चाली और भंगी
मणिपुरी चाल कोमल और बहती हुई होती है। नर्तक शायद ही नुकीले कोण बनाता है; हाथ और बाँहें लहरों की तरह मुड़ती हैं।
चाली का अर्थ है चलने का ढंग: पैर कैसे सरकते हैं, शरीर कैसे ढलता है, नर्तक मंच पर कैसे चलता है। भंगी का अर्थ है मुद्रा या शरीर की सुंदर लचक। ढोल पर जुड़ी हुई भंगियों की छोटी लड़ियों को अक्सर भंगी परेंग कहते हैं।
चोलोम, संकीर्तन और तालें
चोलोम वह नृत्य है जिसमें नर्तक नाचते-नाचते वाद्य बजाता है।
- पुंग चोलोम: नर्तक कूदते-घूमते हुए पुंग, दो-मुँह वाला ढोल, बजाता है।
- कर्ताल चोलोम: नर्तक नाचते हुए कर्ताल (झाँझ) बजाता है।
- ढोल चोलोम: ढोल के साथ ऊर्जा से भरा नृत्य।
संकीर्तन मणिपुर में पुंग और कर्ताल के साथ भक्ति-गायन है। यह मणिपुरी वैष्णव पूजा और नृत्य का हृदय है। मात्राओं के चक्र ताल कहलाते हैं; जाने-माने नाम हैं राजमेल, मेनकुप और तंचप।
रास के पाँच प्रकार
रास (रास लीला) कृष्ण और गोपियों का नृत्य है, जिसकी अगुआ राधा हैं। मणिपुर में पाँच रूप हैं:
- महा रास: बड़ा रास, शरद ऋतु का।
- वसंत रास: वसंत का रास।
- कुंज रास: कुंजों (बगीचों) का रास।
- नित्य रास: रोज़ का रास।
- दिबा रास: दिन का रास।
इनमें ऋतु, समय और कथा का अंतर है, पर सब कोमल, गोल चालों के घेरों में नाचे जाते हैं।
वेशभूषा: पोतलोई, कृष्ण और तिलक
पोतलोई राधा और गोपियों की ख़ास स्कर्ट है। यह कड़ी होती है और छोटे, चौड़े ढोल या बेलन जैसी बनी होती है, चमकदार सजावट के साथ। सिर और चेहरे पर हल्का पारदर्शी घूँघट कोमलता बढ़ाता है।
कृष्ण की वेशभूषा में पीली धोती, मोरपंख वाला मुकुट और बाँसुरी होती है। नर्तक वैष्णव तिलक भी लगाते हैं: माथे और नाक पर चंदन की रेखा, विष्णु और कृष्ण की भक्ति का चिह्न।
करके देखो
घर पर करो। घुटने नरम रखकर और बाँहें मोड़कर हल्के गोल घेरे में चलो (चाली)। रुककर एक सुंदर मुद्रा बनाओ (भंगी)। अब दोस्तों के साथ घेरे में बैठकर एक सरल गीत गाओ और एक-सी गिनती में ताली दो (संकीर्तन)। तेज़ और नुकीले नृत्य से फ़र्क महसूस करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- चाली = चलने का ढंग; भंगी = मुद्रा या शरीर की लचक
- चोलोम = ढोल या झाँझ के साथ नृत्य (पुंग, कर्ताल, ढोल)
- संकीर्तन = पुंग और कर्ताल के साथ समूह भक्ति-गायन
- तालें: राजमेल, मेनकुप, तंचप
- रास: महा, वसंत, कुंज, नित्य, दिबा
हल किए गए उदाहरण
1. नर्तक नाचते हुए पुंग ढोल बजाता है। यह कौन-सा चोलोम है?
पुंग चोलोम।
2. कौन-सा वस्त्र ढोल जैसा है और राधा-गोपियाँ पहनती हैं?
पोतलोई।
3. कौन-सा रास दिन में नाचा जाता है?
दिबा रास।
4. चाली और भंगी में क्या अंतर है?
चाली चलने का ढंग है। भंगी मुद्रा या शरीर की लचक है।
आम गलतियाँ
- चोलोम (वाद्य के साथ नृत्य) को वाद्य समझ लेना। पुंग ढोल है, कर्ताल झाँझ।
- यह सोचना कि मणिपुरी नृत्य तेज़ और नुकीला है। यह कोमल और गोल है।
- पोतलोई को लंबा बहता घाघरा कहना। यह कड़ी और ढोल जैसी होती है।
- भूल जाना कि दिबा रास दिन का है; बाकी चार ऋतु या प्रकृति से जुड़े हैं।