China 高二 General Technology
अध्याय: 6
1. Sel.1 Electronic control technology (engineering series)
Electronic control overview; components; soldering · Analog and digital circuits; diodes, transistors; logic gates · Sensors and relays · Designing electronic control systems
- बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स: पुर्ज़े और परिपथ – इलेक्ट्रॉनिक्स में छोटे पुर्ज़े विद्युत धारा को नियंत्रित करते हैं। बैटरी या पावर सप्लाई ऊर्जा देती है; स्विच रास्ता खोलता या बंद करता है। प्रतिरोधक धारा सीमित करता है (V = IR), संधारित्र आवेश जमा करता है और सिग्नल को समतल या धीमा कर सकता है, डायोड धारा को एक ही दिशा में जाने देता है, LED रोशनी देने वाला डायोड है, और ट्रांज़िस्टर छोटी बेस धारा से बहुत बड़ी धारा को चालू करता या बढ़ाता है। हर पुर्ज़े का मानक प्रतीक है। परिपथ पहले काग़ज़ या सिम्युलेटर में बनाते हैं, ब्रेडबोर्ड पर आज़माते हैं, और बोर्ड पर सोल्डर करके पक्का करते हैं। एनालॉग परिपथ लगातार बदलते सिग्नल, डिजिटल परिपथ केवल चालू/बंद सिग्नल सँभालते हैं।
- बूलियन तर्क (Boolean Logic) – बूलियन तर्क में केवल दो मान हैं: 1 (सत्य) और 0 (असत्य)। लॉजिक गेट इन पर काम करते हैं: NOT मान उलटता है; AND तभी 1 जब सभी इनपुट 1; OR तब 1 जब कोई भी इनपुट 1; NAND और NOR, AND और OR के उल्टे हैं; XOR तब 1 जब इनपुट अलग हों। सत्य सारणी हर इनपुट संयोजन का आउटपुट बताती है (n इनपुट पर 2ⁿ पंक्तियाँ)। डी मॉर्गन: (A·B)' = A' + B' और (A + B)' = A'·B'। गेटों को जोड़कर लॉजिक सर्किट बनते हैं।
- सेंसर: मशीनें दुनिया को कैसे महसूस करती हैं – सेंसर किसी भौतिक राशि (प्रकाश, तापमान, दूरी, नमी, ध्वनि, दाब) को विद्युत संकेत में बदलता है। एनालॉग सेंसर लगातार बदलता वोल्टेज देता है; ADC उसे संख्या में बदलता है जिसे कंप्यूटर समझता है। नियंत्रक संख्या को थ्रेशोल्ड (सीमा) से मिलाकर एक्चुएटर को, अक्सर रिले के ज़रिए, चालू-बंद करता है। तय समय पर बार-बार पढ़ना डेटा लॉगिंग है। अच्छे सेंसर की सही रेंज, संवेदनशीलता, शुद्धता और प्रतिक्रिया-समय होता है।
- नियंत्रण प्रणाली और फ़ीडबैक (Control Systems) – नियंत्रण प्रणाली किसी मशीन या प्रक्रम को हमारी इच्छा के अनुसार चलाती है। हर प्रणाली में इनपुट → प्रक्रम (नियंत्रक) → आउटपुट होता है। खुले लूप (open loop) में नियंत्रक परिणाम नहीं जाँचता (टाइमर वाला टोस्टर)। बंद लूप (closed loop) में सेंसर आउटपुट मापकर वापस भेजता है; नियंत्रक उसकी तुलना निर्धारित मान (set point) से करता है और त्रुटि ठीक करता है (थर्मोस्टैट, क्रूज़ कंट्रोल)। असली प्रणालियाँ सेंसर, नियंत्रक (इलेक्ट्रॉनिक परिपथ, माइक्रोकंट्रोलर या PLC) और एक्चुएटर (मोटर, हीटर, वाल्व, हवा वाले सिलिंडर) से बनती हैं। कई अब नेटवर्क से जुड़ी हैं (IoT, SCADA), ताकि दूर से देखी और चलाई जा सकें।
2. Sel.2 Robot design and making (engineering)
Structure and transmission · Sensing · Controllers and programming · Path planning and motion control
