घर में स्वास्थ्य जाँच के उपकरण
तीन सरल साधनों से शरीर की हालत जाँची जा सकती है।
- थर्मामीटर शरीर का तापमान नापता है। सामान्य लगभग 36.1 से 37.2 °C (97 से 99 °F) होता है। 38 °C या अधिक बुखार है। डिजिटल थर्मामीटर बगल में या कान में लगता है। बीप की आवाज़ तक रुकिए। इस्तेमाल के बाद साफ़ कीजिए।
- रक्तचाप (बीपी) मशीन में ऊपरी बाँह पर कफ़ बँधता है। यह mmHg में दो अंक देती है: ऊपर का (सिस्टोलिक, जब दिल धकेलता है) और नीचे का (डायस्टोलिक, जब दिल आराम करता है)। लगभग 120/80 सामान्य है। पहले 5 मिनट शांत बैठिए। बार-बार 140/90 या ज़्यादा आए तो डॉक्टर को दिखाइए।
- नब्ज़ एक मिनट में धड़कनों की संख्या है। कलाई पर दो उँगलियाँ रखिए, 15 सेकंड गिनिए और 4 से गुणा कीजिए। आराम में वयस्क की नब्ज़: 60 से 100।
और भी उपकरण: पल्स ऑक्सीमीटर (खून में ऑक्सीजन, सामान्य 95 % या अधिक), मधुमेह के लिए ग्लूकोमीटर, वज़न मशीन। उपकरण समस्या पहचानने में मदद करते हैं, डॉक्टर की जगह नहीं लेते।
डॉक्टर को कब बुलाएँ
मदद लीजिए जब: बुखार 2 दिन से ज़्यादा 38 °C से ऊपर रहे (शिशु में जल्दी), बीपी बहुत ऊँचा हो और सिरदर्द या सीने में दर्द हो, साँस लेना कठिन हो, या व्यक्ति भ्रमित हो। आपात स्थिति में राष्ट्रीय नंबर (भारत में 112, एम्बुलेंस के लिए 108) पर फ़ोन कीजिए।
घर की सुरक्षा: खतरे पहचानिए
खतरा वह हर चीज़ है जिससे चोट लग सकती है। हर कमरे में घूमकर देखिए।
- बाथरूम: गीला फ़र्श फिसलाता है। फिसलन-रोधी मैट और हैंडल रेल लगाइए।
- रसोई: कड़ाही के हैंडल अंदर घुमाइए, बच्चों को चूल्हे से दूर रखिए, रात में गैस बंद कीजिए और पास में ढक्कन या फ़ायर ब्लैंकेट रखिए।
- बिजली: खाली सॉकेट ढकिए, एक प्लग पर बहुत उपकरण मत लगाइए, गीले हाथ से स्विच मत छुइए, ढीले तार ठीक कराइए।
- दवाएँ और रसायन: ऊँचाई पर या ताले में रखिए, लेबल वाली मूल बोतल में। सफ़ाई का तरल ठंडे पेय की बोतल में कभी मत रखिए।
- सीढ़ियाँ और फ़र्श: अच्छी रोशनी, रेलिंग, ढीले गलीचे नहीं।
ठीक करिए: सुरक्षा योजना बनाइए
छोटी आदत बनाइए: देखो → ठीक करो → जाँचो। प्राथमिक उपचार पेटी रखिए जिसमें पट्टी, एंटीसेप्टिक, गॉज़, टेप, कैंची, थर्मामीटर, दस्ताने और ज़रूरी दवाएँ हों (हर 6 महीने में तारीख देखिए)। फ़ोन के पास आपातकालीन नंबर चिपकाइए। आग लगने पर क्या करना है, इसका अभ्यास कीजिए: बाहर निकलो, बाहर रहो, मदद बुलाओ। हो सके तो स्मोक अलार्म या अग्निशामक रखिए।
करके देखिए: 10 मिनट की घर जाँच
कागज़ लेकर 10 मिनट घर में घूमिए। हर कमरे का एक खतरा और उसका उपाय लिखिए। फिर परिवार के किसी सदस्य की नब्ज़ देखिए: 15 सेकंड में धड़कनें गिनिए और 4 से गुणा कीजिए। सामान्य सीमा से मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सामान्य तापमान: लगभग 36.1–37.2 °C; बुखार: 38 °C या अधिक
- °C = (°F − 32) × 5 ÷ 9
- सामान्य रक्तचाप: लगभग 120/80 mmHg
- नब्ज़ प्रति मिनट = 15 s की धड़कनें × 4 (आराम में वयस्क: 60–100)
- सुरक्षा दिनचर्या: देखो → ठीक करो → जाँचो
हल किए गए उदाहरण
1. बच्चे का थर्मामीटर 38.6 °C दिखाता है। क्या यह सामान्य है?
नहीं। यह 38 °C से ऊपर है, इसलिए बुखार है। आराम, तरल पदार्थ और 2 दिन से ज़्यादा रहे तो डॉक्टर।
2. 101.3 °F को °C में बदलिए।
(101.3 − 32) × 5 ÷ 9 = 69.3 × 5 ÷ 9 = 38.5 °C। यह बुखार है।
3. आप 15 सेकंड में 19 धड़कनें गिनते हैं। नब्ज़ दर क्या है?
19 × 4 = 76 धड़कन प्रति मिनट। यह 60 से 100 की सामान्य सीमा में है।
4. तीन अलग दिन बीपी 150/95 आया। क्या करना चाहिए?
रीडिंग बार-बार 140/90 से ऊपर है। अनदेखा मत कीजिए, डॉक्टर को दिखाइए।
5. रसोई का एक खतरा और उसका उपाय बताइए।
खतरा: बाहर निकला कड़ाही का हैंडल। उपाय: हैंडल अंदर घुमाइए ताकि बच्चा गर्म कड़ाही न खींच सके।
आम गलतियाँ
- दौड़ने या सीढ़ी चढ़ने के तुरंत बाद बीपी नापना। पहले 5 मिनट शांत बैठिए।
- तापमान और लेबल पर खुराक देखे बिना बच्चे को दवा देना।
- दवा या फिनाइल को पेय की बोतल में या नीची मेज़ पर रखना।
- गीले हाथ से स्विच छूना या एक सॉकेट में कई हीटर लगाना।