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भारतीय शास्त्रीय नृत्य

भारतीय शास्त्रीय नृत्य की जड़ें नाट्य शास्त्र (भरत मुनि, लगभग 2,000 साल पुराना) और अभिनय दर्पण (नंदिकेश्वर) में हैं। हर शैली में तीन भाग होते हैं: नृत्त (सिर्फ़ ताल और चाल), नृत्य (भाव के साथ नाच) और नाट्य (नाटक)। आठ शैलियाँ प्रमुख मानी जाती हैं: भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, ओडिसी, मणिपुरी, मोहिनीअट्टम और सत्रिया। नर्तक चार तरह के अभिनय (आंगिक, वाचिक, आहार्य, सात्त्विक) से भाव दिखाता है, ताकि दर्शक नौ में से कोई रस महसूस करे।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. भारत में नृत्य के तीन भाग हैं। नृत्त सिर्फ़ ताल और चाल है। नृत्य में भाव होता है। नाट्य पूरा नाटक है, कहानी के साथ।
  2. आठ शास्त्रीय शैलियाँ प्रमुख मानी जाती हैं। हर एक अलग क्षेत्र में पनपी, अपनी वेशभूषा, संगीत और चालों के साथ।
  3. हर शैली में दो मिज़ाज होते हैं। तांडव ज़ोरदार और तेज़ है। लास्य कोमल और सुंदर है।
  4. नर्तक चार तरीक़ों से बात कहता है: शरीर से (आंगिक), शब्द और गीत से (वाचिक), वेशभूषा से (आहार्य), और सच्ची भीतरी भावना से (सात्त्विक)।
  5. नर्तक जो भावना दिखाता है, उसे भाव कहते हैं। दर्शक जो स्वाद लेता है, उसे रस कहते हैं। रस नौ हैं।
  6. अब तुम्हारी बारी: आठ में से कोई भी शैली चुनो और उसकी पहचान देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

अगर नृत्त का कोई अर्थ नहीं, तो क्या वह सिर्फ़ कसरत है?

नहीं। नृत्त रेखा, ताल और आकार की सुंदरता है, जैसे बिना शब्दों की धुन। यह शरीर को नृत्य और नाट्य के लिए तैयार करता है।

शास्त्रीय शैलियाँ ठीक आठ ही क्यों हैं?

आठ वह संख्या है जिसे राष्ट्रीय कला संस्थाएँ सबसे ज़्यादा मानती हैं। यह एक सूची है, प्रकृति का नियम नहीं; कुछ सूचियों में छऊ जैसे नृत्य भी जुड़ते हैं।

क्या पुरुष नर्तक लास्य कर सकता है?

हाँ। तांडव और लास्य मिज़ाज हैं, लिंग नहीं। कोई भी नर्तक दोनों दिखा सकता है।

अगर मैं गाता नहीं, तो क्या वाचिक अभिनय होता है?

हाँ। गायक के शब्द और बोले जाने वाले ताल-बोल (बोल, सोलुकट्टु) नर्तक का वाचिक हिस्सा हैं।

नौवाँ रस (शांत) कभी-कभी क्यों छोड़ दिया जाता है?

नाट्य शास्त्र में आठ रस हैं। बाद के विद्वानों ने शांत रस जोड़ा, इसलिए कहीं 8 और कहीं 9 मिलते हैं।

शास्त्रीय नृत्य कहाँ से आया

भारत में नृत्य बहुत पुराना है। पुराने मंदिरों की मूर्तियों में वही मुद्राएँ दिखती हैं जो आज भी नाची जाती हैं। मुख्य विचार कुछ ग्रंथों में लिखे गए:

समय के साथ नृत्य को मंदिर की नर्तकियों (दक्षिण में देवदासी, ओडिशा में महारी), कथा कहने वालों (कथाकार, जिनसे कथक का नाम पड़ा), राजदरबारों और बीसवीं सदी के गुरुओं ने ज़िंदा रखा और आम मंच तक पहुँचाया।

मूल बातें: नृत्त, नृत्य, नाट्य, तांडव, लास्य

शरीर के अंग और लय

शरीर को बाँटा गया है: अंग (बड़े हिस्से: सिर, हाथ, छाती, कमर, बगल, पैर), प्रत्यंग (गर्दन, कंधे, बाँहें, पेट, जाँघें, घुटने) और उपांग (छोटे हिस्से: आँखें, भौंहें, होंठ, गाल, ठुड्डी)। लय के लिए ताल (मात्राओं का चक्र), मात्रा (एक धड़कन) और लय (गति: विलंबित, मध्य, द्रुत) काम आते हैं।

