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ओडिसी में अभिनय, रस और संगीत

अभिनय वह कला है जिससे कहानी और उसका भाव दर्शकों तक पहुँचता है। इसके चार अंग हैं: आंगिक (शरीर), वाचिक (शब्द और गीत), आहार्य (वेशभूषा और श्रृंगार) और सात्त्विक (मन का सच्चा भाव)। नर्तक भाव दिखाता है और दर्शक उसे रस के रूप में महसूस करता है। रस नौ हैं: श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शांत। ओडिसी में पंखे जैसी चुन्नट वाली रेशमी साड़ी, चाँदी के गहने, टाहिया मुकुट, घुँघरू और लाल आलता होता है। संगीत में राग और ताल होते हैं; मर्दल, बाँसुरी, वायलिन या सितार और गिनी बजते हैं, और अक्सर गीत गोविंद गाया जाता है। ओडिशा में गोटीपुआ, छऊ, संबलपुरी, घुमुरा और रणप्पा जैसे लोक-नृत्य भी हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. अभिनय यानी कहानी को दर्शकों तक ले जाना। इसके 4 अंग हैं: शरीर, शब्द, वेशभूषा और मन का भाव।
  2. नर्तक एक भाव दिखाता है। दर्शक उसे रस के रूप में महसूस करता है। रस नौ होते हैं।
  3. वेशभूषा भी अभिनय है: टाहिया मुकुट, चाँदी के गहने, पंखे वाली साड़ी, घुँघरू और आलता।
  4. संगीत ओडिसी की जान है: मर्दल ढोल ताल रखता है, बाँसुरी और वायलिन धुन बजाते हैं।
  5. ओडिशा के लोक-नृत्य भी हैं: गोटीपुआ, छऊ, संबलपुरी, घुमुरा और रणप्पा।
  6. अब आपकी बारी: मुद्रा चुनिए और स्लाइडर से नौ रस बदलिए।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या अभिनय सिर्फ़ चेहरे के हाव-भाव हैं?

नहीं। चेहरा और आँखें आंगिक का हिस्सा हैं। अभिनय में शब्द-गीत, वेशभूषा और मन का सच्चा भाव भी है।

रस कौन महसूस करता है, नर्तक या दर्शक?

दर्शक। नर्तक भाव दिखाता है; दर्शक रस का अनुभव करता है।

ओडिसी नर्तकियाँ हाथ-पैर लाल क्यों रँगती हैं?

लाल आलता से मुद्राएँ और पैरों का काम दूर बैठे दर्शकों को भी साफ़ दिखता है।

राग और ताल में क्या अंतर है?

राग चुने हुए स्वरों से बनी धुन है। ताल मात्राओं का दोहराने वाला चक्र है।

क्या गोटीपुआ और ओडिसी एक ही हैं?

नहीं। गोटीपुआ लड़कियों के वेश में लड़कों की पुरानी परंपरा है। ओडिसी ने इससे कई हरकतें लीं, पर ओडिसी अलग शास्त्रीय नृत्य है।

चौका और त्रिभंगी में क्या फ़र्क है?

चौका चौकोर और स्थिर है; त्रिभंगी में सिर, छाती और कमर उल्टी ओर मुड़कर कोमल रूप बनाते हैं।

अभिनय के चार अंग

अभिनय का अर्थ है 'आगे ले जाना'। नर्तक कहानी और उसका भाव दर्शकों तक ले जाता है।

नाट्य के पुराने ग्रंथों में अभिनय के चार प्रकार बताए गए हैं:

अच्छा नर्तक चारों को जोड़ता है। सुंदर वेशभूषा हो पर मन में भाव न हो, तो नृत्य खाली लगता है।

ओडिसी की दो मूल मुद्राएँ

चौका चौकोर मुद्रा है: घुटने बाहर मुड़े, बाँहें फैली। यह मज़बूत और स्थिर लगती है। त्रिभंगी का अर्थ है 'तीन मोड़': सिर, छाती और कमर उल्टी दिशाओं में मुड़ते हैं। यह मंदिर की मूर्तियों जैसी कोमल लगती है।

