ दो बिंदुओं पर कटती हैं। अब चार केंद्र: दो अधिक-कोण कोने और दो कटान बिंदु।
  4. कोनों से दो बड़े चाप, कटान बिंदुओं से दो छोटे चाप। ये मध्य-बिंदुओं पर मिलते हैं।

बेलन: ऊपर-नीचे दीर्घवृत्त, दो ऊर्ध्वाधर स्पर्श रेखाएँ। शंकु: आधार दीर्घवृत्त, अक्ष पर आइसो ऊँचाई तक शीर्ष, शीर्ष से दो स्पर्श रेखाएँ। लेटी स्थिति में दीर्घवृत्त ऊर्ध्वाधर फलकों पर।

गोला और अर्धगोला

गोला हर दिशा से वृत्त दिखता है। आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में असली त्रिज्या R का वृत्त बनाइए। केंद्र स्पर्श-बिंदु के ठीक ऊपर, 0.816 × R आइसो ऊँचाई पर। (आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग में त्रिज्या 1.225 R होगी।)

समतल फलक पर रखा अर्धगोला: आधार वृत्त को आइसो दीर्घवृत्त (चार-केंद्र) बनाइए, फिर उसी केंद्र से असली त्रिज्या R का अर्धवृत्त ऊपर।

खुद करके देखें: 30°–60° सेट-स्क्वेयर से तीन अक्ष खींचिए। हर अक्ष पर असली 40 mm = 32.7 mm आइसो लगाइए। 40 mm का घन बनाइए। ऊपर 40 mm व्यास की गेंद रखिए: वृत्त की त्रिज्या 20 mm, केंद्र ऊपरी फलक के केंद्र से 16.3 mm ऊपर। 3D में "गोला" चुनकर मिलाइए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. 50 mm किनारे की आइसोमेट्रिक लंबाई ज्ञात कीजिए।

आइसो लंबाई = 0.816 × 50 = 40.8 mm।

2. आइसोमेट्रिक लंबाई 24.5 mm है। असली लंबाई?

असली = 24.5 ÷ 0.816 ≈ 30 mm।

3. आधार 30 mm, ऊँचाई 60 mm का वर्ग प्रिज़्म आधार पर खड़ा है। आइसोमेट्रिक प्रक्षेप की लंबाइयाँ बताइए।

आधार भुजाएँ: 0.816 × 30 = 24.5 mm दोनों 30° अक्षों पर। ऊँचाई: 0.816 × 60 = 49 mm। आधार समचतुर्भुज, चार ऊर्ध्वाधर 49 mm, ऊपर जोड़ें।

4. आधार व्यास 50 mm, ऊँचाई 60 mm का शंकु आधार पर खड़ा है। चरण और माप?

आधार का आइसो वर्ग: भुजा 0.816 × 50 = 40.8 mm। चार-केंद्र से दीर्घवृत्त। केंद्र से 0.816 × 60 = 49 mm ऊपर शीर्ष। शीर्ष से दीर्घवृत्त पर दो स्पर्श रेखाएँ।

5. 40 mm व्यास का गोला ज़मीन पर रखा है। कौन-सी त्रिज्या बनाएँगे, केंद्र कितना ऊँचा?

प्रक्षेप में वृत्त की त्रिज्या = असली = 20 mm। केंद्र स्पर्श-बिंदु से 0.816 × 20 = 16.3 mm ऊपर।

6. षट्भुज प्रिज़्म (भुजा 25 mm, लंबाई 70 mm) आयताकार फलक पर लेटा है, अक्ष 30° अक्ष के समानांतर। कौन-सा डिब्बा बनाएँगे?

कोनों के आर-पार = 50 mm; फलकों के आर-पार = 25√3 ≈ 43.3 mm। फलक पर लेटा है तो ऊँचाई 43.3 mm, चौड़ाई 50 mm। आइसो: 35.3 mm, 40.8 mm, लंबाई 0.816 × 70 = 57.1 mm। सिरे वाले फलक पर षट्भुज बनाकर कोनों को अक्ष पर 57.1 mm आगे दोहराइए।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. दो आइसोमेट्रिक अक्षों के बीच कोण:
2. आइसोमेट्रिक लंबाई ≈
3. प्रक्षेप में 25 mm त्रिज्या का गोला किस त्रिज्या के वृत्त से बनेगा?
4. चार-केंद्र विधि से बनता है:
5. झुके आइसोमेट्रिक अक्ष क्षैतिज से कितने अंश पर?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आइसोमेट्रिक प्रक्षेप और आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग में क्या अंतर है?

प्रक्षेप में आइसोमेट्रिक पैमाना (0.816 × असली); ड्रॉइंग में असली लंबाई, इसलिए 1.225 गुना बड़ा पर रूप वही।

आइसोमेट्रिक पैमाना कैसे बनाते हैं?

एक बिंदु से 45° रेखा पर असली mm और 30° रेखा खींचें; 45° के निशानों से 30° रेखा पर लंब गिराएँ।

आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में गोला कैसे बनाते हैं?

असली त्रिज्या का वृत्त, जिसका केंद्र स्पर्श-बिंदु से 0.816 × R ऊर्ध्वाधर ऊपर हो।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12ठोसों के सममितीय प्रक्षेप

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