आइसोमेट्रिक अक्ष, पैमाना और आइसोमेट्रिक लंबाई
एक घन को ऐसे झुकाइए कि उसका लंबा विकर्ण सीधा आपकी आँख की ओर हो। पास वाले कोने के तीनों किनारे बराबर और 120° पर दिखते हैं। ये आइसोमेट्रिक अक्ष हैं।
हर किनारा आपसे दूर झुका है, इसलिए छोटा दिखता है। तीनों अक्षों पर छोटापन बराबर है:
आइसोमेट्रिक लंबाई = असली लंबाई × √(2/3) ≈ 0.816 × असली लंबाई
इस अनुपात से बना रूलर आइसोमेट्रिक पैमाना है: एक बिंदु से 45° रेखा (असली माप) और 30° रेखा खींचें; 45° के निशानों से 30° रेखा पर लंब गिराएँ।
आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में यह पैमाना लगता है। आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग (दृश्य) में असली लंबाई, इसलिए आकार 1.225 गुना बड़ा पर रूप वही। अक्ष के समानांतर न हो ऐसी (अन-आइसोमेट्रिक) रेखा सीधे नहीं नापते; पहले उसके सिरे खोजते हैं।
प्रिज़्म और पिरामिड अलग-अलग स्थितियों में
तरीका: डिब्बे में बंद करो। आइसो लंबाइयों से ऐसा आइसोमेट्रिक डिब्बा बनाइए जिसमें ठोस ठीक आ जाए। फिर डिब्बे के फलकों पर आधार और ऊपर के कोने खोजिए।
- घन / वर्ग प्रिज़्म खड़ा: आधार का समचतुर्भुज, ऊपर ऊर्ध्वाधर रेखाएँ, ऊपर जोड़ें।
- षट्भुज प्रिज़्म: भुजा a वाला षट्भुज 2a × √3a आयत में बनाइए, कोने चिह्नित कर ऊँचाई तक उठाइए।
- पिरामिड: आधार बनाइए, केंद्र से अक्ष पर आइसो ऊँचाई तक ऊपर जाइए, शीर्ष को हर कोने से जोड़िए।
- लेटी स्थिति: अक्ष क्षैतिज, 30° वाले किसी अक्ष के समानांतर। आधार अब डिब्बे का ऊर्ध्वाधर फलक है।
आइसोमेट्रिक में छिपे किनारे प्रायः नहीं दिखाते।
बेलन, शंकु और चार-केंद्र दीर्घवृत्त
फलक पर व्यास d का वृत्त 0.816d भुजा वाले आइसोमेट्रिक वर्ग (समचतुर्भुज) में बनता है।
- समचतुर्भुज बनाइए; भुजाओं के मध्य-बिंदु चिह्नित कीजिए।
- हर अधिक-कोण वाले कोने से सामने की दोनों भुजाओं के मध्य-बिंदुओं तक रेखा खींचिए।
- ये रेखाएँ दो बिंदुओं पर कटती हैं। अब चार केंद्र: दो अधिक-कोण कोने और दो कटान बिंदु।
- कोनों से दो बड़े चाप, कटान बिंदुओं से दो छोटे चाप। ये मध्य-बिंदुओं पर मिलते हैं।
बेलन: ऊपर-नीचे दीर्घवृत्त, दो ऊर्ध्वाधर स्पर्श रेखाएँ। शंकु: आधार दीर्घवृत्त, अक्ष पर आइसो ऊँचाई तक शीर्ष, शीर्ष से दो स्पर्श रेखाएँ। लेटी स्थिति में दीर्घवृत्त ऊर्ध्वाधर फलकों पर।
गोला और अर्धगोला
गोला हर दिशा से वृत्त दिखता है। आइसोमेट्रिक प्रक्षेप में असली त्रिज्या R का वृत्त बनाइए। केंद्र स्पर्श-बिंदु के ठीक ऊपर, 0.816 × R आइसो ऊँचाई पर। (आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग में त्रिज्या 1.225 R होगी।)