- रोबोटिक्स: रोबोट कैसे महसूस करता, सोचता और काम करता है – रोबोट एक मशीन है जो आसपास को महसूस करती है, प्रोग्राम से फ़ैसला लेती है और मोटरों से काम करती है। इसमें ढाँचा, सेंसर, कंट्रोलर, एक्चुएटर, गियर जैसा संचरण और बिजली का स्रोत होता है। रोबोट कारख़ानों, अस्पतालों, खेतों, घरों और अंतरिक्ष में मदद करते हैं।
- सेंसर: मशीनें दुनिया को कैसे महसूस करती हैं – सेंसर किसी भौतिक राशि (प्रकाश, तापमान, दूरी, नमी, ध्वनि, दाब) को विद्युत संकेत में बदलता है। एनालॉग सेंसर लगातार बदलता वोल्टेज देता है; ADC उसे संख्या में बदलता है जिसे कंप्यूटर समझता है। नियंत्रक संख्या को थ्रेशोल्ड (सीमा) से मिलाकर एक्चुएटर को, अक्सर रिले के ज़रिए, चालू-बंद करता है। तय समय पर बार-बार पढ़ना डेटा लॉगिंग है। अच्छे सेंसर की सही रेंज, संवेदनशीलता, शुद्धता और प्रतिक्रिया-समय होता है।
- रोबोट नियंत्रक और प्रोग्रामिंग – नियंत्रक (कंट्रोलर) एक छोटा कंप्यूटर है जो रोबोट का दिमाग़ होता है। यह सेंसर से इनपुट पढ़ता है, बार-बार प्रोग्राम चलाता है (पढ़ो, फ़ैसला करो, काम करो) और मोटर या बत्ती जैसे आउटपुट चालू-बंद करता है। पिन कमज़ोर होते हैं, इसलिए मोटर के लिए ड्राइवर लगाते हैं।
- पथ-योजना और गति-नियंत्रण – पथ-योजना का मतलब है बाधाओं से बचते हुए शुरू से लक्ष्य तक सुरक्षित छोटा रास्ता चुनना। गति-नियंत्रण का मतलब है पहियों को उस रास्ते पर चलाना: गति और मुड़ना दोनों पहियों की गति से तय होते हैं। लाइन-फ़ॉलोअर रोबोट फ़र्श के सेंसर और मुड़ने के नियम से लाइन पर चलता है।
3. Sel.3 Engineering design basics (engineering)
Science, technology and engineering · General process; DFX; sustainability · Modelling and simulation · Decisions and project management
- इंजीनियरिंग क्या है? – इंजीनियरिंग का अर्थ है विज्ञान, गणित और रचनात्मकता से ऐसी उपयोगी चीज़ें डिज़ाइन करना और बनाना जो असली समस्याएँ हल करें, लागत, सुरक्षा, समय और सामग्री की सीमाओं के अंदर। इंजीनियर एक डिज़ाइन चक्र अपनाते हैं: समस्या पहचानो, खोज करो, विचार बनाओ, प्रोटोटाइप बनाओ, परखो और सुधारो। पुरानी नहरों और सड़कों से लेकर आज की चिप और टीकों तक, इंजीनियरिंग ने सभ्यता को आकार दिया। मुख्य शाखाएँ हैं सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल, कंप्यूटर और बायोमेडिकल, और आज की समस्याएँ कई शाखाओं को साथ जोड़ती हैं (कन्वर्जेंट या STEAM इंजीनियरिंग)।
- डिज़ाइन प्रक्रिया: समस्या से उत्पाद तक – डिज़ाइन प्रक्रिया कदमों का एक चक्र है जिससे डिज़ाइनर असली लोगों की असली समस्या हल करते हैं: ज़रूरत की खोजबीन, उसे ब्रीफ़ और नापने लायक विनिर्देश में लिखना, कई विचार बनाना, प्रोटोटाइप बनाना, और विनिर्देश पर परीक्षण व मूल्यांकन। जो फ़ेल हो, वह आपको चक्र में वापस भेजता है। इस दोहराव को पुनरावृत्ति (iteration) कहते हैं, और लगभग हर उत्पाद, ऐप, इमारत और कलाकृति ऐसे ही बेहतर बनती है।
