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भरतनाट्यम में अडवु और रचनाएँ

अडवु भरतनाट्यम की मूल इकाई है: तय शरीर-मुद्रा, पद-संचालन और हाथ की गति, जो लय के बोलों (सोल्लुकट्टु) पर होती है। ज़्यादातर अडवु अरमंडी (आधा बैठना) में होते हैं। तट्टडवु में पैर ज़मीन ठोकते हैं; नाट्टडवु में एड़ी फैलती है। हर अडवु तीन गतियों में (हर मात्रा पर 1, 2, 4 कदम) सीखा जाता है। अडवु मिलकर कोरवै बनाते हैं (जो पहली मात्रा पर खत्म हो), और कोरवै से अलारिप्पु (तिस्र एक, 3 मात्रा), जतिस्वरम, तिल्लाना जैसी रचनाएँ बनती हैं। आदि ताल (8) और रूपक ताल (6) ताली, उँगली-गिनती और हाथ पलटकर रखे जाते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. अरमंडी: नर्तकी घुटने बाहर की ओर मोड़ती है, एड़ियाँ साथ और पंजे बाहर रखती है, और आधा नीचे बैठती है। बाँहें दोनों ओर फैली हैं। लगभग हर अडवु यहीं से शुरू होता है।
  2. तट्टडवु: पैर बारी-बारी से, दायाँ फिर बायाँ, पूरे तलवे से ज़मीन ठोकते हैं। हर मात्रा पर एक थाप। ज़मीन के रंगीन बिंदु आदि ताल की 8 मात्राएँ हैं।
  3. तीन गतियाँ: पहले हर मात्रा पर 1 थाप, फिर 2, फिर 4। ताल का चक्र उसी रफ़्तार से चलता है; केवल पैर तेज़ होते हैं। गति का नाम बदलते देखें।
  4. नाट्टडवु: एक पैर आगे और थोड़ा बगल में फिसलकर एड़ी पर टिकता है, पंजे ऊपर, फिर लौटता है। फिर दूसरा पैर।
  5. हाथ पर आदि ताल: ताली + 3 उँगली, ताली + पलट, ताली + पलट। कोरवै "त धि गि न थोम" तीन बार बोला जाता है और ठीक पहली मात्रा (सम) पर खत्म होता है।
  6. अब आप खेलें: अडवु, गति और ताल (आदि, रूपक या तिस्र एक) चुनें और देखें मात्राएँ और कदम कैसे बैठते हैं।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

घुटने आगे की जगह बाहर क्यों मोड़ते हैं?

घुटने पंजों के ऊपर बाहर खोलने से मज़बूत हीरे जैसा आकार बनता है, संतुलन रहता है और घुटने सुरक्षित रहते हैं।

तट्टडवु में एड़ी से ठोकें या पूरे पैर से?

पूरे सपाट तलवे से, थोड़ा उठाकर मात्रा पर मज़बूती से नीचे।

क्या तीसरी गति में संगीत तेज़ होता है?

नहीं। ताल के बिंदु उसी रफ़्तार से चलते हैं; केवल थाप प्रति मात्रा बदलती है।

नाट्टडवु में फैला पैर कहाँ टिकता है?

एड़ी पर, पंजे ऊपर, आगे और थोड़ा बगल में।

कैसे पता चले कि कोरवै सम पर खत्म होगा?

बोल गिनें: 5 × 3 = 15 आधी मात्रा, फिर अगला कदम पहली मात्रा पर। उतरते समय लेबल "सम" दिखाता है।

हाथ पर रूपक, आदि से कैसे अलग है?

रूपक ताली और पलट से शुरू होता है, फिर ताली और 3 उँगली: 6 मात्रा। अपने खेल में रूपक चुनकर देखें।

अडवु क्या है?

अडवु भरतनाट्यम की सबसे छोटी पूरी नृत्य-इकाई है, जैसे वर्णमाला का अक्षर। इसमें तीन चीज़ें जुड़ती हैं: शरीर की स्थिति (स्थानक/मंडल), पद-संचालन और हस्त मुद्राएँ, सब बोले गए लय-बोलों पर, जिन्हें सोल्लुकट्टु कहते हैं (जैसे "तै य तै हि")।

ज़्यादातर अडवु अरमंडी (अर्धमंडल) में होते हैं: घुटने बाहर मुड़े, एड़ियाँ साथ, पंजे बाहर, पीठ सीधी, शरीर आधा नीचे। पूरा बैठना मुळुमंडी; सीधा खड़ा होना समपाद। अभ्यास से पहले और बाद में धरती को छोटा प्रणाम (नमस्कारम) किया जाता है।

मुख्य अडवु और तीन गतियाँ

तीन गतियाँ (कालम): ताल की मात्राएँ वही रहती हैं, पर हर मात्रा में ज़्यादा कदम आते हैं।

