अडवु क्या है?
अडवु भरतनाट्यम की सबसे छोटी पूरी नृत्य-इकाई है, जैसे वर्णमाला का अक्षर। इसमें तीन चीज़ें जुड़ती हैं: शरीर की स्थिति (स्थानक/मंडल), पद-संचालन और हस्त मुद्राएँ, सब बोले गए लय-बोलों पर, जिन्हें सोल्लुकट्टु कहते हैं (जैसे "तै य तै हि")।
ज़्यादातर अडवु अरमंडी (अर्धमंडल) में होते हैं: घुटने बाहर मुड़े, एड़ियाँ साथ, पंजे बाहर, पीठ सीधी, शरीर आधा नीचे। पूरा बैठना मुळुमंडी; सीधा खड़ा होना समपाद। अभ्यास से पहले और बाद में धरती को छोटा प्रणाम (नमस्कारम) किया जाता है।
मुख्य अडवु और तीन गतियाँ
- तट्टडवु (तट्ट = ठोकना): सपाट पैर ज़मीन पर थाप देता है। बोल: "तै य तै हि"।
- नाट्टडवु (नाट्ट = फैलाना): एक टाँग एड़ी पर फैलती है (पंजे ऊपर), फिर लौटती है।
- अन्य अडवु: कुदित्तमेट्टु (पंजों पर उछलकर एड़ी ठोकना), विशरु (बाँह घुमाना), तट्टिमेट्टु (पंजा-एड़ी), मंडी (घुटना ज़मीन पर), सरुक्कल (फिसलना), तीर्मानम (अंत के पैटर्न)।
तीन गतियाँ (कालम): ताल की मात्राएँ वही रहती हैं, पर हर मात्रा में ज़्यादा कदम आते हैं।
- पहली गति: हर मात्रा पर 1 कदम।
- दूसरी गति: 2 कदम।
- तीसरी गति: 4 कदम।
तीनों गतियों का अभ्यास स्थिर लय, दम और साफ़ पद-संचालन सिखाता है।
हाथ से ताल: आदि, रूपक, तिस्र एक
ताल मात्राओं का दोहराता चक्र है, जिसे हाथ (क्रिया) से दिखाते हैं:
- आदि ताल (8): लघु = ताली + छोटी उँगली + अनामिका + मध्यमा (4); द्रुतम = ताली + पलट (2); द्रुतम = ताली + पलट (2)।
- रूपक ताल (6): द्रुतम (ताली, पलट) + लघु (ताली + 3 उँगली)। नर्तक अक्सर इसे 3 धीमी मात्राओं में महसूस करते हैं।
- तिस्र एक (3): केवल 3 का लघु: ताली + 2 उँगली।
हर चक्र की पहली मात्रा समम (सम) है। छोटी झांझ से ताल रखने और बोल पुकारने वाले को नट्टुवनार कहते हैं।
कोरवै: सम पर उतरने वाले पैटर्न
कोरवै अडवुओं की श्रृंखला है जो ताल में बैठती है और साफ़ समम पर खत्म होती है, अक्सर एक वाक्यांश को तीन बार दोहराकर। तीर्मानम अंत वाला वाक्यांश है (जैसे "त धि गि न थोम" × 3)।
सरल गणित: आदि ताल की दूसरी गति में एक चक्र = 8 × 2 = 16 आधी मात्राएँ। "त धि गि न थोम" में 5 बोल; तीन बार = 15, फिर एक कदम और, और अगले चक्र की पहली मात्रा आ जाती है। इसीलिए तीसरा "थोम" पहुँचने जैसा लगता है।
मार्गम की रचनाएँ और अलारिप्पु
अडवु और कोरवै पारंपरिक प्रस्तुति (मार्गम) की रचनाएँ बनाते हैं:
- अलारिप्पु: शुरुआती "खिलने" वाली रचना। शुद्ध नृत्य, कोई कहानी नहीं, आमतौर पर तिस्र एक (3 मात्रा) में। आँखें, गर्दन, कंधे, बाँहें, फिर पैर बारी-बारी चलते हैं, जैसे फूल खिलता है।
- जतिस्वरम: किसी राग के स्वरों पर शुद्ध नृत्य।
- शब्दम: शब्द और भाव (अभिनय) वाली पहली रचना।
- वर्णम: लंबी मुख्य रचना, शुद्ध नृत्य और अभिनय का मेल।
- पदम / जावळि: धीमे, भाव भरे गीत।
- तिल्लाना: तेज़, आनंद भरा शुद्ध नृत्य, फिर छोटी प्रार्थना (मंगलम)।
शुद्ध नृत्य नृत्त; भाव वाला नृत्य अभिनय/नृत्य।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आदि ताल = 4 + 2 + 2 = 8 मात्रा (ताली + 3 उँगली, ताली + पलट, ताली + पलट)
- रूपक ताल = 2 + 4 = 6 मात्रा
- तिस्र एक = 3 मात्रा (ताली + 2 उँगली)
- गति: पहली = 1, दूसरी = 2, तीसरी = 4 कदम प्रति मात्रा
- एक चक्र के कदम = मात्राएँ × कदम प्रति मात्रा
- कोरवै समम (पहली मात्रा) पर उतरता है
हल किए गए उदाहरण
1. दूसरी गति में आदि ताल के एक चक्र में कितनी थाप?
आदि = 8 मात्रा; दूसरी गति = 2 प्रति मात्रा; 8 × 2 = 16 थाप।
2. छात्र तीसरी गति में आदि ताल के 2 चक्र तट्टडवु करता है। कितनी थाप?
8 × 4 × 2 = 64 थाप।
3. रूपक ताल की हाथ क्रियाएँ दिखाइए।
ताली, पलट (द्रुतम), फिर ताली, उँगली, उँगली, उँगली (लघु): 6 मात्रा।
4. अलारिप्पु तिस्र एक में है। 4 चक्र में कितनी मात्राएँ?
3 × 4 = 12 मात्रा।
5. 5 बोल का कोरवै वाक्यांश 3 बार, हर बोल आधी मात्रा पर। क्या यह आदि ताल की दूसरी गति (16 आधी मात्रा) में बैठकर सम पर उतरेगा?
5 × 3 = 15 आधी मात्रा। 1 आधी मात्रा का ठहराव बचता है, और अगला बोल अगले चक्र की पहली मात्रा पर आता है: सम पर अंत।
6. मार्गम क्रम में लगाइए: तिल्लाना, अलारिप्पु, वर्णम, जतिस्वरम।
अलारिप्पु → जतिस्वरम → वर्णम → तिल्लाना।
आम गलतियाँ
- अरमंडी में घुटने आगे गिराना। घुटने बगल की ओर, पंजों के ऊपर खुलें।
- तीसरी गति में जाते समय ताल ही तेज़ कर देना। मात्रा स्थिर रहती है; केवल कदम प्रति मात्रा दोगुने होते हैं।
- रूपक को 8 मात्रा गिनना। आदि 8; रूपक 6।
- सोचना कि अलारिप्पु कहानी कहता है। यह शुद्ध नृत्य (नृत्त) है, शब्द नहीं।