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कथक में अभिनय और रस

अभिनय का अर्थ है भाव और अर्थ को दर्शक तक 'ले जाना'। नाट्यशास्त्र चार प्रकार बताता है: आंगिक (शरीर: सिर, आँखें, हाथ, पैर), वाचिक (शब्द, गीत, बोलों की पढ़ंत), आहार्य (वेशभूषा, श्रृंगार, गहने, घुँघरू, मंच सज्जा) और सात्त्विक (भीतरी भाव के अनैच्छिक चिह्न: आँसू, कंपन, पसीना, रंग बदलना)। जब नर्तक स्थायी भाव दिखाता है, विभाव (कारण) और अनुभाव (बाहरी चिह्न) के साथ, तो दर्शक के मन में रस जागता है। नौ रस: शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत और शांत। अन्य शब्द: संगीत (गीत + वाद्य + नृत्य), ताल (मात्राओं का चक्र, जैसे 16 मात्रा का तीनताल), लय (गति: विलंबित, मध्य, द्रुत), भ्रमरी (चक्कर), लोकधर्मी (स्वाभाविक, रोज़मर्रा जैसी प्रस्तुति) और नाट्यधर्मी (शैलीबद्ध, नाटकीय प्रस्तुति)।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. अभिनय के चार प्रकार: आंगिक (शरीर), वाचिक (वाणी), आहार्य (वेशभूषा-गहने) और सात्त्विक (गहरा भीतरी भाव)।
  2. चेहरा भाव ले जाता है। भौंहें, आँखें और होंठ बदलते हैं। देखिए नर्तकी हँसी से दुःख में कैसे जाती है।
  3. नौ रस हैं। चक्र की हर पंखुड़ी एक रस है, अपने रंग के साथ।
  4. नर्तकी स्थायी भाव दिखाती है, दर्शक रस अनुभव करते हैं। यहाँ रति (प्रेम) शृंगार रस बनती है।
  5. ताल और लय: तीनताल में 16 मात्राएँ। नर्तकी भ्रमरी (चक्कर) लेकर ठीक सम, यानी पहली मात्रा पर रुकती है।
  6. अब आप खेलें: रस और लय चुनें। चेहरा, पंखुड़ी और चक्कर बदलते देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

मुद्रा आंगिक है या आहार्य?

आंगिक, क्योंकि यह हाथ (शरीर) से बनती है। आहार्य वह है जो पहना या जोड़ा जाए।

सात्त्विक अभिनय सबसे कठिन क्यों माना जाता है?

आँसू या काँपती आवाज़ जैसे चिह्न सच्चे भीतरी भाव से ही आते हैं; तय मुद्रा से नहीं दिखते।

अलग रसों में चेहरा कैसे बदलता है?

भौंहें, आँखें और होंठ हिलते हैं। हास्य में होंठ ऊपर; करुण में होंठ नीचे और भौंहों के भीतरी सिरे ऊपर; अद्भुत में आँखें-मुँह खुले।

रस कौन अनुभव करता है, नर्तक या दर्शक?

दर्शक। नर्तक भाव दिखाता है; रस दर्शक में जागता है।

चक्कर सम पर ही क्यों खत्म होते हैं?

सम पहली और सबसे ज़ोरदार मात्रा है। आख़िरी चक्कर वहाँ रुकने से तबले के साथ साफ़, रोमांचक अंत होता है।

तेज़ लय से मात्राएँ बदल जाती हैं?

नहीं। तीनताल में 16 मात्राएँ ही रहती हैं; सिर्फ़ गति बदलती है।

अभिनय: आंगिक, वाचिक, आहार्य और सात्त्विक

अभिनय (अभि = की ओर, नी = ले जाना) अर्थ और भाव को दर्शक तक पहुँचाने की कला है।

भाव और नौ रस

भाव वह अनुभूति है जो कलाकार दिखाता है। रस वह आनंद/स्वाद है जो दर्शक अनुभव करता है। भरत मुनि का विचार: विभाव (कारण) + अनुभाव (बाहरी चिह्न) + व्यभिचारी भाव (क्षणिक भाव) से रस बनता है।

रसस्थायी भावअर्थ
शृंगाररतिप्रेम, सौंदर्य
हास्यहासहँसी
करुणशोकदुःख, करुणा
रौद्रक्रोधगुस्सा
वीरउत्साहसाहस
भयानकभयडर
वीभत्सजुगुप्साघृणा
अद्भुतविस्मयआश्चर्य
शांतशमशांति

नाट्यशास्त्र में आठ रस हैं; शांत बाद में जुड़ा, तब नवरस बने। शृंगार को रसराज कहते हैं।

संगीत, ताल और लय

भ्रमरी, लोकधर्मी और नाट्यधर्मी

शास्त्रीय नृत्य ज़्यादातर नाट्यधर्मी होता है, बीच-बीच में लोकधर्मी स्पर्श के साथ।

करके देखें

आईने में सिर्फ़ चेहरे से चार रस दिखाएँ और दोस्त से पहचानने को कहें। फिर 3D चेहरे से तुलना करें।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. नर्तकी ने घुँघरू, दुपट्टा और मंच श्रृंगार पहना है। यह कौन-सा अभिनय है?

आहार्य अभिनय (वेशभूषा, गहने, श्रृंगार)।

2. यशोदा बाल कृष्ण के मुँह में पूरा ब्रह्मांड देखती हैं। दर्शक कौन-सा रस अनुभव करें, और उसका स्थायी भाव?

अद्भुत रस; स्थायी भाव विस्मय। चेहरा: बड़ी आँखें, उठी भौंहें, खुला मुँह।

3. मध्य लय (80 मात्रा प्रति मिनट) में तीनताल का एक आवर्तन कितनी देर का? लय दुगुनी हो तो?

16 ÷ 80 = 0.2 मिनट = 12 सेकंड। दुगुनी लय 160/मिनट: 16 ÷ 160 = 0.1 मिनट = 6 सेकंड।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. वेशभूषा और गहनों से अभिनय:
2. करुण रस का स्थायी भाव:
3. तीनताल में कितनी मात्राएँ?
4. भ्रमरी का अर्थ:
5. शैलीबद्ध, नाटकीय प्रस्तुति कहलाती है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिनय के चार प्रकार कौन-से हैं?

आंगिक (शरीर), वाचिक (वाणी और गीत), आहार्य (वेशभूषा और श्रृंगार) और सात्त्विक (आँसू, कंपन जैसे भीतरी भाव)।

नौ रस कौन-से हैं?

शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत और शांत।

कथक में भ्रमरी क्या है?

घूमने की गतियाँ, मुख्यतः चक्कर: तेज़ घुमाव जो अक्सर सम पर अचानक रुकते हैं।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12कथक सिद्धांत

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