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भरतनाट्यम और मणिपुरी: प्रस्तुति-क्रम और विशेषताएँ

भरतनाट्यम का पूरा कार्यक्रम (मार्गम) इस क्रम में चलता है: पुष्पांजलि, अलारिप्पु, जतिस्वरम, शब्दम, वर्णम, पदम, जावली और थिल्लाना। इसकी विशेषताएँ हैं अरमंडी मुद्रा, नट्टुवनार के साथ कर्नाटक संगीत, और घुँघरू वाली प्लेटदार रेशमी साड़ी। मणिपुरी कोमल और प्रवाहमय है: रास लीला, अभिसार और नर्तन, पुंग व करताल चोलम, लास्य और तांडव, कोमल पदचालन और संपूर्ण-शरीर अभिनय।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. पूरा कार्यक्रम सीढ़ी जैसा है। नीचे से शुरू, बीच में सबसे ऊँची सीढ़ी और अंत में आनंद के साथ उतराई। हर खंड एक प्रस्तुति है।
  2. पहले अभ्यास: पुष्पांजलि (फूल अर्पण) और अलारिप्पु (शरीर खोलना)। अभी कोई कथा नहीं।
  3. फिर ताल और शब्द: जतिस्वरम में केवल स्वरों पर नृत्य; शब्दम में शब्द जुड़ जाते हैं जिन्हें दिखाया जाता है।
  4. सबसे ऊँचा खंड वर्णम है। तेज़ कदम और गहरी कथा साथ-साथ। इसमें सबसे ज़्यादा समय और कौशल लगता है।
  5. फिर भाव और समापन: पदम और जावली कोमलता से प्रेम दिखाते हैं, और थिल्लाना आनंद भरे तेज़ नृत्य से अंत करता है।
  6. खुला अभ्यास: कोई भी प्रस्तुति चुनिए, या मणिपुरी चुनकर रास लीला, पुंग चोलम आदि देखिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कार्यक्रम सीढ़ी जैसा क्यों है?

यह अभ्यास करते व्यक्ति की तरह बढ़ता है: पहले आसान ताल, बीच में सबसे कठिन प्रस्तुति, अंत में प्रसन्न समापन। खंडों की ऊँचाई देखिए।

जतिस्वरम और शब्दम में क्या अंतर है?

जतिस्वरम में केवल स्वर हैं; शब्दम में शब्द हैं जिन्हें नर्तक दिखाता है।

वर्णम खास क्यों है?

यह सबसे ऊँचा खंड है: सबसे लंबी प्रस्तुति, जिसमें तेज़ कदम और गहरी कथा दोनों हैं।

पदम और जावली में अंतर क्या है?

पदम धीमा और गहरा है; जावली हल्की और तेज़।

पुंग चोलम लास्य है या तांडव?

तांडव, क्योंकि यह बलशाली है। खुले अभ्यास में मणिपुरी चुनिए।

भरतनाट्यम की प्रस्तुतियाँ (मार्गम): पुष्पांजलि से थिल्लाना

भरतनाट्यम के पूरे कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के क्रम को मार्गम (मार्ग) कहते हैं।

  1. पुष्पांजलि: फूलों की अंजलि; ईश्वर, गुरु, संगीतकारों और दर्शकों को प्रणाम।
  2. अलारिप्पु: पहली ताल-प्रस्तुति; केवल ताल के बोल; गर्दन, आँखें और शरीर खुलते हैं।
  3. जतिस्वरम: स्वरों पर शुद्ध नृत्य; कोई शब्द नहीं।
  4. शब्दम: शब्दों वाला नृत्य; नर्तक गीत का अर्थ दिखाता है।
  5. वर्णम: सबसे लंबी और मुख्य प्रस्तुति; नृत्त (कदम) और नृत्य (कथा) साथ-साथ। यह कार्यक्रम का केंद्र है।
  6. पदम: धीमा, कोमल भाव-गीत, अक्सर प्रेम; चेहरे से गहरा अभिनय।
  7. जावली: छोटा, हल्का प्रेम-गीत, पदम से तेज़।
  8. थिल्लाना: आनंद भरा तेज़ समापन, शुद्ध कदम और सुंदर मुद्राएँ।

क्रम देखिए: पहले कथा रहित ताल, फिर कथा और भाव, अंत में शुद्ध आनंद।

विशेषताएँ: वेशभूषा, संगीत और मूल मुद्रा

वेशभूषा: प्लेटदार चटक रेशमी साड़ी जो घुटने मुड़ने पर पंखे की तरह खुलती है, कमरबंद, गहने, बालों में फूल, हाथ-पैरों पर लाल रंग और पैरों में घुँघरू।