अभिनय, भाव और नवरस

अभिनय का अर्थ है "बात को दर्शक तक ले जाना"। इसके चार भाग हैं:

  1. आंगिक: शरीर से – हाथ, चेहरा, आँखें, कदम।
  2. वाचिक: शब्दों से – गीत, कविता और बोल।
  3. आहार्य: वेशभूषा, गहने, श्रृंगार और मंच-सज्जा से।
  4. सात्त्विक: सच्ची भीतरी भावना से – आँसू, शर्म से लाल होना, काँपती आवाज़।

नर्तक एक भाव दिखाता है। जब भाव ठीक से दिखे, तो दर्शक को रस (मज़ा, स्वाद) मिलता है। नौ रस (नवरस): श्रृंगार (प्रेम), हास्य (हँसी), करुण (दुःख), रौद्र (क्रोध), वीर (साहस), भयानक (डर), बीभत्स (घृणा), अद्भुत (आश्चर्य) और शांत (शांति)। नाट्य शास्त्र में आठ रस हैं; शांत रस बाद में जोड़ा गया।

आठ शास्त्रीय शैलियाँ एक नज़र में

इनके साथ कई लोक और अर्ध-शास्त्रीय नृत्य भी हैं, जैसे छऊ (मयूरभंज, सरायकेला और मुखौटे वाला पुरुलिया छऊ), बिहू, गरबा और भांगड़ा। शास्त्रीय नृत्य लिखे नियमों और लंबी साधना से चलता है; लोक नृत्य उत्सवों में समाज के बीच सीखा जाता है।

महान गुरु और उनका काम

ख़ुद करके देखो

आईने के सामने खड़े हो। एक ही बात "मुझे एक सुंदर फूल दिख रहा है" तीन तरह दिखाओ: सिर्फ़ हाथ और आँखों से (आंगिक), बोलते हुए (वाचिक), फिर दुपट्टे को पोशाक बनाकर (आहार्य)। कौन-सा सबसे सच्चा लगा? वही सच्ची भावना सात्त्विक है। 3D के छठे चरण में हर शैली चुनो और उसकी एक पहचान बोलो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. कथक नर्तकी तीनताल में तेज़ तत्कार करती है, कोई कहानी नहीं। यह नृत्त है, नृत्य या नाट्य?

सिर्फ़ ताल और आकार है, कोई अर्थ या कहानी नहीं, इसलिए यह नृत्त है।

2. कथकली में कलाकार का हरा चेहरा और बड़ा मुकुट है। यह कौन-सा अभिनय है?

वेशभूषा और श्रृंगार आहार्य अभिनय है।

3. नर्तकी दिखाती है कि यशोदा नन्हे कृष्ण को डाँट रही हैं, और दर्शक प्यार से मुस्कुराते हैं। भाव और रस बताओ।

नर्तकी माँ के प्यार और हल्के ग़ुस्से का भाव दिखाती है; दर्शक मुख्य रूप से श्रृंगार (वात्सल्य वाला प्रेम) और थोड़ा हास्य महसूस करते हैं। याद रखो: भाव मंच पर दिखता है, रस दर्शक के मन में।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कौन-सा पुराना ग्रंथ भरत मुनि का माना जाता है?
2. नृत्य के किस भाग में कोई कहानी या अर्थ नहीं होता?
3. वेशभूषा और श्रृंगार किस अभिनय में आते हैं?
4. त्रिभंग और चौक किस शैली की पहचान हैं?
5. नवरस में कितने रस हैं?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के 8 शास्त्रीय नृत्य कौन-से हैं?

भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, ओडिसी, मणिपुरी, मोहिनीअट्टम और सत्रिया।

नृत्त, नृत्य और नाट्य में क्या अंतर है?

नृत्त शुद्ध ताल और चाल है, नृत्य भाव के साथ नाच है, और नाट्य कहानी वाला पूरा नाटक है।

नौ रस कौन-से हैं?

श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शांत।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11भरतनाट्यम सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11कथक सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11कथकली सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11कुचिपुड़ी सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11मणिपुरी सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11ओडिसी सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12भरतनाट्यम सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12कथक सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12कथकली सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12नृत्य: एक सर्वेक्षण
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12कुचिपुड़ी सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12मणिपुरी सिद्धांत
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12ओडिसी सिद्धांत

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