आँख कैसे काम करती है और थकती क्यों है
आँख कैमरे की तरह काम करती है। लेंस प्रकाश को मोड़कर रेटिना पर फ़ोकस करता है। रेटिना आँख के पीछे का पर्दा है जो तस्वीर दिमाग़ को भेजता है।
पास की चीज़ देखने के लिए छोटी मांसपेशियाँ लेंस को दबाकर मोटा बना देती हैं। दूर देखने के लिए वे ढीली पड़ती हैं और लेंस पतला हो जाता है। अगर आप बहुत देर तक पास देखते रहें, तो मांसपेशियाँ कसी रहती हैं और थक जाती हैं। इससे आँखों पर ज़ोर (eye strain) पड़ता है: आँखें सूखी, खुजलीदार या पानी वाली लगती हैं, सिर दुखता है और धुंधला दिखता है।
बहुत पास का काम और बाहर कम रहना मायोपिया (निकट-दृष्टि दोष) से जुड़ा है, जिसमें दूर की चीज़ें धुंधली दिखती हैं। डॉक्टर आँख जाँचकर ज़रूरत हो तो चश्मा देते हैं।
आँखों की रोशनी बचाने की आदतें
- दूरी: किताब आँख से लगभग 30 से 40 cm दूर रखिए और स्क्रीन हाथ भर दूर। सीधे बैठिए; लेटकर न पढ़िए।
- रोशनी: पीछे या बगल से आती अच्छी रोशनी में पढ़िए। अँधेरे में या चलते वाहन में न पढ़िए।
- 20-20-20 नियम: हर 20 मिनट बाद 20 फ़ीट (लगभग 6 m) दूर की चीज़ को 20 सेकंड देखिए। पलकें झपकाते रहिए।
- बाहर समय: रोज़ 1 से 2 घंटे दिन की रोशनी में बाहर रहिए। इससे बढ़ती आँखों को मदद मिलती है।
- स्क्रीन: मनोरंजन की स्क्रीन कम रखिए और सोने से कम से कम एक घंटा पहले बंद कर दीजिए।
- सावधानी: आँख मत रगड़िए, हाथ धोइए, तेज़ धूप में धूप का चश्मा पहनिए, और आई ड्रॉप या काजल-मेकअप किसी से साझा मत कीजिए।
- खान-पान और नींद: फल, हरी सब्ज़ियाँ, गाजर और अंडे खाइए और 8 से 10 घंटे सोइए।
- जाँच: साल में एक बार आँखें जँचवाइए, और आँखें सिकोड़ने, बोर्ड के पास बैठने या सिरदर्द होने पर तुरंत।
नशा क्या करता है: शरीर, दिमाग़ और जीवन पर असर
यहाँ नशीला पदार्थ यानी वह चीज़ जो शरीर और दिमाग़ के काम को बदल देती है: अवैध नशीले पदार्थ, तंबाकू (सिगरेट, गुटखा), शराब और ग़लत तरह से ली गई दवाएँ। दवा तभी सुरक्षित है जब डॉक्टर लिखे और सही मात्रा में ली जाए।
- शरीर: दिल, फेफड़े और जिगर को नुक़सान; तंबाकू से कैंसर का ख़तरा; साझा सुई से संक्रमण।
- दिमाग़: ध्यान, याददाश्त और सीखने में दिक्कत; घबराहट, उदासी या ख़तरनाक व्यवहार। किशोर का दिमाग़ अभी बढ़ रहा होता है, इसलिए उसे जल्दी चोट पहुँचती है।
- जीवन: नंबर गिरना, परिवार और दोस्तों का भरोसा टूटना, पैसे की तंगी और दुर्घटनाएँ।
- लत: शरीर उस पदार्थ का आदी हो जाता है और आसानी से छोड़ नहीं पाता। इलाज संभव है, और मदद माँगना हिम्मत की निशानी है।
कानून और मदद कहाँ मिलेगी
ज़्यादातर देशों में अवैध नशीले पदार्थ बनाना, बेचना, रखना या सेवन करना अपराध है, और बच्चों को बेचने पर सज़ा और भी कड़ी होती है। बच्चों को तंबाकू और शराब बेचने पर भी रोक है, और कई जगह सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान मना है। कानून हर देश में अलग हैं, पर संदेश एक है: इसमें मत पड़ो।
