पाँच रचनाएँ क्रम से
प्रस्तुति-क्रम (रेपर्टवार) का अर्थ है वे रचनाएँ जो नर्तक ने सीखी हैं और प्रस्तुत करता है। ओडिसी में मुख्य रचनाएँ इस क्रम में आती हैं:
- मंगलाचरण: शुरू की प्रार्थना।
- बटु: मज़बूत मुद्राओं वाला शुद्ध नृत्य।
- पल्लवी: बहती धुन और लय वाला शुद्ध नृत्य।
- अभिनय: कहानी और भाव।
- मोक्ष: अंतिम नृत्य।
क्रम प्रार्थना से कौशल, फिर कहानी, फिर खुशी भरी मुक्ति की ओर जाता है। कुछ कार्यक्रमों में और रचनाएँ भी जुड़ती हैं, पर ये पाँच मूल हैं।
मंगलाचरण: शुरू की प्रार्थना
मंगल का अर्थ है शुभ और आचरण का अर्थ है व्यवहार। नर्तक फूल लेकर आता है, धरती पर पैर रखने की क्षमा माँगने के लिए उसे छूता है और देवता (अक्सर भगवान जगन्नाथ या गणेश), गुरु, संगीतकारों और दर्शकों को प्रणाम करता है। यह छोटे गीत पर नाचा जाता है और शांत व आदर भरा होता है।
बटु और पल्लवी: शुद्ध नृत्य की रचनाएँ
बटु
बटु (जिसे बटुक भैरव भी कहते हैं) शुद्ध नृत्य है। नर्तक मज़बूत, मूर्ति जैसी मुद्राएँ बनाता है, जैसी ओडिशा के मंदिरों की दीवारों पर उकेरी आकृतियाँ हैं। इसमें कहानी नहीं होती। ध्यान संतुलन, साफ़ रेखाओं और खड़े होने की मुद्रा पर रहता है।
पल्लवी
पल्लवी का अर्थ है "नई पत्ती" या "कली"। इसमें राग (धुन) और ताल (मात्राओं का चक्र) इस्तेमाल होते हैं और नृत्य फूल की तरह धीरे खुलता है: पहले सरल गतियाँ, फिर बारीक पैटर्न, फिर तेज़ पैरों का काम। यह कोमल और बहता हुआ है, और इसमें भी कहानी नहीं होती।
अभिनय और मोक्ष
अभिनय
नर्तक गीत या कविता का अर्थ चेहरे, आँखों और हाथों की मुद्राओं से दिखाता है। कई गीत गीत गोविंद (जयदेव की अष्टपदियाँ) से आते हैं, जो राधा-कृष्ण पर हैं। यहाँ गति से ज़्यादा भाव मायने रखता है।
मोक्ष
मोक्ष का अर्थ है मुक्ति या आज़ादी। यह अंतिम रचना तेज़ और चमकीली होती है: लय तेज़ होती है, पैरों का काम और ज़ोरदार होता है और नृत्य अचानक शांत, स्थिर मुद्रा पर खत्म होता है। दर्शकों के मन में शांति और खुशी रह जाती है।
करके देखिए: 3D में और घर पर
3D के आख़िरी चरण में पाँचों बटन दबाइए और देखिए कौन-सी सीढ़ी चमकती है और उसकी ऊर्जा-पट्टी कितनी ऊँची है। घर पर: सीधे खड़े होकर हथेलियाँ जोड़कर प्रणाम कीजिए (मंगलाचरण), मूर्ति जैसी मज़बूत मुद्रा 5 सेकंड रोकिए (बटु), बाँहें फूल की तरह खोलिए (पल्लवी), सिर्फ़ चेहरे से छोटी कहानी कहिए (अभिनय), और तेज़ ताली के बाद शांत स्थिर मुद्रा बनाइए (मोक्ष)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्रम: मंगलाचरण, बटु, पल्लवी, अभिनय, मोक्ष।
- मंगलाचरण = शुभ शुरुआत (प्रार्थना, फूल, प्रणाम)।
- बटु = मूर्ति जैसी मुद्राओं वाला शुद्ध नृत्य (बटुक भैरव)।
- पल्लवी = राग और ताल के साथ खिलता शुद्ध नृत्य।
- मोक्ष = मुक्ति: तेज़ समापन जो स्थिर मुद्रा पर रुकता है।
हल किए गए उदाहरण
1. एक नर्तक फूल लेकर आता है, धरती को छूता है और गुरु को प्रणाम करता है। यह कौन-सी रचना है?
यह मंगलाचरण है, प्रस्तुति की शुरुआती प्रार्थना।
2. पाँचों में कौन-सी रचनाएँ कहानी कहती हैं और कितनी नहीं?
सिर्फ़ अभिनय कहानी या भाव कहता है। बाकी चार (मंगलाचरण, बटु, पल्लवी, मोक्ष) में कहानी नहीं है: एक प्रार्थना और तीन शुद्ध नृत्य।
3. 45 मिनट की प्रस्तुति में मंगलाचरण 5 मिनट, बटु 8, पल्लवी 12 और अभिनय 12 मिनट का है। मोक्ष कितने मिनट का है?
पहली चार रचनाएँ 5 + 8 + 12 + 12 = 37 मिनट लेती हैं। मोक्ष = 45 - 37 = 8 मिनट।
आम गलतियाँ
- पल्लवी को कहानी वाली रचना मान लेना। पल्लवी शुद्ध नृत्य है; कहानी वाली रचना अभिनय है।
- मोक्ष का अर्थ आज़ादी है, इसलिए उसे पहले रख देना। मोक्ष अंतिम रचना है।
- मंगलाचरण को कौशल दिखाने वाला नृत्य कहना। यह छोटी प्रार्थना की रचना है।
- बटु और पल्लवी को मिला देना। बटु मज़बूत मूर्ति जैसी मुद्राएँ है; पल्लवी राग और ताल वाला बहता, खिलता नृत्य है।