आधुनिक भारतीय चित्रकार
राजा रवि वर्मा (1848–1906)
यूरोपीय तेल रंग और यथार्थ शैली में भारतीय कथाएँ — शकुंतला, चाँदनी में स्त्री। उनके छापेखाने से सस्ती प्रतियाँ घर-घर पहुँचीं।
जामिनी रॉय (1887–1972)
तेल यथार्थ छोड़कर बंगाल की लोक कला (कालीघाट पट) अपनाई। मोटी रेखाएँ, मिट्टी-पौधों से बने सपाट रंग, बड़ी आँखों वाले सरल चेहरे। कृति: माँ और बच्चा, संथाल लड़कियाँ।
अमृता शेरगिल (1913–1941)
पेरिस में पढ़ीं, फिर अजंता और लघुचित्रों को समझा। गाँव की शांत, उदास स्त्रियाँ, गर्म रंग। कृतियाँ: तीन लड़कियाँ, दुल्हन का शृंगार, ब्रह्मचारी।
एम.एफ. हुसैन (1915–2011)
प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप (मुंबई, 1947) के सदस्य। तेज़ रेखाएँ, चटक रंग, घोड़े और भारतीय जीवन। कृति: मकड़ी और दीपक के बीच, घोड़ा शृंखला।
आधुनिक भारतीय छापा कलाकार
छापा (प्रिंट) वह चित्र है जो ब्लॉक या प्लेट पर बनाकर कागज़ पर दबाया जाता है, इसलिए कई प्रतियाँ बनती हैं। मुख्य विधियाँ: वुडकट (लकड़ी काटो, उभरे भाग पर स्याही), एचिंग (तेज़ाब से धातु पर खाँचे, स्याही खाँचों में), लिथोग्राफ़ (पत्थर पर चिकनाई से चित्र), स्क्रीन प्रिंट (जाली से स्याही)।
- सोमनाथ होर: अकाल और पीड़ा पर छापे; कागज़ की लुगदी से घाव शृंखला।
- ज्योति भट्ट: लोक आकृतियों, पक्षियों और फ़ोटो से एचिंग व स्क्रीन प्रिंट; बड़ौदा।
- अनुपम सूद: मानव आकृति, मुखौटे और शहरी रिश्तों की एचिंग।
- लक्ष्मा गौड़: तेलंगाना के गाँव, पशु और लोगों की बारीक रेखा वाली एचिंग।
आधुनिक भारतीय मूर्तिकार
- डी.पी. रॉय चौधरी: यथार्थवादी काँसा; श्रम की विजय (चेन्नई, मज़दूर बड़ी चट्टान हटाते हुए), शहीद स्मारक (पटना)।
- रामकिंकर बैज: शांतिनिकेतन में सीमेंट और लैटराइट की विशाल खुली मूर्तियाँ; संथाल परिवार बच्चे और कुत्ते के साथ आगे बढ़ता है।
- अमरनाथ सहगल: पीड़ा और स्वतंत्रता पर खुरदरी काँसा आकृतियाँ।
- पी.वी. जानकीराम: कटी और वेल्ड की हुई धातु की चादरें, बारीक रेखा-सज्जा; गणेश जैसी आकृतियाँ।
साझा विचार और परीक्षा में उत्तर कैसे लिखें
सभी बारह कलाकार एक साथ आधुनिक और भारतीय बनना चाहते थे। उन्होंने यूरोप से तकनीक (तेल, एचिंग, वेल्डिंग) ली पर विषय भारतीय लोक, मंदिर और गाँव से लिए। वर्णन का क्रम: कलाकार → शीर्षक → माध्यम → विषय → रूप/रंग/रेखा → भाव → आधुनिक क्यों।
खुद करके देखें: आलू आधा काटिए, चम्मच से कोई आकार खुरचिए, पोस्टर रंग में डुबोकर कागज़ पर 5 बार छापिए। आपने छापा कलाकार की तरह 5 प्रतियाँ बना लीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चित्र: रवि वर्मा (तेल यथार्थ), जामिनी रॉय (लोक रेखा), अमृता शेरगिल (पेरिस + अजंता), हुसैन (प्रोग्रेसिव ग्रुप)
- छापा: वुडकट = उभरा भाग छपता है; एचिंग = खाँचों में स्याही; स्क्रीन प्रिंट = जाली से स्याही
- छापा कलाकार: सोमनाथ होर, ज्योति भट्ट, अनुपम सूद, लक्ष्मा गौड़
- मूर्ति: डी.पी. रॉय चौधरी (काँसा), रामकिंकर बैज (सीमेंट), अमरनाथ सहगल (काँसा), पी.वी. जानकीराम (वेल्ड धातु)
हल किए गए उदाहरण
1. अमृता शेरगिल की "तीन लड़कियाँ" का वर्णन कीजिए।
कैनवास पर तेल रंग, 1935। तीन युवतियाँ पास-पास शांत बैठी प्रतीक्षा कर रही हैं। गहरे लाल, हरे और भूरे रंग, सरल सपाट आकार, गंभीर चेहरे। भाव: स्त्रियों के जीवन की शांत उदासी। पेरिस की शिक्षा और भारतीय विषय का मेल — इसलिए आधुनिक।
2. रामकिंकर बैज के "संथाल परिवार" का वर्णन कीजिए।
शांतिनिकेतन में सीमेंट और लैटराइट की विशाल खुली मूर्ति (1938)। संथाल पुरुष टोकरियों में बच्चे उठाए है, स्त्री साथ चल रही है, कुत्ता भी है। मज़बूत, खुरदरे रूप। आम आदिवासी लोगों का सम्मान।
3. लक्ष्मा गौड़ की एचिंग कैसे बनती है?
धातु की प्लेट पर मोम चढ़ाते हैं। मोम में बारीक रेखाएँ खुरचते हैं, फिर प्लेट तेज़ाब में रखते हैं जो रेखाओं पर खाँचे बनाता है। खाँचों में स्याही भरकर ऊपर से पोंछते हैं और प्रेस में गीले कागज़ पर दबाते हैं।
आम गलतियाँ
- राजा रवि वर्मा को बंगाल शैली में रखना — वे पहले के थे और यूरोपीय तेल यथार्थ अपनाते थे।
- छापे को फ़ोटोकॉपी समझना — छापा कलाकार की मौलिक कृति है।
- रामकिंकर बैज (सीमेंट, शांतिनिकेतन) और डी.पी. रॉय चौधरी (काँसा, श्रम की विजय) को मिला देना।
- केवल नाम लिखना — परीक्षा में माध्यम, विषय और शैली भी चाहिए।