तीनों गतियों का अभ्यास स्थिर लय, दम और साफ़ पद-संचालन सिखाता है।

हाथ से ताल: आदि, रूपक, तिस्र एक

ताल मात्राओं का दोहराता चक्र है, जिसे हाथ (क्रिया) से दिखाते हैं:

हर चक्र की पहली मात्रा समम (सम) है। छोटी झांझ से ताल रखने और बोल पुकारने वाले को नट्टुवनार कहते हैं।

कोरवै: सम पर उतरने वाले पैटर्न

कोरवै अडवुओं की श्रृंखला है जो ताल में बैठती है और साफ़ समम पर खत्म होती है, अक्सर एक वाक्यांश को तीन बार दोहराकर। तीर्मानम अंत वाला वाक्यांश है (जैसे "त धि गि न थोम" × 3)।

सरल गणित: आदि ताल की दूसरी गति में एक चक्र = 8 × 2 = 16 आधी मात्राएँ। "त धि गि न थोम" में 5 बोल; तीन बार = 15, फिर एक कदम और, और अगले चक्र की पहली मात्रा आ जाती है। इसीलिए तीसरा "थोम" पहुँचने जैसा लगता है।

मार्गम की रचनाएँ और अलारिप्पु

अडवु और कोरवै पारंपरिक प्रस्तुति (मार्गम) की रचनाएँ बनाते हैं:

  1. अलारिप्पु: शुरुआती "खिलने" वाली रचना। शुद्ध नृत्य, कोई कहानी नहीं, आमतौर पर तिस्र एक (3 मात्रा) में। आँखें, गर्दन, कंधे, बाँहें, फिर पैर बारी-बारी चलते हैं, जैसे फूल खिलता है।
  2. जतिस्वरम: किसी राग के स्वरों पर शुद्ध नृत्य।
  3. शब्दम: शब्द और भाव (अभिनय) वाली पहली रचना।
  4. वर्णम: लंबी मुख्य रचना, शुद्ध नृत्य और अभिनय का मेल।
  5. पदम / जावळि: धीमे, भाव भरे गीत।
  6. तिल्लाना: तेज़, आनंद भरा शुद्ध नृत्य, फिर छोटी प्रार्थना (मंगलम)।

शुद्ध नृत्य नृत्त; भाव वाला नृत्य अभिनय/नृत्य।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. दूसरी गति में आदि ताल के एक चक्र में कितनी थाप?

आदि = 8 मात्रा; दूसरी गति = 2 प्रति मात्रा; 8 × 2 = 16 थाप।

2. छात्र तीसरी गति में आदि ताल के 2 चक्र तट्टडवु करता है। कितनी थाप?

8 × 4 × 2 = 64 थाप।

3. रूपक ताल की हाथ क्रियाएँ दिखाइए।

ताली, पलट (द्रुतम), फिर ताली, उँगली, उँगली, उँगली (लघु): 6 मात्रा।

4. अलारिप्पु तिस्र एक में है। 4 चक्र में कितनी मात्राएँ?

3 × 4 = 12 मात्रा।

5. 5 बोल का कोरवै वाक्यांश 3 बार, हर बोल आधी मात्रा पर। क्या यह आदि ताल की दूसरी गति (16 आधी मात्रा) में बैठकर सम पर उतरेगा?

5 × 3 = 15 आधी मात्रा। 1 आधी मात्रा का ठहराव बचता है, और अगला बोल अगले चक्र की पहली मात्रा पर आता है: सम पर अंत।

6. मार्गम क्रम में लगाइए: तिल्लाना, अलारिप्पु, वर्णम, जतिस्वरम।

अलारिप्पु → जतिस्वरम → वर्णम → तिल्लाना।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. आधा बैठने वाली मूल मुद्रा कहलाती है:
2. तट्टडवु का अर्थ:
3. तीसरी गति में हर मात्रा पर कितने कदम?
4. अलारिप्पु आमतौर पर किस ताल में?
5. ताल चक्र की पहली मात्रा:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरतनाट्यम में अडवु क्या है?

भरतनाट्यम की मूल इकाई: शरीर-मुद्रा, पद-संचालन और हाथ की गति, जो लय-बोलों पर की जाती है।

भरतनाट्यम की तीन गतियाँ क्या हैं?

पहली गति: हर मात्रा पर 1 कदम; दूसरी: 2; तीसरी: 4। ताल वही रहता है।

अलारिप्पु क्या है?

भरतनाट्यम प्रस्तुति की शुरुआती शुद्ध-नृत्य रचना, आमतौर पर तिस्र एक (3 मात्रा) में, जिसमें शरीर अंग-अंग "खिलता" है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 11भरतनाट्यम प्रायोगिक

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