घुँघरू, चक्कर, उपज और वेशभूषा
- घुँघरू: टखनों पर बँधी छोटी धातु की घंटियों की लड़ियाँ। नर्तक इन्हें नियंत्रित करता है: हल्का कदम तो हल्की आवाज़, ज़ोर का पैर तो तेज़ आवाज़। कथक नर्तक घुँघरू को पूरी तरह चुप भी कर सकता है, ताकि मौन दिखे।
- चक्कर: एक जगह पर तेज़ घूमना, अक्सर 5, 7 या ज़्यादा चक्करों का समूह। नर्तक सिर ऊँचा रखता है, नज़र एक बिंदु पर टिकाता है और सम पर उतरता है।
- उपज: मौके पर रचे गए नए पैटर्न। जुगलबंदी में नर्तक और तबला-वादक नए पैटर्न से एक-दूसरे को जवाब देते हैं।
- वेशभूषा: घेरदार घाघरा (लहँगा) और दुपट्टा, या पुरुष नर्तक के लिए कुर्ता-चूड़ीदार। घेरदार घाघरा उड़ता है और चक्कर बड़े दिखते हैं।
तीनताल और झपताल की मात्राएँ
ताल मात्राओं का दोहराया जाने वाला चक्र है। यह समूहों (विभाग) में बँटा होता है। कुछ विभाग ताली से शुरू होते हैं और एक विभाग हाथ हिलाकर (खाली) शुरू होता है। पहली मात्रा सम है।
तीनताल: 16 मात्राएँ, 4 + 4 + 4 + 4
धा धिन धिन धा | धा धिन धिन धा | धा तिन तिन ता | ता धिन धिन धा
ताली मात्रा 1 (सम), 5 और 13 पर। खाली मात्रा 9 पर। लिखने में: 1 पर X, 5 पर 2, 9 पर 0, 13 पर 3।
झपताल: 10 मात्राएँ, 2 + 3 + 2 + 3
धी ना | धी धी ना | ती ना | धी धी ना
ताली मात्रा 1 (सम), 3 और 8 पर। खाली मात्रा 6 पर। लिखने में: 1 पर X, 3 पर 2, 6 पर 0, 8 पर 3।
नृत्त, नृत्य, नाट्य, तांडव और लास्य
- नृत्त: शुद्ध नृत्य। लय, पैरों का काम और आकृतियाँ। इसमें कहानी नहीं होती।
- नृत्य: भाव वाला नृत्य। वही शरीर अब गीत का अर्थ दिखाता है।
- नाट्य: नाटक। पात्रों, संवाद या गीत और नृत्य वाली कहानी।
गति के दो रंग:
- तांडव: ज़ोरदार, तेज़ और ऊर्जा भरा, शिव से जुड़ा।
- लास्य: कोमल, बहता हुआ और सुंदर, पार्वती से जुड़ा।
अंग, उपांग और प्रत्यंग
नृत्य की पुरानी पुस्तकें शरीर को तीन समूहों में बाँटती हैं:
- अंग (मुख्य अंग): सिर, हाथ, छाती, पसलियाँ, कमर और पैर।
- उपांग (चेहरे के अंग): आँखें, भौंहें, नाक, होंठ, गाल और ठोड़ी।
- प्रत्यंग (छोटे अंग): गर्दन, कंधे, बाँहें, पीठ, पेट और जाँघें।
कथक नर्तक तीनों को साथ इस्तेमाल करता है: पैर ताल रखते हैं, हाथ और गर्दन मुद्रा बनाते हैं और आँखें कहानी कहती हैं।
करके देखिए: 3D में और घर पर
3D में तीनताल और झपताल बदलकर देखिए कि सुनहरी ताली और सफ़ेद खाली खंभे कहाँ पड़ते हैं। घर पर तीनताल बजाइए: 1, 5 और 13 पर ताली, 9 पर हथेलियाँ ऊपर करके खाली। फिर झपताल: 1, 3 और 8 पर ताली, 6 पर खाली। गिनती ज़ोर से बोलते रहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीनताल = 16 मात्राएँ = 4 + 4 + 4 + 4; ताली 1, 5, 13 पर; खाली 9 पर।
- झपताल = 10 मात्राएँ = 2 + 3 + 2 + 3; ताली 1, 3, 8 पर; खाली 6 पर।
- सम = पहली मात्रा; ताली = हाथ की ताल; खाली = हाथ हिलाना।
- नृत्त = सिर्फ़ लय; नृत्य = लय + भाव; नाट्य = नाटक।
- नृत्य के अंग: अंग (मुख्य) + उपांग (चेहरा) + प्रत्यंग (छोटे)।
हल किए गए उदाहरण
1. तीनताल के एक चक्र में कितनी ताली और कितनी खाली हैं, और किन मात्राओं पर?
तीन ताली मात्रा 1, 5 और 13 पर, और एक खाली मात्रा 9 पर। यानी 3 ताली + 1 खाली = 4 मात्राओं के 4 विभाग।
2. नर्तक झपताल 4 चक्र बजाता है। कुल कितनी मात्राएँ और कितनी तालियाँ हुईं?
एक चक्र में 10 मात्राएँ हैं, इसलिए 4 चक्र = 40 मात्राएँ। हर चक्र में 3 ताली (मात्रा 1, 3, 8), इसलिए 4 × 3 = 12 तालियाँ।
3. नर्तकी पहले सिर्फ़ तेज़ पैर और चक्कर दिखाती है, बिना कहानी के। फिर आँखों से गीत का अर्थ दिखाती है। दोनों नृत्य-प्रकारों के नाम बताइए।
सिर्फ़ तेज़ पैर और चक्कर नृत्त (शुद्ध लय) है। भाव के साथ गीत का अर्थ दिखाना नृत्य है।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि खाली का मतलब चुप्पी है। खाली हाथ का इशारा है; तबला बजता रहता है, बस बोलों की आवाज़ बदलती है।
- नृत्त और नृत्य को मिला देना। नृत्त में अर्थ नहीं होता; नृत्य शब्दों या कहानी का अर्थ दिखाता है।
- झपताल को 4 + 4 + 2 मात्राएँ कहना। यह 2 + 3 + 2 + 3 = 10 है।
- आँखों और भौंहों को अंग कहना। वे उपांग में आती हैं; अंग का मतलब मुख्य अंग है।