- सतत डिज़ाइन: लोगों और धरती के अनुकूल उत्पाद – सतत (टिकाऊ) डिज़ाइन का मतलब है ऐसे उत्पाद बनाना जो हमारी ज़रूरत पूरी करें और प्रकृति व लोगों को कम से कम नुकसान दें। हर उत्पाद का जीवन चक्र है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। जीवन चक्र आकलन हर चरण का पारिस्थितिक पदचिह्न (ऊर्जा, CO₂, पानी, कचरा) जोड़ता है। सामाजिक पदचिह्न मज़दूरों और समुदायों पर असर है: वेतन, सुरक्षा, बाल श्रम, उचित व्यापार। डिज़ाइनर छह R (पुनर्विचार, मना करना, कम करना, दोबारा उपयोग, मरम्मत, पुनर्चक्रण), मरम्मत और विघटन योग्य डिज़ाइन अपनाते हैं और नियोजित अप्रचलन से बचते हैं। इको डिज़ाइन आर्थिक पक्ष भी देखता है: उत्पाद सस्ता और बनाने लायक़ हो, इसलिए अच्छा डिज़ाइन पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था में संतुलन रखता है।
- इंजीनियरिंग में मॉडलिंग और सिमुलेशन – इंजीनियर कोई चीज़ बनाने से पहले उसके मॉडल पर डिज़ाइन जाँचते हैं। मॉडल भौतिक (स्केल मॉडल, प्रोटोटाइप), गणितीय (समीकरण) या डिजिटल (CAD मॉडल) हो सकता है। हर मॉडल में प्रयास (effort) चर (बल, वोल्टेज, दाब) और प्रवाह (flow) चर (चाल, धारा, प्रवाह दर) होते हैं; प्रयास × प्रवाह = शक्ति। सिमुलेशन सॉफ़्टवेयर पुर्ज़े को छोटे फ़ाइनाइट एलिमेंट में काटता है, हर एक के समीकरण लिखता है और सॉल्वर उत्तर निकालता है; चलती प्रणालियाँ छोटे टाइम स्टेप में हल होती हैं। प्रतिबल, मोड़ और सुरक्षा गुणांक जैसे परिणाम रंगीन नक्शों और ग्राफ़ से पढ़े जाते हैं। बारीक मेश या छोटा टाइम स्टेप ज़्यादा सटीक है पर ज़्यादा समय लेता है। अंत में परिणामों को सेंसर वाले असली परीक्षण से, माप की त्रुटि ध्यान में रखकर, मिलाया जाता है।
- परियोजना प्रबंधन – परियोजना (project) एक बार का काम है जिसका साफ़ लक्ष्य, शुरुआत और अंत होता है। परियोजना प्रबंधन यानी उसकी योजना बनाकर और नियंत्रण करके उसे तय दायरे में, समय पर और बजट में पूरा करना। जीवन चक्र: आरंभ, योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और समापन। योजनाकार काम को छोटे कामों (WBS) में बाँटते हैं, गैंट चार्ट पर रखते हैं, क्रांतिक पथ ढूँढते हैं, जोखिम सँभालते हैं और अंत में सीख की समीक्षा करते हैं।
4. Sel.4 Modern home-management technology (life series)
Home management; appliances; furniture · Family finance · Home health care and safety
- गृह विज्ञान: घर को अच्छे से चलाना – गृह विज्ञान (गृह अर्थशास्त्र) घर के संसाधनों, यानी जगह, समय, पैसा, ऊर्जा और कौशल, को ऐसे सँभालने के बारे में है कि घर में रहने वाले सब स्वस्थ, सुरक्षित और ख़ुश रहें। इसमें घर के कामों की योजना और बँटवारा, आसान डिज़ाइन नियमों से जगह सजाना, सामान रखने के तरीके, समय पर मरम्मत, कारीगर कब बुलाएँ यह जानना, और ऐसा घर बनाना शामिल है जो काम का भी हो और सुंदर भी।
- पारिवारिक बजट: घर की आय, ख़र्च और बचत – परिवार (गृहस्थी, household) वे लोग हैं जो साथ रहते हैं और आय-ख़र्च बाँटते हैं। उसकी ज़रूरतें (खाना, घर, कपड़े, सेहत, पढ़ाई) और इच्छाएँ (जो अच्छी हैं पर ज़रूरी नहीं) होती हैं। आय आती है काम से (मज़दूरी, वेतन), काम-धंधे से, संपत्ति से (किराया, ब्याज, लाभांश) और हस्तांतरण से (पेंशन, छात्रवृत्ति, उपहार)। पारिवारिक बजट एक योजना है जिसमें किसी अवधि, आमतौर पर एक महीने, की अनुमानित आय और ख़र्च लिखे जाते हैं। ख़र्च स्थिर (किराया, फ़ीस, किस्त) या परिवर्ती (खाना, बिजली, सफ़र) होते हैं। आय ज़्यादा हो तो बचत (surplus), बराबर हो तो संतुलित, कम हो तो घाटा (deficit)। पैसा सीमित है, इसलिए हर चुनाव की एक अवसर लागत है: छोड़ा गया अगला सबसे अच्छा विकल्प।
