📘 CodingMarble Learn

कथक: कथाएँ और प्रस्तुति-क्रम

कथक का अर्थ है "कथा कहने वाला"। इसकी कहानियाँ रामायण, महाभारत, भागवत (कृष्ण की कथाएँ) और गीत गोविंद से आती हैं। एक प्रस्तुति में आम तौर पर इस क्रम से रचनाएँ होती हैं: वंदना, बंदिश (ताल में बँधे नृत्य-पैटर्न), अभिनय की रचनाएँ (ठुमरी, भजन, गत भाव), तिरवट, चतुरंग (चार हिस्से जुड़े हुए) और अंत में तेज़ तराना।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. कथक का अर्थ है "कथा कहने वाला"। इसकी कहानियाँ 4 स्रोतों से आती हैं: रामायण, महाभारत, भागवत और गीत गोविंद।
  2. प्रस्तुति 6 रचनाओं का रास्ता है: वंदना, बंदिश, अभिनय की रचना, तिरवट, चतुरंग, तराना।
  3. पहले प्रणाम (वंदना)। फिर बंदिश: तय पैटर्न जो सम, यानी मात्रा 1, पर लौटना ही चाहिए।
  4. आगे अभिनय की रचनाएँ आती हैं। नर्तक चेहरे और हाथों से कहानी कहता है: ठुमरी, भजन, गत भाव।
  5. तिरवट, तराना और चतुरंग लय और रफ़्तार दिखाते हैं। चतुरंग एक रचना में 4 हिस्से जोड़ता है।
  6. अब आपकी बारी: हर रचना पर दबाइए और रास्ते पर चलिए। क्या आप क्रम से सभी 6 नाम बोल सकते हैं?

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कथक को कथा कहने वालों का नृत्य क्यों कहते हैं?

इसका नाम कथा से आया है। पुराने कथाकार मंदिरों में शब्दों, इशारों और पैरों की चाल से कहानियाँ सुनाते थे।

क्या प्रस्तुति का क्रम तय होता है?

नहीं। यह आम क्रम है। गुरु इसे बदल सकते हैं, पर शुरू में प्रार्थना और अंत में जोशीली रचना होती ही है।

सम क्या है और ज़रूरी क्यों है?

सम चक्र की मात्रा 1 है। बंदिश को वहीं उतरना होता है, ताकि नर्तक और तबला-वादक साथ खत्म करें।

बंदिश और अभिनय की रचना में क्या अंतर है?

बंदिश ताल में बँधा लय-पैटर्न है। अभिनय की रचना चेहरे और हाथों से कहानी या भाव कहती है।

क्या तराना शब्दों वाला गीत है?

इसमें ता, नो, दिर, दिर जैसे सुरीले बोल गाए जाते हैं, कहानी के शब्द नहीं। अर्थ गति और लय से बनता है।

छहों रचनाएँ कैसे याद रखूँ?

तरकीब "व-बं-अ-ति-च-त" याद कीजिए और रास्ते पर हर बटन क्रम से दबाते हुए चलिए।

कथक की कहानियाँ कहाँ से आती हैं

कथक शब्द कथा से बना है, यानी कहानी। पुराने समय में कथाकार मंदिरों और गाँवों में आवाज़, हाथों के इशारों और पैरों की चाल से कहानियाँ सुनाते थे।

चार बड़े स्रोत कथक को उसके ज़्यादातर विषय देते हैं:

नर्तक एक दृश्य चुनता है और उसे अभिनय (चेहरे और हाथों) और लय से दिखाता है।

प्रस्तुति का क्रम

प्रस्तुति रचनाओं की एक कड़ी है। एक आम क्रम यह है:

  1. वंदना
  2. बंदिश
  3. अभिनय की रचना
  4. तिरवट
  5. चतुरंग
  6. तराना

गुरु और नर्तक क्रम बदल सकते हैं या कोई रचना छोड़ भी सकते हैं। बात वही रहती है: आदर से शुरू करो, कौशल दिखाओ, कहानी सुनाओ और खुशी व तेज़ी के साथ खत्म करो।

