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मणिपुरी नृत्य: शब्द, चोलोम, रास और वेशभूषा

मणिपुरी नृत्य मणिपुर का नृत्य है, कोमल, गोल और भक्तिमय। चाली चलने का ढंग है और भंगी शरीर की मुद्रा। चोलोम ढोल या झाँझ के साथ नाचने वाला नृत्य है (पुंग चोलोम, कर्ताल चोलोम)। संकीर्तन समूह में भक्ति-गायन है जिसमें राजमेल, मेनकुप, तंचप जैसी तालें हैं। रास पाँच प्रकार का होता है। राधा और गोपियाँ पोतलोई स्कर्ट पहनती हैं; कृष्ण पीली धोती, मोरपंख का मुकुट और वैष्णव तिलक।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. चाली मणिपुरी नर्तक की चाल है: कोमल और गोल। भंगी एक मुद्रा है। पैरों के निशान घुमावदार राह पर देखो, सीधी रेखा में नहीं।
  2. चोलोम ढोल-नृत्य है। पुंग चोलोम में नर्तक पुंग ढोल बजाता है। कर्ताल चोलोम में झाँझ।
  3. संकीर्तन घेरे में बैठकर समूह-गायन है। बीच में पुंग। मात्राएँ राजमेल, मेनकुप, तंचप जैसी तालों में गिनी जाती हैं।
  4. रास पाँच प्रकार के हैं: महा, वसंत, कुंज, नित्य और दिबा (दिन का)। घड़ी का काँटा दिन या रात बताता है।
  5. वेशभूषा: राधा के लिए पोतलोई (ढोल-जैसी स्कर्ट) और कुही (घूँघट)। कृष्ण के लिए पीली धोती, मोरपंख का मुकुट और तिलक।
  6. अब तुम खेलो: एक-एक चीज़ पहनाओ या उतारो और देखो कौन-सा पात्र बनता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या चाली सिर्फ़ चलना है?

यह चलने का ढंग है और मंच पर पैरों और शरीर की गति भी, सिर्फ़ सादा चलना नहीं।

नर्तक नाचते हुए ढोल क्यों बजाता है?

चोलोम में ढोल और नृत्य एक ही कला हैं। इससे ताल और ताकत साथ-साथ सधती है।

गायक घेरे में क्यों बैठते हैं?

संकीर्तन साझा भक्ति है। घेरे का मतलब है सब शामिल हैं।

क्या पाँचों रास एक जैसे दिखते हैं?

ऋतु, समय और कथा अलग हैं, पर सब कोमल गोल चालों के बने हैं।

पोतलोई कड़ी क्यों होती है?

कड़ा आकार ढोल-जैसा गोल रूप रखता है और घूमते नर्तक के साथ फूल की तरह चलता है।

क्या दोनों पोशाकें साथ पहनी जा सकती हैं?

नहीं। राधा और कृष्ण की वेशभूषा अलग है। दोनों के हिस्से पहनाओ तो "मिला-जुला" दिखेगा, ताकि याद रहे।

चाली और भंगी

मणिपुरी चाल कोमल और बहती हुई होती है। नर्तक शायद ही नुकीले कोण बनाता है; हाथ और बाँहें लहरों की तरह मुड़ती हैं।

चाली का अर्थ है चलने का ढंग: पैर कैसे सरकते हैं, शरीर कैसे ढलता है, नर्तक मंच पर कैसे चलता है। भंगी का अर्थ है मुद्रा या शरीर की सुंदर लचक। ढोल पर जुड़ी हुई भंगियों की छोटी लड़ियों को अक्सर भंगी परेंग कहते हैं।

चोलोम, संकीर्तन और तालें

चोलोम वह नृत्य है जिसमें नर्तक नाचते-नाचते वाद्य बजाता है।

संकीर्तन मणिपुर में पुंग और कर्ताल के साथ भक्ति-गायन है। यह मणिपुरी वैष्णव पूजा और नृत्य का हृदय है। मात्राओं के चक्र ताल कहलाते हैं; जाने-माने नाम हैं राजमेल, मेनकुप और तंचप।

रास के पाँच प्रकार

रास (रास लीला) कृष्ण और गोपियों का नृत्य है, जिसकी अगुआ राधा हैं। मणिपुर में पाँच रूप हैं:

इनमें ऋतु, समय और कथा का अंतर है, पर सब कोमल, गोल चालों के घेरों में नाचे जाते हैं।

वेशभूषा: पोतलोई, कृष्ण और तिलक

पोतलोई राधा और गोपियों की ख़ास स्कर्ट है। यह कड़ी होती है और छोटे, चौड़े ढोल या बेलन जैसी बनी होती है, चमकदार सजावट के साथ। सिर और चेहरे पर हल्का पारदर्शी घूँघट कोमलता बढ़ाता है।

कृष्ण की वेशभूषा में पीली धोती, मोरपंख वाला मुकुट और बाँसुरी होती है। नर्तक वैष्णव तिलक भी लगाते हैं: माथे और नाक पर चंदन की रेखा, विष्णु और कृष्ण की भक्ति का चिह्न।

करके देखो

घर पर करो। घुटने नरम रखकर और बाँहें मोड़कर हल्के गोल घेरे में चलो (चाली)। रुककर एक सुंदर मुद्रा बनाओ (भंगी)। अब दोस्तों के साथ घेरे में बैठकर एक सरल गीत गाओ और एक-सी गिनती में ताली दो (संकीर्तन)। तेज़ और नुकीले नृत्य से फ़र्क महसूस करो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. नर्तक नाचते हुए पुंग ढोल बजाता है। यह कौन-सा चोलोम है?

पुंग चोलोम।

2. कौन-सा वस्त्र ढोल जैसा है और राधा-गोपियाँ पहनती हैं?

पोतलोई।

3. कौन-सा रास दिन में नाचा जाता है?

दिबा रास।

4. चाली और भंगी में क्या अंतर है?

चाली चलने का ढंग है। भंगी मुद्रा या शरीर की लचक है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पोतलोई किसकी वेशभूषा है?
2. चाली का अर्थ है:
3. पुंग चोलोम किसके साथ होता है?
4. इनमें रास कौन-सा नहीं है?
5. कृष्ण के मुकुट में क्या होता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोतलोई क्या है?

राधा और गोपियों की कड़ी, ढोल जैसी स्कर्ट।

चोलोम क्या है?

चोलोम ऐसा नृत्य है जिसमें नर्तक नाचते हुए पुंग या कर्ताल जैसा वाद्य बजाता है।

मणिपुरी नृत्य इतना कोमल क्यों है?

यह भक्ति की परंपरा से आया है, जिसमें नर्तक प्रेम और शांति दिखाता है; चालें गोल, बहती और कोमल हैं।

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