- स्वास्थ्य देखभाल: वाइटल साइन, चिकित्सा शब्द और देखभाल कौशल – स्वास्थ्य देखभाल लोगों को स्वस्थ रखने और बीमार होने पर उनकी देखभाल का काम है। स्वास्थ्यकर्मी मूल, उपसर्ग और प्रत्यय से बनी साझा चिकित्सा भाषा बोलते हैं। वे चार जीवन-चिह्न जाँचते हैं: तापमान (सामान्य लगभग 36.5–37.5 °C), नाड़ी (वयस्क 60–100 प्रति मिनट), साँस की दर (वयस्क 12–20 प्रति मिनट) और रक्तचाप (स्वस्थ 120/80 mmHg से कम)। वे थर्मामीटर, स्टेथोस्कोप, बीपी कफ़ जैसे उपकरण इस्तेमाल करते हैं, हाथों की सफ़ाई और PPE से संक्रमण रोकते हैं, जानकारी साफ़ और गोपनीय रूप से लिखते-बताते हैं, और लोगों को स्वस्थ आदतें चुनने में मदद करते हैं।
- घर में स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा – स्वस्थ घर के लिए दो कौशल चाहिए। पहला, सरल उपकरण (थर्मामीटर, बीपी मशीन, नब्ज़) चलाना और सामान्य सीमा जानना: शरीर का तापमान लगभग 36.1–37.2 °C, रक्तचाप लगभग 120/80 mmHg, नब्ज़ 60–100 प्रति मिनट। दूसरा, खतरे पहचानकर ठीक करना: गीला फ़र्श, गर्म बर्तन, खुले सॉकेट और बच्चे की पहुँच में दवा। प्राथमिक उपचार पेटी और आपातकालीन नंबर तैयार रखिए।
5. Sel.5 Clothing and design (life)
Clothing and culture; materials; structure; sewing
- वस्त्र: हम कपड़े क्यों पहनते हैं, वे किससे बनते हैं और कैसे चुनें – कपड़े हमें धूप, बारिश और ठंड से बचाते हैं, शालीनता देते हैं, पहचान दिखाते हैं (वर्दी, साड़ी या कोरिया का हानबोक जैसी पारंपरिक पोशाक) और हमें अपनी पसंद दिखाने देते हैं। ये रेशों से बनते हैं: पौधों से (सूती, लिनन) और जानवरों से (ऊन, रेशम) मिलने वाले प्राकृतिक रेशे, और पेट्रोलियम से बने कृत्रिम रेशे (पॉलिएस्टर, नायलॉन)। रेशों को कातकर धागा बनता है, और धागे से बुनाई (ऊपर-नीचे) या निटिंग (फंदे) से कपड़ा। डिज़ाइन में रेखा, रंग, आकार और बनावट होती है। समझदार ख़रीदार वॉर्डरोब की योजना बनाता है, फ़िटिंग, क्वालिटी और केयर लेबल देखता है, दुकानों की तुलना करता है, प्रति पहनावा लागत निकालता है, और टिकाऊ विकल्प चुनता है: कम ख़रीदो, मरम्मत करो, अदला-बदली करो, रीसायकल करो।
6. Sel.6 Smart-home design (life)
Smart-home architecture; IoT communication; simple products; system design
- इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) – इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) रोज़मर्रा की चीज़ों का ऐसा नेटवर्क है जिनमें सेंसर, छोटा कंप्यूटर और नेटवर्क कनेक्शन होता है, ताकि वे डेटा इकट्ठा करें, इंटरनेट पर भेजें और उस पर काम करें. सेंसर भौतिक बदलाव को डेटा बनाता है, माइक्रोकंट्रोलर उसे संसाधित करता है, नेटवर्क (Wi-Fi, ब्लूटूथ, ज़िगबी, 4G/5G, LoRa) उसे क्लाउड या ऐप तक ले जाता है, और एक्चुएटर आदेश को काम में बदलता है. IoT को तीन परतों में समझते हैं: संवेदन, नेटवर्क और ऐप्लिकेशन. यह सुविधा और ऊर्जा बचत देता है, पर मज़बूत गोपनीयता और सुरक्षा चाहिए.