वंदना और बंदिश

वंदना

शुरू की छोटी प्रार्थना। नर्तक ईश्वर, गुरु, संगीतकारों और दर्शकों को प्रणाम करता है। इसे गाया या बोला जाता है और नर्तक सरल हस्त-मुद्राओं से दिखाता है।

बंदिश

बंदिश यानी "बँधी हुई" रचना: नृत्य के बोलों का तय पैटर्न, जो किसी ताल में बँधा होता है। कथक में आम प्रकार हैं तुकड़ा और तोड़ा (छोटे चमकदार पैटर्न) और परन (ढोल के बोलों वाला मज़बूत पैटर्न)। बंदिश कितनी भी लंबी हो, उसे सम, यानी चक्र की पहली मात्रा, पर लौटना ही होता है। तीनताल में 16 मात्राएँ हैं, इसलिए नर्तक 1 से 16 गिनता है और ठीक 1 पर उतरता है।

अभिनय की रचनाएँ

अभिनय की रचना में गति से ज़्यादा कहानी मायने रखती है। नर्तक हर पंक्ति का अर्थ चेहरे, आँखों और हाथों से दिखाता है।

तिरवट, तराना और चतुरंग

ये तीनों रचनाएँ कहानी से ज़्यादा लय और रफ़्तार की हैं। इसी कारण ये वहाँ रखी जाती हैं जहाँ नर्तक अपना कौशल दिखाता है।

करके देखिए: 3D में और घर पर

3D के आख़िरी चरण में छहों बटन दबाइए और आकृति को रास्ते पर चलते देखिए। घर पर तीनताल की 16 मात्राएँ ताली से बजाइए (1 से 16) और हर बार 1 पर पहुँचकर "सम!" कहिए। फिर परिवार के लिए छोटी प्रस्तुति बनाइए: एक प्रणाम, सिर्फ़ हाथों से कही एक कहानी और तेज़ ताली का समापन।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक नर्तक कृष्ण को गाँववालों को बचाने के लिए पहाड़ उठाते दिखाता है। यह कथा किस स्रोत की है और यह कैसी रचना है?

कृष्ण और पहाड़ की कथा भागवत में है। अगर इसे गीत पर चेहरे और हाथों से दिखाया जाए तो यह अभिनय की रचना है; अगर बिल्कुल शब्द न हों तो यह गत भाव है।

2. तीनताल की एक बंदिश बिना रुके 3 बार नाची जाती है। नर्तक कितनी मात्राएँ गिनता है और अंत में कहाँ उतरता है?

तीनताल में 16 मात्राएँ हैं, इसलिए 3 चक्र = 16 × 3 = 48 मात्राएँ। 48वीं मात्रा के बाद नर्तक सम, यानी अगले चक्र की मात्रा 1, पर उतरता है।

3. एक रचना में गाए हुए सुर (सा रे ग म), कविता, तराना के बोल और ढोल के बोल हैं। इसका नाम क्या है और इसमें कितने हिस्से हैं?

यह चतुरंग है, क्योंकि चतुर का अर्थ चार है। चार हिस्से हैं: कविता, सरगम, तराना के बोल और तिरवट के बोल।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. कथक शब्द किससे बना है?
2. कथक की प्रस्तुति आम तौर पर किस रचना से शुरू होती है?
3. बंदिश को हमेशा कहाँ लौटना होता है?
4. चतुरंग में कितने हिस्से होते हैं?
5. इनमें अभिनय की रचना कौन-सी है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कथक के विषय क्या हैं?

रामायण, महाभारत, भागवत (कृष्ण-कथाएँ) और गीत गोविंद की कहानियाँ, साथ में कविताएँ और भजन।

कथक प्रस्तुति का क्रम क्या है?

आम क्रम है: वंदना, बंदिश, अभिनय की रचना, तिरवट, चतुरंग और तराना; गुरु इसे बदल भी सकते हैं।

कथक में चतुरंग क्या है?

चार जुड़े हिस्सों वाली रचना: कविता, सरगम, तराना के बोल और तिरवट के बोल।

पहले यह पढ़ें

आगे पढ़ें

इससे जुड़े पाठ

सभी ललित कला पाठ