समतल फलक पर रखा अर्धगोला: आधार वृत्त को आइसो दीर्घवृत्त (चार-केंद्र) बनाइए, फिर उसी केंद्र से असली त्रिज्या R का अर्धवृत्त ऊपर।
खुद करके देखें: 30°–60° सेट-स्क्वेयर से तीन अक्ष खींचिए। हर अक्ष पर असली 40 mm = 32.7 mm आइसो लगाइए। 40 mm का घन बनाइए। ऊपर 40 mm व्यास की गेंद रखिए: वृत्त की त्रिज्या 20 mm, केंद्र ऊपरी फलक के केंद्र से 16.3 mm ऊपर। 3D में "गोला" चुनकर मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आइसोमेट्रिक लंबाई = 0.816 × असली लंबाई (√2 / √3)
- आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग = 1.225 × आइसोमेट्रिक प्रक्षेप
- अक्ष: आपस में 120°; झुके अक्ष क्षैतिज से 30°
- व्यास d का वृत्त → 0.816d भुजा के समचतुर्भुज में दीर्घवृत्त (चार-केंद्र विधि)
- गोला (प्रक्षेप): त्रिज्या R का वृत्त; केंद्र स्पर्श-बिंदु से 0.816R ऊपर
हल किए गए उदाहरण
1. 50 mm किनारे की आइसोमेट्रिक लंबाई ज्ञात कीजिए।
आइसो लंबाई = 0.816 × 50 = 40.8 mm।
2. आइसोमेट्रिक लंबाई 24.5 mm है। असली लंबाई?
असली = 24.5 ÷ 0.816 ≈ 30 mm।
3. आधार 30 mm, ऊँचाई 60 mm का वर्ग प्रिज़्म आधार पर खड़ा है। आइसोमेट्रिक प्रक्षेप की लंबाइयाँ बताइए।
आधार भुजाएँ: 0.816 × 30 = 24.5 mm दोनों 30° अक्षों पर। ऊँचाई: 0.816 × 60 = 49 mm। आधार समचतुर्भुज, चार ऊर्ध्वाधर 49 mm, ऊपर जोड़ें।
4. आधार व्यास 50 mm, ऊँचाई 60 mm का शंकु आधार पर खड़ा है। चरण और माप?
आधार का आइसो वर्ग: भुजा 0.816 × 50 = 40.8 mm। चार-केंद्र से दीर्घवृत्त। केंद्र से 0.816 × 60 = 49 mm ऊपर शीर्ष। शीर्ष से दीर्घवृत्त पर दो स्पर्श रेखाएँ।
5. 40 mm व्यास का गोला ज़मीन पर रखा है। कौन-सी त्रिज्या बनाएँगे, केंद्र कितना ऊँचा?
प्रक्षेप में वृत्त की त्रिज्या = असली = 20 mm। केंद्र स्पर्श-बिंदु से 0.816 × 20 = 16.3 mm ऊपर।
6. षट्भुज प्रिज़्म (भुजा 25 mm, लंबाई 70 mm) आयताकार फलक पर लेटा है, अक्ष 30° अक्ष के समानांतर। कौन-सा डिब्बा बनाएँगे?
कोनों के आर-पार = 50 mm; फलकों के आर-पार = 25√3 ≈ 43.3 mm। फलक पर लेटा है तो ऊँचाई 43.3 mm, चौड़ाई 50 mm। आइसो: 35.3 mm, 40.8 mm, लंबाई 0.816 × 70 = 57.1 mm। सिरे वाले फलक पर षट्भुज बनाकर कोनों को अक्ष पर 57.1 mm आगे दोहराइए।
आम गलतियाँ
- "आइसोमेट्रिक प्रक्षेप" में असली लंबाई लेना — पैमाना (× 0.816) लगाइए।
- झुकी (अन-आइसोमेट्रिक) रेखा सीधे नापना — पहले सिरे आइसो रेखाओं पर खोजिए, फिर जोड़िए।
- प्रक्षेप में गोले की त्रिज्या 0.816R लेना — वृत्त असली त्रिज्या का; केवल केंद्र की ऊँचाई घटती है।
- बिना समचतुर्भुज के हाथ से दीर्घवृत्त बनाना — चार-केंद्र विधि अपनाइए।