संगीत: कर्नाटक संगीत। नट्टुवनार (गुरु) छोटी झाँझ से ताल देते हैं और ताल के बोल बोलते हैं। साथ में गायक, मृदंग, वायलिन या बाँसुरी, और कभी-कभी वीणा।

मूल मुद्रा: अरमंडी (आधा बैठना): पीठ सीधी, घुटने मुड़े और बाहर की ओर, एड़ियाँ साथ, दोनों पैरों पर बराबर भार। सारे अडवु इसी से शुरू होते हैं।

मणिपुरी प्रस्तुति: रास लीला, अभिसार और नर्तन

मणिपुरी नृत्य मणिपुर से आया है। इसकी मुख्य प्रस्तुति रास लीला है: कृष्ण, राधा और गोपियाँ कोमल घेरों में नाचते हैं। अलग-अलग ऋतुओं और कथाओं की अलग रास लीलाएँ हैं।

दो मुख्य दृश्य हैं अभिसार (राधा कृष्ण से मिलने निकलती हैं) और नर्तन (दोनों का आनंद-नृत्य)।

पुंग चोलम और करताल चोलम

पुंग चोलम ढोल का नृत्य है। पुरुष पुंग (दो मुँह वाला ढोल) बजाते हुए कूदते, घूमते और झूमते हैं। करताल चोलम झाँझ (करताल) का नृत्य है, जो ताल के साथ बजाई जाती है। दोनों मणिपुर की संकीर्तन परंपरा से आते हैं।

लास्य और तांडव; पदचालन; संपूर्ण-शरीर अभिनय

लास्य का अर्थ है कोमल, सुंदर नृत्य; तांडव का अर्थ है बलशाली, दृढ़ नृत्य। मणिपुरी में दोनों हैं: रास लीला अधिकतर लास्य है, पुंग चोलम तांडव।

पदचालन कोमल और तैरती हुई होती है; पैर फर्श को हल्के से छूते हैं, घुटने थोड़े मुड़ते हैं, और गतियाँ तीखी नहीं बल्कि गोल और बहती हुई हैं।

मणिपुरी में अभिनय पूरे शरीर से होता है: चेहरा शांत रहता है, और भाव बाँहों, हाथों, शरीर के झुकाव और चाल से दिखता है। लड़कियों की वेशभूषा में कड़ा बेलनाकार घाघरा (कुमिल) और हल्का दुपट्टा होता है, और कृष्ण धोती तथा मोरपंख वाला मुकुट पहनते हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. क्रम में लगाइए: थिल्लाना, वर्णम, अलारिप्पु, पदम।

अलारिप्पु → वर्णम → पदम → थिल्लाना।

2. किन प्रस्तुतियों में कथा या शब्द नहीं, केवल कदम और ताल हैं?

अलारिप्पु (ताल के बोल) और जतिस्वरम (स्वर)। थिल्लाना भी अधिकतर शुद्ध नृत्य है।

3. वर्णम को कार्यक्रम के बीच में क्यों रखा जाता है?

यह सबसे लंबी और कठिन प्रस्तुति है, जिसमें कदम और कथा साथ हैं। तब तक नर्तक अभ्यस्त हो चुका होता है, इसलिए यह शुरुआती अभ्यास के बाद और हल्की प्रस्तुतियों से पहले आती है।

4. पुरुषों का समूह ढोल बजाते हुए कूदता और घूमता है। यह मणिपुरी की कौन सी प्रस्तुति है और लास्य है या तांडव?

पुंग चोलम। यह बलशाली है, इसलिए तांडव है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. मार्गम की पहली प्रस्तुति कौन सी है?
2. केंद्रीय और सबसे लंबी प्रस्तुति है:
3. भरतनाट्यम में झाँझ से ताल कौन देता है?
4. पुंग चोलम किसके साथ नृत्य है?
5. मणिपुरी अभिनय मुख्यतः किससे होता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरतनाट्यम में प्रस्तुतियों का क्रम क्या है?

पुष्पांजलि, अलारिप्पु, जतिस्वरम, शब्दम, वर्णम, पदम, जावली, थिल्लाना।

मणिपुरी नृत्य की मुख्य विशेषता क्या है?

यह कोमल और बहता हुआ है, अधिकतर रास लीला में राधा-कृष्ण पर, संपूर्ण-शरीर अभिनय के साथ, और ढोल व झाँझ के बलशाली नृत्य (पुंग और करताल चोलम)।

क्या यह CBSE कक्षा 11 में है?

हाँ। "प्रस्तुति-क्रम और विशेषताएँ" CBSE कक्षा 11 भरतनाट्यम (057) और मणिपुरी (060) का सिद्धांत विषय है।

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