अगर आपका कोई जानने वाला नशा करता है, तो उसे दोष मत दीजिए। किसी भरोसेमंद बड़े, स्कूल काउंसलर या डॉक्टर से बात कीजिए। कई देशों में बच्चों और परिवारों के लिए मुफ़्त हेल्पलाइन होती हैं।
ना कैसे कहें: मना करने के तरीके
साथी कह सकते हैं "बस एक बार ट्राई करो" या "सब करते हैं"। ज़्यादातर किशोर नशा नहीं करते, इसलिए यह सच नहीं है। जवाब पहले से सोचकर रखिए।
- साफ़ ना कहो: "नहीं, धन्यवाद।" सामने वाले की आँखों में देखो और आवाज़ शांत रखो।
- बात बदलो: "चलो फ़ुटबॉल खेलते हैं।"
- वहाँ से हटो: जगह छोड़ो और सुरक्षित लोगों के पास जाओ।
- भरोसेमंद बड़े को बताओ: माता-पिता, शिक्षक या काउंसलर।
सच्चे दोस्त आपकी ना का सम्मान करते हैं। और भी मदद करने वाली आदतें: खेल, शौक़, भरपूर नींद और तनाव को छिपाने की जगह उस पर बात करना।
करके देखें: एक हफ़्ते की आँखों की डायरी
एक हफ़्ते तक लिखिए कि कितने घंटे स्क्रीन देखी और कितनी देर बाहर रहे। होमवर्क में 20 मिनट का टाइमर लगाइए और 20 सेकंड दूर देखिए। स्केल से अपनी पढ़ने की दूरी नापिए। फिर 3D के फ्री-प्ले चरण में अपना अंक देखिए। दोस्त के साथ तीन अलग दबाव वाली बातों पर मना करने के चारों क़दम करके दिखाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पढ़ने की दूरी: लगभग 30 से 40 cm।
- 20-20-20 नियम: हर 20 मिनट पर 20 फ़ीट (6 m) दूर 20 सेकंड देखो।
- दिन की रोशनी में बाहर: रोज़ लगभग 1 से 2 घंटे।
- पास देखना: लेंस मोटा; दूर देखना: लेंस पतला।
- ना कहो: मना करो, बात बदलो, हट जाओ, भरोसेमंद बड़े को बताओ।
- दवा: केवल डॉक्टर की सलाह से।
हल किए गए उदाहरण
1. रिया ने बिना रुके 1 घंटा 20 मिनट पढ़ाई की। उसे कितनी बार 20 सेकंड दूर देखना चाहिए था?
हर 20 मिनट पर एक बार दूर देखना है। 80 ÷ 20 = 4, यानी 4 बार, हर बार 20 सेकंड।
2. करन फ़ोन आँख से 15 cm दूर पकड़ता है। इसमें क्या ग़लत है और उसे क्या करना चाहिए?
15 cm, 30 से 40 cm से बहुत पास है। आँख की मांसपेशियों पर ज़ोर पड़ता है और आँखों की थकान तथा मायोपिया का ख़तरा बढ़ता है। उसे फ़ोन लगभग 30 से 40 cm दूर रखना चाहिए, अच्छी रोशनी में देखना चाहिए और बीच-बीच में ब्रेक लेने चाहिए।
3. दोस्त कहता है, 'बस एक कश लो, कुछ नहीं होगा।' मना करने के क़दमों से जवाब लिखिए।
ना कहो: 'नहीं, धन्यवाद, मैं सिगरेट नहीं पीता।' बात बदलो: 'मैच देखने चल रहे हो?' ज़्यादा ज़िद करे तो वहाँ से हट जाओ, और दबाव लगे तो किसी शिक्षक जैसे भरोसेमंद बड़े को बताओ।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि केवल टीवी के पास बैठने से आँखें ख़राब होती हैं। पास पकड़ा फ़ोन, किताब और टैबलेट भी आँखों पर ज़ोर डालते हैं।
- बाहर का समय छोड़ देना। दिन की रोशनी में बाहर रहना आँखों की सुरक्षा का हिस्सा है, केवल कसरत नहीं।
- 'बस एक बार' को हानिरहित मान लेना। एक बार भी आदत शुरू कर सकता है और कानून फिर भी लागू होता है।
- बिना डॉक्टर के दोस्तों या घर वालों की दवाएँ ले लेना। दवा का ग़लत इस्तेमाल भी नशा-सेवन (drug misuse) है।