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कथकली के शब्द, मुख-श्रृंगार और संगीत

कथकली केरल का नृत्य-नाटक है। इसके श्रृंगार के पाँच प्रकार हैं (पच्चा, कत्ती, ताड़ी, करी, मिनुक्कु), जिनके रंग से दर्शक पात्र पहचानता है। प्रस्तुति केली (ढोल) और पुरप्पाड (पहला नृत्य) से शुरू होती है, बीच में ताल पर शुद्ध-नृत्य कलासम आते हैं, और गायक, चेंडा, मद्दलम, एडक्का साथ देते हैं। मुडियेट्टु, तेय्यम, कूडियाट्टम और कलरिपयट्टु केरल की पड़ोसी कलाएँ हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. केरल की पुरानी कलाएँ हैं: मुडियेट्टु, तेय्यम, कूडियाट्टम और कलरिपयट्टु। कथकली इन्हीं के पड़ोस में पली।
  2. शाम को केली के ढोल गाँव को बुलाते हैं। फिर पुरप्पाड: परदा हटता है और पात्र पहला नृत्य करते हैं।
  3. कलासम शुद्ध नृत्य का टुकड़ा है। यह ताल की गिनती पर चलता है। पहली मात्रा (सम) चमकती देखो।
  4. संगीत: गायक के पास चेंगिला और इलत्तालम, साथ में चेंडा, मद्दलम और एडक्का ढोल। जो चमके, वही अभी बज रहा है।
  5. पाँच श्रृंगार: पच्चा, कत्ती, ताड़ी, करी, मिनुक्कु। रंग से पात्र का स्वभाव एक शब्द गाए बिना पता चल जाता है।
  6. अब तुम खेलो: कोई श्रृंगार चुनो और देखो उसे कौन पहनता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या कथकली बहुत पुरानी है?

यह कुछ सौ वर्षों में बनी, और इसने कूडियाट्टम, कलरिपयट्टु और अनुष्ठान-रंगमंच जैसी पुरानी केरल कलाओं से लिया।

केली और पुरप्पाड में क्या फ़र्क है?

केली शाम का ढोल-बुलावा है। पुरप्पाड प्रस्तुति खुलने पर मंच का पहला नृत्य है।

क्या कलासम कहानी का हिस्सा है?

नहीं। यह कहानी के बिना शुद्ध नृत्य है, ताल पर चलता है। अक्सर हिस्सा समाप्त करता है।

शब्द कौन गाता है?

नर्तकों के पीछे दो गायक गाते हैं। कलाकार कभी नहीं गाते; वे शब्दों को मुद्राओं से दिखाते हैं।

कत्ती और पच्चा में फ़र्क कैसे करें?

दोनों हरे हैं। पच्चा सादा और शांत है। कत्ती में लाल निशान और नाक पर गाँठ होती है।

क्या स्त्री पात्र मिनुक्कु हो सकती है?

हाँ। मिनुक्कु कोमल पीला-नारंगी रंग है जो स्त्रियों, ऋषियों और ब्राह्मणों के लिए है।

कथकली के आसपास की केरल की कलाएँ

कथकली अकेले नहीं पनपी। केरल की चार पुरानी कलाओं ने इसे ढाला।

केली, पुरप्पाड और कलासम

केली (केलिकोट्टु भी) शाम का ढोल है जो गाँव को बताता है कि प्रस्तुति होने वाली है। पुरप्पाड का अर्थ है "निकलना": पहला कार्यक्रम, जहाँ पात्र पकड़े हुए परदे के पीछे से आते हैं और स्वागत-नृत्य करते हैं।

कलासम कहानी के बिना शुद्ध नृत्य (नृत्त) का छोटा टुकड़ा है। यह ताल के निश्चित चक्र पर चलता है। अक्सर कलासम किसी हिस्से को समाप्त करता है, जैसे नृत्य से बना पूर्ण-विराम। चेम्पट जैसी ताल में 8 मात्राएँ होती हैं; दूसरी तालें लंबी या छोटी होती हैं।

श्रृंगार के पाँच प्रकार

चेहरे का श्रृंगार चावल के लेप, रंगों और बड़े मुकुट से बनता है। रंग बताता है कि आप कैसे पात्र को देख रहे हैं।

गायन और ताल-वाद्य संगीत

कथकली में कलाकार न बोलते हैं, न गाते हैं। पीछे दो गायक खड़े होकर कथा गाते हैं। पहला (पोन्नानी) चेंगिला (गोल काँसे का घंटा) और दूसरा (सिंकिडी) इलत्तालम (छोटी झाँझ) बजाकर ताल रखता है।

ताल-वाद्य ज़ोरदार और रोमांचक है: चेंडा (ऊँचा ढोल, डंडियों से बजता है), मद्दलम (बेलनाकार ढोल, हाथ से) और एडक्का (डमरू जैसा ढोल, कोमल भावों के लिए)। ये सब मिलकर नृत्य को हर मात्रा पर उठाते हैं।

करके देखो

घर पर करो। कागज़ पर सादे चेहरे बनाओ। एक को हरा रंगो और नाक पर लाल गाँठ बनाओ। दूसरे को काला करो। तीसरे को पीला-नारंगी। दोस्त को दिखाकर पूछो कि नायक कौन है, जंगली शिकारी कौन और ऋषि कौन। फिर 3D के चुनाव से अपने जवाब जाँचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक पात्र का हरा चेहरा है और नाक पर लाल गाँठ। यह कौन-सा श्रृंगार है और कैसा पात्र?

कत्ती श्रृंगार: घमंडी, ताकतवर और बुराई की झलक वाला पात्र, जैसे रावण।

2. कथकली के एक पात्र की दाढ़ी सफ़ेद है। वह कौन हो सकता है?

सफ़ेद दाढ़ी वाला ताड़ी श्रृंगार: हनुमान जैसा दिव्य वानर पात्र।

3. कथकली की रात का कौन-सा हिस्सा ताल पर चलने वाला शुद्ध नृत्य है?

कलासम।

4. कौन-सा ढोल ऊँचा है और डंडियों से बजता है, कौन-सा बेलनाकार है और हाथ से?

चेंडा ऊँचा है और डंडियों से बजता है। मद्दलम बेलनाकार है और हाथों से बजता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. नेक नायकों के लिए कौन-सा श्रृंगार है?
2. केली क्या है?
3. कलासम किसका टुकड़ा है?
4. कौन-सा ढोल बेलनाकार है?
5. मिनुक्कु श्रृंगार किसके लिए है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कथकली का श्रृंगार इतना रंगीन क्यों है?

कलाकार बोलते नहीं, इसलिए रंग दर्शक को एक नज़र में पात्र का स्वभाव बता देता है।

पुरप्पाड क्या है?

यह कथकली प्रस्तुति का शुरुआती नृत्य है, जहाँ पात्र बाहर आकर स्वागत करते हैं।

क्या कथकली का कलरिपयट्टु से संबंध है?

हाँ। कई कथकली गुरुओं ने कलरिपयट्टु सीखा है, और उसका मज़बूत शरीर-नियंत्रण नृत्य में दिखता है।

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