वार्म-अप और आधार मुद्राएँ
हर कक्षा धरती, गुरु और दर्शकों को प्रणाम से शुरू होती है, फिर वार्म-अप: गर्दन घुमाना, कंधे के गोले, हल्की बैठकें और टखने घुमाना। गर्म मांसपेशियों को चोट कम लगती है।
आधार मुद्राएँ
- समपाद: पैर साथ, सीधे खड़े।
- अरैमंडी / अर्धमंडल (भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी): एड़ियाँ साथ, पंजे बाहर, घुटने बाहर मुड़कर हीरे जैसा आकार, पीठ सीधी।
- मंडल / मुळुमंडी: पंजों पर पूरा बैठना, घुटने चौड़े।
- चौक (ओडिसी): चौकोर मुद्रा, पैर दूर, घुटने बाहर, बाँहें कंधे की ऊँचाई पर।
- कथक में सीधी, ऊँची मुद्रा होती है, वज़न दोनों पैरों पर बराबर।
बैठी हुई मुद्राओं में पहले हस्त और भाव का अभ्यास होता है, फिर पैर जुड़ते हैं।
शरीर की रेखाएँ, आँख, गर्दन और सिर
त्रिभंग (तीन मोड़) से S जैसा आकार बनता है: सिर एक ओर झुका, धड़ उल्टी ओर, कूल्हा फिर पहली ओर। यह ओडिसी की ख़ास रेखा है।
आँखों के अभ्यास में सिर स्थिर रखकर आँखें ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ और गोल घुमाते हैं, क्योंकि भाव ज़्यादातर आँखों से ही दिखता है। गर्दन (बगल में सरकाना) और सिर (हिलाना, घुमाना, झुकाना) की चालें ताल के साथ सीखी जाती हैं। कलाई घुमाने से मणिपुरी और ओडिसी के लिए हाथ कोमल रहते हैं।
तीन गति में पद-संचालन
पैर के काम की एक इकाई को भरतनाट्यम में अडवु, कुचिपुड़ी में अडुगु और कथक में तत्कार कहते हैं। हर एक तीन गति में सीखी जाती है:
- पहली गति (ठाह): हर मात्रा पर 1 थाप।
- दूसरी गति (दुगुन): हर मात्रा पर 2 थाप।
- तीसरी गति (चौगुन): हर मात्रा पर 4 थाप।
थाप प्रति सेकंड = (BPM ÷ 60) × गति। 60 BPM पर चौगुन: 1 × 4 = 4 थाप प्रति सेकंड। आम इकाइयाँ: तट्टडवु (फ़र्श पर थाप), नाट्टडवु (एड़ी फैलाना), कुचिपुड़ी का मंडिकोप्पु, मणिपुरी का चालि (कोमल चलने वाला कदम), और कथकली की छलाँगें व सात चुळिप्पु (शरीर घुमाना)।
ताल: चक्र को गिनना
ताल मात्राओं का दोहराने वाला चक्र है। नर्तक ताली और हाथ हिलाकर ताल रखते हैं और साथ में बोल पढ़ते हैं (कथक में बोल, भरतनाट्यम में सोलुकट्टु)।
- तीनताल: 16 मात्राएँ (4+4+4+4)। पहली मात्रा = सम (X), नौवीं = खाली (0, हाथ हिलाकर)।
- झपताल: 10 मात्राएँ (2+3+2+3)।
- आदि ताल: 8 मात्राएँ (4+2+2)। रूपक ताल: आज की आम गिनती में 3 मात्राएँ। तिस्र एक: 3 मात्राएँ।
तिहाई या कोरवै/तीर्मानम एक छोटा टुकड़ा है जो तीन बार आकर ठीक सम पर ख़त्म होता है। जैसे तीनताल में 5 मात्रा का टुकड़ा × 3 = 15 मात्राएँ; तीसरी मात्रा से शुरू करो तो 17वीं, यानी अगले सम पर ख़त्म होगा।
हस्त, चक्कर और रचनाएँ
हस्त हाथ की मुद्राएँ हैं। असंयुत हस्त एक हाथ से (पताका, त्रिपताका, अर्धचंद्र, मुष्टि), संयुत दोनों हाथ से (अंजलि, कपोत)। पताका (झंडा) में सारी उँगलियाँ सीधी और साथ, अंगूठा मुड़ा; इससे बादल, जंगल, आशीर्वाद, दरवाज़ा या लहरें दिखाते हैं। कथकली में 24 मूल हस्त हैं।
घूमना: कथक का चक्कर (एड़ी पर तेज़ घूमना), ओडिसी की भ्रमरी। आँख एक बिंदु पर टिकाओ और सिर सबसे आख़िर में घुमाओ ("स्पॉटिंग"), इससे चक्कर नहीं आते। पादभेद पैरों की स्थितियाँ हैं। ओडिसी की पल्लवी या भरतनाट्यम का जतिस्वरम इन इकाइयों को जोड़कर पूरी रचना बनाते हैं।
सुरक्षित अभ्यास
- वार्म-अप और कूल-डाउन करो; पानी पीते रहो।
- अरैमंडी में घुटने हमेशा पंजों की सीध में रहें।
- गति धीरे बढ़ाओ: पहले पहली गति साफ़, फिर दूसरी।
ख़ुद करके देखो
फ़ोन के मेट्रोनोम को 60 BPM पर रखो। हर क्लिक पर 1, फिर 2, फिर 4 थाप दो, हर बार 16 क्लिक तक, और सम पर ज़ोर से "एक" बोलो। फिर आईने के सामने 30 सेकंड अरैमंडी में रहो: क्या घुटने पंजों की सीध में हैं? 3D के छठे चरण में वही लय रखकर गिनती मिलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- थाप प्रति सेकंड = (BPM ÷ 60) × गति (1, 2 या 4)
- तीनताल = 16 मात्रा (4+4+4+4); सम = 1, खाली = 9
- झपताल = 10 मात्रा (2+3+2+3); आदि ताल = 8 मात्रा (4+2+2)
- तिहाई = टुकड़ा × 3, सम पर ख़त्म
- त्रिभंग = सिर + धड़ + कूल्हे के मोड़ (S आकार)
हल किए गए उदाहरण
1. 90 BPM पर दुगुन में एक सेकंड में कितनी थाप?
90 ÷ 60 = 1.5 मात्रा प्रति सेकंड; × 2 = 3 थाप प्रति सेकंड।
2. चौगुन में तीनताल के एक पूरे चक्र में कितनी थाप?
16 मात्रा × 4 = 64 थाप।
3. 5 मात्रा का टुकड़ा बिना रुके तीन बार। तीनताल में कहाँ से शुरू करें ताकि सम पर ख़त्म हो?
5 × 3 = 15 मात्राएँ। अगला सम 17वीं मात्रा है (16 + 1)। शुरुआत = 17 − 15 + 1 = तीसरी मात्रा। जाँच: 3 से 17 तक 15 मात्राएँ।
आम गलतियाँ
- अरैमंडी में घुटने अंदर गिर जाना; उन्हें पंजों की सीध में रहना चाहिए।
- दुगुन में मात्रा ही तेज़ कर देना: मात्रा वही रहती है, सिर्फ़ थाप दुगनी होती है।
- खाली भूल जाना: तीनताल की नौवीं मात्रा पर ताली नहीं, हाथ हिलाते हैं।
- आँखों के अभ्यास में सिर भी घुमा देना; सिर स्थिर रहना चाहिए।