भाव और नौ रस

भाव वह अनुभूति है जो नर्तक दिखाता है। रस वह मनोदशा है जिसका दर्शक स्वाद लेता है। 'रस' का अर्थ ही है स्वाद।

रसमनोदशास्थायी भाव
श्रृंगारप्रेम, सौंदर्यरति (प्रेम)
हास्यहँसी-मज़ाकहास
करुणदया, दुःखशोक
रौद्रप्रचंड गुस्साक्रोध
वीरबहादुरीउत्साह
भयानकडरभय
बीभत्सघृणाजुगुप्सा
अद्भुतआश्चर्यविस्मय
शांतशांतिशम (निर्वेद)

पहले आठ रस नाट्यशास्त्र में हैं। शांत रस बाद में जोड़ा गया, जब विद्वानों ने शांति को भी अलग रस माना।

ओडिसी की वेशभूषा और श्रृंगार

ओडिसी संगीत

ओडिसी नृत्य ओडिसी संगीत पर होता है, जो ओडिशा की शास्त्रीय शैली है। इसमें राग (स्वरों का समूह जिससे धुन बनती है) और ताल (मात्राओं का चक्र) होते हैं।

ओडिसी प्रस्तुति के भाग

प्रस्तुति आमतौर पर मंगलाचरण (वंदना) से शुरू होती है, फिर शुद्ध नृत्य (बटु, पल्लवी), फिर कथा-नृत्य (अभिनय), और अंत में तेज़ नृत्य मोक्ष।

ओडिशा के लोक-नृत्य

शास्त्रीय नृत्य लिखे नियमों और लंबे प्रशिक्षण से चलता है। लोक-नृत्य गाँव के जीवन, त्योहारों और काम से निकलता है, और उसमें कोई भी शामिल हो सकता है।

करके देखें: 3D में और घर पर

3D के आख़िरी चरण में चौका और त्रिभंगी बदलिए और स्लाइडर से नौ रस देखिए। घर पर: शीशे के सामने खड़े होइए। सिर्फ़ आँखों और भौंहों से हास्य, करुण और अद्भुत रस दिखाइए। घर के किसी सदस्य से पूछिए कि कौन-सा रस है।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. राधा के अकेले इंतज़ार का दृश्य दिखाते समय नर्तकी की आँखों में सच में आँसू आ जाते हैं। यह कौन-सा अभिनय है और दर्शक कौन-सा रस महसूस करते हैं?

मन से आए सच्चे आँसू सात्त्विक अभिनय हैं। दर्शक करुण रस महसूस करते हैं, या अगर विरह के प्रेम पर ज़ोर हो तो वियोग श्रृंगार।

2. शो से पहले नर्तकी सूती अभ्यास-साड़ी बदलकर रेशमी साड़ी, टाहिया और चाँदी के गहने पहनती है। वह कौन-सा अभिनय जोड़ रही है?

आहार्य अभिनय: बाहर से पहनी जाने वाली हर चीज़, जैसे वेशभूषा, श्रृंगार और गहने।

3. ओडिसी संगीत में ताल रखने वाला वाद्य और हर थाप पर खनकने वाला वाद्य बताइए।

मर्दल (दोनों ओर से बजने वाला ढोल) ताल रखता है। गिनी या मंजीरा (छोटे झाँझ) हर थाप पर बजता है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. वेशभूषा और श्रृंगार किस अभिनय में आते हैं?
2. नवरस में कितने रस हैं?
3. हास्य रस किसकी मनोदशा है?
4. ओडिसी वेशभूषा में टाहिया क्या है?
5. ओडिशा का कौन-सा लोक-नृत्य बाँस की बैसाखियों पर होता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिनय के चार प्रकार कौन-से हैं?

आंगिक (शरीर), वाचिक (शब्द और गीत), आहार्य (वेशभूषा, श्रृंगार, गहने) और सात्त्विक (मन का सच्चा भाव)।

नौ रस कौन-से हैं?

श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शांत।

ओडिसी नृत्य में कौन-से वाद्य बजते हैं?

मर्दल (ढोल), बाँसुरी, वायलिन या सितार, गिनी (छोटे झाँझ) और गायक; कभी-कभी हारमोनियम या वीणा भी।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

सीबीएसई (भारत)कक्षा 12ओडिसी सिद्धांत

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